कहानी जिसमे मा ने बेटे को अपना सब कुछ दिया

जैसा की मैने आपको पिछले पार्ट में बताया था, की मेरा मेरी मा के साथ झगड़ा हो गया था, मेरी चुदाई की हरकटो को लेकर. और मैने उनसे माफी माँग कर वापस जाने और कभी ना आने की बात कही थी. और फिर मैं चला आया. तभी उसी रात को आयेज क्या हुआ, वो जानते है.

आचंक रात में मेरी नींद खुली, और मैने रोने की आवाज़ सुनी. मैने उठ कर देखा की मेरी मा मेरे रूम के पास आ कर रो रही थी. मैं अपने बिस्तर से उठा, और मा के पास उनको शांत करने गया.

मैने बोला: चुप हो जाओ मा, वरना पापा उठा जाएँगे तो गड़बड़ हो जाएगी. मैं जानता हू की मैने अपने ही हाथो से सब कुछ बिगाड़ दिया, और आपके साथ बहुत बुरा करके आपकी भावनाओ को ठेस पहुँचयी है. और इसके लिए शायद ही आप मुझे माफ़ कर पाओ. और इसीलिए मैं वापस जेया रहा हू, ताकि यहा का माहौल ठीक हो सके.

मा सुसक-सुसक कर रोए जेया रही थी, और मैं उनके करीब जाता तो वो मूह फेर लेती थी.

मैं: मैं आपको कभी दुख में नही देख सकता. आप हमेशा खुश रहो. आप पापा और बहनो के साथ हमेशा खुश रहना. अपना ढेर सारा ध्यान रखना. अब आपको इससे ज़्यादा परेशन नही कर सकता मैं.

मा ने कुछ नही बोला और वो दरवाज़े के पास ही बैठ गयी, और रोने लगी, और रो-रो कर कहने लगी.

मा: ये सब क्या हो गया. सब कुछ कितना अछा चल रहा था. क्यूँ किया तूने ऐसा? मेरी सारी खुशिया टूट गयी.

मैं: हा मा, मैने बहुत ग़लत किया है. मुझे माफ़ कर देना. आप ठीक से रह सको इसलिए मैं आपको छ्चोढ़ कर जेया रहा हू. मेरे लिए मत सोचना, मैं जहा भी रहूँगा आपको याद करूँगा.

मा और रोने लगी

मैं: चुप हो जाओ मा.

मा: वैभव तूने सब बिगाड़ दिया. तूने और ग़लतिया कर दी, और अब इतनी बड़ी ग़लती करके तू जेया रहा हू कहता है.

मा मुझे बचपन से ही चिकू कहते आ रही थी. आज पहली बार उन्होने मुझे वैभव कह कर पुकारा था. मैने चुप हो कर ह्म जवाब दिया.

मा: एक मा के उपर क्या बीट रही है तुझे क्या पता.

मैं: हा मा.

मा: तूने ग़लत किया तो ही मैं नाराज़ हू, और तेरी जाने के बात से मैं और भी बुरा महसूस कर रही हू. आख़िर तू जेया क्यू रहा है? हे भगवान किस्मत ही खराब है मेरी. एक तो तूने ये सब किया, उपर से ये मा की ममता के कारण तुझे जाने भी नही देना चाहती.

मैं चुप रहा, पर मा रोए जेया रही थी

मैने बोला: आप अपना ख़याल रखना मा. मैं बीच में आता-जाता रहूँगा.

मा: नही, तू मत जेया. तेरे बिना ये घर सूना-सूना सा लगता है, और तेरी बहुत याद आती है. तूने वादा किया था ना, की तू जाने की बात नही करेगा.

मैं: क्या करू मा, मैं अपनूली ही नज़रो में गिर चुका हू. इसलिए मुझे ये करना पद रहा है.

मा: तो तू क्या चाहता है?

मैं: कुछ नही मा, आपको खुश देखना चाहता हू हमेशा से.

मा: तो तू मत जेया, भूल जा सब कुछ जो हुआ.

