एक माँ की चुदाई की दास्तान उसी की ज़ुबानी

फिर उन्होने खाना खाया, और फिर मैने पूछा-

मैं: अंकल आप रात की ड्यूटी करके आए है. नहाए है या नही?

वो बोले: नही.

फिर मैने उनसे कहा: आप नहा लीजिए.

और अंकल को बातरूम तक छोढ़ के आई और बोली-

मैं: आप अभी होश में नही लग रहे अंकल. तब तक मैं आपके लिए छाई बना देती हू.

फिर अंकल बातरूम में नहाने चले गये. मैं किचन में छाई बना के किचन की सफाई करने लगी. मुझे लगा की अंकल नहा रहे होंगे. पर मैने बाहर आँगन की तरफ किचन से देखा, तो अंकल किचन के दरवाज़े पे पुर नंगे खड़े थे.

फिर वो बोले: तौलिया दे दो.

मैं चौंक गयी अंकल को पूरा नंगा देख कर. मैने देखा की वो पुर नंगे थे, और उनका लंड नीचे की तरफ लटक रहा था. उनका लंड कम से कम 4 इंच का होगा ही बिना खड़े हुए.

मेरे तो होश ही उडद गये थे, और मैं घबरा अलग से रही थी. उनके लंड में खूब सारे बाल भी थे, और उनके लंड की बनावट एक-दूं तंदुरुस्त लग रही थी. उनकी दोनो बॉल्स (टट्टो) के बीच में लंड लटक रहा था, और उनके लंड का सूपड़ा पीछे उठा हुआ था.

मतलब उनके लंड का टोपा खुला हुआ था, जो उपर से रब्बर होती है, वो पीछे को थी अंकल की. फिर मैं तुरंत भागी, और अंकल को पकड़ कर बातरूम में ले गयी. मैने उनको स्टूल पे बिता दिया.

फिर अंकल नहाने लगे. मैने कहा-

मैं: आप जब नहा लीजिएगा, तो आवाज़ दे देना. मैं तौलिया ले अवँगी.

फिर मैने सोचा की कोई बात नही अंकल होश में नही है. तो ऐसी ग़लती हो गयी. फिर मैने सोचा अंकल आवाज़ देंगे. लेकिन कोई आवाज़ नही आई. फिर मैने उनको आवाज़ लगाई.

घर के पीछे मोहल्ले में कन्स्ट्रक्षन का काम चल रहा था, तो आवाज़ नही जेया रही होगी. अंदर जब की बातरूम का दरवाज़ा आधा खुला हुआ था, फिर भी आवाज़ नही जेया रही थी.

फिर मैं हिम्मत करके बातरूम की तरफ बढ़ी, और मैने तौलिया हाथ में लिया हुआ था. मैं दरवाज़े के बाहर ही थी, और अंकल खड़े होके उस तरफ नहा रहे थे.

वो मुझे साइड से दिख रहे थे. मैने पहले उनकी गांद देखी, जो की काली थी. और फिर मेरी नज़र उनके लंड पे गयी. इस बार तो उनका लंड देख के मैं डांग( दर्र) ही रह गयी.

मैने देखा की उनका लंड इस बार पूरा खड़ा था, और वो उसपे लगा साबुन सॉफ कर रहे थे. उनका लंड इस टाइम शायद पूरा खड़ा था, और वो अपने लंड को आयेज-पीछे करके लेफ्ट-रिघ्त करके सॉफ कर रहे थे.

वो एक हाथ से पानी डाल रहे थे लंड के उपर. उनका लंड कम से कम 6.5 इंच का तो होगा ही, और मोटा भी बहुत था. पर कितना मोटा था, ये सही से समझ नही आया.

फिर मैं हिम्मत करके बातरूम की तरफ बढ़ी, और मैने तौलिया हाथ में लिया हुआ था. मैं दरवाज़े के बाहर ही थी, और अंकल खड़े होके उस तरफ नहा रहे थे.

