लेज़्बीयन गर्ल के अपनी प्रोफेसर को प्यार दिखाने की कहानी

ही फ्रेंड्स, मेरा नाम नीलम है, और मैं एक लेज़्बीयन हू. मेरी उमर 23 साल है, और मैं दिखने में काफ़ी हॉट हू. मेरा फिगर 34-30-36 है. रंग मेरा गोरा है, और हाइट मेरी 5’7″, है.

मैं शुरू से ही स्पोर्ट्स में काफ़ी अची रही हू. मैं काफ़ी डॉमैनेटिंग थी शुरू से ही, बिल्कुल लड़कों की तरह. इसीलिए शायद मुझे स्पोर्ट्स टीम का कॅप्टन बनाया गया था.

बहुत से लड़कों ने मुझे काई बार प्रपोज़ किया. लेकिन मुझे कभी हा बोलने का दिल नही करता था. आक्च्युयली मुझे कभी लड़कों की तरफ अट्रॅक्षन होता ही नही था. जब मैं अपनी फ्रेंड्स के साथ होती थी, तो वो लड़कों की बातें करती थी.

वो सब उनकी हाइट और मसल्स देख कर उनके लंड के साइज़ का अंदाज़ा लगती थी. लेकिन मेरा इन सब बातों में इंटेरेस्ट नही जागता था. जो चीज़े मेरी फ्रेंड्स लड़कों में देखती थी, वो मुझे लड़कियों में देखने का शौंक था.

मुझे लड़कियों की गांद, उनकी छूट, उनके बूब्स देखने आचे लगते थे. अब क्यूंकी मैं एक लड़की हू, तो लड़कियों को नंगा देखने का मौका आसानी से मिल जाता था. मुझे उनकी ब्रा और पनटी की ब्रा और पनटी की खुश्बू बड़ा उत्तेजित करती थी.

मेरा दिमाग़ शुरू से ही तेज़ थी, और जल्द ही मैं समझ गयी थी, की मैं एक लेज़्बीयन हू. लेकिन बुरा लगता था, क्यूंकी हमारे समाज में लेज़्बीयन होना शायद एक जुर्म माना जाता है. तो ऐसे ही मैं अपनी फीलिंग्स को दबाती रही.

लेकिन फिर मेरी लाइफ में कणिका आई. अब वो कब और कैसे मेरी लाइफ में आई. मैने कैसे उसके साथ संबंध बनाए. हमारा प्यार कैसे अपनी मंज़िल तक पहुँचा, और एंड में कैसे हमारी शादी हुई, ये सब आपको मेरी इस कहानी में पढ़ने को मिलेगा. तो चलिए शुरू करते है.

बात तब की है, जब मैं कॉलेज में 1स्ट्रीट एअर में पढ़ती थी. हमारे कॉलेज में एक नयी टीचर आई थी. उसका नाम कणिका था. जब वो हमारी क्लास में आई, तो मैं उसको देखती ही रह गयी. क्या बदन था उसका, क्या चाल-ढाल थी, क्या रंग-रूप था. सब कुछ एक-दूं कमाल का था.

उसने जीन्स और शर्ट पहनी हुई थी. उसकी जीन्स ब्लू रंग की थी, और शर्ट वाइट कलर की. उसका साइज़ 36-28-36 था, और उसके बूब्स शर्ट में एक-दूं टाइट थे. होंठ रस्स से भरे हुए थे, और बाल कमर तक लंबे थे. गांद उसकी एक-दूं गोल और मुलायम थी. हाइट उसकी 5’5″ थी. सीधे-सीधे बोलू, तो वो मेरे लिए हुस्न की पारी जैसी थी.

अब उसका हमारी क्लास में रेग्युलर पीरियड होने लगा. मैं तो लेक्चर के दौरान बस उसी को देखती रहती थी. उसको देख कर ही मेरी छूट गीली हो जाती थी. जब कभी भी कोई लड़की उसके लिए बुरा बोलती थी, तो मुझे बहुत बुरा लगता था.

काई बार तो मैने अपनी फ्रेंड्स के साथ इसलिए लड़ाई की, क्यूंकी वो उसके अगेन्स्ट ग़लत बोल रही थी. 3 महीने हो गये थे, और मेरी दीवानगी उसके लिए बढ़ती जेया रही थी.

