लाइब्ररी में मिली लड़की के लंड तक पहुँचने की कहानी

हेलो रीडर्स, मैं एक न्यू रियल लाइफ सेक्स स्टोरी सीरीस लाने जेया रहा हू आप सब के पास. जिसको पढ़ के सारे माले रीडर्स मूठ मारते-मारते तक जाओगे, आंड फीमेल रीडर्स, सेक्स के लिए पागल होके लंड ढूँढने निकल जाएँगी.

ये स्टोरी पूरी तरह से ओरिजिनल है, आंड मेरी लाइफ पे बेस्ड है. इसमे कुछ भी मिर्च-मसाला नही लगाया गया है. सो ये ज़रा लंबी हो सकती है. बुत जैसे-जैसे नेक्स्ट पार्ट में जाएगी, ये और रोमांचक होती जाएगी. कहानी के कॅरेक्टर्स.

दामऊ: यानी मैं, 23 साल का 6 फीट का लड़का. अपनी जॉब छ्चोढ़ के गवर्नमेंट जॉब की प्रेपरेशन करने के लिए न्यूली देल्ही आया हू. लंड मेरा ज़्यादा बड़ा नही, सिर्फ़ 7 इंच का है, बुत काफ़ी मोटा है.

नेहा: स्टोरी की हेरोयिन 25 साल की 4 फीट 11 इंच की लड़की. बाल लंबे, घने आंड स्ट्रेट. बाल उसके गांद तक है. गेहुआ रंग उसकी खूबसूरती और बढ़ा देता है. फिगर 34सी-39-36(ये बाद में पता चला).

अंगद: नेहा का ब्फ. मुंबई में जॉब करता है. काफ़ी पैसे वाला है और काफ़ी ज़्यादा तर्की है. हर महीने 2 बार फ्लाइट से देल्ही आता. 3 दिन रुक के, सारा टाइम छूट गांद मरता है नेहा का. अंगद की वजह से नेहा अकेले रहती है फ्लॅट में. लंड 6 इंच का है.

वेसिम: मेरे बचपन का दोस्त, आगे 24 साल. इसका भी लंड मेरे जैसा ही है. बहुत ज़्यादा तर्की है, और जब किसी लड़की की लेना शुरू करता है तो रुला देता है.

अमित: नेहा का भाई, आगे 19 यियर्ज़, लंड 6.5 इंच, वर्जिन है.

ये मेरे और नेहा के तारक की वजह से, नेहा के रंडी बनने की कहानी है. ये लास्ट एअर की बात है. मैं देल्ही में न्यूली आया था. आंड स्टडीस के लिए मैने एक लाइब्ररी जाय्न कर ली. मेरे पास की चेर में 1 लड़की आके बैठ गयी. क्या ही आग थी.

छ्होटी सी हाइट (4’11”), लंबे घने काले स्ट्रेट बाल गांद तक. 32सी-29-34 का फिगर. भोली सी सूरत. उसको देखते ही मेरा लंड अपनी जगह से हिलने लगा. बुत कोई ऑप्षन भी नही था पास में. सो मैं वापस से बुक्स में घुस गया.

समय बीट-ता गया, आंड स्लोली वी स्टार्टेड टॉकिंग. मैं उसको पढ़ाई में भी हेल्प करने लग गया. आंड फिर वी स्टार्टेड टॉकिंग ओं व्हातसपप आस वेल. मुझे ये भी पता चला, की उसका 1 लोंग डिस्टेन्स बाय्फ्रेंड भी था.

स्लोली हम दोनो एक-दूसरे से नों-वेग बातें भी करने लग गये. एक दिन मैं लाइब्ररी गया, तो नेहा वाहा नही थी. मैने उसको कॉल की, तो कॉल बिज़ी आ रही थी. फिर मैने उसको व्हातसपप किया.

मे: कहा बिज़ी हो? लाइब्ररी क्यूँ नही आई?

15 मिनिट्स के बाद नेहा का रिप्लाइ आया-

नेहा: क्यूँ डिस्टर्ब कर रहे हो, देखते नही बिज़ी हू? (आँख मारने वाली स्माइली के साथ)

मैं समझ गया वो अपने बाय्फ्रेंड के साथ कॉल पे बिज़ी थी.

मे: आज सुबा-सुबा शुरू हो गयी?

नेहा: अब तुम लड़कों की सुबा खड़े होने वाली बीमारी है, क्या ही करू?

मे: ये बीमारी तो मुझे भी है. बुत कोई डॉक्टर नही मिल रही.

नेहा: बुरा लगा सुन के, कोई डॉक्टर ढूँधो.

मे: एक ढूँढा हू, बुत वो किसी और डोर के पेशेंट के साथ ही बिज़ी रहती है. वो मुझ जैसे डेडिकेटेड पेशेंट, जो हर वक़्त उसके पास रहने को रेडी है, की कदर ही नही करती.