वो मुझे साइड से दिख रहे थे. मैने पहले उनकी गांद देखी, जो की काली थी. और फिर मेरी नज़र उनके लंड पे गयी. इस बार तो उनका लंड देख के मैं डांग( दर्र) ही रह गयी.

मैने देखा की उनका लंड इस बार पूरा खड़ा था, और वो उसपे लगा साबुन सॉफ कर रहे थे. उनका लंड इस टाइम शायद पूरा खड़ा था, और वो अपने लंड को आयेज-पीछे करके लेफ्ट-रिघ्त करके सॉफ कर रहे थे.

वो एक हाथ से पानी डाल रहे थे लंड के उपर. उनका लंड कम से कम 6.5 इंच का तो होगा ही, और मोटा भी बहुत था. पर कितना मोटा था, ये सही से समझ नही आया.

फिर मैने तेज़ी से आवाज़ लगाई, तो अंकल को मैने अपने हाथ बढ़ा कर तौलिया पकड़ा दिया. मुझे उस टाइम बहुत दर्र लगने लगा था. फिर अंकल तौलिया लपेट के बाहर आ गये, और अपनी पंत शर्ट बाहर ले आए.

अब जब मैं बातरूम में घुसी, तो देखा की उनका अंडरवेर नीचे पड़ा हुआ था. मतलब उन्होने चड्डी नही पहनी थी. फिर मैने उन्हे अंकु के पापा की चड्डी दी पहनने को.

वो कपड़े पहन कर लेट गये, और सो गये. जब वो उठे, तो अंकु भी घर आ चुका था. फिर ना उन्होने, और ना ही मैने इस बारे में कोई बात करी. मैने जल्दी से उनकी चड्डी धो के सूखा कर अपनी अलमारी में रख ली थी, ताकि कोई देखता तो ग़लत समझता.

फिर वो अपने घर चले गये. अगले दिन जब अंकल फिर आए, तो बोले-

अंकल: कल मैं बहुत नशे में था. होश में नही था.

मैने उनसे कुछ नही कहा, पर अंकल ने मेरे से कहा-

अंकल: मंजू मेरी चड्डी तुम्हारे यहा रह गयी थी. वो मुझे दे दो.

मैने कहा: नही अंकल, मैने वो रख ली थी. ताकि अंकु के पापा पूछते तो प्राब्लम ना होती. और मैने उन्हे नही बताया, की आप कल नशे की हालत में आए थे.

अंकल बोले: अर्रे मंजू, ग़लती हो गयी मुझसे. ऐसी हालत में तुम्हारे यहा नही आना चाहिए था. पर मैं क्या करता? तुम्हारा घर पास में था, तो अजय ने भी बोल दिया की मंजू आंटी के यहा ही चलो. पर मंजू तुम्हारा पति क्या फ्रेंच अंडरवेर ही पहनता है?

मैने कहा: हा, वो यही पहनते है. क्यू क्या हुआ?

अंकल: अर्रे नही, कुछ नही. इस वाली में दिक्कत होती है.

मैं: क्या अंकल, कैसी दिक्कत?

अंकल: कोई नही, मेरे लिए साइज़ छ्होटा था.

फिर मैं बोली: कोई नही अंकल. एर पास होती है, इसलिए यही सही है. ये यही लाते है.

फिर अंकल बोले: मुझे भी दिलवा दो यही वाली बेज़ार से.

मैने कहा: ठीक है, आप बोल दीजिएगा इनसे. ये ले आएँगे आपके लिए. क्यूकी इनको अपने लिए भी लानी है.

अंकल बोले: अछा तो मेरा एक काम करोगी?

मुझे अगले हफ्ते एक शादी में जाना है. मुझे एक सूट का कपड़ा दिलवा दो चल के.