फिर एक दिन मेरी और उसकी बात शुरू हुई. हुआ कुछ ऐसा की हमारा गेम्स पीरियड था. सारी लड़कियाँ बाहर ग्राउंड में थी(एक बात मैं बताना भूल गयी, की मैं गर्ल्स कॉलेज में थी). हम लोग क्रिकेट खेल रहे थे. तभी कणिका मेडम आई और अपनी साथ वाली मेडम बोली-

कणिका मेडम: वाउ, क्रिकेट! मुझे भी बहुत शौंक था क्रिकेट का बचपन में. काश मैं भी इनके साथ खेल सकती.

मैं उनके थोड़ी ही डोर खड़ी थी, तो मुझे उनकी आवाज़ सुन गयी. ये मेरे लिए एक अछा मौका था उनसे बात बढ़ने का. तो मैने उनको बोला-

मैं: मेडम आप चाहो को अभी भी खेल सकते हो क्रिकेट.

कणिका मेडम: अभी कहा, मैने तो सालों से बात भी नही पकड़ा.

मैं: तो आज पकड़ लो. और वैसे भी आप टीचर्स यही सीखते हो ना की कभी भी कुछ भी कर सकते है.

ये बोल कर मैने प्लेयर से बात लिया, और उनको पकड़ाया. फिर मैं उनको पिच तक लेके आई, और बोलर को बॉल डालने को कहा. उन्होने बात तो घुमाया, लेकिन बॉल मिस कर दी. और वो हस्स कर बोली-

कणिका मेडम: देखा मैने बोला था ना, की नही होगा.

मैं: होगा मेडम, बिल्कुल होगा.

फिर मैं उनके पास गयी, और उनके पीछे जाके खड़ी हो गयी. मैने पीछे से उनके हाथो पर अपने हाथ रखे, और बात पकड़ने का सही तरीका सिखाया. अब मैं उनसे पूरी तरह से चिपकी हुई थी.

मैं पूरी तरह से उनके सेक्सी बदन को फील कर पा रही थी. उनकी गांद मेरी जांघों पर टच हो रही थी. मेरी बाहों में उनकी बाहें थी, और मेरे बूब्स उनकी पीठ से टच हो रहे थे. इतनी मधुर खुश्बू हो रही थी, की मज़ा ही आ गया.

फिर मैने बोलर को बॉल डालने को कहा, और बात घूमने में उनकी मदद की. इस बार बॉल बात से लगी, और बाउंड्री को पार कर गयी. ये देख कर कणिका मेडम बहुत खुश हुई.

वो खुशी से उछाल पड़ी, और उन्होने मुझे अपने गले से लगा लिया. जब उनके बूब्स मेरे बूब्स से टच हुए, तो मेरी छूट से पानी निकालने लगा. हा ये प्यार था. मैं उनसे प्यार करती थी, बहुत ज़्यादा प्यार.

फिर ऐसे ही हमारी नज़दीकिया बढ़ने लगी. अब वो सुबा भी ग्राउंड आने लगी. वो सुबा टाइट लेगैंग्स और त-शर्ट पहन के आती थी. उनकी सेक्सी बॉडी देख कर लड़के को मज़ा लेते ही थे, मेरी भी छूट गीली हो जाती थी.

मैं उनको कोई ना कोई एक्सर्साइज़ करवाने के बहाने से टच करती थी, और मज़ा लेती थी. अब मैं रात भर उनके बारे में सोचने लगी, और उनको सोच-सोच कर फिंगरिंग करने लगी थी. अब मुझसे रहा नही जेया रहा था, और मैं उनको अपनी फीलिंग्स बताना चाहती थी. मुझे उम्मीद थी, की वो मेरी फीलिंग्स को समझेगी.

फिर एक दिन सुबा के वर्काउट के बाद वो चेंजिंग रूम में चेंज कर रही थी. मैं भी उनके पीछे-पीछे चली गयी. जब मैने कॅबिन का दरवाज़ा खोला, तो वो दूसरी तरफ मूह करके बिल्कुल नंगी खड़ी थी.

उनको देख के मेरी छूट में उबाल आ गया. मुझसे रुका नही गया, और मैने पीछे से जाके उनको पकड़ लिया. मैने उनको अपनी तरफ घुमाया, और अपने होंठ उनके होंठो से मिला दिया.

वो समझ नही पाई, और उसने मुझे धक्का मारा. फिर उसने मेरे मूह पर एक थप्पड़ जद्द दिया.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. कहानी का मज़ा आया हो तो लीके और कॉमेंट ज़रूर करे. और इसको शेर भी करे.

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