मा और बेटे की वासना भारी बातों की स्टोरी

पहले आप पीछे की कहानी ज़रूर पढ़ना. चलो शुरू करते आयेज की कहानी.

हम दोनो अब रात को फोन पर बाते करते. सुबा कभी मेसेज कभी कॉल. मैं भी रात का इंतेज़ार करता. पापा जल्दी सो जाते थे. मम्मी मेरे से उनके सोने के बाद बात करती थी दूसरे कमरे में जाके. वो उठ भी जाए तो कुछ बहाना बना देती, की वो डिस्टर्ब ना हो जाए, और मेरा फोन आया हुआ था, तो बात करने इस रूम में आ गयी.

रात को उनकी कॉल का इंतेज़ार करता. उनकी कॉल के आने से पहले मैने खाना खा लेता. मेरी ज़िंदगी में भी अब अलग ही एग्ज़ाइट्मेंट थी. मेरे पास भी मेरी गफ़ थी चाहे मेरी खुद की मा क्यूँ ना हो. जैसे ही उनका कॉल आता दिल खुश हो जाता. एक दिन की कॉल के बारे में बताता हू.

मम्मी: कैसा है?

मैं: तेरे बिना कैसे होऊँगा? जब तेरा कॉल आता है तब जान आती है.

मम्मी: हहा, अब तो बड़ी बातें करने लग गया है.

मैं: सॅकी बोल रहा हू. मेरी जान तेरे अंदर है. तेरी कॉल का इंतेज़ार करता हू, की पापा कब सोए, और मैं जल्दी से मेरी जान से बात करू.

मम्मी: अब तो आपको पापा पर गुस्सा आता होगा. एक तरीके से कॉंपिटिटर है.

मैं: गुस्सा तो आता ही है, और कॉंपिटिटर किसने कहा? मैं चाहु तो अपनी जान को उनके नीचे से कभी भी ले जौ.

मम्मी: मैं तो उनके नीचे कभी जाती ही नही. मैं तो तेरे नीचे ही आना चाहती हू. आप बुलाते ही नही.

मैं: अछा और जाना भी नही. मेरी है तू. और तुझे तो नीचे ऐसे लूँगा की तू खुद कहेगी मुझे छ्चोढ़ दो.

मम्मी: कभी भी ना काहु. मेरी जान के नीचे से जाने का मॅन क्यूँ करेगा?

मैं: कोई ना देखते है.

मम्मी: देख लेना. और लो तो अपने नीचे.

मैं: लोंगा, इस बार 26 जन्वरी को आ रहा हू.

मम्मी: क्या, बताया भी नही. सॅकी आ रहे हो. पहली बार मिलेंगे. सॅकी पहली बार ही मिलेंगे जब से मैं आपकी हुई हू. अपने ब्फ से पहली बार मिलूंगी.

मैं: मैं भी आते ही हग करूँगा.

मम्मी: फिर क्या करोगे?

मैं: फिर सारी खोलूँगा, फिर पेटिकोट, फिर ब्लाउस.

मम्मी: अछा, इस आयेज कुछ नही खॉलोगे?

मैं: फिर खोलना क्या उतरूँगा. तेरी पनटी तेरी ब्रा.

मम्मी: मैं तो शर्मा ही जौंगी.

मैं: अछा, क्यूँ शरमाओगी?

मम्मी: मॅन कर रहा होगा. पागल हो क्या. आपके सामने पहली बार नंगी होंगी तो क्या दौड़ूँगी.

मैं: दौड़ने तो नही दूँगा. एक-दूं से हग कर दूँगा मेरी जान को. फिर आपकी गांद को टच करूँगा. फिर किस करूँगा.

मम्मी: अछा जी. खुद नही होगे नंगे? मैं भी आपके लंड को देखना चाहती हू. उसको हाथ में लेना चाहती हू.

मैं: क्यूँ नही, वो तो तू करेगी ना. ये लंड अब तेरा ही है. इसकी मालकिन तू ही है. कैसे भी उसे कर मुझे क्या. मेरा हक़ नही है इस पर. तेरी छूट और गांद का मलिक मैं. उसका कुछ करू.

मम्मी: आप तो मेरे ही मलिक. मैं लंड की मालकिन नही दासी हू. लंड मेरे कंट्रोल में कहा, कब खड़ा हो जाए किसे पता. जब ये खड़ा हुआ, मैं सो भी नही सकती. मलिक जो खड़े होंगे. मलिक को सेवा चाहिए होगी. कभी इसको मूह में लेना पड़ेगा, कभी छूट में.