मैं: नही मा, मैं आज की ये सिचुयेशन कभी नही भूल पौँगा.

मा: तो तू चाहता क्या है की मैं तेरे साथ वो सब कर लू?

मैं: नही मा, इसकी अब कोई ज़रूरत नही है.

मा: तो फिर तू मत जेया, यही रह जेया कुछ दिन, और मुझे खुश रहते हुए देख.

मैं अपनी बात पर ही अटका था, की मुझे जाना है, और मैं आपको ऐसे नही देख सकता वग़ैरा-वग़ैरा.

उसके बाद वही हुआ जिसकी उम्मीद मैने छ्चोढ़ दी थी. मेरी मा ने मुझे एक ज़ोर का झापड़ मारा, और मुझे अपनी तरफ खींच कर मेरे होंठो पर किस कर दिया. मैं सातवे आसमान पर पहुँच गया, और मेरा दिल ज़ोरो से धड़कने लगा. वो मुझे किस किए जेया रही थी.

मैने भी उनका साथ दिया, और उनको किस करते रहा और छ्चोढा नही. किस करने के बाद उन्होने छ्चोढा, और मुझसे कहा-

मा: ले वही हुआ जो तू चाहता था, अब खुश है?

मैं चुप रहा और कुछ बोल नही पाया. इतने में मेरी मा मुझे गले से लगा कर रोने लगी और रोते-रोते मेरे होंठो को चूमे जेया रही थी. आज मैने खुद को च्चूधने की कोशिश की, पर मा ने मुझे ज़ोर से पकड़ रखा था.

मैं समझ गया की बाज़ी मेरे हाथो में आ गयी थी, और अब यहा से मेरे और मा के रास्ते एक हो गये थे. मैने मा का साथ दिया, और उनको कस्स कर पकड़ लिया, और दरवाज़े पर टीका कर किस करने लगा.

हम दोनो दरवाज़े के पास ही थे. हमने दरवाज़ा बंद भी नही किया था. और हम बिना दर्रे एक-दूसरे को बाहों में भर कर आहें लेते हुए किस किए जेया रहे थे.

कोई आ ना जाए इसलिए, मैने मा का हाथ पकड़ा, और किस करते-करते उनको खड़ा किया. फिर मैं उनको अपने रूम की तरफ खींचने लगा, और उनके कान में हल्की सी आवाज़ में बोला-

मैं: सब कुछ यही करना है क्या?

मा कुछ नही बोली बस मुझसे लिपटी हुए थी. अब मैने अपनी मा की मोटी-मोटी गांद पे अपना हाथ रख दिया, और मसालने लगा. फिर मैने मा के कानो में धीरे से बोला-

मैं: हमे ऐसा करते अगर किसी ने देख लिया तो हम मुसीबत में पद सकते है. आपको नही लगता हमे अंदर जाना चाहिए?

मा ने फिर हा में हामी भारी, और मुझसे लिपट कर मेरे कानो में कहने लगी-

मा: मैं इस मौके को और इस चुंबक के जैसे लगे इस किस को छ्चोढना नही चाहती. और मैं अपने पैरों से चलना भी नही चाहती.

मैं उनका इशारा समझ गया, और फिर क्या था मैने उनकी कमर पर हाथ रख कर अंदर की तरफ खींचा, और दरवाज़े को बंद किया. अब इस भारी अंधेरी रात में बस मैं और मेरी मा की भारी जवानी फूटने वाली थी.

मैं बता नही सकता की मैं इस दिन का इंतेज़ार कितनी बेसब्री से कर रहा था. मैने मा की गांद में दोनो हाथ लगाए, और उनको चूमते ही जेया रहा था. वो भी मेरा साथ बड़े ज़ोरो के साथ देने लगी थी.

मैने उनको अपनी गोद में उठाया, और बेड की तरफ ले जाने लगा.

