मा के साथ चुदाई करके बेटी ने टेन्षन भगाई

जब एग्ज़ॅम देके सेंटर से निकली तो मुझे खुशी भी और तोड़ा दुख भी था. दुख की वजह थी मेरा एग्ज़ॅम, जो मेरी तैयारी के हिसाब से अछा नही गया था. लेकिन खुशी इस बात से थी की अब अगर मार्क्स कम आते है, तो मैं ये रीज़न भाईजान (मुराद) पे डाल सकती थी.

मेरी दोस्तों ने कही होटेल में जेया कर खाने का प्लान बनाया. लेकिन मुझे घर जाना था, और भाईजान के सामने जाके देखना था की अब क्या आयेज करेंगे भाईजान. इसलिए मैं अर्जेंट काम का बहाना बना के अपने घर की तरफ मूड गयी.

मैने फोन निकाला और मुराद भाईजान को फोन लगाया. 4-5 रिंग जाती, लेकिन वो फोन पिक नही करते. मैने लगातार 5-6 बार करा, लेकिन कुछ नही. फाइनली एक मेसेज आया जब मैं घर से 100 मीटर डोर थी.

मेसेज: सॉरी मैं बताना भूल गया, मैं ऑफीस ट्रिप पे आया हू. 6-7 दिन लग जाएँगे.

इस मेसेज ने मेरे सारी उमीद को दबा दिया. उपर से मुझे गुस्सा भी आ रहा था, क्यूंकी अब ना मेरे पास अब्बू थे, और ना ही भाईजान, जो मेरे एग्ज़ॅम प्रेशर को कम करने में मेरी मदद करे. उपर से अभी भी 2 एग्ज़ॅम्स बचे हुए थे.

अपने लड़खड़ते हुए पैरों से घर का गाते खोल मैं अंदर घुसी. मैं इतनी अपसेट थी की बजते हुए गानो की आवाज़ भी सही से सुनाई नही दी, और मैं सीधा अपने कमरे में चली आई. लेकिन जब-जब मैं भाईजान का मेसेज पढ़ती, तो मेरा गुस्सा बढ़ता जाता, और आख़िर में अब मुझे बजते हुए गाने पे भी गुस्सा आने लगा.

गाना अम्मी के कमरे से आ रहा था ( वैसे अम्मी गाना जल्दी नही सुनती है). गुस्से में मैने ज़ोर से अम्मी के रूम पे हाथ मारा, तो गाते झट से खुल गया.

गाते खुलते थी अंदर का नज़ारा:-

अम्मी पूरी नंगी बेड पर अपने पैर चौड़े किए हुए, अपनी छूट में डिल्डो घुसाए मस्त थी. अम्मी के बगल में ही अलग-अलग साइज़ के डिल्डोस पड़े थे. और दूसरी तरफ फोन पर शायद कोई पॉर्न चल रही थी, जिसे देख-देख कर अम्मी पूरी कामुकता के चरम पर थी.

तभी मेरी और अम्मी की आँखें मिली. मैं हैरान थी, और वही अम्मी शरम से पानी-पानी हुए जेया रही थी. वो जल्दी से खड़ी हो कर अपने बालों भारी छूट और बूब्स को मुझसे च्छूपाते हुए एक कोने में हो गयी. ये सब देखने के बाद मैं वाहा से जल्दी हटती, और अपने रूम में आ गयी. लेकिन अभी भी मेरी आँखों के सामने अम्मी की तस्वीर, जिस हालत में वो थी, बार-बार आ रही थी.

थोड़ी देर बाद अम्मी ने मेरे रूम का गाते नॉक किया, और मैने गाते खोल उन्हे अंदर आने दिया. उनके बदन पर चढ़ि निघट्य में सॉफ दिख रहा था, की अंदर अम्मी ने ब्रा और पनटी नही पहनी थी. अम्मी मेरे सामने सिर झुकाए बस खड़ी थी, और थोड़ी-थोड़ी तो मुझे भी शरम आ रही थी. लेकिन मुझे भी समझ नही आ रहा था की इस टाइम मैं भी क्या ही बोलती. तभी अम्मी ने पहल करी.

अम्मी: बेटी ज़राइना, वो, वो, जो वो सब तूने देखा वो, बस.

