होटल में कुंवारी लड़की की सील तोड़ी

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम मन्नी है. मैं उत्तर प्रदेश के रायबरेली में रहता हूँ. मैं अभी स्टूडेंट हूँ और मुझे अपनी पढ़ाई और एग्जाम के चलते दूसरी सिटी में भी जाना पड़ता है.

यह कहानी तब की है, जब मैं अपने एक दोस्त के साथ बाहर एग्जाम देने गया हुआ था. जिस सिटी में एग्जाम था, वो थोड़ा दूर था इसीलिए हम दोनों ने ट्रेन से जाने का फ़ैसला किया. जहां पेपर देने जाना था, वहां से ही थोड़ी दूर पर मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड एक हॉस्टल में रहती थी. दोस्त ने उससे भी बुला लिया था जो मुझे वहां जाके पता चला.

एग्जाम के एक दिन पहले हम दोनों दिन में निकले और देर रात को हम स्टेशन पे पहुंचे. वहां पहुंच कर मैंने दोस्त से होटल में एक रूम लेने को कहा.

दोस्त ने मुझे ये कह कर मना कर दिया कि रूम सुबह पांच बजे लिया जाएगा. उससे हमारा एक दिन का किराया बच रहा था. इसलिए मैं भी उसकी बात से सहमत हो गया. हम दोनों ने किसी तरह रात काटी और सुबह पांच बजे जब हम दोनों वेटिंग रूम में थे, तो दोस्त को किसी का कॉल आया और उसके थोड़ी देर बाद ही दो बहुत ही खूबसूरत सी लड़कियां वेटिंग रूम में आईं.

मैं अभी उन दोनों को ही देख रहा था कि तभी दोस्त ने मुझे जोर से हिलाते हुए कहा कि ये उसकी गर्लफ्रेंड है और साथ आई लड़की, उसकी गर्लफ्रेंड की सहेली है. उसकी गर्लफ्रेंड का नाम निम्मी था … और उसकी सहेली का नाम अलका था. वे दोनों इसी शहर के एक कॉलेज में पढ़ती थीं और एक हॉस्टल में रहती थीं.

मैंने दोनों को हैलो बोला और थोड़ी देर बात करने के बाद हम सब होटल में रूम लेने के लिए निकल गए. होटल में जाकर मेरे दोस्त ने दो रूम की बुकिंग की.

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ऊपर कमरे में जाने के थोड़ी देर बाद ही मेरा दोस्त अपनी गर्लफ्रेंड के रूम में चला गया. मैंने इस बात पर इसलिए ज्यादा ध्यान नहीं दिया कि ये अभी आ जाएगा.

मुझे नींद आ रही थी तो मैं अपने रूम में ही सो गया. दस बजे करीब जब मेरी आंखें खुलीं, तो मैंने देखा मेरे बगल में अलका सोई हुई है. पहले तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ, फिर मैंने दोस्त को कॉल किया, तो पता चला वो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ है. खैर मैं नहा धोकर तैयार होने लगा.

मगर मेरी नज़र अलका पर से हट ही नहीं रही थी. रेड टॉप में वो कमाल की माल लग रही थी. उसका भरा हुआ बदन और नाज़ुक से रसीले होंठ मुझे अपनी तरफ बुला रहे थे. मैंने किसी तरह खुद पर कंट्रोल किया और रेडी होके पेपर देने चला गया.

पेपर देने जाते वक़्त मैंने अपना फोन रूम में ही छोड़ दिया था. ये बात मैंने अपने दोस्त को भी बता दी थी.

जब मैं पेपर देकर रूम पर वापस आया तो अलका अभी अभी नहा के बाहर आई थी. वो मिनी शॉट्स और छोटे से टॉप में इस वक्त और भी कमाल लग रही थी. मैं उसे ही घूरे जा रहा था.

उसने मुझे हैलो बोला, तब मेरा ध्यान टूटा. उसके बाद उसने मुझसे बातचीत शुरू की- कहां खो गए थे? कभी लड़की को नहा के आया नहीं देखा क्या?
मैं- नहीं … इतना करीब से आज ही देखा है.
अलका- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?
मैं- नहीं … अब तक तो कोई भी नहीं है.
अलका- एग्जाम कैसा हुआ?
मैं- अच्छा ही हुआ … और ये दोनों कहां हैं?
अलका- सुबह से रूम से बाहर ही नहीं आए है. लगता है हनीमून पूरा कर के ही आएंगे.

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मैं- मुझे तो भूख लगी है, चलो कहीं बाहर खाने चलते हैं?
अलका- हां ज़रूर … बस दो मिनट में रेडी हो जाऊं.
मैं- अब और कितना रेडी होना है यार … ऐसे भी कमाल ही लग रही हो.
अलका- थैंक्यू … लेकिन क्या लाइन मार रहे हो?
मैं- नहीं यार … सच बोल रहा हूँ.
अलका हंसी और अपने बाल सही करने लगी.

फिर हम दोनों बाहर गए. बाहर उसके साथ जाते हुए ऐसा लग रहा था, जैसे हम दोनों कपल हों. मैंने उसके हाथ को अपने हाथ में थाम लिया, उसने भी कोई ऐतराज नहीं किया.

अब हम दोनों हाथ में हाथ डाले बिल्कुल कपल की तरह ही लग रहे थे. उसके हाथों का स्पर्श पाकर मेरे दिल की धड़कनें तेज हो गई थीं. जींस में मेरा लंड बार बार खड़ा हो रहा था. उसने भी ये बहुत बार देख लिया था.
खैर … हम दोनों खाना खा के वापस रूम में आए, तो मैंने दोस्त को कॉल किया. उस टाइम दिन में तीन बजे रहे थे.

वो उठ गया था. उससे बात होने के बाद हम दोनों उनके रूम में गए और बैठ कर बातें करने लगे. तभी मेरी नज़र दोस्त के बेड पे गई, वहां निम्मी की ब्रा पड़ी हुई थी. मैं समझ गया ये दोनों पूरा काम कर चुके हैं.

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