जो दर्द होना था हो गया

Hindi Chudai sex kahani jo dard hona tha ho gaya अपनी यादो मैं डूबते ही मुझे मेरा बचपन याद आता है! मेरी सेक्स नामक शब्द से पहचान भी तभी हुई थी! मैं एक जमींदार परिवार से संम्बंद रखता हू| मेरा कोई भाई या बहन तो नहीं थे परन्तु हम एक सयुंक्त परिवार मैं रहते थे तो मेरे काफी चचेरे भाई बहन थे| हम सब एक साथ ही रहते थे |मेरा परिवार काफी बड़ा था, एक हवेली मैं सभी लोग रहते थे | मेरे दादा जी परिवार तथा गांव दोनों के मुखिया थे | चुकी मैं उनके छोटे बेटे की इकलोती संतान था वो मुझे बहुत प्यार करते थे | मैं उनके पास ही ज्यदा रहता था | मुझे अच्छी तरह याद है तब मैं मात्र १० साल का था |जब मैंने किसी को सेक्स करते पहली बार देखा था, मुझे ये तब पता नहीं था की वो लोग क्या कर रहे है , लेकिन उनकी बाते सुन कर मुझे काफी अच्छा लगा था | उस दिन रविवार था यानि हमारे स्कूल कि छुट्टी थी ,मैं यूही गांव में घूम रहा था , माँ ने सुबह ही कहा था “बेटा ज्यादा दूर मत जाना घूमने घर जल्दी आ जाना ,मैंने तुम्हारी पसंद ही खीर बना रही हू .” मैं बहुत खुस था उस दिन. मैं टहलते -२ पास के मंदिर तक चला गया था. |

चुकी सुबह के १० बज रहे थे , पूजा खतम हो चुकी थी, इसलिए कोई था नहीं| मैं मंदिर कि सीडियों पे बैठ गया , ओर कुछ गुनगुनाने लगा | तभी मेरी नजर मदिर के पीछे जाते कुछ लडको पर पड़ी| ध्यान से देखा तो वो मेरे बड़े पिता जी का लड़का मोहन था ,उसके साथ उसका दोस्त राकेश भी था |दोनों की उम्र १७ साल थी ,दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे | राकेश के पिता हमारे यहाँ मुंसि का काम करते थे | दोनों काफी खुस लग रहे थे , थोड़ी देर बाद दोनों मंदिर के पीछे बने छोटे से कमरे में चले गए | वो कमरा वहां के पुजारी का था चुकी उस समय कोई मंदिर में पुजारी नहीं था ,कुछ महीनो पहले ही पुजारी महाराज की मृत्यु हुई थी, वो कमरा खाली पद था| वो दोनों कमरे के अंदर जा चुके थे , मुझे उनपे कोई सक भी नहीं था ,मैं तो एक नादाँ लड़का था उस समय | मैं थोड़ी देर मैं घर को जाने ही वाला था कि तभी एक लड़की मुझे उस कमरे की तरफ जाती हुई दिखी ,मैंने देखा वो हमारे घर के पीछे रहने वाले माली कि बेटी माला थी| मेरी उत्सुकता बढने लगी ,वो क्या करने जा रही है उस कमरे में |

मैंने सोचा वो लोग कोई खेल खेलने वाले है वह, मैं नादान उस कमरे की तरफ जा ही रहा था की , माला उस कमरे में घुस गयी, उसके घुसते ही दरवाजा बंद हो गया| मैं तब तक उस कमरे तक पहुच चूका था, मैं दरवाजा खटखटाने ही वाला था की मुझे उंदर से हसने कि आवाज आई . मेरी उत्सुकता अंदर से आती हँसी सुनकर बढती जा रही थी, पहले मैंने सोच दरवाजा खटखटाउ |फिर मन मैं आया देखता हू ये लोग अंदर कोंन सा खेल खेल रहे है, अब मैंने कोई खिडकी या सुराग ढूढने लगा| इस बीच अंदर से बार-२ आवाजे आ रही थी | माला : “छोड़ो ना क्यों तंग कर रहे हो ,मैंने जो कहा था लाए या नहीं , रुको तो ऐसे तो फट जायेगी ……..रुको” मोहन :”मेरी जान , तुने एक मागा था मैं तेरे लिए दो ले आया हू , तू आराम से खा इसे हमें हमारा काम करने दे ………..” माला :”दो लाए हो तो तुम भी तो दो हो , रुको पहले मुझे एक खा लेने दो फिर मैं निकालूंगी.” राकेश :”तू दोनों खा आराम से किसने रोका है तुझे, हमें हमारा काम करने दे.” तभी मुझे लगा अंदर कोई किस ले रहा,,,,,,,,,,,एक -दो -तीन …….उसके बाद मैंने गिनती करना छोड़ दिया. तब तक मैं कमरे के पीछे पहुच चूका था |

