परेशान कामवाली की चुदाई

Hi , to all ISS readers, this is vicky , 32 from Pune.I am a regular reader of AV. This is for the first time I narrate my experience. Now to the story. मेरा लुनद है 7 इनच का , ओर असतिवे है लसत 22 सल से, आप इस पेर विशवस नहि करेनगे। मैं अभि आप को मेरा बहुत फ़रेश एक्सपेरिएनसे लिख रहा हु ।ये बत है 21/8/2005 कि। ये कहनि है मैद को सेदुसे कर के उसे मेरि कीप बनने कि। मेरे घर पेर मैद है । उमर है बिस कि। नम है वैशलि । वो लगति है जैसे इतेम सोनग गिरल। मुझे पता था वो विरगिन (कुनवरि) है। सलि बहुत जवन है। उसके गाल पेर का कला तिल मुझे पेरेशन करता था। पिछले दो महिनो से मैं उस पेर जाल बिछा रहा था।मेरे बेदरूम कि सफ़ै वो करति है । मेरि बिबि 9।00 बजे ओफ़्फ़िसे जति है। मेरि पेहलि चल थि के मैं सुबह बथरूम मे मूथ मर मेरि फ़रेनचि गिलि करता और उसपर थोदा और थुकता । वो फ़रेनचि मैं दरवजे के पिछे लतका देता । कपदे धोने के लिये वैशलि उसे हाथ मे लेति थि। मेरि चद्दि को थिक से देखति भि थि। मैं सहि जा रहा था ।

फिर एक दिन मैने मेरे निघत पनत का निचे का बुतन तोदा। उस दिन मैं 9।45 तक सोता रहा। फिर मैने मेरा लुनद गोतियोन के साथ पजमेसे बहर निकला।और मैं पेत के बल सोने का नतक किया। मेरि गोतियन मेरे पैरोके बीच से दिख रहि थि । वैशलि 9।15 को मेरे बेदरूम मे आयि , उसकि नजर मुझ पर पदि और वो गोतिया देखति रहि । मुझे ये सब वरदरोबे के अनदर के मिर्रोर मैं दिख रहा था। उसने दो मिनुते तक देखा फिर वो और नजदिक आयि और उसने और गौरसे देखा। उसने इधर उधर का अनदज लेकर अपने लेफ़त मम्मे को दबया। फिर उसने रिघत हनद आगे बधया और गोतियोको छूना चहा पेर फिरसे हथ हता लिया । वो निचे चलि गयि । मैं उथा बथरूम मैं जकर मेरा रोजका कम किया।आज मैं बहुत खूश था। उसकि आग और भदकने कि सोचा । बरुश करने के बाद निचे जकर उस्से चै पि और उसे गरम पनि बथरूम मे देने को कहा। वो नजरे नहि मिला रहि थि । मैं बथरूम मे गया। शविनग कि। एकदुम से मुझे नया इदेअ कलिक किअ। मैने मेरे उनदेररम पेर शविनग सरèमे लगया और उसकि रह देखता रहा। मैने सिरफ़ मेरे कमर पेर तोवेल लपेता था। जैसे वो आने कि आहत सुनै दि। मैने मेरा हाथ उथया और शविनग शुरु किअ । उसने बलति रखते हुइ कहा “सिर, पनि” और वो शरमकर भग गयि। मैने उसके बाद शरमने का नतक किअ।

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ये सब मुझे अस्सह्हा लग रहा था। फिर 4 दिन मैने सेदुसे नहि किअ। वैशलि मे चनगेस आ रहे थे। वो अब सज के आने लगि थि। ये चिदिअ फस रहि थि। मुझे मलुम था आगे कया करना है। मेरे पास क्सक्सक्स पिसतुरे बूकस और सद है। उसमे से दो बहुत गनदि बूकस मैने मेरे इसत्रि के शिरतस के निचे रख दि। ऐसा लग रहा था जैसे चुपयि हो। मैने बदे धयन से रखा और पगेस को खोल के रखा। मैं मेरे ओफ़्फ़िसे के लिये चला गया। उस दिन मैं 4।00 बजे लौता । बेल्ल दबने पेर दरवजा खोलने मे देर लगि । मैं एक्ससिते हो रहा था । दरवजा खुलते हि मैने वैशलि को नोतिसे किअ। गरम औरत एकदुम थनदि होने पेर जैसि दिखति है वैसे वो दिख रहि थि। मैने पुछा “ सो रहि थि कया?” उसने कहा “ हा “। मैं बेदरूम मे गया , बूकस देखे । बूकस को गदबदि मैं रखा गया था। मैने सतैरससे के कोने से निचे देखा तो वो बेदरूम का अनदजा ले रहि थि। मैं वपस चला गया और 5 बजे लौता। अब बूकस थिक से रखे थे । वैशलि अब सोमफ़ोरतबले दिख रहि थि। अब मैं रोज वहा पेर बूकस रखने लगा और उसे तदपने लगा। इसका मुझे आगे जकर फयदा हुअ कयोनकि बूकस मैं सुब तरह कि तसविरे थि जैसे दो लेसबिअन, गनद कि चुदै, लुनद चतना और सुब कुछ। अब मैं दोपहर को घरपर कम करने लगा।

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