जो दर्द होना था हो गया

Hindi Chudai sex kahani jo dard hona tha ho gaya अपनी यादो मैं डूबते ही मुझे मेरा बचपन याद आता है! मेरी सेक्स नामक शब्द से पहचान भी तभी हुई थी! मैं एक जमींदार परिवार से संम्बंद रखता हू| मेरा कोई भाई या बहन तो नहीं थे परन्तु हम एक सयुंक्त परिवार मैं रहते थे तो मेरे काफी चचेरे भाई बहन थे| हम सब एक साथ ही रहते थे |मेरा परिवार काफी बड़ा था, एक हवेली मैं सभी लोग रहते थे | मेरे दादा जी परिवार तथा गांव दोनों के मुखिया थे | चुकी मैं उनके छोटे बेटे की इकलोती संतान था वो मुझे बहुत प्यार करते थे | मैं उनके पास ही ज्यदा रहता था | मुझे अच्छी तरह याद है तब मैं मात्र १० साल का था |जब मैंने किसी को सेक्स करते पहली बार देखा था, मुझे ये तब पता नहीं था की वो लोग क्या कर रहे है , लेकिन उनकी बाते सुन कर मुझे काफी अच्छा लगा था | उस दिन रविवार था यानि हमारे स्कूल कि छुट्टी थी ,मैं यूही गांव में घूम रहा था , माँ ने सुबह ही कहा था “बेटा ज्यादा दूर मत जाना घूमने घर जल्दी आ जाना ,मैंने तुम्हारी पसंद ही खीर बना रही हू .” मैं बहुत खुस था उस दिन. मैं टहलते -२ पास के मंदिर तक चला गया था. |

चुकी सुबह के १० बज रहे थे , पूजा खतम हो चुकी थी, इसलिए कोई था नहीं| मैं मंदिर कि सीडियों पे बैठ गया , ओर कुछ गुनगुनाने लगा | तभी मेरी नजर मदिर के पीछे जाते कुछ लडको पर पड़ी| ध्यान से देखा तो वो मेरे बड़े पिता जी का लड़का मोहन था ,उसके साथ उसका दोस्त राकेश भी था |दोनों की उम्र १७ साल थी ,दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे | राकेश के पिता हमारे यहाँ मुंसि का काम करते थे | दोनों काफी खुस लग रहे थे , थोड़ी देर बाद दोनों मंदिर के पीछे बने छोटे से कमरे में चले गए | वो कमरा वहां के पुजारी का था चुकी उस समय कोई मंदिर में पुजारी नहीं था ,कुछ महीनो पहले ही पुजारी महाराज की मृत्यु हुई थी, वो कमरा खाली पद था| वो दोनों कमरे के अंदर जा चुके थे , मुझे उनपे कोई सक भी नहीं था ,मैं तो एक नादाँ लड़का था उस समय | मैं थोड़ी देर मैं घर को जाने ही वाला था कि तभी एक लड़की मुझे उस कमरे की तरफ जाती हुई दिखी ,मैंने देखा वो हमारे घर के पीछे रहने वाले माली कि बेटी माला थी| मेरी उत्सुकता बढने लगी ,वो क्या करने जा रही है उस कमरे में |

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मैंने सोचा वो लोग कोई खेल खेलने वाले है वह, मैं नादान उस कमरे की तरफ जा ही रहा था की , माला उस कमरे में घुस गयी, उसके घुसते ही दरवाजा बंद हो गया| मैं तब तक उस कमरे तक पहुच चूका था, मैं दरवाजा खटखटाने ही वाला था की मुझे उंदर से हसने कि आवाज आई . मेरी उत्सुकता अंदर से आती हँसी सुनकर बढती जा रही थी, पहले मैंने सोच दरवाजा खटखटाउ |फिर मन मैं आया देखता हू ये लोग अंदर कोंन सा खेल खेल रहे है, अब मैंने कोई खिडकी या सुराग ढूढने लगा| इस बीच अंदर से बार-२ आवाजे आ रही थी | माला : “छोड़ो ना क्यों तंग कर रहे हो ,मैंने जो कहा था लाए या नहीं , रुको तो ऐसे तो फट जायेगी ……..रुको” मोहन :”मेरी जान , तुने एक मागा था मैं तेरे लिए दो ले आया हू , तू आराम से खा इसे हमें हमारा काम करने दे ………..” माला :”दो लाए हो तो तुम भी तो दो हो , रुको पहले मुझे एक खा लेने दो फिर मैं निकालूंगी.” राकेश :”तू दोनों खा आराम से किसने रोका है तुझे, हमें हमारा काम करने दे.” तभी मुझे लगा अंदर कोई किस ले रहा,,,,,,,,,,,एक -दो -तीन …….उसके बाद मैंने गिनती करना छोड़ दिया. तब तक मैं कमरे के पीछे पहुच चूका था |

मेरी अभी तक समझ मैं नहीं आया था कि अंदर क्या चल रहा था. माला क्या खाने कि बात कर रही थी , मोहन भैया ओर राकेश किस काम कि बात कर रहे थे| तभी मुझे कमरे मैं एक सुराख़ दिखाइ दिया ……जो सायद कमरा बनाते वक्त रह गया था| चुकी मेरी लम्बाई भी छोटी थी मैं वह तक नहीं पहुच पा रहा था| मेरी नजर पास पड़े ईट के ढेर पर गयी, मैंने कुछ को उठा कर सुराख़ के निचे रखा ताकि मैं सुराख से देख सकू अंदर क्या हो रहा है| मैं बहुत कोशिशो के बाद अंदर क्या हो रहा था देखने मैं कामयाब हो गया था | इस बीच अंदर से आती मोहन ,राकेश ,माला कि बाते मुझे लगातार सुनाई दे रही | जिसके मुताबिक मोहन भैया ने माला को कुछ उतारने को कहा ओर माला ने सायद हा कर दी थी| ईट पे पैर रखने के बाद मैं अंदर देखने की कोशिश करने लगा ,सबसे पहले मुझे मोहन भैया की पीठ नजर आई , उन्होंने अपनी कमीज उतार रखी थी |जैसे ही उनका सर नीचे हुआ मुझे राकेश नजर आया | मुझे अब काफी कुछ साफ दिखने लगा था, मुझे लग रहा था उन दोनों के बीच मैं कोई है | तभी उन दोनों के बीच से मुझे माला निकलती हुई दिखाई पड़ी| वो उन दोनों से थोड़ी दूर जाकर खड़ी हो गयी और हसने लगी |मोहन भैया राकेश दोनों हँसते हुए उसकी तरफ बढे | माला ने दोनों को रुकने का इशारा किया और कहा

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