मेरी अभी तक समझ मैं नहीं आया था कि अंदर क्या चल रहा था. माला क्या खाने कि बात कर रही थी , मोहन भैया ओर राकेश किस काम कि बात कर रहे थे| तभी मुझे कमरे मैं एक सुराख़ दिखाइ दिया ……जो सायद कमरा बनाते वक्त रह गया था| चुकी मेरी लम्बाई भी छोटी थी मैं वह तक नहीं पहुच पा रहा था| मेरी नजर पास पड़े ईट के ढेर पर गयी, मैंने कुछ को उठा कर सुराख़ के निचे रखा ताकि मैं सुराख से देख सकू अंदर क्या हो रहा है| मैं बहुत कोशिशो के बाद अंदर क्या हो रहा था देखने मैं कामयाब हो गया था | इस बीच अंदर से आती मोहन ,राकेश ,माला कि बाते मुझे लगातार सुनाई दे रही | जिसके मुताबिक मोहन भैया ने माला को कुछ उतारने को कहा ओर माला ने सायद हा कर दी थी| ईट पे पैर रखने के बाद मैं अंदर देखने की कोशिश करने लगा ,सबसे पहले मुझे मोहन भैया की पीठ नजर आई , उन्होंने अपनी कमीज उतार रखी थी |जैसे ही उनका सर नीचे हुआ मुझे राकेश नजर आया | मुझे अब काफी कुछ साफ दिखने लगा था, मुझे लग रहा था उन दोनों के बीच मैं कोई है | तभी उन दोनों के बीच से मुझे माला निकलती हुई दिखाई पड़ी| वो उन दोनों से थोड़ी दूर जाकर खड़ी हो गयी और हसने लगी |मोहन भैया राकेश दोनों हँसते हुए उसकी तरफ बढे | माला ने दोनों को रुकने का इशारा किया और कहा

माला : “मुझे ये वाला आम खा लेने दो पहले उसके बाद तुम लोग जो कहोगे मैं करने को तैयार हू ,” तब नुझे पता चला वो किन दो की बात कर रही थी , अशल में मोहन भैया ने उसे आम का लालच दे कर वह बुलाया था ,उसके लिए दो आम लेकर गए थे| तभी मोहन भैया ने कहा “तू आराम से आम खा ना , हमें बस तेरे कपडे उतारने दे ” माला : “मैं अपने कपडे नहीं उतारने वाली कल तुमने बहुत तंग किया था , मुझे अभी भी सीने में दर्द हो रहा है ” मोहन भैया थोडा मुस्कुराये फिर बोलो ” अरे आज आराम से करूँगे तुझे दर्द नहीं होगा क्यों राकेश “. राकेश ,मोहन भैया कि तरफ देख के मुश्कुराया ओर बोला “बिल्कुल माला हम आराम से करेंगे ,तुझे दर्द नहीं होगा ” माला : ” राकेश तुम कहा थे कल …….मोहन ने बहुत तेजी से दबाया था मेरे सीने को , मुझे बहुत दर्द हुआ था ” राकेश : “माला तू बिलकुल चिंता मत कर मैं हू ना तुझे बिलकुल दर्द नहीं होने दूँगा ” ये कहते हुये भैया और राकेश फिर से माला के पास पहुच गए थे |

तब तक माला के हाथो का आम भी खत्म हो चका था |उसने दोनों को मुस्कुराते हुए देखा ओर अपना सर नीचे कर लिया| मेरी ज्यादा कुछ समझ मैं तो नहीं आ रहा थ उस समय लेकिन मुझे उनकी बाते सुनकर काफी अच्छा लग रहा था| इसी बीच मैंने देखा भैया ने माला के होठो पे किस करना चालू कर दिया था ,ऐसा लग रहा था माला के लिए पहली बार नहीं था ये सब,मुझे ये सब देखकर जरुर अजीब लग रहा था | शयद भैया ने पहले भी माला को आम के बहाने वहां बुलाया था | मैं ये सोच ही रहा था कि तभी राकेश ने माला कि शर्ट उतारने के लिए ऊपर से खीचना चाहा ,और माला ने दोनों हाथ आसानी से ऊपर कर दिए , मेरे देखते -२ माला कि शर्ट जमीन पर पड़ी थी ओर माला दोनों के बीच कसमसा रही थी | मुझे अब काफी अच्छे से अंदर का नजारा दिखने लगा था |सायद सुराख़ छोटा होने कि वजह से तीनों मैं से कोई मुझे देख नहीं पाया था | तभी मैंने देखा राकेश दोनों को छोड़ कर बाहर जा रहा है | भैया :” कहा जा रहे हो ” राकेश :”एक बार बाहर देख कर आता हू कोई आ तो नहीं रहा है तुम अंदर से दरवाजा बंद कर लो मैं बाहर से बंद करके जा रहा हू

