मा बेटे की पलंग-तोड़ सुहागरात की कामुक कहानी

अब मैं तैयार हो कर घर से निकल गया. साथ ही मैं वो रिंग भी ले लिया. जो मैं आज से दो साल पहले अपनी एक गर्लफ्रेंड के लिए खरीदा था. लेकिन इससे पहले की मैं उसको ये रिंग दे पता. मेरा उससे ब्रेक-उप हो गया था. शायद ये रिंग मेरी ड्रीम गर्ल के लिए ही था.

कुछ देर में ही मों की कॉल आई, की अभी मुझे और कितना टाइम लगेगा. मैने मों से 10 मिनिट माँगे. और फिर गाड़ी को तोड़ा तेज़ चलते हुए 10 मिनिट में मों के पास पहुँच गया. अब मैने मों को जैसे ही कॉल की, तो वो पार्लर के बाहर निकल के आ गयी.

वाउ! मों को देख के मैं बस देखता ही रह गया. मों ब्लॅक ट्रॅन्स्परेंट सारी और मरून वेल्वेट वाला ब्लाउस पहने हुए थी. ट्रॅन्स्परेंट सारी के अंदर से झाँकता उनका गोरा जिस्म बेहद कामुक लग रहा था. वही मैं मों को घूर्ने में इतना व्यस्त था की वो कब मेरे पास आ गयी ये पता भी नही चला.

मों: रॉकी जल्दी कर यार, हम पहले ही काफ़ी लाते कर चुके है.

मैं: आप बहुत खूबसूरत लग रही हो मों. मेरा मॅन नही कर रहा आपको पार्टी में लेके जाने का.

मों: हाहहहाहा. बदमाश, चल अब देर मत कर.

मैं: हा मों, चलता हू.

और मैने गाड़ी स्टार्ट की, और साथ ही मों से बात करने लगा.

मैं: पर वाहा आज सबकी नज़र आप पे ही रहने वाली है.

मों: किसी की नज़र रहे ना रहे, पर तेरी नज़र तो मेरे पे ही रहने वाली है.

मैं: वो तो शुवर है. अब कोई अपनी ड्रीम गर्ल पे भी नज़र ना रखे तो फिर कहा रखे?

मों ने नेरी तरफ देख के स्माइल की, और बोली: तू भी आज बहुत हॅंडसम लग रहा है.

मैं: आपके प्यार का असर है मों.

और मैने मों को आँख मार दी. ऐसी ही मज़ेदार बातें करते हुए हम निम्मी आंटी के घर पहुँच गये. वाहा पार्टी चालू थी और काफ़ी सारे मेहमान आए हुए थे. हम जैसे ही पार्टी में पहुँचे, तो वाहा सब की नज़रे मों को घूर्ने लगी.

ये देख के मों को अजीब लगा तो वो झट से मेरा हाथ पकड़ ली. जैसे की वो मेरी मों नही गर्लफ्रेंड हो. हमे देखते ही निम्मी आंटी हमारे पास आई और बोली-

निम्मी आंटी: आओ-आओ तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रही थी. चलो अब केक काटा जाए. बहुत लाते हो गया है. मेरा बेटा कब से पूच रहा है की नेहा आंटी कब आएँगी.

तभी आंटी का बेटा विकी भी आ गया. और उसने हमे ही बोला.

निम्मी आंटी: विकी देख तेरी आंटी आ गयी. चल अब केक काटा जाए.

विकी: हा मों, चलो, मेहमान कब से इसका वेट कर रहे है.

फिर सब ने मिल करके केक काटा. उसके बाद खाना पीना होने लगा. अब खाना-पीना होने के बाद मों आंटी के पास गयी, और उनके कान में कुछ बोलने लगी. कुछ देर बात करने बाद वो मेरे पास आई. फिर वो स्माइल करते हुए मुझसे बोली-

मों: चल यार, अब घर चलते है.

मों के कहते ही मैं घर के लिए चल दिया. चुकी हमारा घर बहुत डोर नही था, इसलिए 10 मिनिट में ही हम अपने घर पहुँच गये. अब मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन पल आने वाला था. जिसका इंतेज़ार मुझे वर्षों से था, और शायद मेरी मों को भी.

अब मैने रूम के अंदर घुसते ही सारी लाइट्स ओं कर दी. साथ ही फन भी चला दिया. इससे फूलों की वर्षा होने लगी. ये देख के मों एक-दूं चौंक गयी. लेकिन फूलों की वर्षा ने उनके चेहरे पे एक अलग ही मुस्कान को सज़ा दिया. अब मों के पुर बदन पे फूल ही फूल थे.