मा बहुत गरम हो गयी थी. उनके बदन की गर्मी मेरे टन-बदन में महसूस होने लगी. आज मुझे कोई बहाना ढूँढना नही था, बस मा के उपर अपना प्यार बरसाना था. जिससे दोनो के छोड़ने की प्यास मिट सके.

मैने उनको बिस्तर में लिटा दिया, और उनकी आँखों को चूम कर उनके आँसू को अपने होंठो से पोंचा. मैं मेरी लेती हुई मा को भूखे शेर की तरह घूर्ने लगा. वो भी मुझे आहें भर-भर केदेक़े जेया रही थी. उन्होने मेरे त-शर्ट को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और कहा-

मा: आख़िर तू वही करके माना, जो तुझे चाहिए था.

मैं: हा मा, ये देख कर मुझे बहुत अछा लग रहा है की आज आप मेरे नीचे हो.

ऐसा कह कर मैं उनसे लिपट गया, और मा से कहने लगा-

मैं: मैने जब आपको पहली बार उस रात पापा के साथ सेक्स करते हुए आपके बदन को नंगा देखा था, तब से आपका दीवाना हो गया था. मैने आपकी प्यास को भी देखा था, जो पापा नही बुझा पा रहे थे.

मा: मैं रोज़ रात को तड़पति हू तेरे पापा के साथ, क्यूंकी वो मुझे हमेशा अधूरा छ्चोढ़ देते है

मैं: मैं वादा करता हू की आपकी प्यास बूझौँगा आज, और आपको अब से कभी अधूरा नही छ्चोधुंगा.

मा: मैं भी यही उम्मीद रखती हू. अब जब तूने मुझे पा ही लिया है, तो आज मैं तेरी हू. तू जो चाहे वो कर, जितना करना है कर. बस मुझे आज अपनी सॅकी खुशी लौटा दे.

ये सुन कर मैं और ज़्यादा एग्ज़ाइटेड हो गया. फिर मैने अपना काम सुरू किया.

मैने मा के माथे पर किस किया, और फिर माथे में किस करते-करते उनके गालो तक पहुँचा. उनके नरम गालो को चूमने लगा, और उसको चाटने लगा.

दोनो तरफ के गालो को आचे से चूमने के बाद मैं उनकी ठुड्डी को चूमने लगा. मैने मेरी मा को गरम करने का काम सुरू कर दिया था. फिर मैने उनके रसीले होंठो का रस्स-पॅयन किया. आहह कितने नरम थे वो, मानो गुलाब की कोई पंखुड़ी हो, और उसको मैं चूज़ जेया रहा था.

मैं आयेज बढ़ता रहा, और उनके कान के पीछे बाल हटा कर चूमने लगा. वो एक-दूं बावली हो गयी मेरे ऐसा करने से.

फिर मैने उनके दूसरे कान पर वही किया, और वो और खुलने लगी. मैने अपने होंठो को उनके गले की तरफ बढ़ाया, और उसे चूमता और चाट-ता रहा. चाट-चाट कर उनके गले को मैने मेरी जीभ की लार से भिगो दिया.

फिर उपर जेया कर उनके होंठो को चूस्टे-चूस्टे उनके ब्लाउस का हुक खोलने लगा, और उनके ब्ल्ौसे को उतार दिया. मैं उनके बड़े-बड़े बूब्स को ब्रा के उपर से चूमने लगा, और एक बूब को मसालने लगा.

मैने उनको लिटा दिया, और उनके बूब्स के बाद उनके पेट में आ कर चूमने लगा. मैं मा को चूमे जेया रहा था, और मेरी मा के मूह से बस आआहह सस्स्शह और उूउउंम्म की सिसकियाँ निकल रही थी. अब मैने उनकी नाभि में अपनी जीभ डाल दी. इतने में वो मेरी पीठ को नोचने लगी.

मैं उनकी नाभि को इतना चाट रहा था, जैसे कोई स्वादिष्ट आइस क्रीम चाट रहा हू. मैने उनके गड्राए हुए मोटे-मोटे पेट को चूमा, और हाथ लगा कर उसके साथ खेले लगा. उफ़फ्फ़ क्या फीलिंग आ रही थी, और वो भी ये सब अपनी मा के साथ करने में.