” भैया : “कितनी देर में आओगे ” राकेश :”बस थोड़ी देर में आ रहा हू ” भैया : “ठीक है ” माला ने माशुमियत से कहा :”राकेश तुम मत जाओ , तुम चले जाओगे तो ये बहुत जोर से दबाएगा ” राकेश को माला कि माशुमियत पे तरश आया वो बोला : “तुम बिलकुल मत परेशान हो मैं अभी आया , मेरे आने तक मोहन कुछ नहीं करेगा ” फिर वो भैया से बोला : “मेरे आने तक तुम कुछ नहीं करोगे माला के साथ ठीक है ” भैया ने मुश्कुराते हुए कहा :”ठीक है भाई कुछ नहीं करूँगा , अब तुम जाओ ” इसी के साथ राकेश कमरे से बाहर चला गया ओर भैया अंदर से कमरा बंद करके माला के पास आ कर बोले: “चल उधर बैठते है ” माला ओर भैया दोने कमरे के कोने में रखे घास के ढेर पर पड़े बिस्तर पे बैठ

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गए………………….. थोड़ी देर तो दोनों के बीच कुछ नहीं हुआ …….तभी मैंने देखा माला कसमसाती हुई बार-२ भैया का हाथ पकड़ रही थी और मना कर रही थी | भैया बार-२ उससे हाथ छुडा कर उसके सीने पर रख रहे थे | एक बार फिर जब माला ने हाथ हटाया तो भैया ने कहा : “क्यों बार-२ हाथ हटा रही है मेरा करने दे ना !” माला : “नहीं जब तक राकेश नहीं आ जाता मैं कुछ नहीं करने दूंगी …….हटो तुम यहाँ से ” भैया : “क्यों कल तो बड़े मजे से दबवा रही थी आज क्या हुआ रानी ” माला : “तुमने कल बहुत जोर से दबाया था अभी तक दर्द कर रहा है ” भैया : “अच्छा ठीक है आज आराम से करूँगा अब तो कपड़े उतार “………..अभी तक मेरी ये समझ में नहीं आया था कि भैया माला का क्या दबाने कि बात कर रहे है |…..इसका जवाब मुझे जल्दी ही मिलने वाला था. भैया ने अपनी बात कहते हुआ एक बार फिर माला के सीने पे हाथ रख्खा |माला ने गुस्से मैं भैया को देखा ओर हाथ झटक दिया| माला कि इस हरकत पर भैया थोडा गुस्सा हो गए ओर बोले : “ठीक है मैं जा रहा हू अब राकेश से ही सब करवाना और वोही तुझे आम भी ला कर देगा .”

माला भैया की इस बात पर थोड़ी घबरा गयी क्युकी उसे पता था …..गावं में जो आम का बाग है वो हमारा ही है , ओर भैया ही उसे लाकर दे सकते है ……. माला ने भैया का हाथ पकड़ा ओर मुशकुरा के बोली : “अरे गुस्सा क्यों होते हो ……अच्छा ठीक है मैं कपडे उतारती हू पर तुम धीरे-२ करोगे पहले वादा करो.” भैया :”अरे कल गलती से जोर से दब गया होगा …….मैं अब धीरे-२ ही करूँगा ,तुझे भी मज़ा आएगा ” भैया के ये कहते ही माला ने अपनी शर्ट के बटन खोलने चालू कर दिए …….और लगातार भैया को देख कर मुस्कुराये जा रही थी| भैया क़ी आखे माला की खुलती बटनों पर थी ……और उनकी आखो मैं अपनी जीत कि खुसी साफ दिख रही थी | भैया उस नवयुवती को एक आम का लालच देकर उसके अनमोल अंग के दर्शन करने वाले थे | भैया को लगातार देखता देखकर माला के हाथ आखिरी बटन पर आकर रुक गया |

