मा द्वारा बेटे के लंड को शांत करने की कहानी.

हेलो दोस्तों, मैं सोनिया आप लोगों के लिए एक मा बेटे की सेक्स स्टोरी लेके आ चुकी हू. स्टोरी स्टार्ट करने से पहले थोड़ी इंट्रो दे देती हू. मैं सोनिया शर्मा, आगे 39, फिगर 36ब-26-34, हाइट 5.6 फीट. राकेश शर्मा मेरे पातिदेव, आगे 43, एक इट फार्म में जॉब करते है. और इस कहानी में मेरा हीरो मेरा बेटा राज आगे 18+, हाइट 5.8 फीट. अब स्टोरी स्टार्ट करते है.

ये लास्ट वीक की बात है. आक्च्युयली वीकेंड था तो मैं राकेश के साथ सेक्स करने की प्लान कर रही थी. पिछले कुछ महीनो से उसने मुझे ज़रा भी वक़्त नही दिया था. वैसे भी वो मुश्किल सही 5 मिनिट टिक पता था, उपर से 4 इंच का लंड. फुल मिला कर मेरी सेक्स लाइफ एक-दूं फक्ड उप थी.

मैं जिम जाती हू, तो वाहा की एक सहेली ने मुझे वियाग्रा उसे करने के लिए बोला था. जिम से आते वक़्त मैं मेडिकल शॉप से वियाग्रा लेके आई थी. मैं डिन्नर के बाद कॉफी बना रही थी, की तभी राज किचन में आया.

राज: अछा है आप किचन में ही मिल गयी. मैं सोच रहा था आप सो गयी.

मैं: क्यूँ क्या चाहिए तुझे?

राज: आप कॉफी बना रही हो? मुझे भी एक कप चाहिए.

मैं: क्यूँ?

राज: कॉलेज से असाइनमेंट मिला है, पर मुझे आज बहुत नींद आ रही है.

मैं: ठीक है, रूम में जेया. मैं लेके आती हू.

राज मुझे पीछे से हग करते हुए.

राज: थॅंक्स मम्मी.

मैं: मुझे मक्खन लगाना हो गया है, तो रूम में जेया. मैं कॉफी लेके आती हू.

राज अपने रूम में चला गया. फिर मैने 3 कप कॉफी बनाई, और उसमे से एक कप लेफ्ट साइड में अलग रख के बाकी 2 कप में वियाग्रा की गोली मिला दी, एक राकेश के लिए एक मेरे लिए. मैं बहुत एग्ज़ाइटेड थी. आज रात बहुत मज़ा आने वाला था. बहुत दीनो बाद मेरी छूट को आज थोड़ी चुदाई नसीब होने वाली थी.

पर तभी मुझे टाय्लेट आ रही थी तो मैं टाय्लेट चली गयी. फिर मैं किचन आते वक़्त सोची की पहले राज को कॉफी देके आती हू, पर किचन में पहुँच के देखा तो वाहा बस 2 ही कप थे. तो मैं राज के रूम में जाके देखी, की वो ऑलरेडी एक कप लेके आ चुका था.

मैं: ये कों सा कप उठाया है तूने?

राज: मतलब?

मैं: लेफ्ट से या रिघ्त से?

राज: लेफ्ट से क्यूँ?

मैं: नही रिघ्त वाले में तेरे पापा के सिर दर्द की दवाई मिलाई थी. ठीक है, तू पढ़ाई कर. और अगर भूख लगे तो फ्रिड्ज में खाना रख दिया है, ले लेना.

राज: ओक. गुड नाइट मम्मी.

मैं: गुड नाइट बेटा.

फिर मैं किचन में आई, और मेरा और राकेश का कप लेके हमारे रूम में चली गयी.

राकेश मोविए देख रहा था. फिर हम दोनो एक साथ कॉफी पीते हुए मोविए देखने लगे. कुछ देर बाद एक रोमॅंटिक सीन आया. मैने हल्के से अपना हाथ राकेश की जाँघ पर रखा, और धीरे-धीरे सहलाने लगी.

राकेश मेरी तरफ देख के मुस्कुरा रहा था. मैं समझ गयी की वियाग्रा काम करना शुरू कर दिया था. फिर मैं उसके उपर चढ़ कर उसको डीप स्मूच करने लगी. मैने क्रीम कलर कमी टॉप आंड शॉर्ट्स पहनी थी.

राकेश मेरी थाइस को सहला रहा था. फिर उसने मेरी टॉप उतार दी, और मुझे पीठ के बाल लिटा कर मेरी शॉर्ट्स और पनटी उतार दी. अब मैं कंप्लीट्ली नंगी थी. फिर उसने अपनी पंत उतरी, और अपना लंड मेरी छूट में डाल के मिशनरी पोज़िशन में छोड़ने लगा. जितना सोचा था मुझे उतना मज़ा नही आ रहा था. पर फिर भी मैं जितना मिल रहा था, उसे ही एंजाय कर रही थी.