फिर मैं धीरे से आयेज बढ़ा, और मों को पीछे से हग कर लिया. और उनके कान में धीरे से बोला-

मैं: मों, ई लोवे योउ.

मों: ई लोवे योउ टू मेरी जान.

फिर मैने अपनी जेब से डाइमंड रिंग निकली, और मों के आयेज घुटनो के बाल झुक के बोला-

मैं: क्या तुम मुझसे शादी करोगी नेहा?

मों(रिंग के लिए अपने हाथ को आयेज बढ़ते हुए): शादी तो नही करूँगी, पर अब ज़िंदगी भर तुमसे ही छुड़वाने का वादा करती हू.

ये सुनते ही मैने मों को रिंग पहना दी. फिर उठ करके मैने उनके होंठो पे अपने होंठ रख दिए. मों भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. वो अब बिना किसी संकोच के मेरे होंठो को चूस रही थी. और मैं उनके बूब्स को ब्लाउस के उपर से ही मसलते हुए उनके होंठो को चूस रहा था.

एक लंबे स्मूच के बाद हम दोनो ही अपना आपा खो बैठे, और एक-दूसरे एक अंगो को चाटने और काटने लगे. अब मों मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में लेके मसल रही थी. वही मैं मों के बूब्स, गांद और छूट को कपड़े के उपर से ही चूस और काट रहा था.

कुछ देर और ऐसा ही चला, और तभी मों मुझसे तोड़ा अलग हुई और बेडरूम की तरफ चलने का इशारा किया. मैं समझ गया की अब मों अपनी छूट में लंड लेने के लिए बिल्कुल तैयार थी. तो मैने हॉल में ही मों की सारी खोल दी. मैने उनके ब्लाउस का हुक भी तोड़ दिया.

पर जैसे ही मैने ब्लाउस खोले, मों अपने दोनो हाथो से अपने दोनो बूब्स को धक ली. वो भाग के बेडरूम में पहुँच गयी. बेडरूम की सजावट देख के मों की आँखें खुली की खुली रह गयी. अब मैं भी पीछे से बेडरूम पहुँचा. मों मुझे देखते ही बोली-

मों: लगता है मेरी चुदाई की पूरी प्लॅनिंग करके तू गया था.

मैं: हा मों, मैने आज सुहग्रात की पूरी तैयारी करके रखी थी. ताकि आपको छुड़वाने पे पूरा मज़ा मिल सके.

मों: तो अब किसका इंतेज़ार कर रहा? आजा मेरी जान, मेरी बाहों में आजा.

इतना सुनते ही मैने फिरसे मों को अपनी बाहों में भर लिया, और उनके होंठो को चूसने लगा. मों भी मेरे होंठो को चूस्टे हुए मेरा लंड भी सहलाने लगी. इसलिए मैने भी बिना देर किए मों के पेटिकोट का नाडा खोल दिया. और अब उन्हे नीचे से भी नंगा कर दिया.

अब मों ने मुझे अपनी तरफ ज़ोर से खींच लिया, और मेरे लंड पे अपनी छूट को रगड़ने लगी. ये एक इशारा था की अब मों छूट में लंड लेना चाहती थी. इसलिए मैं अब बिना देर किए मों को बिस्तर पे पटक दिया, और उनकी छूट में अपना लंड पेल दिया. अभी आधे से कम लंड उनकी छूट में घुसा था, की तभी मों ज़ोर से चीख पड़ी.

मैं: क्या हुआ मों?

मों: बहुत दर्द हो रहा है.

मैं: अछा रूको, अभी आपका दर्द कम करता हू.

मों: हा बेटा, आराम से छोड़ना. बहुत दीनो के बाद इतना बड़ा लंड ले रही हू. तेरे दाद का लंड तो बहुत ही छ्होटा है. उससे मुझे दर्द नही होता.

मैं ये सुनते ही जान गया की मों दाद के अलावा भी दूसरे लोगों से चुड चुकी थी. पर मैने इग्नोर करते हुए मों की छूट पे अपने होंठ रख दिए, और मों की छूट चाटने लगा.