भैया ने आशचर्य से कहा :”रुक क्यों गयी निकाल ना ” माला : “मुझे शर्म आती है ” भैया उसकी बात सुनकर आगे बढे और आखिरी बटन को भी खोल दिया ओर पीछे कि तरफ ले जाकर उसकी शर्ट को उतार कर एक तरफ रख दिया | माला ने शर्म ने नजरे झुका ली ……..उसके गाल सुर्ख लाल हो चुके थे ओर दोनों हाथो से उसने अपने सीना ढक लिया था | भैया ने उसकी तरफ देखा और प्यार से एक हाथ से उसके चेहरे को ऊपर किया ………माला ने दोनों आखे अभी तक बंद कर रखी थी| भैया ने प्यार से उसके होटो पे किस किया माला थोडा कसमसाई फिर उसने नजरे नीचे कर ली
दोस्तों कहानी अभी बाकी है हिंदी सेक्सी कहानियां पर अगला भाग शीघ्र ही

भैया ने प्यार से फिर से माला का चेहरा ऊपर किया और अपने होठ माला के होठो पे लगा दिए ,भैया ने माला के सर को पीछे से पकड़ रख्खा था दोनों हाथो से | माला कि आंखे अभी भी बंद थी पर उसने कोई विरोध नहीं किया इस बार भैया का साथ दे रही थी | थोड़ी देर के बाद भैया के हाथ माला कि नंगे सीने पे घूमने लगे | मैंने देखा माला ने शर्ट के अंदर कुछ पहना नहीं था , सायद उसे जरुरत भी नहीं थी |माला के सीने के उभार बहुत ही छोटे थे उसकी अरोला किसी ५० पैसे के सिक्के जितना बड़ी थी ओर उसपे छोटी सी निप्पल तो पता ही नहीं चल रही थी | भैया अभी भी माला के होठो पे लगे थे अब तक भैया के हाथ माला के सीने तक पहुच कर उसक़ी छोटी -२ चुचियो को मसलने लगे थे | भैया ने दो उंगलियों से माला के छोटे से निप्पल को पकड़ कर मसला ,तो माला के मुह से हल्की सी आह निकल गयी| माला ने भैया के होठो से अपने होठ हटाकर कहा : “देखो तुमने कितना जोर से कल दबाया था अभी भी निशान पड़ा हुआ है ”

भैया ने माला के दोनों चुचियो को देखा तो पाया कि माला कि बाई तरफ की चूची पे हल्के लाल कलर का निशान था जो उसके अरोला के बिलकुल पास में था |भैया ने उसपे हाथ फेरा और बोले :”अरे हा देख तो कैसे लाल सा हो गया है ,हो सकता है कल जोश में ज्यादा जोर से दब गए होंगे,लकिन आज ऐसा नहीं होगा तू चिंता मत कर . तुझे आज पूरा मजा दूँगा ” माला को भी भैया की हरकतों की वजह से जोश आने लगा था ,उसकी साँसे धीरे-२ तेज होने लगी थी |भैया के हाथ अब तेजी से माला की चुचियो पे चलने लगे थे , जब भैया थोड़ी जोर से दबाते तो माला की आह निकल जाती | थोड़ी देर ये खेल दोनों के बीच चलता रहां तभी मैंने देखा कि भैया अपने हाथ माला के निचले भाग की तरफ ले जा रहे है उनके हाथ अभी माला की नाभि तक पहुचे ही थे कि माला ने भैया का हाथ पकड़ लिया ओर बोली :”वहा नही ऊपर से जितना करना है करो पर नीचे नहीं ” भैया माला की बात सुनकर थोडा मुस्कुराये और माला के स्तनों पे दूसरा हाथ फेरते हुए बोले : “अरे शर्माती क्यों है कुछ नहीं होगा ,देखना तुझे कितना मज़ा आयगा ” कहते हुआ भैया ने माला की सलवार के नाडे को पकड़ लिया और खोलने का प्रयाश करने लगे |

