हेलो दोस्तों, मेरा नामे हिमांशी है, और मैं पुंजब के शहर फ़िरोज़पुर की रहने वाली हू. आप लोगों ने मेरी बाकी की सेक्स स्टोरीस पढ़ी ही होंगी. फिर भी मैं बता डू. मेरा रंग बिल्कुल दूध जैसा सफेद है, और मेरा फिगर 34-32-36 का है.
आप लोगों ने मेरी और मेरी मामी की चुदाई का किस्सा पढ़ा ही होगा. कैसे मैने मामी को मज़दूरों से चूड़ते हुए देखा, जिसे देख कर मेरी छूट की आग भड़क उठी. फिर मैने भी अपनी मामी का साथ देने के लिए मज़दूरों के आयेज अपनी टाँगें खोल कर अपनी छूट चुड़वणी शुरू कर दी थी. अभी आयेज की कहानी.
ऐसे ही उस रात मामी और मैने हरिया और विकास के साथ भरपूर चुदाई का आनंद लिया था. उनके जाने के बाद मैं और मामी रूम में आ गये, और हमने साथ में शवर लिया. जब मैं शवर ले रही थी मामी ने मेरे पीछे आ कर मुझे दीवार के सहारे झुका दिया, जिससे मेरी छूट बाहर की तरफ हो गयी, और मामी ने सीधा अपना मूह मेरी छूट में घुसा दिया और चाटने लगी.
मेरे मूह से निकला: आअहह मामी, ये क्या कर रही हो आप?
मामी बोली: मज़ा आ रहा है ना, बस मज़ा लो.
दोस्तों मैं पहले भी अपनी रूमेट के साथ लेज़्बीयन सेक्स का मज़ा ले चुकी थी. बुत मामी ने जिस तरीके से मेरी छूट को छाता, और मेरा पानी निकाला, मेरा शरीर काँपने लगा था.
मैं बोली: मामी आप तो बहुत हरामी हू.
मामी बोली: 2 साल से बिना लंड के रह रही हू मैं. जो भी मिल जाए उससे काम चला लेती हू.
मैं समझ गयी मम्मी और मामी भी दोनो आपस में लेज़्बीयन सेक्स का मज़ा लेती होंगी. बुत मैने कुछ भी नही कहा, और बेड पर लेट गयी.
मामी बोली: कल रात के लिए तैयार रहना. कल मेरे ख़ास मज़दूर आएँगे.
मैं बोली: आज वाले ख़ास नही थे क्या?
मामी: थे, बुत इतने ख़ास नही. कल 4 मज़दूर आएँगे और हमारी मुरम्मत करेंगे आचे से.
और हम दोनो हास दिए. चुदाई के बाद अची नीड आई थी. सुबह उठ कर घर का तोड़ा बहुत काम किया. तब तक काम करने वाले मज़दूर आ चुके थे.
1. राजू, कला रंग, लंड 6 इंच लंबा.
2. राजन, कला रंग, लंड 5.6 इंच लंबा.
3. चेतन, सावला, रंग, लंड 6.6 इंच लंबा
4. हितें सावला रंग, लंड 7 इंच लंबा.
चारों मज़दूर काम में लगे हुए थे. मैं रूम से बार-बार उनको देख रही थी. क्यूंकी गर्मियों के दिन थे, उन्होने पुर कपड़े नही पहने थे. बस एक पतली सी लूँगी और उसके अंदर भी कोई अंडरवेर नही पहना हुआ था. जिस वजह से उनका लंड पसीने की वजह से दिख रहा था.
मामी मेरे पास आई और बोली: सबर रख मेरी काली. रात को ये हमारी ही सेवा करेंगे.
मैने मामी से पूछा: हरिया और विकास कहाँ है?
मामी बोली: वो गाओं गये है. वो जब आएँगे हमारा घर बन कर तैयार हो चुका होगा. और मैं उनसे कभी दोबारा नही मिलूंगी. मैने इन चारों के साथ भी चुदाई का सुख लिया है, पर एक-एक करके. आज चारों साथ में हमे छोड़ेंगे.
मैं भी एक्शिटेड थी. जैसे-तैसे करके रात हुई. शाम का खाना बना. मैने मामी के सास-ससुर को खाना दिया, और उनके पास बैठी. फिर मामी ने उन दोनो को रात की दवाई दी और बोली-
मामी: मैं मज़दूरों को भी खाना दे अओ?
