अगले दिन मैं पतिदेव से उसके घर जाने के लिये पूछने लगी, उन्होंने हाँ कह दिया और सुबह 10 बजे मुझे उसके घर पर छोड़ आये।
उसने हमे अंदर बुलाया, चाय पिलाई, चाय पिलाने के बाद पतिदेव घर जाने के लिये निकले तो मैंने उन्हें शाम तक आने के लिये बोला।
उनके जाते ही मैं उर्वशी से लिपटकर उसे किस करने लगी पर इस बार किस्सी मुझे थोड़ी अजीब लगी पर फिर भी बहुत मजा आ रहा था, वो भी मेरा साथ देने लगी।
किस करने के बाद जब हम अलग हुए तो उसने कहा कि उसे थोड़ा डर लग रहा है और बैचेनी हो रही है।
पर मैंने उसे समझाया और वो मुझे उसके बेडरूम में ले गई और 3-4 नकली लंड निकाले और बताया कि ये उसके पतिदेव लेकर आये।
इतना बोलकर पूरी नंगी हो गई उसके मम्मे उस समय मेरे मम्मों से भी बहुत बड़े और तने हुए थे।
मैं भी पूरी नंगी हो गई, पर मेरे मम्मों पर रात की बेरहम चुदाई के समय दाँतों के निशान देखकर उसे हँसी आ गई।
मैंने कुछ नहीं कहा और मुस्कुरा दी।
मैंने उसके बच्चों के बारे में पूछा तो बताया कि उन्हें भी उसके पति और सास ससुर के साथ ले गए हैं।
बस इतना बोलकर मुझे फिर किस करने लगी और मैं भी जीभ से जीभ मिलाकर मजे लेने लगी ऐसे करते हुए मैंने उसे 69 की पोज़ में चूत चूसने के लिये कहा, और हम दोनों एक दूसरी की चूत चूसने लगी।
दोनों तरफ से बस उम्म्म उम्म्महम सीईईईई आअह्ह ह्हह्हह की आवाज निकल रही थी।
तभी उसने चूत चूसते हुए मेरी गांड को जोर से दबा दिया और मेरी दर्द भरी सिसकारी निकल गई जो कि रात को पतिदेव के द्वारा बेरहम चुदाई से दर्द कर रही थी।
तभी उर्वशी हंसी और बोली- तेरी गांड का जीजाजी बहुत ही ज्यादा ध्यान रखते हैं।
और चूत चूसने लगी तभी मैंने उसे पूछा- क्या तू मेरा योनि रस पी सकती है?
तो उसने हाँ कह दिया, पर यह भी कहा कि तुझे भी मेरा रस पीना होगा।
बस इतना बोलकर हम फिर चूत चूसने लगीं, बीच बीच में हम दोनों एक दूसरे की खुली हुई फांकों भी होंठ से दबा लेते।
लगभग 10 मिनट बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और उर्वशी सारा रस गटक गई और लगभग 2 मिनट बाद उर्वशी की चूत ने भी पानी छोड़ दिया और मैंने भी सारा रस चाट लिया।
क्योंकि मैं लगभग हर बार पतिदेव का वीर्य पीती हूँ तो मुझे इसे पीने में कोई भी समस्या नहीं हुई।
थोड़ी देर बाद हम फिर एक दूसरे को किस करने लगीं। मैंने दोनों हाथ से उसके गाल पकड़कर किस कर रही थी और उर्वशी एक हाथ से मेरे निप्पल को मसल रही थी और एक हाथ से मेरी चूत को मसल रही थी।
मेरी सिसकारी बढ़ती जा रही थी और मजा भी, मैंने उसे किस करना नहीं रोका।
थोड़ी देर बाद जब हम हटे तो उर्वशी ने मुझे बिस्तर पर लेटाकर मेरे मम्मों को पहले तो चूसा और अचानक काटने लगी।
मैंने पूछा तो बोली- जीजाजी ने तो पहले से ही इनके 12 बजा रखे हैं, अब मैं काटूंगी तो कुछ नहीं होगा।
थोड़ी देर बाद मैं भी उसके निप्पल को हल्के काटकर उसके मम्मों को चूसने लगी, मम्मों को चूसने पर कुछ दूध भी निकल रहा था। कुछ देर तक दोनों ही एक दूसरे के मम्मों को चूसती रहीं।
जब हम अलग हुए तो एक डिल्डो को मैंने मेरी कमर पर बाँधा और और कहा- अब इससे तेरा मुँह को चोदूंगी।
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