मामू ने दिया लंड का स्वाद

नमस्कार दोस्तों, आपकी तारक की प्यास को और ज़्यादा बढ़ने के लिए एक डुमदार, गांद फाड़ चुदाई कहानी लेकर आया हू. इसलिए टाइम ज़्यादा ना खराब करते हुए कहानी पर आते है.

मेरा नाम सलीम है, देल्ही में रहता हू, 1स्ट्रीट एअर स्टूडेंट हू, आगे 19, रंग गोरा, हाइट 5.5 फीट, 6 महीने से जिम कर रहा हू, इसलिए थोड़ी मस्क्युलर बॉडी है. लिप्स, निपल्स और गांद का च्छेद एक-दूं गुलाबी, गांद रौंद, कुल मिला कर मेरा बदन भरा हुआ है.

मेरे पापा इंजिनियर और मम्मी डॉक्टर है. एक दिन ऐसा हुआ की मम्मी को किसी मीटिंग के लिए 7 दिन तक मुंबई जाना था, और पापा भी लास्ट कुछ दीनो से कश्मीर किसी प्रॉजेक्ट के लिए गये हुए थे. उनका भी इतना जल्दी आना मुश्किल था.

मम्मी को टेन्षन हो रही थी की मैं कभी भी इतने दीनो तक अकेला नही रहा हू. उनको टेन्षन में देख कर मैने मेरे बड़े मामा (अकबर) को घर बुलाने के लिए बोला, और मम्मी मान भी गयी.

मम्मी ने बड़े मामा को कॉल किया, और वो आने के लिए रेडी भी हो गये. मामा बचपन से ही मेरे साथ घूमते और नयी-नयी चीज़ें लाते थे. हम मिल कर बहुत मज़े करते है. 2 साल पहले मेरे दोनो मामा की शादी के बाद उनसे मिलना ही नही हुआ.

वैसे मुझे मेरे बड़े मामा (अकबर) ज़्यादा पसंद है, और मैं मॅन ही मॅन अकबर मामा को पसंद भी बहुत करता हू. इसलिए उनको छ्छूने का कोई ना कोई बहाना ढूंढता रहता हू.

मैं बहुत कुश था, मामा आ रहे थे. अब मामा और मैं घर पर अकेले होंगे, शायद इस बार मैं उनको नंगा देख साकु. असल में अकबर मामा थोड़े सावले, घुंघराले काले बाल, मर्दाना बदन, छ्चाटी पर काले बाल, गुलाबी होंठ, हाइट 5.8 इंच, हासमुख स्वाभाव के है.

अगले दिन मम्मी मीटिंग के लिए 10 बजे मॉर्निंग में चली गयी. मामा की ट्रेन तोड़ी लाते थी. वो लुक्कणोव से आ रहे थे. मैं मामा के लिए किचन में पकोडे और नाश्ता बना रहा था. बहुत गर्मी थी, इसलिए मैने शर्ट निकाल दी थी. तभी मेरे माइंड में आया क्यूँ ना मामा को रिझाने के लिए मैं सिर्फ़ अंडरवेर पहन लेता हू, और उपर से एप्रन ( जिसे खाना बनाते टाइम पहनते है).

मैने रेड कोलूर की टाइट अंडरवेर और ब्लू एप्रन पहन लिया. मेरा गोरा मस्क्युलर बदन बहुत मस्त लग रहा था. 12 बजे डोरबेल बाजी. मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था. मैं भागते हुए गाते खोला. मामा को देखते ही उनको गले लगाने लगा. मामा ने भी मुझे कस्स कर पकड़ लिया, और मेरे माथे पर किस किया. गले लगते हुए मामा ने मेरी पीट पर हाथ फेरते हुए कहा-

मामा: कपड़े क्यूँ निकाल रखे है?

मैं: आपके लिए खाना बनते हुए बहुत गर्मी लग रही थी.

मामा मेरे बालों पर हाथ सहलाते हुए हासणे लगे और बोले, “तेरा बचपाना अभी तक नही गया. अर्रे भाई टॅक्सी वाले को पैसे दे रहा है या टॅक्सी खरीद रहा है?”

मैं एक-दूं चौंक गया मामा किसके साथ आए थे.

मैं: कों है और?

मामा: तेरा छ्होटा मामा और कों? कुछ दीनो से हॉलिडे पर आया हुआ था, इसलिए मैं इसे भी ले आया.

मेरे छ्होटे मामू (शोहेब), बिल्कुल बड़े मामा जैसे ही बदन वाले है. लेकिन मुझे फिर भी वो पसंद नही है, क्यूंकी वो मुझे बहुत परेशन करते है. काई बार वो मुझे ग़लत तरीके से भी छ्छूते है, जो मुझे अछा नही लगता.