पर 5 मिनिट में ही राकेश झढ़ गया, और मेरी छूट के साथ-साथ मेरे सपनो पर भी पानी छोढ़ दिया. फिर वो साइड होके लेट गया. मैं सोचने लगी की वियाग्रा ने ठीक से काम क्यूँ नही किया? तभी मुझे याद आया राज ने बोला था उसने लेफ्ट वाला कप उठाया था. पर उसने किचन के बाहर से खड़ा होके लेफ्ट वाला उठाया था, या किचन के अंदर जाके लेफ्ट वाला उठाया था, ये तो मैने पूछा ही नही.

क्यूंकी हमारा किचन दीवारों से घिरा हुआ नही है, मॉडुलर वाला है. ओवेन के उपर चिम्नी है, और कमर की हाइट तक एक रॅक है जो की हॉल और किचन को डिवाइड करता है.

कप मैने रॅक पे रखे थे. शायद राज ने ग़लती से राकेश का वियाग्रा वाला कप उठा लिया था. तो चेक करने के लिए मैने कपड़े पहन लिए. राकेश ऑलरेडी घोड़े बेच कर सो रहा था.

मैं राज के रूम में जेया रही थी, की मुझे मोनिंग की आवाज़ सुनने मिली. राज के रूम का दरवाज़ा बंद था, तो मैने तोड़ा हल्का धक्का दिया, तो हल्का सा खुल गया. उसने दरवाज़ा लॉक नही किया था.

अंदर झाँक कर देखा तो मेरे होश उडद गये. राज अपने बेड पर लेट कर ज़ोर-ज़ोर से अपना लंड हिला रहा था. उसका लंड राकेश के लंड से बड़ा था, और मोटा भी. मुझ पर भी वियाग्रा का असर था, तो मेरी छूट में भी आग जल रही थी. और राज का लंड देख कर वो आग और भड़क गया.

मैने पनटी नही पहनी थी, और राज को हिलाते देख कर मैं भी शॉर्ट्स के उपर से ही अपनी छूट रग़ाद रही थी. की तभी मेरे मूह से उम्मह की आवाज़ निकल गयी, और राज ने चौंक के मेरी तरफ देखा.

राज: मम्मी! वॉट थे हेल अरे योउ डूयिंग हियर?

मैं: ई’म सॉरी हनी, ई डिड्न’त मीन तो इंटरूड. मैं तो यहा तुम्हे बस देखने आई थी. और तुम ये सब कर रहे हो.

राज ने बिस्तर पर बैठ के एक तकिये से अपना लंड धक लिया, और बोला-

राज: और आप मुझे देख कर अपनी छूट रग़ाद रही थी.

मैं: ई’म सॉरी बेटा. मैं जानती हू ये एंबॅरसिंग है, लेकिन मैं एक्सप्लेन कर सकती हू.

राज: तो करो एक्सप्लेन.

देन मैने उसको सब कुछ एक्सप्लेन किया.

राज: मतलब मेरे इस एरेक्षन की वजह आप हो.

मैं: काइंड ऑफ, बुत तेरी भी ग़लती है. तूने बिना पूछे कप क्यूँ उठाया था?

राज: मुझे क्या मालूम था की आपने कॉफी में वियाग्रा मिला कर रखी थी. देखो मेरा क्या हाल है अब. मैं कब से पागलों की तरह हिला रहा हू. मेरा लंड बहुत दर्द कर रहा है.

मैं:ई आम सो सॉरी बेटा. क्या बहुत ज़्यादा दर्द कर रहा है? दो योउ वॉंट मे तो कॉल आ डॉक्टर?

राज: नो ये बहुत शरामणाक है. मैं नही चाहता की कोई और इसके बारे में जाने. मुझे डॉक्टर की ज़रूरत नही है.

मैं: तो क्या मैं हेल्प करू?

राज: आप कैसे हेल्प करोगी?

मैं: उउहम्म लीके जर्किंग योउ?

राज: इट’स एंबॅरसिंग.

मैं: ई’म सो सॉरी बेटा. तुम मेरी वजह से दर्द में हो. तो प्लीज़ रिलॅक्स करो, और मुझे हेल्प करने दो.

ये बोल कर मैं उसके सामने अपने घुटनो पर बैठ गयी, और उसकी गोद से तकिया हटा दिया. फिर उसका लंड अपने हाथो में लेके धीरे-धीरे और आराम से हिलने लगी. असल में मैं भी बहुत हॉर्नी हो चुकी थी, और मैं राज का लंड चाहती थी. मुझपे हवस चढ़ गयी थी, और मेरे पुर बदन में आग जल रही थी.

राज: ई कॅन’त बिलीव योउ’रे डूयिंग तीस मम्मी! आ आ.

मैं: उूउउंम्म अछा लग रहा है तुम्हे?

बहुत टाइम हो गया था मुहे हॅंजब दिए हुए, तो मैं तोड़ा आउट ऑफ प्रॅक्टीस थी.

राज: आअहह उुउऊहह आप बहुत अछा कर रही हो. बहुत अछा लग रहा है. आअहह आह रूको मत मम्मी, और ज़ोर-ज़ोर से हिलाओ. मुझे विश्वास नही हो रहा की आप ये कर रहे हो. मैने हमेशा इसकी कल्पना ही की है.