माला अभी भी “नहीं-२ ” कर रही थी लेकिन इस बार उसने भैया के हाथ रोकने की कोशिश नहीं की | भैया ने माला को बिस्तर पे लेटने को कहा | माला बिना कोई सवाल किये बिना बिस्तर पे लेट गयी | अब भैया इतमिनान से माला के सलवार के नाडे को खोलने लगे | माला का एक हाथ उसके पेट पे था और दूसरे हाथ की उंगलियों को उसने अपने दातो तले दबा रखा था और पीछे की तरफ देख रही थी |बीच-२ में वो भैया की तरफ देख भी रही थी कि वो क्या कर रहे है | भैया इस बीच नाडे को खोलने में व्यस्त थे ….थोड़ी देर में झुझला के बोले :”कैसे बाधा है तुने ये तो खुल ही नहीं रही रहा है ” माला ने नीचे की तरफ देखा और मुशकुरा कर बोली : ” अरे बेवकूफ ! ऊपर वाले को खिचो ,ज्यादा जोर मत लगाना वर्ना टूट जायेगा ” भैया ने फिर प्रयाश किया पर वो नहीं खोल नहीं पाए |

इसपर माला ने उठते हुए कहा :” रुको मैं खोलती हू नहीं तो तुम तोड़ दोगे ” भैया ने दोनों हाथ हटा लिए और माला को नाडा खोलते देखने लगे | थोड़ी देर में ही माला ने अपनी सलवार का नाडा खोल कर कहा :” तुम्हे तो एक नाडा भी खोलना नहीं आता ” भैया :” हा ठीक है , बस तू अब लेट जा मुझे मेरा काम करने दे ” माला एक बार फिर बिस्तर पे पीठ के बल लेट गयी | अब भैया के हाथो ने माला की सलवार पकड़ कर नीचे करना चालू कर दिया |सलवार के थोडा नीचे होते ही माला की पुरानी नीले रंग की चढ्ढी मुझे दिखने लगी |भैया ने सलवार थोडा नीचे किया तो सलवार माला की चूतडो में फस गयी ओर जोर लगाने पे भी नीचे नहीं आ रही थी | भैया ने माला से कहा :” थोडा गांड उठा ना सलवार नहीं निकल रही है ऐसे ” माला ने बिना किसी सवाल के भैया की आज्ञा का पालन किया और अपने चूतड़ को थोडा ऊपर उठा दिया ताकि सलवार आसानी से निकल जाये | माला के चूतड़ उठाते ही भैया ने सलवार को निकाल कर एक कोने में रख दिया |

माला के संगमरमरी बदन को देखकर मोहन भैया की आखे चमक उठी | मुस्कुराते हुए उन्होंने माला के बदन पे एक बार हाथ फेरा और दाहिने हाथ को नीचे की तरफ ले जाने लगे | माला की नाभि तक पहुच कर उनका हाथ रुक गया | थोड़ी देर नाभि पे हाथ फेरने के बाद भैया ने अपने हाथ की सबसे छोटी उंगली नाभि पर रख कर दबाया | उनके ऐसा करते ही माला की आह निकल गयी |भैया थोड़ी देर यु ही माला की नाभि से खेलते रहे , और माला आहे भरती रही | फिर भैया ने हाथ को धीरे -२ माला के चड्डी की तरफ ले जाना सुरु किया , ज्यु ही भैया का हाथ चड्डी की एलास्टिक तक पहुच ,माला ने अपना हाथ बढाकर रोक लिया | भैया ने एक नजर माला के चेहरे पर डाली तो माला ने नहीं का इशारा करते हुआ सर हिलाया | भैया ने धीरे से कहा : “क्या हुआ हाथ क्यों पकड़ लिया तुने .” माला ने धीरे से शरमाते हऐ कहा : “वहा हाथ मत डालो , मुझे शर्म आती है ” .भैया ये तो समझ गए कि माला इंकार नहीं कर रही है बस थोड़ी शरमा रही है |

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भैया ने अपने दाहिने हाथ को वही रहने दिया और अपने अपने बाएँ हाथ को माला की चूचियों पे रखकर मसलना चालू कर दिया ,साथ ही साथ अपने होठो को माला के होठो की तरफ बढ़ा दिया | माला ने जैसे भैया के होठो के स्वागत में अपने होठ थोड़े से खोल दिए ओर अपनी आखे बंद कर ली | इतनी देर से भैया के साथ नंगे होने के कारण शायद माला की शर्म भी थोड़ी कम हो गयी , उसकी आखे भी नशे में लगने लगी थी | थोड़ी देर में भैया ने माला के होठो को चूसते हुए उसके चूची को जोर से दबाया | माला की आह भैया के होठो में कैद रह गयी पर उसने अपने सीने को ऊपर उठा कर प्रतिक्रिया दी | थोड़ी देर ये ही खेल चलता रहा दोनों के बीच , माला बार-२ अपने सीने को थोडा उठा लेती जब भैया जोर से उसके चूची मसलते |तभी मैंने देखा कि माला के हाथो की पकड़ भैया के दाहिने हाथ पे कम हो गयी और भैया का हाथ धीरे-२ उसकी चड्डी के अंदर जाने लगा | इसबार माला ने कोई विरोध नहीं किया ,वो तो मज़े से भैया के होठो को चूस रही थी|धीरे -२ भैया का हाथ माला की चड्डी की इलास्टिक को ऊपर करते हुए अंदर समाता जा रहा था |