मा का शरीर पसीने और मेरी लार से भीग चुका था. मैं उनके पेट से नीचे की तरफ जाने लगा, और उनकी सारी और उपर करने लगा. मैं उनकी चुदाई के ख़यालो में मदहोश हो चुका था. फिर मैने उनसे सारी उतारने को कहा. उन्होने ना में सर हिलाया, और बोलने लगी आहें भर कर-

मा: ये तेरा काम है, और तुझे ही करना पड़ेगा बेटा.

मैं उनकी सारी को उतारने लगा, और उतार कर नीचे फेंक दी बेड से, और अब उनके पेटिकोट का नाडा अपने दांतो से खोला, और उसको हाथो से सरकाते हुए उसको भी उतार फेंका.

अब मा मेरे सामने ब्रा और पनटी में अधनंगी लेती हुई थी. मैने उनके पैरों के अंगूठो को चूमा, और उसको मूह में लेने लगा. फिर पैरों को चूमते-चूमते उनकी मोटे-मोटे जाँघो में पहुँच गया.

उनकी गोरी और मोटी जांघें मुझे पागल कर रही थी. मा अया उउई सस्शह करके सिसकिया भरे जेया रही थी. मैंस उनकी दोनो जांगो को चाट-चाट कर गीला कर रखा था.

फिर मैने मेरी मा उल्टा लिटाया, और उनके उपर चढ़ गया.

ऐसा लग रहा था मैं किसी मखमली गद्दे में लेट गया था. मैने उनकी पीठ को चूमना शुरू किया, और ऐसा करते-करते मैने उनकी ब्रा का हुक खोल दिया, और उसको अपने हाथो से निकाल कर उनके बदन से अलग कर दिया.

अब मैं उनके दोनो बूब्स में नीचे से हाथ डाल कर दबाने लगा, और पीठ को चूमने लगा. उनका बदन भरा हुआ बदन था आआहह.

मैं उनकी पीठ को चूमते हुए नीचे कमर के पास आने लगज़ और वो ऐसा करते देख तड़प उठी. मैने उनकी गांद से उनकी पनटी उतार दी, और उनके पनटी को सूंघने लगा, और उसकी खुश्बू लेने लगा.

मा ने कहा: बस मेरी पनटी का स्वाद लेगा, की और भी कुछ टेस्ट करेगा?

मैने उनको सीधा किया, और उनके पैरों के पास चले गया. फिर मैने उनकी छूट में हाथ फेरना शुरू किया, और उनकी टाँगो को फैला दिया. यहा से मेरी मा की छूट का जो नज़ारा था, उसके सामने जन्नत भी फीकी थी.

उनके छूट में वो छ्होटे-छ्होटे बाल, और उनकी टाइट छूट मुझे अपने तरफ खींचे जेया रही थी. मेरी मा की छूट से निकलता पानी ये बता रहा था, की मा के अंदर कितनी हवस भारी हुई थी.

मैं मा की छूट के करीब गया, और उसमे जीभ रख दी. मा तिलमिला उठी, और मेरे बालो को कस्स के पकड़ कर खींचने लगी.

मैं छूट को अपनी जीभ से सहलाने लगा, और उनकी छूट का रस्स पीने लगा था. जैसे कुत्ता अपनी जीभ से छाता करता है वैसे ही मैने भी मा की छूट छाती. मा ने मुझसे भारी आवाज़ में कहा-

मा: बेटा तूने मेरे टन-बदन में आज आग लगा दी है. इसको तुझे आज शांत करना पड़ेगा. अब रहा नही जेया रहा है बेटा. कुछ कर, और मेरी छूट में लगी इस आग को बुझा दे.

मैं समझ गया था, की अब मुझे क्या करना था. मैने अपने सारे कपड़े उतारे, और मा की तरह अब मैं भी नंगा हो गया. फिर मैने अपना लंड लिया, और उनकी टाइट छूट में रगड़ने लगा.

