पापा ने दोस्तों ने किया गंगबांग

हेलो दोस्तों, मेरा नाम सौरव है, आगे 21, हाइट 5.5 फीट, रंग सावला, बुत स्मूद हेरलेस और क्लीन बॉडी. गांद भी बहुत सॉफ्ट है, एक-दूं मक्खन.

हमारा घर आगरा में है, और घर पर पापा (परडीप), मम्मी, बड़ा भाई और मैं रहते हू. ये स्टोरी लास्ट एअर जून की है. मेरे पापा ड्रिंक करते है, बुत मम्मी जब घर नही होती तब दोस्तों के साथ जेया कर. वरना मम्मी गुस्सा करती है. ये बात मुझे पता है.

एक दिन मम्मी और भाई को लुक्कणोव 2 दिन के लिए बुआ के घर किसी काम से जाना था. अब घर पर पापा और मैं ही रहने वाले थे, इसलिए मम्मी ने मुझे जाने से पहले बोला-

मम्मी: अगर तेरे पापा ड्रिंक करके घर आए तो मुझे कॉल कर डियो.

मम्मी इसलिए मुझे बोल रही थी, क्यूंकी एक-दो बार मैने मम्मी को झूठ बोल कर पापा को बचा लिया था. उनकी मॉर्निंग की ट्रेन थी. पापा, मम्मी और भाई को स्टेशन छ्चोढ़ कर सीधा ऑफीस चले गये, और मैं भी कॉलेज चला गया. शाम को जब मैं घर आया, तो पापा पहले से घर आ चुके थे.

पापा: फ्रेश हो जेया, जब तक मैं कुछ ऑर्डर कर लेता हू खाना.

मैने और पापा ने खाना खाया, लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था जैसे पापा कुछ बोलना चाहते थे, लेकिन बोल नही पा रहे थे.

मैं: क्या हुआ पापा, शांत क्यूँ हो? कुछ बोलना चाहते हो क्या?

पापा: सौरव तुझे तो पता है कभी-कभी दोस्तों के साथ मिल कर बैठने का मौका मिलता है. वो भी तेरी मम्मी गुस्सा करती है.

मैं: आपको ड्रिंक करना है तो कोई नही. आप चले जाओ. मैं नही बोलूँगा, टेन्षन मत लो.

पापा: अर्रे नही बेटा, जाना नही है. वो मैने अपने 4 दोस्तों को घर बुला लिया है, क्यूंकी अबकी बार किसी का भी रूम खाली नही है.

मैं: अछा ये बात है. कोई नही आप बुला लो सब को, मुझे तो वैसे भी नींद आ रही है.

9 बजे मैं मेरे रूम में आ गया, और मोविए देख रहा था. तभी घर का डोर खुला.

मैं: पापा कोई आया है शायद.

पापा की आवाज़ आई: बेटा सो जेया, मेरे दोस्त है.

मोविए देखते-देखते 11:30 बाज गये. मैं मोविए देख कर सो गया. रात के 1:30 बजे बहुत तेज़ गुस्सा करने की आवाज़ आने लगी. मैं अचानक से रूम के बाहर गया तो देखा पापा अपने किसी दोस्त को कार मैं बिता कर ले जेया रहे थे.

मैं: पापा क्या हुआ, कहाँ जेया रहे हो?

पापा: बस अभी आ रहा हू, तू गाते लॉक कर लियो.

पीछे से एक अंकल ने मेरे सर पर हाथ रखा और बोले: कुछ नही सौरव बेटा, बस सेयेल के घर से कॉल आ रहा है, इसलिए पापा साथ में गये है.

ये विनोद अंकल (आगे 36+, हाइट 5.8 फीट, तोड़े मोटे, और रंग गोरा) थे, हमारे घर बहुत बार आते है.

विनोद: यारों ये परडीप का लड़का है. और सौरव, ये दोनो अक्षय और दीपक है.