छूट पे जीभ लगते ही मों के मूह से आहह ऊहह की आवाज़े निकालने लगे. अब मों अपने दोनो हाथो से मेरे सर को अपनी छूट पे दबाने लगी. अब मैं भी मों की रसीली छूट के रस्स को चाटने लगा, और उनके नमकीन पानी का रस्स-पॅयन करने लगा. जिससे की मों फुल्ली एग्ज़ाइटेड हो गयी.

मों: आहह रॉकी, कितना अछा करता है रे तू. चूस बेटा, अपनी मों की छूट को आचे से चूस.

मैं: हा मों, बस देखती जाओ.

और मैने फिरसे मों की छूट पे होंठ रख दिया.

मों: उउंम उ माआ आहह.

अब मैं छूट के दाने पे बीच-बीच में दाँत भी गाड़ा रहा था.

मों: स्शह ओह मी गोद, बहुत अछा कर रहा है बेटा, ह्म.

इसी बीच मों झड़ने लगी, और उसकी छूट से नमकीन पानी निकालने लगा. जिसे मैं पी गया और चाट-चाट के मों की छूट को सॉफ भी कर दिया. अब वो समय आ गया था की मों की छूट में लंड डाल दिया जाए, और उनकी टाइट छूट को फाड़ दिया जाए.

इसी इरादे के साथ अब मैं बिना कॉंडम के मों की छूट में अपना लंड डाल दिया. लंड मैने इतनी तेज़ी से पेला था, की एक ही झटके में मेरा पूरा लंड मों की छूट में घुस गया. और मों के मूह से “ऊहह मॅर गयी रे” की आवाज़ निकल गयी.

इतना सुनते ही मुझे और जोश आ गया, और मैं मों को और ज़्यादा रफ्ली छोड़ने लगा. अब मों मेरे हर झटके पे आहह उउहह की आवाज़ करने लगी. जिससे की पुर घर में आहह आहह स्शह उउंम ऊहह और घाप-घाप की आवाज़ गूंजने लगी. मों भी चुदाई में मेरा पूरा-पूरा साथ दे रही थी.

वो नीचे से अपनी गंद उछाल-उछाल के मेरे हर एक झटके का जवाब दे रही थी. साथ ही पूरा-पूरा लंड अपनी छूट में ले रही थी.

ऐसा लग रहा था जैसे मों छुड़वाने में एक्सपर्ट हो. मैं भी पुर जोश में शॉट मार रहा था. कुछ देर में उनकी छूट इतनी ज़्यादा गीली हो गयी थी, की अब फॅक-फॅक की आवाज़ आने लगी थी. वही मों अब और ज़ोर से चिल्ला रही थी.

मों अहहा आ श उफ़फ्फ़ की आवाज़े निकाल रही थी. लगभग 25 मिनिट की ताबाद-तोड़ चुदाई के बाद

हम दोनो ही अपने पीक पे पहुँच चुके थे. क्यूंकी मैं पुर जोश में शॉट मार रहा था. वही मों भी पुर जोश में अपनी गांद उछाल रही थी.

तभी मेरे लंड से एक ज़ोर की पिचकारी छूट गयी, और मैने अपना माल मों की छूट में भर दिया. मों इससे पहले 2 बार झाड़ चुकी थी, और ये उनका तीसरा टाइम था जब वो मेरे साथ ही झड़ी. अब हम दोनो का इतना सारा माल निकला था, की छूट लंड के साथ-साथ जांघें भी गीली हो गयी थी.

ऐसे में हम दोनो ही शांत होके बिस्तर पे पड़े थे. और एक-दूसरे को प्यार कर रहे थे. मेरा लंड अब भी मों की छूट में ही था. मों भी अब कभी मेरी पीठ को सहला रही थी, तो कभी मेरे गालों पे किस कर रही थी.

ऐसे ही प्यार करते-करते उस रात हमने एक-दूसरे को भोर के 3 बजे तक छोड़ा. रात 10 बजे से लेकर भोर के 3 बजे तक मैने मों को 6 बार छोड़ा था. लास्ट चुदाई के बाद मों एक-दूं से ठंडी पद गयी थी. वही मैं भी काफ़ी तक गया था.

ऐसे में देखा जाए तो हमने अपनी सुहग्रात का पूरा मज़ा लिया था. आयेज भी हमारी चुदाई चलती रही. जिसकी कहानी मैं आयेज बतौँगा.

तो दोस्तों कहानी कैसी लगी ये ज़रूर बताइएगा. साथ ही इस पार्ट को भी उतना ही प्यार दीजिएगा. जितना की पहले देते आए है. बाइ बाइ साथियो, मिलते है अगली कहानी में.

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