मेरा सारा मूड खराब हो गया था. मैं रूम में कपड़े चेंज करने जाने लगा, तभी पीछे से शोहेब मामू ने मुझे पकड़ लिया.

शोहेब: कहाँ जेया रहा है मुझे देख कर? आ साथ बैठ कर बातें करते है.

मैं चुप-छाप किचन से नाश्ता लेकर आया और नाश्ता रख कर फिर से किचन में चला गया. हमारे किचन और मैं हॉल के बीच एक परदा लगा हुआ है, जिसे मैने ही मॉर्निंग में निकाल दिया था. यानी अब दोनो मामू मेरी गांद को देख सकते थे. लेकिन मुझे ये नज़ारा शिरफ़ अकबर मामू को ही दिखना था. मैं नोटीस कर रहा था शोहेब मामू बार-बार मुझे देख कर अपने लंड पर हाथ फेर रहे थे.

अकबर: सलीम बेटा, जेया कर कपड़े चेंज कर लो. कोई आएगा तो अछा नही लगता.

मैं ओके बोल कर जाने लगा.

शोहेब: रुक सलीम, क्या भाई जान आप भी! कोई आए तो हम दोनो है तो सही गाते खोलने के लिए. बच्चे को गर्मी लग रही है, तो रहने दो, और वैसे भी ये कों सी जननी है.

मैं हॉल में आ कर सीधा अकबर मामू की गोद में जेया कर बैठ गया. फिर बात करते-करते उनके बदन की गर्मी महसूस करने लगा. मैने मामू के गाल पर एक किस किया.

मैं: आप मेरे सबसे प्यारे मामू हो. थॅंक योउ आने के लिए.

शोहेब मामू मुझे आपनी गोद में खींचते हुए, “क्यूँ मैं अछा मामू नही हू क्या?”

शोहेब मामू मेरे बदन पर गुदगुदी करते हुए मेरे गाल, गर्दन पर किस करने लगे. मामू मुझे अपनी गोद से उठने ही नही दे रहे थे, इतना ज़ोर से पाकर रखा था. और पीछे से मेरी कमर पर हाथ फिरते हुए मेरी चड्डी के अंदर हाथ डालने की कोशिश कर रहे थे.

तभी मैं ज़ोर से खड़ा हुआ और कहा: मामू आप दोनो तक गये होंगे. मैं आपके लिए आइस क्रीम लाता हू. फिर आप आराम कर लेना.

अकबर: सलीम आराम तो रोज़ करते है. क्यूँ ना आज कोई मोविए देखे?

हमने एक हॉरर मोविए देखने का पक्का किया. रूम का एसी फुल करके हम मोविए देखने लगे.
मैं दोनो मामू के बीच में लेता हुआ था. हमने एक ब्लंकेट से खुद को धक रखा था.

हम तीनो बनियान और पाजामे में थे. मैं तो किसी भी तरह अकबर मामू को कस्स के पकड़ना चाहता था. एक हॉरर सीन आया, और मैने डरने का नाटक करके अकबर मामू को कस्स के पकड़ लिया. शोहेब मामू पीछे से मुझे भी कस्स के पकड़ कर मेरी गांद पर अपना लंड चुभाने लगे, जो सेमी हार्ड हो चुका था.

अकबर: क्या सलीम, इतना डरते हो तुम?

अकबर मामू ने मेरा सर अपनी छ्चाटी के पास किया और अपना सीधा हाथ मेरे कंधे से होते हुए मुझे पकड़ लिया, और मुझे थपकी देने लगे. इस पोज़िशन में मुझे मामू की छ्चाटी के बालों की पसीने की खुश्बू आ रही थी, जो मुझे पागल बना रही थी.

लेकिन इस पोज़िशन में मेरी गांद मूड कर शोहेब मामू के लंड से और ज़्यादा चिपक गयी. शोहेब मामू जो चाहते थे वो उनको मिल रहा था. मामू अब मेरे बनियान और उपर करके मेरी कमर को कस्स के मसालने लगे. मोविए इंग्लीश थी. उसमे एक सेक्स सीन आया. अकबर मामू सीन आयेज करने की बोलने लगे.

शोहेब: भाई जान ये कों सा अब बच्चा रह गया है, देखने दो.

अकबर मामू फिर भी अपने हाथ से मेरी आँख बंद कर रहे थे. लेकिन फिर भी मुझे तोड़ा-तोड़ा दिख रहा था. लेकिन ये सीन नॉर्मल नही था, इसमे लड़का बिल्कुल नंगा हो कर लड़की की छूट फाड़ चुदाई कर रहा था, और अपने हाथो से उसके चुचो को दबा रहा था.