आगे और हाइट लगभग सब की सेम थी. बस विनोद अंकल ही थोड़े मोटे थे, बाकी दोनो तो एक-दूं पहलवानो जैसे जिस्म के मालिक थे. मैं सभी अंकल को नमस्ते बोल कर रसोई में पानी पीने चला गया, और दीपक अंकल गाते लॉक करने चले गये.

तभी रसोई में अक्षय अंकल भी पानी पीने आ गये. अक्षय अंकल और मैं नॉर्मल बात करने लग गये. बात करते करते 5 मिनिट ही हुए थे, की तभी घर के फोन पर कॉल आया. विनोद अंकल हॉल में ही थे, इसलिए उन्होने कॉल पिक करी. अंकल कॉल रखने के बाद बोले-

विनोद: सौरव बेटा पापा 2 घंटे लाते हो जाएँगे. वहाँ कुछ बात हो गयी, इसलिए रुकना पद रहा है.

अक्षय: कोई नही, तब तक हम यहीं है बेटा आपके पास.

ये बोलते ही अक्षय अंकल ने मुझे पीछे से पकड़ लिया. विनोद और दीपक अंकल कुछ आपस में धीरे-धीरे बोल रहे थे. फिर अचंक से-

दीपक: बेटा लगता है आपको नंगा सोना अछा लगता है.

मैने तभी ध्यान दिया की मैने भाई की त-शर्ट और नीचे ओन्ली अंडरवेर पहनी थी, जो लंभी त-शर्ट से दिख नही रही थी.

मैं (शरमाते हुए): वो मैं रूम से अचानक ही आ गया था, इसलिए ध्यान नही रहा, की मैने अंडरवेर पहना हुआ है. नंगा नही हू.

तभी पीछे से अक्षय अंकल ने मेरी त-शर्ट उपर कर दी. फिर मेरी गांद पर हाथ रखने लगे.

अक्षय: हा यार नंगा नही है. क्यूँ पंगे ले रहे हो बेटे से?

ये सुन कर हम सब हासणे लगे.

मैं: आप सब का ग़मे हो गया क्या? कों जीटा?

दीपक: नही बेटा, तेरा बाप तो चले ही गया. तू खेलेगा क्या?

विनोद: बच्चा है, इसे कहा पैसों के लालच में लगा रहा हो?

अक्षय: एक आइडिया है, ट्रूथ और डरे खेलते है.

मेरा मॅन उनके साथ खेलने का बिल्कुल भी नही था, बुत करता भी क्या, वो फोर्स ही इतना कर रहे थे. हमने घर के हॉल में सोफे पर बैठ कर कार्ड खेलना शुरू किया. बीच-बीच में वो सब तोड़ा ड्रिंक भी कर रहे थे. पहले रौंद में दीपक अंकल हार गये.

विनोद: सौरव बेटा आप पूछो, और कोई भी शरमाएगा नही. दोस्त समझ कर सच बोलना है.

मैं: क्या आपकी कोई गफ़ है या थी?

सब एक-दूं चुप हो गये. शायद उनको लगा नही था की मैं कोई पर्सनल सवाल पूच लूँगा.

दीपक ने अपने कॉलेज की स्टोरी बताई, लेकिन वो ये भूल गया था की यहाँ मैं भी बैठा था, और वो अपनी गफ़ की चुदाई भी बताने लगे.

मैं: बस-बस आप तो कुछ ज़्यादा ही खुल गये.

दीपक: कोई नही बेटा, तुम भी बड़े हो गये हो, उसमे क्या?

अगला रौंद अक्षय हार गया.

विनोद: अछा बता तू अब भी तेरे कॉलेज वाले दोस्त की गांद लेता है क्या?

अक्षय ने माना किया. मैं तो बहुत हैरान था ये सब मेरे सामने नशे में क्या बोले जेया रहे थे.

मैं: बात करते-करते तो ग़मे कभी कटम ही नही होगी. क्यूँ ना कोई टास्क कर लेते है?

