किरायेदार ने लड़के को लड़की बनाया

हेलो दोस्तों, मेरा नाम फ़ारूक़ है. आगे 24 साल है. अभी मैं एक अमेरिकन कंपनी में सॉफ्टवेर डेवेलपर हू. ये स्टोरी आज से 4 साल पहले की है, जब मैं 2न्ड एअर के एग्ज़ॅम के बाद घर पर वाकेशन एंजाय कर रहा था. चलो अब स्टोरी पर आते है.

उस टाइम मेरा शरीर 5’5″ हाइट, लड़कियों जैसा एक-दूं चिकना, पुर शरीर पर एक भी बाल नही था. मेरे चुचे भी लड़कियों जैसे मोटे और उभरे हुए थे. गांद की शेप भी मस्त गोल-गोल थी. मुझे कम उमर से ही कान तक बाल रखने का शौंक था.

अपने अम्मी और अब्बू का सबसे छ्होटा लड़का था, इसलिए सबसे लाड़ला भी था. वो मुझे कभी किसी चीज़ की कमी नही होने देते थे. मेरी हर डिमॅंड पूरी करते थे. हमारा घर इनडोर में है. हमारे रेंट पर एक भैया रहते है, जो बहुत साल से हमारे घर पर ही रह रहे थे. इसलिए उनसे हमारा घर जैसा ही रिश्ता था.

उनका नाम अनिल, आगे 34 साल, 5’9″ हाइट, फेस पर एक मूच, फेर कलर, रेलवे में लोको पाइलट की पोस्ट पर थे. उनका जिस्म तो जैसे कोई मोविए में हीरो हो. एक पर्फेक्ट मर्द वाली बॉडी. यहा वो अकेले ही रहते थे. कभी-कभी उनकी वाइफ वाकेशन के टाइम आ जाती थी, या फिर वो ही गाओं चले जाते थे. वो बहुत बार मुझे भी साथ चलने को बोलते थे. बुत स्टडी की वजह से अम्मी माना कर देती है.

एक बार मेरी अम्मी और अब्बू की आनिवर्सयरी का फंक्षन था. तब हमारे सभी रिश्तेदार आए थे. हमने भैया को भी इन्वाइट किया था. जब भैया आए तो मैं उनको देखता ही रह गया. वो आज कुर्ते-पाजामे में बहुत स्मार्ट लग रहे थे. उनके क्लीन फेस पर मूच और भी ज़्यादा अची लग रही थी.

भैया: फ़ारूक़ क्या हुआ तुझे?

मैं एक-दूं से होश में आया.

मैं: कुछ नही भैया, आपकी मूच सच में ग़ज़ब लगती है. पता नही मेरी मूच कब आएगी.

इस बात पर अम्मी, अब्बू, और भैया हस्स दिए.

भैया (गले मिलते हुए): आ जाएगी, क्यूँ इतना सोचता है?

उनके बदन की खुसबु भी बहुत अची लग रही थी. सारा फंक्षन ख़तम हो गया था. हमने बहुत सारी बातें करी, और फिर सभी गेस्ट्स अपने-अपने घर चले गये थे. भैया सारा काम ख़तम करवा कर अम्मी और अब्बू से कुछ बात करने लगे. थोड़ी देर बाद तीनो मेरे पास आए.

अब्बू: तेरे एग्ज़ॅम कब है?

मैं: ख़तम तो हो गये. क्यूँ याद दिलवा रहे है दोबारा?

अम्मी: तेरे अब्बू भी ना, डाइरेक्ट कुछ नही पूछते. फ़ारूक़, अनिल भैया तुझे गाओं ले जाने के लिए बोल रहे है. उनके दोस्त की शादी है. अगर तेरी स्टडी खराब ना हो तो चले जेया.

मैं: जी बिल्कुल, कब जाना है?

भैया: कल रात की ट्रेन है.