मुझे समझ आ गया था की अम्मी बहुत ज़्यादा शर्मिंदा थी, इसलिए मैने उनका हाथ पकड़ कर उन्हे रिलॅक्स फील करने के लिए उन्हे गले से लगा लिया. तभी अम्मी के आँसू मेरी पीठ पर फील होने लगे, और अम्मी रोने लगी. रोते-रोते वो बोली-

अम्मी: मैं कोई रंडी नही हू, बस जब मैं अकेली होती हू, तो यही करती हू. लेकिन किसी पराए आदमी के साथ कुछ नही किया.

उनका रोता चेहरा देख और उनकी बाते सुन लगा की ये सब अम्मी के दिमाग़ में क्या-क्या चल रहा था. लेकिन बहुत बार चुप करने के बाद भी अम्मी बस रोए जेया रही थी. तभी उनको शांत करने के लिए मैने उनके भीगे होंठो को चूम कर कुछ देर के लिए उन्हे शांत कर दिया.

जब हम अलग हुए तो अम्मी काफ़ी शांत थी. मैने उनको बेड पर बिताया, और खुद उनके बगल में लेट गयी.

मैं: अम्मी, जो तुम अभी कर रही थी ना, वो हर दूसरी औरत करती ही. इसमे कुछ ग़लत नही.

अम्मी: लेकिन.

मैं: अछा ये बताओ, उससे तुम शांत हो जाती हो?

अम्मी: हल्का सा बस.

मैं: अब्बू क्या अब नही करते?

अम्मी: पहले तो 1 महीने में 2-3 बार करते थे. लेकिन अभी कुछ दीनो से तो भूल ही गये.

उनकी बातें सुन मुझे समझ में आ गया, की जब से अब्बू ने मेरी चुदाई करी होगी, तभी से उनकी चुदाई छ्चोढ़ दी होगी. तभी मुझे ख़याल आया, क्या मैं और अम्मी एक-दूसरे की मदद कर सकते थे. इसी सोच के साथ मैं अपने हाथो को अम्मी की बूब्स पर ले-जेया कर उन्हे दबाने लगी.

मैं: मैं हू ना अम्मी, आज मैं आपको बतौँगी की कैसे आप अब्बू के औज़ार के बिना भी खुशी ले सकती हो.

अम्मी: लेकिन कैसे?

मैने उनके बूब्स को मसलना तेज़ किया, और उनके कंधो से निघट्य का बोझ कम करते हुए निघट्य को उनके बदन से नीचे गिरा दिया. मैने उनके हाथो को पकड़ उन्हे अपने बूब्स पर रख कर कहा-

मैं: जैसे-जैसे आप अपने बूब्स के साथ करती है, वही मेरे बूब्स के साथ भी करो. मैने भी अपना टॉप उतार कर बेड पर फेंक दिया. अम्मी मेरे काली ब्रा के उपर से मेरे बूब्स को मसले जेया रही थी. मैं अपना हाथ उनकी कमर से उनकी छूट पर ले-जेया कर अंदर उंगली करने लगी. कुछ देर के बाद हम दोनो बेड पर चढ़ गये, और अम्मी को लिटा कर मैं अपनी जीभ से उनकी छूट चाट कर उनको वो एहसास दिला रही थी, जो शायद आज तक अब्बू ने भी नही दिया था.

अम्मी: बेटी, इसमे तो सच-मच काफ़ी मज़ा आ रहा है. तेरे अब्बू ने बहुत बार मेरे मूह में अपना लोड्‍ा घुसा कर चुस्वाया है. लेकिन कभी मेरी छूट नही छाती.

मैं: कोई नही, मैं हू ना आपकी बेटी.

शायद अम्मी काफ़ी एग्ज़ाइट्मेंट में आ गयी थी, और खुद पर कंट्रोल ना करते हुए अम्मी ने अपना टाय्लेट मेरे मूह पर ही छ्चोढ़ दिया. लेकिन उसके बाद भी मैं लगी रही, जब तक अम्मी की झांतो समेत उनकी छूट गीली नही हो गयी. फिर धीरे-धीरे उपर आ कर उनके बूब्स के निपल को मूह में भर कर एक लीप किस किया, और उनके मूह के उपर बैठ कर अब उन्हे अपनी छूट चाटने को को बोला.

अम्मी ने मेरी काली पनटी के उपर से मेरी छूट चाटना चालू कर दिया. लेकिन जब अम्मी ने मेरी पनटी उतरी, तो मेरी चिकनी छूट को देख अम्मी हैरानी से बोली.