दीपक: अछा तो फिर अक्षय सौरव को उठा कर नाच.

मैं: ये क्या बात हुई?

मेरी बात पूरी भी नही हुई, और अक्षय अंकल मुझे गोद में उठा कर नाचने लगे. हम सब हासणे लगे. अक्षय के उठाने से मेरी त-शर्ट उपर हो गयी. अब मेरी चड्डी उपर हो कर मेरी गांद विनोद और दीपक को दिख रही थी.

विनोद: बेटा पानी लाना, और ये बॉटल रसोई में रख दो.

मैं पानी लाया, तब तीनो आपस में कुछ बात कर रहे थे. नेक्स्ट रौंद हुआ, अबकी बार मैं हार गया.

दीपक: अब आई ना बेटे जी आपकी बारी.

विनोद: तुझे नाचना होगा, जब तक हम नही रोकते.

दीपक: और अगर तू पहले रुक गया तो…

अक्षय: तो इसे हम तीनो की पंत अपने हाथ से खोलनी होगी.

तीनो एक-दूसरे को देख कर हासणे लगे. मुझे भी ये एक ग़मे लगा, इसलिए मैने ओके बोल दिया.

गाना शुरू हुआ, मैं डॅन्स करने लगा. तीनो मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे कोई मुज़रा चल रहा हो. डॅन्स करते-करते मैं तक गया, लेकिन वो रोकने का नाम ही नही ले रहे थे. जैसे आज वो पंत खुलवाने के लिए ही बैठे हो. फिर मैं एक-दूं से रुक गया. मुझे बहुत ज़्यादा थकान हो गयी थी. थोड़ी सास लेने के बाद-

विनोद: अब याद है ना क्या करना है बेटा जी?

मैं चुप-छाप विनोद के पास गया, और सोफे पर बैठे-बैठे तीनो की पंत निकाल दी.

पंत खोलते हुए तीनो अपना लोड्‍ा मेरे मूह के आयेज ही चड्डी में सेट करने लगे. उनकी ये अदा मुझे पागल सा कर रही थी. विनोद ने ब्लॅक, अक्षय ने ब्लू, और दीपक ने ग्रे अंडरवेर पहना था.

अक्षय: अब हुई कुछ .. अब हम सब चड्डी में है.

नेक्स्ट रौंद हुआ और अबकी बार वो तीनो ही हार गये, क्यूंकी मेरे पास 4 इकके आ गये थे. मैं उनकी सज़ा सोच ही रहा था, तभी दीपक बोला-

दीपक: हमने अपनी पंत निकलवाई थी, कहीं ये हमारी शर्ट ना खुलवा दे.

मैं: जी हा, यही करना है, करो अब.

शर्ट कोलने के बाद सब सिर्फ़ अंडरवेर में थे. सिर्फ़ अक्षय था जिसने बनियान पहनी थी.
विनोद का बदन मोटा और क्लीन था. अक्षय की चेस्ट पर बाल थे. दीपक के भी बाल थे, बुत अक्षय से कम.

नेक्स्ट 2 रौंद हुए और दोनो में मैं हार गया, जिसका सब ने खूब बदला लिया. पहले सब ने मेरी शर्ट और अक्षय का बनियान मेरे से खुलवाया. फिर दूसरे में तो हड्द ही कर दी.

विनोद: बेटा जी हमसे पंगे लोगे, अब हम तीनो एक-एक करके तुम्हारे गाल से पेट तक किस करेंगे.

मैं: ये ग़लत है.

अक्षय: यार तू भी, हम तेरे अंकल है, और ये सब तो ग़मे है.

उनके नंगे बदन देख कर वैसे भी मेरे अंदर तारक जेया रही थी. मैं मान गया. फिर तीनो मेरे पास आए. पहले विनोद ने मुझे गाल पर किस किया, और धीरे-धीरे गर्दन और फिर छ्चाटी पर.