फिर मैं वापस से पढ़ने लगा, कुछ देर के बाद नेहा लाइब्ररी आ गयी. आज क्या ही लग रही थी वो वन पीस ब्लॅक ड्रेस में. लग रहा था किसी क्लब में आई हो. बाल खुले हुए थे उसके. मॅन तो हुआ की पकड़ के अभी छोड़ डू.

मैं क्या, लाइब्ररी के सारे लड़के उसको ही घूर रहे थे. फिर वो मेरे पास आ कर बैठ गयी.

मे: मुझे दर्र लग रहा है.

नेहा: क्या हुआ?

मे: मुझे वो सुबा वाली बीमारी वापस से हो रही है.

नेहा (इनोसेंट बनते हुए, चेहरे पे 1 स्माइल के साथ): कों सी बीमारी?

मैने भी सोच लिया, आज थोड़ी हिम्मत दिखा ही देता हू. मैने उसका हाथ पकड़ा, आंड चुपके से अपने लंड के उपर वाले एरिया पे रख दिया.

वो झटके से हाथ हटा ली और बोली-

नेहा: ये क्या बदतमीज़ी है दामऊ? मैं तुम्हे अपना अछा फ्रेंड समझती थी.

मैं दर्र गया की वो बुरा मान गयी. फिर मैं उसको सॉरी बोलने लगा, बुत वो मूह घुमा के बैठ गयी.

मुझे भी शरम आने लगी, क्यूंकी मुझे ये नही करना चाहिए था. फिर मैं चुप-छाप पढ़ाई करने लगा.

बुत मुझे बहुत गिल्टी फील हो रहा था. सो मैं उठ के अपने फ्लॅट आ गया, और सो गया. रात मैं जब सो कर उठा, तो देखा नेहा के काफ़ी सारे व्हातसपप आंड मिस्ड कॉल्स थी. बुत गिल्ट से मैं रिप्लाइ ही नही कर पा रहा था.

फिर मेरे रूमेट ने पूच: भाई बंदी बार-बार कॉल कर रही है, बात तो कर ले.

मैने कहा: बाद में करूँगा.

आंड फिर सो गया. नेक्स्ट दे, मेरा रूमेट मुझे उठा के लाइब्ररी चला गया. बुत मुझे मॅन नही कर रहा था. तो मैं फोन ऑफ करके वैसे ही सोया रहा.

जब मेरी नींद खुली, मैं देखता हू मेरे बेड पे नेहा बैठी हुई थी, बिल्कुल गुस्से में. मैं हड़बड़ा गया, क्यूंकी फ्लॅट पे मैं सिर्फ़ अंडरवेर में सोता था.

मैं पूछा: तुम यहा कैसे? अंदर कैसे आई?

वो मुझे गुस्से से 1 मुक्का मारी चेस्ट पे.

नेहा: फोन क्यूँ ऑफ किए हो? कॉल बॅक क्यूँ नही किए? तुम्हे पता है कितनी परेशन हो गयी थी मैं?

मे: सॉरी, मुझे लगा तुम नाराज़ हो गयी होगी मुझसे, मेरी कल वाली हरकत से.

नेहा: मैं फर्स्ट टाइम में माना करूँगी तो तुम दोबारा ट्राइ नही करोगे?(मुस्कुराते हुए).

मुझे अब याद आया, तट मैं सिर्फ़ अंडरवेर में था. सामने इतनी खूबसूरत लड़की देख के मेरा लंड वापस से तंन गया.

नेहा (मेरे लंड को देखते हुए): तुम फिर से बीमार हो गये.

मे (फ्लर्ट करते हुए): क्या करू, अब इतनी हॉट डॉक्टर पास बैठी हो तो बीमार तो होऊँगा ही.

नेहा: अछा, ट्रीटमेंट करा क्यूँ नही लेते फिर?

मे: करा तो लू, बुत दर्र लगता है, कल जैसे फिर से बुरा ना मान जाओ.

नेहा: नही मानूँगी.

मे: प्रॉमिस?

नेहा: प्रॉमिस बाबा.

तो मैने नेहा का हाथ पकड़ लिया. मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी थी. मैने स्लोली उसके हाथ को अपने अंडरवेर के उपर रख दिया.

दोनो रूम में शांत बैठे थे, और दोनो कुछ नही बोल रहे थे. वो धीरे-धीरे मेरे लंड को अंडरवेर के उपर से सहलाने लगी. काफ़ी देर तक वो सिर्फ़ सहला ही रही थी, आंड धीरे-धीरे दबा भी रही थी. मेरा अंडरवेर प्रेकुं से भीग चुका था.

नेहा: दामऊ कैसा लग रहा है?

मे: बहुत मज़ा आ रहा है, ज़ोर से दब्ाओ ना प्लीज़.

नेहा: बुत ये भीग गया है.

मे: उतार डू?

नेक्स्ट स्टोरी में बतौँगा, कैसे नेहा ने मुझे मेरी लाइफ की बेस्ट ब्लोवजोब दी.

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आपका अपना दामऊ.

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