मामा की बेटी की कुँवारी चूत

 हैल्लो दोस्तों, रिंकू मेरे मामा की बेटी है और रिंकू का मेरे घर में आना मुझे कुछ अच्छा नहीं लगा था. वो अभी 20 साल की हुई है और सेकेंड ईयर की परीक्षा दे रही है, लेकिन वो दिखने में 17-18 साल की लगती है. मेरी मम्मी का कहना था कि प्रियंका प्रेग्नेंट है और 2 महीने में उसकी डिलेवरी हो जाएगी, तो रिंकू भी चली जाएगी. हमारे दो बेडरूम के फ्लेट में अब तक में, मेरी वाईफ प्रियंका और मम्मी, पापा रहते थे.

एक बेडरूम में मम्मी, पापा और एक में प्रियंका और में रहते थे और रिंकू हॉल में सोफे पर ही सोती थी. मुझे रात को देर तक टी.वी देखने की आदत है और में जमीन पर सोफे के पास लेटकर ही हॉल में टी.वी देखता था, सोफा मेरे ठीक पीछे होता था. अब प्रियंका परेशान नहीं होने के लिए बेडरूम का दरवाज़ा बंद कर लेती थी और मम्मी, पापा रात के करीब 11 बजे सो जाते थे.

उस रात जब में टी.वी देख रहा था, तो रिंकू अपना एक हाथ मेरी आँखों के सामने रखकर मुझे परेशान करने लगी. तो पहले तो मैंने कई बार उसका हाथ हटाया, फिर मैंने उसके हाथों को हटाने की बजाए उन पर अपना हाथ फैरना शुरू कर दिया. पहले तो उसने एक बार अपना हाथ एकदम से पीछे खींच लिया और फिर काफ़ी देर के बाद वापस से अपना हाथ मेरी आँखों के आगे रख दिया. फिर इस बार में फिर से उसके हाथ पर प्यार से अपना हाथ फैरने लगा, तो उसने अपना हाथ नहीं हटाया.

फिर में उसकी हथेलियों से होता हुआ उसकी बाँह तक पहुँच गया. अब मुझे भी अच्छा लग रहा था और वो कुछ बोल नहीं रही थी. अब कमरे में सिर्फ़ टी.वी की रोशनी थी. अब इस बार में अपना हाथ उसकी हथेलियों से लेकर उसके कंधों तक ले जाने लगा था.

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में काफ़ी देर तक उसके हाथों को अपनी उंगलियों से सहलाता रहा. फिर उस दिन उतना ही हुआ, अब अगले दिन सब नॉर्मल था. फिर दूसरी रात को में फिर से उसके हाथ का इंतज़ार कर रहा था, तो मुझे ज़्यादा देर तक नहीं रुकना पड़ा. फिर इस बार मैंने थोड़ी देर तक उसका हाथ सहलाया और फिर अपने दाएँ हाथ को पीछे ले जाकर उसके पैरो को सहलाने लगा.

यह सुरक्षित भी था, क्योंकि किसी को भी यही लगता कि में सोफे का सहारा लेकर टी.वी देख रहा हूँ और वो चादर ओढ़कर लेटी है. अब चादर के अंदर मेरा हाथ क्या कर रहा है? बाहर से अंदाज़ा लगाना मुश्किल था. हमने अभी तक एक दूसरे की तरफ देखा भी नहीं था. फिर में टी.वी देखता रहता और यह सब भी चलता रहा था और अब मेरा ध्यान टी.वी पर बिल्कुल भी नहीं था. उसने गाउन के नीचे सलवार पहन रखी थी और में उसकी सलवार के ऊपर से ही उसे सहलाने लगा था.

फिर कुछ देर तक उसके घुटनों के नीचे सहलाने के बाद मैंने अपना हाथ उसके घुटनों के ऊपर लिया, तो उसने अपनी दोनों जांघें चिपका ली और अपने दोनों हाथों से मेरा हाथ पकड़ लिया, तो तब मैंने पहली बार उसका चेहरा देखा और उसने मुझे देखा. फिर मैंने उससे कहा कि क्या हुआ? हाथ हटा लूँ. फिर उसने कहा कि नहीं प्लीज.

मैंने अपना हाथ नहीं हटाया और वही पर सहलाने लगा. फिर कुछ देर के बाद उसने अपना हाथ हटा लिया, तो मुझे ऊपर जाने की इजाजत मिल गई. फिर में उसकी जांघों पर काफ़ी देर तक अपना एक हाथ फैरता रहा और उसकी चूत तक पहुँचकर लौट आता था. फिर मैंने उसकी चूत पर अपना एक हाथ लगाया. अब वो अपने दोनों पैरो को फैलाकर मेरा पूरा साथ दे रही थी. फिर मैंने उसकी चूत की दरार तक पहुँचकर वहाँ पर अपनी उंगली से घर्षण शुरू कर दिया और उसके चेहरे को देखा, तो वो अपनी आँखें बंद किए पूरा आनंद ले रही थी.

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फिर तीसरी रात मैंने उससे रिक्वेस्ट की वो सलवार नहीं पहने और वैसे भी रात के वक़्त किसी को पता नहीं चलेगा. फिर उसने सलवार पहनी, लेकिन सबके सोने के बाद उसने अपनी सलवार उतार दी और सोफे पर लेट गई. फिर इस बार मैंने मुड़कर उसके चेहरे पर किस किया, उसकी सुगंध मुझे बहुत अच्छी लग रही थी. फिर मैंने उसकी छाती की गोलाईयों को अच्छी तरह से दबाया और उसके होंठो को और जीभ को जी भरकर चूसा.

उसने कहा कि कोई आ जाएगा, जैसा रोज करते हो वैसा ही करो, प्लीज. तो में मुड़कर टी.वी की तरफ अपना मुँह करके बैठ गया और धीरे से उसकी चादर के अंदर अपना एक हाथ डाल दिया और उसके पैरो को थोड़ी देर तक सहलाने के बाद उसकी जांघों तक पहुँच गया. अब मुझे उसके मुलायम जिस्म पर अपना हाथ फैरना बहुत अच्छा लग रहा था और अब में उसकी चड्डी के ऊपर से उसकी चूत की दरार पर अपना एक हाथ फैर रहा था.

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