ससुर जी बोले: हा दे आओ बेटा. बेचारे सुबह से काम कर रहे है, भूख लगी होगी.
मैने मॅन में सोचा भूख तो मामी को लगी थी, वो भी लंड की. मैं बर्तन उठा कर किचन में आई और बर्तन सॉफ करके रख दिए. जब मैने घर के पिछले हिस्से में नज़र घुमाई, तो देखा चारों मज़दूर नंगे नहा रहे थे, और मामी गार्डेन में रखी हुई चेर पर खाना लगा रही थी.
मैं भी रेडी हो गयी, क्यूंकी खाने के बाद हमारी चुदाई होनी पक्की थी. मैने रूम में आ कर मामी की मॅक्सी पहन ली, जो वाइट कलर की और ट्रॅन्स्परेंट थी. जिसमे मैं लगभग नंगी ही थी.
तभी मामी रूम में आई, और मुझे देख कर बोली: बड़ी जल्दी है तुझे लंड लेने की?
मैं बोली: और क्या करू मामी? आपने कल से मेरी छूट में आग लगा दी है. भी और नही रहा जाता.
मामी बोली: सबर कर. पहले इन शेरॉन को दारू पीला दो. फिर ये शेर भेड़िए बन कर हमे खाएँगे.
मामी ने अलमारी से विस्की की बॉटल निकली, और किचन में से आइस क्यूब और पानी लेकर उन लोगों को दारू दे आई. फिर रूम में आ कर मामी ने भी एक ट्रॅन्स्परेंट मॅक्सी पहन ली. अब मैने और मामी ने सिर्फ़ एक पतली सी जालीदार मॅक्सी पहनी थी, और अंदर से बिल्कुल नंगी थी.
हम दोनो बाहर गार्डेन में गये. चारों मज़दूर ड्रिंक कर रहे थे, और वो सिर्फ़ लूँगी में थे.
मामी बोली: सिर्फ़ दारू ही पियोगे या कुछ करोगे भी?
इतना सुन कर चेतन उठा. उसने मामी की मॅक्सी उतरी, और मामी के बूब्स उपर दारू गिरा कर चूसने लगा. हितें ने भी दूसरा बूब पकड़ा, और चूसने लगा. ये देख कर राजू और राजन मेरे पास आ गये, और मेरी मॅक्सी उतार कर मेरे एक एक बूब को मूह में लेकर चूसने लगे.
मेरी सिसकारियाँ निकल रही थी आ आहह आअहह. वो दोनो बीच-बीच में मेरी छूट को भी सहला रहे थे. मैं इतनी गरम हो गयी थी की मैं उनकी उंगलियों पर ही अपनी छूट रगड़वाने लगी, और आ आ आह आ आ करने लगी.
दूसरी साइड चेतन चेर पर बैठ गया. मामी खड़े-खड़े बेंड हो गयी और पीछे से हितें मामी की छूट चाटने लगा. मामी तो फुल मूड में चुस्वा रही थी अपनी छूट और राजू और राजन भी चेर पर बैठ गये. मैं बारी-बारी दोनो के लंड मूह में लेकर चूसने लगी.
आप लोग जानते ही है मुझे लंड चूसना बहुत पसंद है. मैं पूरा लंड मूह में ले कर अंदर गोल-गोल जीभ घुमा रही थी, जिस वजह से दोनो 5 मिनिट्स से ज़्यादा मेरे आयेज टिक नही पाए, और मेरे मूह में ही दोनो ने अपना स्पर्म छ्चोढ़ दिया. मैं भी उनका सारा माल गतक गयी.
उधर मामी की चुदाई तो शुरू हो चुकी थी. मामी चेतन की गोद में बैठ कर उछाल-उछाल कर छुड़वा रही थी. उनका मूह हितें की तरफ था, और हितें मामी का मूह ऐसे छोड़ रहा था, जैसे वो मामी की छूट हो. 5 मिनिट्स के स्मूच के बाद मेरे दोनो शेर भी खड़े हो गये.
मैं घोड़ी बन गयी और बोली: एक-एक करके छोड़ना. तुम लोगों के लंड बहुत लंबे और मोटे है. एक साथ अंदर नही जाएँगे.
सबसे पहले राजन ने मेरी छूट पर थूक लगा कर गीला किया, और अपने लंड के टोपे उपर भी तोड़ा सा थूक लगाया. उसने पूरा लंड एक झटके में अंदर पेल दिया. मेरी अहह निकल गयी, और मैं बोली-
मैं: उ मा, आराम से करो सालों. इतनी भी क्या हड़बड़ी है?