मैं बोली: अर्रे मैं कहा चल पौँगी. ये मोनू भी अभी गोद में है. अंकु को अकेले छोढ़ के कैसे जौंगी?

अंकल बोले: पति के ऑफीस कॉल करके पूचु क्या?

और तुरंत अंकल ने अपने फोन से इनके ऑफीस कॉल कर दी. अंकल उनसे बोले-

अंकल: मुझे ज़रा बेज़ार जाना है. मैं मंजू से कह रहा हू चले, तो ये माना कर रही है. बोली तुमसे पूच लू.

ये बोले: मैं क्या बोलू, जैसा मंजू का मॅन करे चले जाए. और अपने लिए भी समान ले आए.

फिर मैने अंकल का फोन लिया, और पूछा-

मैं: तुम्हारे लिए क्या लाना है?

तो ये बोले: कुछ नही, अपने लिए सारी देख लेना. और बच्चो के लिए कपड़े. मेरे लिए अंडरवेर और बनियान ले आना, और अपने लिए भी देख लेना. अंकु को बड़ी भाभी के यहा छोढ़ दो, और मोनू को साथ ले जाओ. या मोनू को भी बड़ी भाभी रख ले तो ठीक है. वैसे भी उनके यहा नौकरानी तो रहती ही है.

और हा, मैं शाम को तुम्हे कॉल करता, की आज मैं देर से अवँगा 8 बजे तक. तोड़ा दूसरी जगह जाना है, और टाइम से आ जाना.

फिर अंकल ने फोन लेके इनसे कहा-

अंकल: तुम भी आ जाओ, साथ चलते है.

तो ये बोले: नही आप दोनो चले जाओ. मुझे देर हो जाएगी.

फिर मैने कहा: इन दोनो को भी मैं साथ ले चलूंगी. पर पहले अपने लिए भी देख लू, की क्या लाना है.

फिर मैं अपने अलमारी खोल के अपने लिए ब्रा और पनटी देखने लगी. उसके बाद हम 2 बजे बेज़ार को निकल लिए. अंकल की वन से अंकल को मैं वाहा ले गयी, जहा हम जाते थे. फिर उन्हे एक सूट का कपड़ा दिलवाया, और बच्चे के लिए कपड़े लिए. अंकु के पापा के लिए एक शर्ट ली.

फिर अंकल बोले: तुम कुछ नही लॉगी?

फिर अंकल का सूट हमने नाप के लिए दे दिया, और अंकल बोले अजय ड्राइवर से-

अंकल: तुम्हे ज़रूरी काम से जाना था. तुम जाओ, मैं वन चला के ले अवँगा.

तो वो चला गया. फिर अंकल जहा से अंडरगार्मेंट्स का समान लेते है, उस दुकान में घुस गये. वाहा पर एक आदमी था. वो 55 से उपर का था. अंकल ने पहले मेरा इंट्रो दिया. फिर दुकान वाला बोला-

दुकान वाला: क्या चाहिए आपको?

तो अंकल बोले: मुझे अंडरवेर दिखाओ.

दुकान वाले ने अंडरवेर दिखयी, तो अंकल बोले-

अंकल: नही, ये वाली नही. वैसी वाली कट वाली.

तो दुकान वाले ने कट वाली ही निकाल के दी. फिर अंकल ने अपने लिए 4, और अंकु के पापा के लिए मैने 2 ले ली. उसके बाद दुकान वाला बोला-

दुकान वाला: भाभी जी आपके लिए कुछ दिखौ?

तो अंकल बोले: बोलो मंजू, ले लो जो लेना है. नैल्पोलिश या लिपस्टिक.

मैं चुप रही, पर दुकान वाला बोला: लगता है भाभी जी हमसे नाराज़ है.

फिर मैं बोली: नही जी, ऐसी कोई बात नही.

