सेक्सी काम वाली भाभी को चोदा

हेल्लो फ्रेंड्स कैसे हो आप लोग | आशा करता हूँ की ठीक होगे | दोस्तों थोडा आप लोग मेरे बारे में जान लीजिये फिर मैं आप लोगो को सीधा कहानी की और ले चलता हूँ | दोस्तों मेरा नाम लकी है | मैं डेल्ही का रहने वाला हूँ | मेरा परिवार एक छोटा परिवार है | मेरे घर मेंमम्मी-पापा और एक छोटा भाई है | तो चलिए दोस्तों में आप लोगोको सीधे कहानी की ओर ले चलता हूँ |

तो दोस्तों ये बात उस समय की है जब मेरे घर में एक काम वाली नौकरानी छोड़ कर चली गयी थी और उसके बदले में दूसरी काम वाली नौकरानी आयी थी | दोस्तों उसका फिगर ऐसा था की पूछो न उसके बूब्स यानि चूंचियां ऐसी कि हाय, बस दबा ही डालो । ब्लाऊज में चूंचियां समाती ही नही थी मेरा मन उसपे आ गया था की कभी न कभी तो इसे चोदुंगा | जब वो झाड़ू लगाते हुएझुकती, तब ब्लाऊज के ऊपर से चूचियों के बीच की दरार को छुपा ना पाती थी । एक दिन जब मैंने उसकी इस दरार को तिरछी नज़र से देखा तो पता लगा की उसने ब्रा तो पहना ही नही था । यह देख कर मेरा दिमाग और खराब हो गया |

जब वो ठुमकती हुयी चलती, तो उसके चूतड़ बड़े ही मोहक तरीके से हिलते | और मैं यही सोंचता था काश मैं इसे चूम सकता, इसके बूब्स दबा सकता। और फिर अपने लंड को इसकी बुर में डाल कर चोद सकता । लेकीन साली वो मेरे तरफ देखती ही नही थी । वोअपने काम से मतलब रखती और ठुमकती हुयी चली जाती।
मैंने भी उसे कभी एहसास नही होने दिया कि मेरी नज़र उसे चोदने के लीये बेताब है । मैंने अब सोच लिया की इसे सीड्यूस करना ही होगा । एक दिन सुबह उसे चाय बनाने को कहा । वो मेरे पास चाय ले के आई चाय पीते हुएमैंने थोड़ी उसकी तारीफ करदी की तुमचाय बहुत अच्छी बना लेती हो” । उसने जवाब दिया, “धनंयवादबाबूजी।”

अब करीब रोज़ उससे मैं चाय बनवाता और उसकी बड़ाई करता रहता था | जब घर में कोई नही होता, तब मैं उसे इधर उधर की बातें करता। एक बार मैंने उससे पूंछा की तुम्हारा आदमी तुम्हारा ख्याल रखता है की नही | वह शरमाते हुए उसने जवाब दिया की हां बाबु जी | मैंने फिर पूछा तो तुम दोनो का खर्चा-पानी तो चल ही जाता होगा । “साहब, चलता तो है, लेकीन बड़ी मुश्किल से । मेरा आदमी शराब में बहुत पैसे बरबाद कर देता है।”
मैंने उससे कहा तुम अपने आदमी को मेरे पास लाओ, मैं उसे समझाऊंगा । ठीक है साहब,” कहते हुए उसने ठण्डी सांस भरी।
इस तरह, दोस्तों मैंने बातों का सिलसिला काफ़ी दिनो तक जारी रखा । एक दिन मैंने शरारत से कहाकी तुम इतनी सुंदर हो और तुम्हारा पति तुम्हे छोड़ कर शराब में पड़ा है | उसने मेरे कहने का मतलब कुछ कुछ समझ तो लिया था लेकिन अभी तक अहसास नही होने दिया अपनी ज़रा सी भी नाराजगी का। मुझे भी ज़रा सा हिन्ट मिला कि मैं इसे कुछ दिन ऐसी बाते और करू येचुदवा तो लेगी और आखिर एक दिन ऐसा एक मौका लगा |