मेरे बदन में तो जैसे कोई करेंट सा ही दौड़ रहा था. अक्षय आया, गाल से होते हुए सीधा ही मेरे चुचो पर पहुँच गया. फिर ज़ोर से चुचो को मूह में लेकर चूसने लगा.

मैं: एयेए ह्म.

मैने अक्षय के सर को कस्स के पकड़ लिया. ऐसा मदहोश करने वाला पल मैने कभी नही महसूस किया था. फिर अक्षय डोर हुआ.

दीपक (अक्षय से): सेयेल तू बढ़िया है.

अक्षय: यार पेट के रास्ते में वो भी तो आता है.

तीनो हासणे लगे. अब दीपक मेरी तरफ आया और सीधा मेरे लिप्स को मूह में लेकर चूमने लगा. मैने डोर करने की कोशिश करी, लेकिन वो नही हुआ, और वो दोनो हासणे लगे. 2 मिनिट किस करने के बाद-

अक्षय: मज़ा आ रहा है ना खेल में.

मैं: ह्म ( धीरे से).

अक्षय (मेरे गले लगते हुए): लगता है बेटे को बहुत अछा लगा. क्यूँ ना अब फाइनल रौंद करते है, इसमे जो भी हारेगा वो एक साथ 2 काम करेगा, बोलो मंज़ूर है?

सब फिर से सोफे पर बैठ गये, और कार्ड खेलना शुरू हुए. मेरे चुचे बहुत लाल हो गये थे, जिन्हे मैं बीच-बीच में हिला-हिला कर सहला रहा था. मुझे देख-देख कर तीनो के लोड चड्डी में खड़े हो गये थे, जिन्हे तीनो मुझे देखते हुए सहलाने लगे. वैसे लोड्‍ा तो मेरा भी खड़ा हो गया था. और ये क्या, मैं फिर से हार गया.

दीपक: सौरव ये लास्ट टास्क है. इसलिए पहले हम तीनो को सोचने दे क्या करवाना है.

1 मिनिट बाद विनोद बोला: तुझे मेरी गोद में बैठ कर दीपक की जाँघ को 2 मिनिट तक चूमना है. उससे पहले खड़ा नही होगा, चाहे कुछ हो जाए.

मैं आपने खड़े लोड को च्छूपाते हुए, मटकता हुआ सीधा विनोद के लोड पर जेया कर बैठ गया. दीपक हमारे सामने चेर लगा कर उस पर लोड्‍ा सेट करते हुए बैठ गया. विनोद ने मेरी गांद पर अपनी चड्डी में खड़े लोड को चुभाते हुए मुझे दीपक की तरफ झुकाया, और दीपक ने मेरे सर पर ज़ोर से हाथ रक्ते हुए अपने लोड के पास जाँघ पर मेरे मूह घुसा दिया.

दीपक की जाँघ थोड़ी बालों वाली थी, लेकिन खुश्बू ऐसी थी जो मेरे अंदर की रांड़ को जगा रही थी. मैं पुर मज़े लेते हुए दोनो जांघों को चाट-ते हुए चूम रहा था. पीछे से विनोद मेरी कमर पकड़ कर लोड्‍ा मेरे च्छेद में घुसा रहा था.

तभी अक्षय ने मेरी आँख पर हाथ रखा. पीछे से विनोद ने मुझे उछा किया, और विनोद और दीपक ने अपनी-अपनी चड्डी खोल दी. ये सब इतना तेज़ हुआ की मैं कुछ समझ ही नही पाया. विनोद का लोड्‍ा और मेरे च्छेद के बीच बस मेरी चड्डी थी. मेरे गाल पर मुझे कुछ मोटा और मुलायम सा फील हुआ. मेरी आंकों खुली तो देखा दीपक अपना लोड्‍ा मेरे होतो के पास बार-बार लगा रहा था.

अक्षय: कुछ भी हो जाए 2 मिनिट से पहले हिलना नही है.