बुत वो मेरी कहाँ सुन रहे थे. उन लोगों को तो बस छोड़ने से मतलब था. वो पीछे से ज़ोर-ज़ोर से मेरी छूट मारने लगा. राजू मेरे आयेज आ कर अपना लंड चुसवाने लगा. दर्द के कारण मेरी अया ह्म एमेम ह्म आहम जैसी आहें निकल रही थी. बिकॉज़ मूह में भी लंड था.
उधर मामी की तरफ देखा तो देखा की चेतन नीचे लेता था. मामी चेतन के उपर और मामी के उपर हितें. मतलब मामी की सॅंडविच चुदाई हो रही थी. मामी की हिम्मत थी वो एक साथ इतने बड़े-बड़े लंड ले रही थी. बिकॉज़ मज़दूर लोगों के लंड बहुत बड़े और मोटे होते है.
मैने 2-2 लंड एक साथ अंदर लिए है. बुत इतने बड़े नही. खैर मामी की चुदाई देख कर मुझे और हवस चढ़ गयी. मैं ज़ोर-ज़ोर से अपनी गांद आयेज-पीछे करने लगी, जिस कारण राजेश का माल मेरी छूट में गिर गया.
मैं बोली: बहनचोड़, ये तूने क्या किया? बता तो देता तेरा होने वाला है.
वो बोला: साली तेरी छूट में इतनी गर्मी होगी, सोचा ही नही था. कोई बात नही, मैं गोली दिला दूँगा.
इतना कह कर वो हॅट गया, और उसकी जगह राजू ने ले ली. वो तो पागल कुत्ते की तरह मुझे चूमने और चाटने लगा. फिर मुझे उठा कर खड़ा किया, और चेर के सहारे बेंड कर दिया. उसके बाद मुझे झुका कर पीछे से मेरी कमर पकड़ कर लंड अंदर पेल दिया, और छोड़ने लगा. जब उसका लंड पूरा अंदर जाता और बाहर आता, तो छूट से अजीब-अजीब सी आवाज़े आ रही थी.
उसने करीब मुझे 30 मिनिट्स तक छोड़ा, और जब उसका होने वाला था, तो उसने मुझे पकड़ कर नीचे बिता दिया, और मूह में लंड दे दिया. मैं उसका सारा माल गतक गयी. राजू और राजेश के साथ मेरी चुदाई के 2 रौंद हो चुके थे. वो दोनो मर्दों ने मुझे ऐसा छोड़ा की मेरी पूरी बॉडी के उपर रेड मार्क और छूट पर सूजन आ गयी थी.
हितें और चेतन मेरे पास आए और बोले: हमे भी छोड़ना है अभी.
मैं बोली: मुझे माफ़ करो, मेरे से नही हो पाएगा. तुम लोग मेरी मामी के साथ हे कर लो.
और मैं वहीं नीचे गार्डेन में लेती रही. उधर मेरी मामी 4-4 लंड के साथ खेल रही थी. उस रात मामी ने 4 मज़दूरों के साथ 2-2 बार चुदाई करवाई. मामी का हाल भी बहाल हो चुका था, और सुबह के 4 बजने वाले थे. 4 मज़दूर हमे उठा कर हमारे रूम्स में छ्चोढ़ कर आए.
सबसे पहले हमने सब ने साथ में शवर लिया, एक-दूसरे की बॉडी को आचे से सॉफ किया. लंड को चूस-चूस कर सॉफ किया. वो नहा कर कपड़े पहन कर चले गये, और मैं और मामी ऐसे ही नंगी बेड पर लेट गयी, और बातें करने लगी.
मैं: मामी आप तू महान हो. एक साथ इन जैसे 4-4 मर्दों को संभाल लिया. वरना ये लोग तो मेरी छूट का भरता बना देते.
मामी हस्स कर बोली: पगली ऐसा कुछ नही होता. जब तू अगली बार आएगी ना, 4 मज़दूरों से सब से पहले तुझे चड़वौनगी. फिर मैं चुड़ूँगी.
हम दोनो हस्स पड़े, और ऐसे ही सो गये. दोस्तों ये चुदाई आज भी मैं याद करती हू. होप आप सब लोगों को मज़ा आया होगा मेरी स्टोरी पढ़ कर. फिर अवँगी नयी कहानी के साथ. तब तक बाइ-बाइ.