रविवार का दिन था। पूरी फ़ेमिली एक शादी में गयी थी । मैं अपनी तबियत ख़राब होने का बहाना बता कर नही गया । वो लोग सब चले गये अब मेरे दिल में लड्डू फ़ूटने लगे और लौड़ा खड़ा होने लगा । वो आयी, उसने दरवाज़ा बन्द किया और काम पर लग गयी । इतने दिन की बातचीत से हम खुल गये थे और उसे मेरे ऊपर विश्वास सा हो गया था इसी लिये उसने दरवाज़ा बन्द कर दिया था । मैंने हमेशा की तरह चाय बनवायी और पीते हुए चाय की बड़ाई की । और कहा की अगर तुम्हे पैसे की ज़रूरत हो तो मुझे ज़रूर बताना । झिझकना मत।”

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तो उसने कहा की साहब, आप मेरी तनखा काट लोगे और मेरा आदमी मुझे डांटेगा । और मैंने हस्ते हुए कहा की अरे पगली, मैं तनखा की बात नही कर रहा । बस कुछ और पैसे अलग से चाहिये तो मैं दूंगा मदद के लिये । और किसी को नही बताऊंगा। बसतुम्हे एक काम करना होगा अब मैंने हलके से कहा, की तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो | और तुम्हे पसंद करने लगा हूँ | ये कहते हुए मैंने उसे 1000रुपये थमा दिये । उसने रुपये टेबल पर रखा और मुसकुराते हुए पूछा “क्या करना होगा साहब ? मैंने कहा की अपनी आंखे बन्द करो पहले।” मैं कहते हुए उसकी तरफ़ थोड़ा सा बढा उसने अपनी आंखे बंद कर ली। मैंने फिर कहा, जब तक मैं ना कहूं, तुम आंखे बंद ही रखना । शरमाते हुए आंखे बंद कर वो खड़ी थी । मैंने देखा की उसके गाल लाल हो रहे थे और होंठ कांप रहे थे । दोनो हाथों को उसने सामने अपनी जवान चूत के पास समेट रखा था ।

मैंने हलके से पहले उसके माथे को चूम लिया। अभी मैंने उसे छुआ नहीं था। उसकी आंखे बंद थी। फिर मैंने उसकी दोनो पलकों पर बारी बारी से चूमा। उसकी आंखे अभी भी बन्द थी । फिर मैंने उसके गालों पर आहिस्ता से बारी बारी से चूमा । उसकी आंखे खुल गयी थी। इधर मेरा लण्ड तन कर लोहे की तरह कड़ा और सख्त हो गया था । वह सरमाते हुए मना कर रही थी | पर मैंने उसे चुमते-चुमते गरम कर दिया था | मैंने अब की बार उसके थिरकते हुए होंठो को अपने मुह में रख के चूसने लगा । फिर मैंने उसके दोनो हाथों को अपनी कमर के चारो तरफ़ लपेट लिया और उसे अपनी बाहों में समेटा और उसके होंठो को चूमता रहा | उसके दोनो हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और मैं उसके गुलाबी होठों को खूब चूस चूस कर मजा ले रहा था |

और फिर मैंने उसको बूब्स को दाबना स्टार्ट किआ हाय हाय क्या बूब्स थे उसके । मेरा लंड अब लण्ड फुंकारे मार रहा था। फिर मैं अपने हाथ से उसके चूतड़ को अपनी तरफ़ दबाया और उसे अपने लण्ड को महसूस करवाया | थोड़ी देर बाद मैंने उसके उसके शरीर केएक-एक करके सारे कपडे उतार दिए और उसे लेकर अपने बेडरूम में चला गया | मैंने भी अपने सारे कपडेउतार कर झट से नंगा हो गया। मेरालण्ड तन कर उछल रहा था। वो ऐसे बेड पर लेट कर मचल रही थी जैसे वो चुदवाने को तैयार ही थी । दोनों लोग कमरे में एकदम नंगे थे | जब मैं उसे चोदने जा रहा था तो उसने मुझसे शरमाते हुए कहा, “साहब, परदे खींच कर बन्द करो ना ।