मोविए में सेक्स को देख कर अकबर मामू को मैने और ज़्यादा कस्स कर पकड़ लिया. तभी शोहेब मेरी गांद पर अपना लंड चुबा रहे थे. थोड़ी देर बाद अकबर मामू को नींद आ रही थी, इसलिए वो बाहर हॉल में चले गये और शोहेब मामू ने मुझे अपने पास खींच लिया.

धीरे-धीरे मेरे पाजामे को नीचे करते हुए, मामू ने मुझे शिरफ़ चड्डी में कर दिया, और मेरी गांद को मसालने लगे. मामू अपने हाथ को मेरे लंड पर रख कर उसे चड्डी के उपर से ही मसालने लगे.

मेरे कान में वो धीरे से बोले, “मज़े आ रहे है तो कुछ और करेगा?”

मामू ने मेरा फेस अपनी तरफ करके, अपना लोड्‍ा पाजामे से निकाल कर मेरे हाथ में रख कर हिलने लगे. फिर मामू ने चादर हटा दी. रूम में अंडरा था, लेकिन टीवी की रोशनी में लोड्‍ा एक-दूं सॉफ नज़र आ रहा था.

क्या मस्त 6 इंच लंबा और मोटा लोड्‍ा. मेरे हाथ में लोड्‍ा हिलता हुआ क्या ग़ज़ब लग रहा था. मामू मेरी चड्डी भी अपने हाथ से निकाल कर मेरा लोड्‍ा हिलने लगे. हम दोनो 5 मिनिट तक ऐसे ही एक-दूसरे के लोड हिलाते रहे. मेरा जिस्म बहुत गरम हो गया था. अचंक मेरे बदन में करेंट सा आया, और मेरा माल मामू के हाथ में ही निकल गया.

मामू ने अपना हाथ कपड़े से सॉफ किया. थोड़ी देर बाद हम दोनो एक-दूसरे के सामने बैठ गये. मैं अभी भी मामू का लोड्‍ा हिला ही रहा था. तभी मामू “ह्म्‍म्म्म ह्म्‍म्म्म” की आवाज़ करके सारा माल लंड से पिचकारी की तरह मेरे मूह पर गिरा दिए. इससे माल मेरी नाक से होते हुए मेरे लिप्स पर आ गया, और मैने जीभ से उसे मूह के अंदर ले लिया.

शोहेब (हेस्ट हुए): इतना पसंद आया क्या?

मैं कुछ नही बोला. उसके बाद हम सो गये. रात को हम सब ने डिन्नर किया. दोनो मामू गर्मी की वजह से लूँगी पहने हुए थे. दोनो की बॉडी बहुत मस्त थी. शोहेब मामू का लंड हिलने के बाद मेरा ध्यान बार-बार दोनो के आधे नंगे बदन पर ही लगा हुआ था.

मॅन तो ऐसा कर रहा था की अकबर मामू की लूँगी ही खोल डू, और उनका लोड्‍ा हाथ में लेकर पुर मज़े से हिलौ.

शोहेब: भाई जान आप सो जाओ, मुझे कुछ मैल सेंड करनी है, सलीम तुम कंप्यूटर चलाने में मेरी मदद कर दो.

मैं समझ गया था अब मामू फिर से वही करना चाहते थे. शोहेब मामू मुझे रूम के अंदर ले जाते है. फिर रूम अंदर से लॉक कर दिया. मुझे कस्स के पकड़ कर मेरी किस लेने लगे.

मामू अपनी लूँगी निकाल कर पुर नंगे हो गये. उनका लोड्‍ा पूरा खड़ा था. मैं हाथ में लोड्‍ा लेकर हिलने लगा.

मामू: मेरा माल अछा लगा था ना? इस बार पूरा पी कर देख, और ज़्यादा अछा लगेगा.

मामू ने मुझे पकड़ कर नीचे बिता दिया और मेरे मूह में अपना लोड्‍ा डाल कर आयेज-पीछे करने लगे. पता नही मुझे क्या हो गया था. मामू जो करवा रहे थे वो मैं करे ही जेया रहा था.

1-2 मीं बाद मुझे भी चूसने में बहुत मज़े आ रहे थे. अब मैं भी हाथ से मसल-मसल कर चूसने लगा.

मामू: देखा मज़ा आता है ना? और तू है जो करने ही नही देता.

कुछ देर ऐसे ही करते-करते मामू मेरे मूह में ही फारिघ् हो गये. मैने उनका सारा माल पी लिया. सच में मुझे बहुत मज़े आए थे. मैने खड़े हो कर मामू को कस्स के गले लगा लिया.

मामू: अछा लगा ना मेरी जान?

मैं (धीरे से): हा बहुत मज़ा आया.

इसके बाद हम फिर से रूम में आ कर तीनो सो गये. नेक्स्ट मॉर्निंग क्या हुआ, वो पढ़ने के लिए दूसरे पार्ट का वेट करे.

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