मैं: क्या सुषमा, तुम इसको मूह में भी ले लोग?

मम्मी: क्यूँ, नही लेने दोगे? मैं तो मूह में लेना चाहती हू. मेरे मलिक को फुल सेवा दूँगी.

मैं: अछा जी.

मम्मी: और क्या. गांद में जाना चाहे, तो वाहा भी जेया सकता है.

मैं: सुषमा अब मास्टरबेट हो चुका है मेरा.

मम्मी: मेरा भी.

मैं: सॅकी बताओ ये सब करोगी?

मम्मी: पता नही. मगर प्यार ज़रूर करूँगी आपको भी, इसको भी.

मुझे पता था ये हम बातों के ही है. मूठ के बाद एक-दूं से गिल्ट आ जाता है. जब मूठ मारते है तो हम सब इमॅजिनेशन कर लेते है. हम दोनो बात करके सो गये. ये अब हर रोज़ का हो चुका था. हर रोज़ मूठ मार के सोने का. वो उंगली डालती थी छूट में. मगर ये बातें धीरे-धीरे प्यार बढ़ा रही थी हमारा.

रात को जो बातें करते अगले दिन सुबा उठ के याद करते बातें. जब भी अगले दिन फ्री होते, रात वाली बात करते. जैसे अगले दिन ऑफीस जाते हुए उनका कॉल आया-

मम्मी: ऑफीस जेया रहे हो?

मैं: हा.

मम्मी: मेरा मलिक भी उठा की नही?

मैं: अभी उठा है. बोल रहा है मेरी दासी कहा है.

मम्मी: दासी खुद इंतेज़ार कर रही है की मलिक की सेवा करू.

मैं: कोई नही मौका मिलेगा सेवा करने का. तेरे मूह में जाने का फुल इंतेज़ार कर रहा है.

मम्मी: मैं खुद कर रही हू.

मैं: सॅकी बतौ कभी-कभी सोचता हू मुझे इतना अछा नही बनना चाहिए था. डॅल्लूसियी में तू मुझे छूट देने से माना नही करती. करती भी तो मैं ले लेता, तो गुस्सा ना होती. उस दिन ही तेरे को छोड़ देना चाहिए था.

मम्मी: अछा पता नही गुस्सा करती की नही. मगर ये तो पक्का था मुझे हग करके सोता तो माना नही करती. हो सकता था ब्रा पनटी तक तो नंगी भी हो जाती.

मैं: सॅकी पागल था मैं. वही सुहग्रात माना लेता तेरे साथ.

मम्मी: सुहग्रात तो पति के साथ मानते है. तू ब्फ है मेरा. ये बोल फुल छोड़ देता.

मैं: छोड़ता तो तुझे. रही सुहग्रात की बात, कोई नही पति से कम हू क्या तेरा? सिंदूर भर देता हू तेरी माँग में.

मम्मी: ऐसे नही बनौँगी पति अपना. उसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी. कुछ वॅल्यू है मेरी.

मैं: कोई नही, जब चूड़ोगी ना, खुद पति मानने लग जाओगी.

इस तरह हम बात करने लग गये थे. हम कुछ कोड वर्ड में भी बात करने लग गये थे. जैसे अब लंड को मलिक कहने लगी वो. मैं उनकी छूट को मेरी क्वीन कहने लगा. हमने उनके नाम रख लिए थे. कभी छेड़ना भी होता मम्मी को जब मैं ऑफीस होता उनसे बात करते हुए. तेरे मलिक को प्यार चाहिए मेरी क्वीन से, ऐसा बोलता.

20 दिन में हम इतनी बातें करने लग जाएँगे. हमने सोचा भी नही था. मैं 26 जन्वरी का इंतेज़ार कर रहा था. की घर जौंगा और क्या-क्या करूँगा. नींद ही नही आती थी थी अब सोचते हुए.

आज ये कहानी यही पर ख़तम करता हू. कहानी बहुत लंभी है. तो कितने पार्ट्स में आए मुझे भी नही पता. अब हमारा प्यार स्टार्ट हो चुका था. जो भी मैं बातें याद आती रहेगी, मैं पार्ट्स में बताता रहूँगा. साची ई लोवे मी मों सुषमा. क्या आज भी हम सेक्स करते है या ऐसी ही बातें करते है, जानने के लिए स्टोरी पढ़ते रहना.

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