( भैया का दोस्त उनके साथ जेया रहा था. लेकिन उनको अचानक कोई काम आ गया, इसलिए उनकी टिकेट पर भैया मुझे ले जेया रहे थे)

नेक्स्ट दे हम दोनो रात की ट्रेन से भैया के गाओं जो पटना के पास है के लिए निकल गये. नेक्स्ट मॉर्निंग ट्रेन ने हमे पटना जंक्षन पर उतार दिया. हमे लेने के लिए भैया का एक दोस्त स्टेशन पर ही आ गया था. ये फर्स्ट टाइम था जब मैं मेरे अम्मी और अब्बू के बिना कही जेया रहा था. हम भैया के दोस्त की फोरटुनेर में बैठ गये

भैया: फ़ारूक़ ये मेरा लंगोतिया यार है कुलदीप. हम जिनकी शादी में जेया रहे है वो इनके टॉ जी का लड़का है, और इनके टॉ जी यहा के सरपंच है.

मैं उनको नमस्ते बोल कर ये सोचने लगा की यार फर्स्ट टाइम कही आया तो भी कहा सरपंच के बेटे की शादी में. ये सब सोचते-सोचते हम अनिल भैया के घर आ गये. यहा मैने सब को नमस्ते की, और फिर मैं भैया के रूम में सो गया. बहुत ज़्यादा तक गया था मैं.

दपहर के 2 बजे अनिल भैया ने मुझे नींद से उठाया.

भैया: फ़ारूक़ क्या हुआ, कितना सोएगा? शादी वाले घर भी जाना है हमे, और कुछ खा तो ले.

मैने देखा भैया तो बिल्कुल रेडी थे, और मैं अभी भी नाहया ही नही था. फिर जल्दी-जल्दी में रेडी हो कर 3 बजे तक सरपंच जी के वाहा चले गये.

शादी वेल घर पर:-

सरपंच जी का घर बहुत बड़ा था. मैने कभी इतना बड़ा घर और इतनी कार्स और नौकर एक साथ कही नही देखे थे.

भैया: फ़ारूक़ मेरे साथ ही रहना, वरना गुम जाओगे. और किसी को कुछ फालतू मत बोलना, जो जितना पूछे बस उसका ही जवाब देना, ओके?

मैं: ठीक है भैया.

भैया को बहुत लोग जानते थे. वाहा सभी भैया से एक-दूं परिवार जैसा बर्ताव कर रहे थे. सारे फंक्षन्स होते-होते रात के 7 बजे गये, की तभी कुलदीप भागते हुए आया.

कुलदीप: अनिल यार जल्दी कार निकाल, पुरानी हवेली चलना है. कुछ पंगा हो गया.

भैया: क्या हुआ? वाहा तो टॉ जी (सरपंच) का

प्रोग्राम चल रहा होगा ना?

कुलदीप: चल ना यार बताता हू, चल तो सही.

भैया: फ़ारूक़ क्या करेगा वाहा?

कुलदीप: अब बच्चा थोड़ी ना है ये. ले चल इसे भी.

हवेली पर:-

नीचे सब डॅन्स और ड्रिंक कर रहे थे. फुल ओं पार्टी मूड था वाहा. हम तीनो वाहा पहुँच कर पीछे के गाते से उपर एक रूम में चले गये.

गाते ओपन करते ही वाहा बहुत सारी लड़कियों ने बेल्ली डॅन्सर वाली ड्रेस पहनी हुई थी, जो दोनो पैरों (लेग्स) की साइड से उनकी गांद तक कट थी, जिससे उनकी नंगे लेग्स आराम से दिख रही थी. ब्रा ऐसी जिसमे ओन्ली उनके निपल्स ही च्छूपे हुए थे, बाकी सब दिख रहा था.

भैया: यार अब तो बता क्या हुआ है?

कुलदीप: यार ये 7 लड़कियाँ थी. बुत जिसको टॉ जी के लिए बुलाया था वो भाग गयी साली.

दोनो एक-दूं शांत हो गये. टेन्षन सी थी दोनो को, और पसीना आ रहा था. तभी एक कॉल आया. कुलदीप कॉल डेक्ते ही टेन्षन में आ गया. उसने कॉल पिक करी और “ओके ओके ओके” बोल कर कॉल कट कर दिया

कुलदीप: टॉ जी के चंचे का कॉल था. लड़कियों को नीचे बुला रहे है.