अब उनकी छूट से भर-भर कर पानी आने लगा था. मैने टाइम खराब ना करते हुए अपना 6 इंच का लंबा और 3 इंच मोटा लंड उनकी छूट में घुसा दिया. इतने में वो ज़ोर से चीख पड़ी आहह करके. मैने उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिए, ताकि वो चिल्ला ना सके.

मा पागल हो गयी थी इतना मोटा और लंबा लंड लेके. वो मेरे कान में भारी आवाज़ से कहने लगी-

मा: बेटा तेरा लंड बहुत मोटा और लंबा है. इससे पहले मैने कभी ऐसा लंड नही देखा.

मैं: आज से ये सिर्फ़ आपका है.

मा: तेरे पापा का भी इतना नही है, जितना तेरा है. काश तू मुझे पहले मिल पता, तो मेरी छूट की प्यास को तू ही बुझता.

मैं मा को अब अपने मोटे लंबे लंड से छोड़ने लगा. मा को बहुत दर्द हो रहा था, क्यूंकी उनकी छूट तो टाइट थी ही, उपर से मेरा मोटा लंड उनकी छूट की दीवारो को और फैला रहा था. मा को छोड़ते समय उनके मूह से आहें और अयाया उहह उम्म्म्म आआईय की आवाज़े निकालने लगी.

मैं अपने छोड़ने की रफ़्तार बढ़ने लगा, और ज़ोर-ज़ोर से उनकी कोमल छूट को छोड़ने लगा. आ, क्या गर्मी थी उनकी छूट में. उनको छोड़ते वक़्त उनका मोटा पेट मेरे पेट से टकराने लगा था जिससे ठप-ठप फाड़-फाड़ की आवाज़े आने लगी थी.

एक तो उनके चूड़ने की आवाज़, तो दूसरी उनकी पायल और चूड़ियों के खनकने की आवाज़ पुर रूम में भर गयी थी. मैं और ज़ोर से छोड़ने लगा उनको. मा का दर्द बढ़ने लगा तो वो मुझसे कहने लगी-

मा: धीरे करो बेटा धीरे, बहुत मोटा है तुम्हारा लंड, जो मेरे दर्द को बढ़ा रहा है.

मैं: आप मेरे लिए इतना नही कर सकते हो?

मा: तेरे लिए तो दर्द क्या, सब कुछ सहने के लिए तैयार हू मैं.

मैं उनको छोड़ता ही रहा ज़ोर-ज़ोर से. वो मेरे फेस को पकड़ कर मेरे होंठो पर किस कर रही थी.

उन्होने मुझसे बोला: और छोड़ बेटा मुझे, तू रुक मत, बस मेरी छूट को छोड़ते ही जेया. बरसो की आग में आज तू गीयी डाल रहा है.

फिर मेरे मूह से मा के बदले उनका नाम निकल गया.

मैं: अया मीनाक्षी, तुम्हारी छूट बहुत टाइट है. इसको छोड़ने में मुझे भी मेरे लंड में दर्द हो रहा है.

मा: तू भी अब से इसकी आदत डाल ले चिकू. तेरे मूह से मेरा नाम सुन कर चूड़ने में और भी ज़्यादा मज़ा आ रहा है. अब से तू मुझे मीनाक्षी ही बोलना.

मैं: हा मीनाक्षी, अब से मैं तुझे रोज़ ऐसे ही छोड़ूँगा तेरा नाम लेकर.

मा: तेरे में तेरा पापा से भी ज़्यादा ताक़त है. तू मेरी लंबी रेस का घोड़ा है.

मैं: हा मीनाक्षी.

मा: इस मैदान में आज से तेरा ही लॉडा दौदेगा अब तय है.

मैं: और पापा का क्या होगा?

मा: उनको तो जल्दी रेस जीतने की आदत लग गयी है. मैं उनका जल्दी से पानी निकाल कर तेरे पास चूड़ने आ जौंगी.