वैसे भी अब तो मैं खुद भी हिलना नही चाहता था. मैं जान-बूझ कर अब अपनी जीभ दीपक के सूपदे पर, और गांद विनोद के लोड पर मसल रहा था.

दीपक ने अपने हाथ से मेरा मूह खोला, और लोड्‍ा सीधे अंदर कर दिया, जिसे मैं अपने दोनो हाथो से पकड़ कर हिलाते हुए चूसने लगा.

अक्षय: अर्रे बहनचोड़, अकेले-अकेले मूह छोड़ रहा है सला.

अक्षय ने मुझे खींच कर अपने पास किया और अपना लोड्‍ा निकाल कर चुसवाने लगा. विनोद का 5 इंच, दीपक और अक्षय का 6 इंच लंबा, और मोटा तो सब का एक जैसा ही था.

अक्षय का लोड्‍ा चूस्टे हुए दीपक अपना लोड्‍ा मेरे हाथ से हिलवा रहा था. विनोद ने मेरी चड्डी फाड़ कर मेरी गांद को पकड़ कर फैलते हुए च्छेद पर बहुत सारा थूक फेंका, और चाटने लगा. गांद चटवाना सच में कामुक करने वाला सुख है.

विनोद: क्या मस्त सील पीक गांद है. भाइयों बहुत मज़ा आने वाला है आज.

बारी-बारी मैने तीनो का लोड्‍ा चूसा, और सब ने मेरी गांद चाट-चाट कर फैला दी.

दीपक: इससे रूम में ले चल, वहीं गांद मारेंगे.

रूम में ला कर विनोद मेरी गांद पर आयिल लगने लगा. फिर कॉंडम लगा कर मेरी गांद पर सेट किया.

मैं: आराम से करना, पहली बार है मेरा.

विनोद: बचपन से मेरी गोद में खेला है. आज गांद मरवाने से दर्र रहा है.

तीनो हासणे लगे. तभी दीपक ने लोड्‍ा मूह में दिया, और तभी विनोद ने ज़ोर के झटके के साथ लोड्‍ा अंदर कर दिया. मेरी दर्द से हाअलत कराब हो गयी, लेकिन विनोद तेज़ झटको के साथ मेरी गांद पेलता रहा. करीब 2 मिनिट बाद विनोद अपना लोड्‍ा मेरे मूह में, और अक्षय मेरी गांद में डाल कर चुदाई करने लगे.

10 मिनिट बाद अब दर्द पहले से कम हुआ. मैं भी गांद हिला-हिला कर छुड़वाने लगा. विनोद का सबसे जल्दी मेरे ही मूह में निकल गया, जिससे मैने अमृत समझ कर पी लिया.

डॉगी स्टाइल में चूड़ने से मेरे घुटने बहुत दर्द कर रहे थे. इसलिए मैं सीधा लेट गया. फिर मेरी टाँगें उठा कर दीपक ने लोड्‍ा अंदर डाला, और मूह अक्षय छोड़ रहा था. तभी विनोद मेरे लाल-लाल चुचो को चूसने लगा.

तीनो की हरकतों से मेरा माल बिना हाथ लगाए ही निकल गया. 15 मिनिट नों स्टॉप छोड़ने के बाद दीपक का माल मेरी गांद में ही निकल गया. अक्षय ने मेरे मूह से लोड्‍ा निकआल कर माल की पिचकारी मेरे बदन पर निकाल दी.

तीनो ने फिर से किस किया. हम सब ऐसे ही नंगे ही सो गये. नेक्स्ट मॉर्निंग पापा आए, उससे पहले ही हम सब जाग गये थे.

पापा (हम सब से): और रात कैसी रही?

तीनो ने मुझे देखते हुए बोला “मज़ा आ गया तेरे बेटे के साथ कार्ड खेल कर.” सब हासणे लगे. इसके बाद कब और कैसे मेरी चुदाई तीनो ने की, और क्या उसमे कोई शामिल हुआ, उसके लिए नेक्स्ट पर ज़रूर पढ़ना.

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