मैं ये सुन के थोड़ी शॉक्ड हुई और खुश भी. क्यूंकी मैं तो राज से छुड़वाने का सोच रही थी.

मैं: उम्म नॉटी बॉय. तू अपनी मा से हंड़जोड़ पाने का ख्वाब देखता है? कमीना कही का.

राज: सिर्फ़ हॅंजब नही मम्मी! मैं तो आपको छोड़ने का सपना देखता हू. आआहह अहह.

मैं: अपनी मा को छोड़ना चाहता है कमीना, उूउउंम्म.

राज: क्या करू, आप इतनी हॉट हो.

मैने फिर उसके लंड के टोपे को धीरे से एक किस किया.

राज: आअहह ह.

फिर मैं धीरे-धीरे उसके लंड के टोपे को जीभ से चाटने लगी. फिर पुर लंड को आचे से चाटने लगी.

राज: आअहह मम्मी, आप मुझे कमीना बोल रही थी, और अभी आप रंडी की तरह अपने बेटे का लंड चूस रही हो.

मैं: मेरे बेटे का लंड है ही ऐसा, की मुझे रंडी बनना ही पड़ा.

ये बोल के मैं ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी, और पूरा लंड मूह में लेने लगी. एक-दूं गले तक जेया रहा था.

राज: मम्मी आह आ. मम्मी बहुत मज़ा आ रहा है. चूसो, और चूसो.

ऐसे ही कुछ देर चूसने के बाद राज झड़ने वाला था. तो वो मेरा सिर पकड़ कर खुद मेरा मूह छोड़ने लगा. मेरी साँस अटक रही थी, पर बहुत मज़ा आ रहा था. और फिर उसने मेरे मूह में ही अपना सारा रस्स झाड़ दिया.

बहुत गरम और ठीक था उसका रस्स. मैं सारा रस्स पी गयी. फिर उठ कर मैने राज को धक्का देके बिस्तर पर लेता दिया, और अपनी शॉर्ट उतार कर उसके मूह पे बैठ गयी. और वो अपने जीभ से मेरी छूट चाटने लगा.

हाए क्या मज़ा आ रहा था. राकेश कभी भी मेरी छूट नही चाट-ता था. राज बीच-बीच में अपनी जीभ मेरी छूट के अंदर डाल रहा था, तो कभी मेरी क्लाइटॉरिस को जीभ से हिला रहा था.

बहुत मज़ा आ रहा था. मुझसे भी ज़्यादा कंट्रोल नही हुआ, और मैं उसके मूह पे झाड़ गयी. सालों बाद किसी ने अपनी जीभ से मुझे ऑर्गॅज़म दिया था. लास्ट याद है कॉलेज में थी तब ब्फ ने दिया था.

फिर शादी हो गयी थी, और मेरी सेक्स लाइफ बर्बाद हो गयी. पर अब कोई टेन्षन नही थी, अब मेरा बेटा मुझे चरमसुख देने के लिए तैयार था. और मैं भी उसका बिस्तर गरम करने के लिए हमेशा तैयार थी.

फिर मैं उसके मूह से हटके उसके लंड पर बैठा गयी, और अपनी छूट रगड़ने लगी. उसका लंड ऑलरेडी राक हार्ड हो चुका था. और मेरी छूट भी सेन्सिटिव थी, तो मैने देर ना करते हुए उसका लंड डाल लिया अपने अंदर. हाए क्या मज़ा आ रहा था. उसका लंड मेरी छूट को फाड़ रहा था. ऐसा लग रहा था की मानो मैं स्वर्ग में थी.

मैं: ओह, बहुत अछा और सख़्त है.

राज: आज से आप मेरी पर्सनल रंडी हो मम्मी. अब मैं रोज़ आपको छोड़ूँगा.

मैं: ह हा बेटा, हुई मैं आज से तेरा रंडी. जब मर्ज़ी तब छोड़ना मुझे. तुम्हारा लंड बहुत अछा है. मैं लगभग भूल ही गयी तू की एक आचे सख़्त लंड पर बैठना कितना अछा लगता है. थॅंक योउ बेटा मुझे याद दिलाने के लिए. ह आह.

राज: कोई ना, अब से आप जब चाहो तब इस लंड को अपने अंदर फील कर सकती हो. मम्मी.

मैं 30 मिनिट से छुड़वा रही थी. अब मैं झड़ने वाली थी.

मैं: मेरा निकल रहा है बेटा.

राज: मैं भी झड़ने वाला हू मम्मी.

मैं: डाल दे सारा रस्स अपनी मा की छूट में बेटा. आह ऊहह ह ह उम्म्म्मम.

फिर राज झाड़ गया मेरे अंदर, और उसके गरम रस्स से मैं भी झाड़ गयी. आज एक मा को उसके अपने बेटे ने चरमसुख दिया था. ऐसे ही घंटो तक चुदाई की हमने उस रात.

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