मैने उनकी पोज़िशन चेंज की, और उनको डॉगी स्टाइल में छोड़ने लगा. उनके मोटे-मोटे वो चूतड़ मुझे चिपक कर चूड़ने लगे, और वाहा से भी तेज़ आवाज़ आने लगी ठप-ठप भक-भक धक-धक की.

मैं उनको डॉगी स्टाइल में छोड़ते हुए उनके मोटे बूब्स को मसालने लगा था. बहुत मज़ा आ रहा था उनको छोड़ कर.

मेरी मा की ताक़त भी बहुत थी, और वो रुकने का नाम ही नही ले रही थी. फिर मैं रुका, और उनसे मेरे लंड को चूसने को कहा.

मा बोली: मुझे ये अछा नही लगेगा बेटा.

मैं: एक बार चूस कर तो देखो अपने बेटे का मोटा लॉलिपोप, बहुत सुकून मिलेगा.

मा ने मेरे लंड को अपने मूह के अंदर पूरा घुसा लिया, और चूसने लगी. चूसने से उनके मूह से गल्प-गल्प की आवाज़े आ रही थी. वो मेरा लंड सच में लॉलिपोप जैसे चूज़ जेया रही थी. फिर मैने उनको 69 करने को कहा.

मा: ये क्या होता है?

मैं: तुम नही जानती इसके बारे में?

मा: नही?

मैं: ठीक है, मैं तुझे बताता हू.

मैं: तुम मेरा लंड चूस्टी रहो, और अपनी छूट को मेरे मूह के पास लाओ.

मा: अछा.

मैं: हा

हम 69 पोज़िशन में आ कर एक-दूसरे का समान चूसने लगे. इस पोज़िशन में मा को बड़ा मज़ा आ रहा था. जिस बात की गवाही उनके उछलते हुए चूतड़ दे रहे थे.

10 मिनिट तक ऐसा करने के बाद मैने मा को मेरे उपर चढ़ने को बोला. वो उपर आ कर मेरे उपर चढ़ गयी, और मेरा लंड अपने छूट में डाल कर चूड़ने लगी.

मैं उनके बूब्स को एक हाथ से दबा रहा था, और एक बूब्स को चूज़ जेया रहा था. बूब्स को चूस्टे-चूस्टे मैं उनको दांतो से ज़ोर से काट देता था, और वो आईइ करके चिल्ला देती थी. वो मेरे उपर छूट चूड़ने का नंगा नाच करने लगी थी.

मेरा भी उनको लेकर छोड़ने का नशा बढ़ते जेया रहा था. उस दिन मैने उनको कामसुत्रा के 16 पोज़ लगाए थे. फिर हम देसी स्टाइल में आ गये.

मैने उनकी टांगे फैलाई, और मैं पूरा अंदर घुस गया. फिर मैने मा के पैरों को मेरे पीठ में रखने को बोला. मैं उनको अब तेज़-तेज़ झटके देने लगा था.

मा (सिसकियाँ लेते हुए): और ज़ोर से छोड़ बेटा आहह.

मैने उनको मेरी बॉडी से पूरा कवर कर लिया था, और छोड़े जेया रहा था. करीब आधे घाटे की चुदाई के बाद मेरी मा ने मुझसे बोला-

मा: अयाया बेटा, मेरा पानी निकालने वाला है. मैं खुद को रोक नही पा रही हू.

मैं: अभी रूको ना मीनाक्षी तोड़ा और.

मा: बस अब मैं आने ही वाली हू, और ज़ोर से चोद.

मैं: हा मीनाक्षी.

मा: आ बेटा आहह अहः आ.

ऐसा करते-करते मेरी मा की छूट से उनका गरमा-गरम पानी छूटने लगा था.

मेरी मा की छूट से ढेर सारा पानी निकल कर बहने लगा, और उन्होने पूरी तरह से सॅटिस्फाइड हो कर आँखें बंद कर ली थी. 5 मिनिट बाद मेरे लंड से भी पानी छूटने वाला था. तो मैने मा से कहा-

मैं: मेरे लंड का पानी अंदर छ्चोढू या बाहर?