अनिल भैया: टेन्षन मत ले, पहले तू इन्हे नीचे भेज. तब तक कुछ करते है.

लड़कियों के नीचे जाने के बाद कुलदीप मुझे बहुत देर से घूर-घूर के देख रहा था. तभी अनिल भैया बहुत तेज़ आवाज़ में बोले-

भैया: बहनचोड़ ग़लती से भी ये मत सोचियो. साला टॉ जी को पता चल गया ना तो हम सब का क्या होगा ये तू सोच भी नही सकते.

कुलदीप: रुक तो यार, कुछ नही होगा. मैने कुछ अछा ही सोचा है. फ़ारूक़ को कुछ नही होगा, बस मेरे उपर छ्चोढ़ दे सब.

मुझे दोनो की बातें बिल्कुल समझ नही आ रही थी. कुलदीप मेरे पास आया और बोला-

कुलदीप: फ़ारूक़ यार तू कितना सुंदर है. तेरे बाल भी कितने लंबे है. एक-दूं लड़कियों के जैसा जिस्म है तेरा. सिर्फ़ हमारे लिए आज डॅन्स कर लेगा? तू टेन्षन मत कर, टॉ जी अगर तेरे साथ कुछ ग़लत करे तब हम एक ड्रिंक देंगे, वो तू उनको पीला देना. फिर वो सो जाएगे, और तुझे कुछ नही होगा. वरना यार हम नही बचेंगे. प्लीज़ कर दे यार.

वो दोनो बहुत डरते हुए मुझे ही देख रहे थे. उनको ऐसे देखते हुए मैने हा कर दी.

तभी कुलदीप जल्दी से मेरे लिए मेकप और ड्रेस ले आया. पहले मेरा मेकप करके मुझे नकली बाल लगा दिए. फिर अनिल भैया ने मेरे कपड़े उतार दिए, और मुझे ओन्ली अंडरवेर में कर दिया, जो पहले ही मेरी गांद में फ़ससी हुई थी. मुझे बहुत शरम आ रही थी. कुलदीप मेरे सामने खड़ा था. वो मेरे मोटे चुचो को ज़ोर से उछाल कर बोलने लगा.

कुलदीप: अनिल यार इसको तो बॉल या ऑरेंज लगाने की भी ज़रूरत नही है. सेयेल के तो लड़कियों से भी मस्त है चुचे.

अनिल भैया मेरे पीछे मेरी गांद पर हाथ फेरते हुए बोले-

अनिल: उपर ही क्या देख रहा है. नीचे गांद तो देख.

दोनो बहुत तेज़-तेज़ हासणे लगे.

कुलदीप: फ़ारूक़ यार ये पनटी पहन ले जल्दी, और फिर ये ड्रेस. वरना तेरी अंडरवेर में तो हम पकड़े जाएँगे.

मैने अंडरवेर साइड में जार कर उतार दी. पनटी में ओन्ली मेरा छ्होटा सा लंड च्छूपा हुआ था, बाकी सब ओपन था. मैने जल्दी से ड्रेस पहन ली. वरना वो दोनो मेरी गांद देख कर फिरसे हासणे लगते. तभी किसी ने गुस्से में गाते खोला-

“हरंखोरो, यहा लड़की के साथ लगे हुए हो, और वाहा मालिक परेशन है. और तू रांड़, तेरा आदमी नीचे है, और तू यहा मज़े ले रही है. चल नीचे”.

ये टॉ जी का ख़ास आदमी (वीरेंदर) था, जिसे सब चमचा बोलते थे. मुझे उसका ऐसे मेरे से बात करना अछा नही लगा. मैं गुस्से में नीचे चला गया. नीचे एक लड़की ने मुझे फेस पर बेल्ली डॅन्सर वाला मास्क लगा दिया, और मेरे हाथ में ड्रिंक दे कर टॉ जी के पास ले गयी.

टॉ जी ने कैसे-कैसे मेरे जिस्म का इस्तेमाल किया, ये सब नेक्स्ट पार्ट में

यह कहानी भी पड़े  शिवानी की ज़िंदगी का सफ़र


error: Content is protected !!