अम्मी: तेरी झाँते नही आती क्या?

मैं पहले हल्का हस्सी, और फिर बोली: आती है अम्मी, लेकिन मैने आज सुबा ही सॉफ करी है.

अम्मी: क्यूँ, आज ही

क्यूँ?

अब मैं अम्मी को कैसे समझती, की पिछली रात की चुदाई के बाद मैं आज भी भाईजान से चूड़ने को तैयारी थी, इसी खुशी में.

मैं: वो बहुत खुजली होने लगी थी.

अम्मी: वैसे बहुत मस्त लग रही है.

अम्मी तो बिल्कुल आइस्क्रीम की तरह छूट पर जीभ रख छाते जेया रही थी. तभी मुझे लगा की मुझे इतना मज़ा आ रहा था, तो अब्बू जब अम्मी से ब्लोवजोब लेते होंगे, तो क्या ही मज़ा आता होगा उन्हे. मैने अम्मी से सारे डिल्डो मँगवाए. थोड़ी देर में ही मेरे बेड पर 6 से 12 इंच तक के लंबे मोटे काले डिल्डो मेरी आँखो के सामने थे. उसमे से मैने 12 इंच का काला मोटा डिल्डो उठाया, जिसे देख अम्मी बोल पड़ी.

अम्मी: बेटी! इससे तो छूट ही फटत जाएगी.

मैं: ट्राइ करते है ना.

बेड की बीचो बीच डिल्डो रख उसपे अम्मी को बिता कर उनके मूह से पास अपनी छूट रखी मैने. फिर मस्त अपनी छूट चटाई करवाई. लेकिन कुछ ही देर बाद अम्मी बोली-

अम्मी: इसमे तो बहुत जान लगती है. कुछ दूसरा तरीका नही है क्या?

तोड़ा सोचने के बाद मैं किचन की तरफ गयी, और कुछ देर बाद वापस आई.

अम्मी: क्या हुआ? क्या लेने गयी थी?

तभी मैने उनके सामने एक खीरा रखा, जिसे देख अम्मी की एक मुस्कान देखने को मिली.

फिर उनकी छूट में एक सिरा सेट कर दूसरा सिरा अपनी छूट में घुसा कर दोनो अपनी-अपनी साइड से आयेज-पीछे होते. काई बार हम दोनो की छूट एक-दूसरे से रग़ाद भी जाती थी.

ऐसे करते-करते मैने और अम्मी ने सारे खीरे ट्राइ किए. जब हम दोनो झड़ने ही वाले थे, तभी दोनो ने अपने-अपने खीरे को अपनी छूट में समाते हुए दोनो की छूट मिला दी. फिर दोनो की छूट एक साथ झड़ी, हम एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए एक-दूसरे को चूमने लगे. फिर हम दोनो की आँख लग गयी.

करीब शाम को मेरी नीड खुली, तो देखा मैं अकेले बेड पर लेती थी. बगल में अपनी ब्रा पनटी ढूँढने लगी तो सिर्फ़ ब्रा मिली. फिर उसे पहन कर मैं बाहर आई तो अम्मी मेरी पनटी पहने किचन में कुछ बना रही थी. पीछे से मैं गयी, और उनके बूब्स को पकड़ लिया.

मैं: क्या बना रही हो अम्मी?

अम्मी: बस भूख लगी थी तो सोचा कुछ बना लू.

जब तक नाश्ता तैयार नही हुआ, मैं अम्मी से ऐसे ही चिपकी रही और उनके बूब्स दबाए. आख़िर में हम प्लेट्स लेकर दोनो सोफे पे आ कर बैठ गयी. फिर मैं एक हाथ से अम्मी के बूब्स मसालने लगी, और अम्मी अपने एक हाथ से मेरी छूट में उंगली करने लगी. टीवी ओं किया तो मेरा और अम्मी का फॅवुरेट ड्रामा चल रहा था, जिसे देखते हुए नाश्ता किया, और हमारी मस्ती भी चल रही थी.

उसके बाद मैं और अम्मी, भाईजान और अब्बू के घर पर ना होने का पूरा फ़ायदा उठाते हुए फुल मस्ती में लगे हुए थे. इससे मैं अगले होने वाले एग्ज़ॅम की टेन्षन से फ्री हो गयी.

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