मा: अंदर डाल दे बेटा तेरा गरमा-गरम रस्स.

मैं उनको ज़ोरो की चुदाई देने लगा, और मेरा भी आने वाला था. मैने आआअहह हहााआ आआआहह आआआहह करते हुए मेरे लंड का माल उनकी छूट के अंदर ही डाल दिया. मेरे लंड से पानी छूटने के बाद मैं उनके उपर ही लेट गया.

5 मिनिट तक दोनो शांत हो कर नंगे ही एक दूसरे को बाहों में कस्स कर पकड़े हुए थे. उसके बाद मैने मा से कहा-

मैं: बोलो मीनाक्षी, कैसी रही मेरी चुदाई?

मा: इतने सालों बाद मेरी आज जाके प्यास बुझी है.

मैं: मज़ा आया मेरे साथ?

मा: तूने सच में बहुत आचे से छोड़ा है मूज़े चिकू.

आज से तू ही मुझे रोज़ छोड़ेगा, और तेरे पापा को हाथ लगाने नही दूँगी खुद को.

मैं: इसीलिए तो मैने बोला था तुमको मेरे साथ चूड़ने के लिए.

मा: मुझे पहले नही पता था की तू मेरी उम्मीद से भी 10 गुना आयेज निकल जाएगा.

मैं: ऐसा क्या?

मा: हा.

मैं: तो मुझे आपना पति बना लो.

मा: हॅट पागल, अपने बेटे को ही अपना पति नही बना सकती मैं.

मैं: बना नही सकती पर मान तो सकती हो?

मा: चल मान लेती हू, की तू मेरा आज से पति है.

मैं: ये हुई ना बात! अब अगर तू मुझसे शादी करने भी बोलेगी तो कर लूँगा.

मा: तू सच में मेरे से शादी करेगा?

मैं: हा, आप में बुराई ही कहा है?

मा: तो मुझे अपना बना ले ना चिकू.

मैं: आज से तुम मेरी ही हो.

मैने मा को एक और बार के लिए झट से तैयार किया, और हम फिरसे शुरू हो गये. उस रात मैने मा को 5 बजे तक छोड़ा, और साथ में 7 बार एक साथ ही झाडे थे. सुबा होने वाली थी, इससे पहले सब जागते मा ने मुझको अपने से अलग किया, और अपने कपड़े पहन कर अपने रूम में जाने लगी.

मा ने मुझसे कहा: ओह मेरे हीरो, तुम भी अपना कपड़े पहन लो, नही तो कोई और ना ले जाए.

मैं: तुम्हारे रहते इसको अब कोई हाथ नही लगा सकता. तुम चिंता मत करो.

मैने सिर्फ़ शॉर्ट्स पहना, और मैं इतनी लंबी चुदाई के बाद तक चुका था. इसलिए मैं सो गया, और मा अपने रूम में चली गयी.

अगली सुबा मैं लाते से उठा, और मा ने मुझे आवाज़ देकर उठाया. मैं नही माना तो वो मेरे पास आ कर मुझे उठाने लगी. मैने आँखें खोली और मा को टाइट्ली हग कर लिया.

मा: छ्चोढ़ पागल तेरे पापा और बेहन घर पर ही है. अभी मत कर ये सब.

मैं: क्या फराक पड़ता है किसी के होने से? वैसे भी तुम मेरी पत्नी हो.

मा: हा बाबा, पर अभी तेरी पत्नी नही मा बोल रही है. उठ जेया और फ्रेश हो कर नाश्ता करने आजा.

वो जाने लगी थी, और मैं फ्रेश होने जेया रहा था. तभी बाहर चाची हॉल में बैठी हुई थी.

ट्विस्ट अभी बाकी है

अब आयेज अगले पार्ट में मिलते है. मेरा ये पार्ट आप सब को कैसा लगा, मुझे ए-मैल के ज़रिए अपनी फीडबॅक दे. मिलते है अगले पार्ट में.

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