चलिए पहले नाइल पैंट और लिपस्टिक देख लेती हू. फिर मैने दोनो चीज़े ले ली. फिर दुकान वाला बोला-

दुकान वाला: भाभी जी, आपने तो अपने लिए ब्रा पनटी तो ली नही? आपको वो भी दिखौ.

मा बोली: नही भैसाहब, अभी नही.

पर अंकल बोले: ले लो मंजू मॅन है तो.

फिर मैने हा कर दी, और मैने जिस कंपनी का नाम बताया, उसपे दुकान वाला बोला-

दुकान वाला: ये तो सस्ती और लो क्वालिटी कपड़े की है. आपको देखना है तो ये देखिए.

ये बोल का उसने टेबल पर वही कंपनी वाली सेम ब्रा निकाल के रख दी पॅकेट से. फिर उसने अंकल से कहा-

दुकान वाला: देखिए भैसाहब, इसका कपड़ा चू के. कितना लो क्वालिटी का है.

तो अंकल बोले: कोई और दिखाओ.

तो दुकान वाला बोला: अंदर से समान निकाल के लता हू.

फिर वो जैसे ही अंदर जाने वाला था, उसने पूछा-

दुकान वाला: आपका साइज़?

तो मैने कहा: 34″.

फिर वो अंदर गया, तो मैं बोल पड़ी-

मैं: इन्हे पता चलेगा तो गुस्सा करेंगे.

अंकल बोले: मैं समझ गया था. तभी तुम माना कर रही थी. पर तुम ले लो, बोल देना की बाद में सहेली के साथ गयी थी लेने.

फिर मैने हा बोल दी. तब तक दुकान वाला बाहर ब्रा पनटी दोनो ले आया. उसने एक ब्रा डीकाई और बोला-

दुकान वाला: ये लीजिए आपके लिए नेट वाली ब्रा.

मैं बोली: नही नॉर्मल दिखाओ.

तो दुकान वाला बोला: अक्सर आप नॉर्मल पहनती होंगी, इस बार नेट वाली ब्रा पनटी लेके देखिए फिर बताना आप.

मैने कहा: बाहर ही पहनने वाली बताइए. क्यूकी घर में तो मुश्किल होता है पहनना.

फिर मैने एक वाइट नेट वाली ब्रा ली. और फिर एक नेट वाली पनटी. फिर मैने कहा-

मैं: साइज़ प्राब्लम तो नही होगी?

दुकान वाला बोला: ट्राइ कर लीजिएगा एक-दूं 34″ ही आएगी. बिल्कुल ठीक दी है. कोई दिक्कत हो, तो भैसाहब तो है ही, बदल देंगे.

उसके बाद हम दोनो घर आ गये शाम 5 बजे तक. फिर मैने अंकल के लिए छाई बनाई. उसके बाद हम मैं बेड रूम में थे. तो अंकल ने कहा-

अंकल: एक बार ट्राइ करके देख लेता हू अंडरवेर, की साइज़ ठीक है.

मैं बोली: घर जाके देख लेना अंकल.

तो अंकल बोले: अरे नही, अभी चेक कर लेता हू. और तुम भी चेक कर लो साइज़. अगर दिक्कत होगी तो बदल अवँगा. बाकी तुम्हे कल दे जौंगा फिर.

मैं: अछा अंकल फिर आप उधर तो जाओ, में चेक करके बताती हू आपको.

अंकल: अर्रे पहन के नही दिखावगी क्या?

मैं बोली: अर्रे कैसी बात कर रहे है अंकल आप भी?

अंकल: और क्या, मैं भी तो दिखौँगा तुम्हे की ठीक लग रही है या नही. इसमे कोई दिक्कत नही है मंजू. आदमी औरत को तो तुमने देखा होगा नदी नहर में खुल के कपड़े उतार कर नहाते है. तो इसमे कोई प्राब्लम नही है.

मैं: जी बात तो सही है. अंकल अब जाओ उस कमरे में, और बदल के आओ.

तो बे कंटिन्यूड…

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