बहुत रोशनी है।” मैंने झट से परदों को बन्द किया जिससे थोड़ा अन्धेरा हो गया और मैं उसके ऊपर लेट गया। होठों को कस कर चूमा, हाथों से चूंचियां दबायी और एक हाथ को उसके बुर पर फिराया। उसके घुंघराले बाल बहुत अच्छे लग रहे थे चूत पर। फिर थोड़ा सा नीचे आते हुए उसकी चूंची को मुंह मैं ले लिया। अपनी एक अंगुली को उसकी चूत के दरार पर फिराया और फिर उसके बुर में घुसाया। अंगुली ऐसे घुसी जैसे मक्खन मैं छुरी। चूत गरम और गीली थी। उसकी सिसकारियां मुझे और भी मस्त कर रही थी। मैंने उसकी चूत चीरते हुए कहा,अब बोलो क्या करूं ? तो उसने कहा “साहब, मत तड़पाईये, बस अब कर दीजिये।”मैंने कहा, रुक तो जाओथोडापहले थोड़ी देर चूमा-चाटी तो कर ले | दोस्तों उसको मैंने बहुत गरम कर दिया था और वह अब बरदासनहीं कर पा रही थी |

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अब मैं उसकी चूत में अपना लंड डालने जा रहा था | फिर क्या था, मैंने लण्ड उसके बुर पर रखा और घुसा दिया अन्दर। एकदम ऐसे घुसा जैसे बुर मेरे लण्ड के लिये ही बनी थी। दोस्तों, फिर मैंने हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए, होठों से उसके गाल और होठों को चूसते हुए, चोदना शुरु किया। बस चोदता ही रहा। ऐसा मन कर रहा था की चोदता ही रहूं। खूब कस कस कर चोदा । और उसके मुह से आह अहः आहा अहः अह हाह अह आ हुंह उन्ह उन्ह उन्ह ओह्ह ओह्ह आह आह ओह्ह उन्ह उन्ह ओह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह ओह्ह आह आह ऊं ओह्ह ओह्ह आह आह की सिस्कारिया निकल रही थी | दोस्तों उसे चोदते चोदते मन ही नही भर रहा था ।

क्या चीज़ थी यारों, बड़ी मस्त थी । वो तो खूब उछल उछल कर चुदवा रही थी । और उसके हाथ मेरी पीठ पर कस रहे थे, टांगे उसने मेरी चूतड़ पर घुमा कर लपेट रखी थी और चूतड़ से उचल रही थी । खूब चुदवा रही | थोड़ी देर के बाद मैं उसकी चूत में ही झड गया | थोड़ी देर मैंने आराम किया और एकबार फिर मेरा लंड खड़ा हुआ और उसे चोदना चाहा | मैंने इस बार उसकी गांड को चोदना चाहा | मैंने उसको घोड़ी बनाया और उसकी गांड में अपना लंड घुशेडा और जोर-जोर से चोदने लगा |

और इस बार भी उसके और मेरे मुह से आह आहा हाह अह अहहाह हाहा हाहा अहः हाहा ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह्ह ओह्ह्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह इह्ही इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह आहाह अहः हाहाहा हाहा हाहा हह अह्की सिस्कारिया निकल रही थी | और उससे कहा की तेरी गांड में तो चूत चोदने से ज्यादा मजा है | मैंने उससे पूंछा बहुत मज़ा आ रहा है। बोल ना कैसी लग रही है ये चुदायी। थोड़ी देर बाद में झड गया और अपने बेड पर लेट गया |

अभी मन नही भरा था। 20 मिनिट के बाद मैंने फिर अपना लण्ड उसके मुंह में डाला और खूब चुसवाया । हमने 69 की पोजिशन ली और जब वो लण्ड चूस रही थी मैंने उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदना शुरु किया । और हमारे मुह से आहाहा आह आहा हाहा हाहा हाह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह इह्ह उन्ह उन्ह की सिस्कारिया निकल रही थी | धीरे-धीरे रात होने वाली थी और घर वालो का भी आने का टाइम हो गया था | उसने अपने कपडे पहने और घर चली गयी |
तो दोस्तो ये थी मेरी कहानी | आशा करता हूँ कि आप लोगों को पसंद आएगी |

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