माला बस कसमसाए जा रही थी भैया की इस हरकत पे भैया के हाथो का असर माला के चेहरे पे साफ दिखाई दे रहा था |माला की आंखे अभी भी बंद थी पर ज्यु ही भैया का हाथ उसकी चड्डी में गया उसके बदन ने एक अंगडाई ली और चेहरे पे थोड़ी मुस्कराहट दौड़ गयी | भैया चड्डी के अंदर हाथो को धीरे-२ घुमाने लगे ,इस बीच लगातार माला के होठो को चूसते जा रहे थे |माला ने भी भैया का खूब साथ दिया , उसने भैया के सर को पकड़ कर उनके होठो को जितना जोर से चूस सकती थी चूस रही थी | थोड़ी देर के बाद भैया ने अपना हाथ माला की चड्डी से निकाला , तो मैंने देखा की उनका हाथ काफी भीग गया था और पानी सा चु रहा था |भैया ने माला के होठो को छोड़ा ओर उसे अपनी गोंद में बैठाते हुए अपना हाथ दिखाया | भैया : “देख माला तेरी चुत का रस, तेरी चुत तो पूरी गीली हो कर रस छोड रही है ” . माला भैया के हाथो पे लगे पानी को देख कर शर्मा गयी और सर नीचे करते हुए कहा ” कैसी गन्दी बाते कर रहे हो , गंदे कहीके “. भैया : “अच्छा अब मैं गन्दा हो गया , तेरी चुत मज़े से पानी छोड रही है , तुझे मज़ा आ रहा है और गन्दा मैं हू ” माला ने भैया की ओर सर करके कहा : “तुम ऐसे मत बोलो मुझे अच्छा नही लगता “. भैया माला के कामरस से भीगे हाथ को सुघते हुए बोले. भैया : “तो चुत को चुत नहीं कहू तो क्या कहू , तू एक बार सूंघ के देख ना मेरा हाथ कितना मज़ा आ रहा है ” कहते हुए भैया अपने हाथ माला के नाक के पास ले गए जो अभी भी उनकी गोंद में बैठी थी |

ज्यु ही भैया का हाथ माला कि नाक के पास पंहुचा ,माला को हल्की से गंध मिली उसे अच्छा तो लगा पर शर्मा कर उसने भैया का हाथ हटा दिया और बोली : ” मुझे नहीं सूंघना , तुम ही सूँघो “. भैया ने हँसते हुए अपना हाथ माला के सीने पे रख दिया और फिर से मसलने लगे उसकी चुचिया| माला को जब से भैया ने अपनी गोंद में बैठाया था उसे नीचे से कुछ चुभने का आभाश हो रहा था , वो बार-२ चूतड़ों को इधर -उधर कर रही थी | भैया ने उसे अपनी गोंद में मचलते देखा तो पूछा : “क्या हुआ जानेमन , क्यों इतना मचल रही हो. ” माला ने भोली सी सूरत ऊपर करते हुए कहा ” मुझे नीचे से कुछ चुभ रहा है ” . भैया मुस्कुरा के बोले :” अरे मेरी जान वो तो तेरा खिलौना है , रुक जा अभी दिखाता हू ” . कहते हुए उन्होंने माला को अपनी गोंद से नीचे उतार दिया| गोंद से उतरते ही माला को चैन मिला वो पलट कर भैया की तरफ उत्सुकता से देखने लगी | भैया ने अपनी शर्ट तो पहले ही उतार रख्खी थी अब बारी उनके पैंट की थी , उन्होंने बैठे-२ ही अपने पैंट की चैन खोली और ऊपर के दोनों बटनों को भी खोल दिया | अपनी चूतड़ थोड़ी सी उठा के भैया ने अपनी पैंट को बाहर निकाल दिया और एक तरफ जहा माला के कपडे थे रख दिया | मैंने देखा उनकी चड्डी में काफी उभार था कोई लम्बी सी मोटी सी चीज़ बार-२ झटके खा रही थी |

माला ने भैया की चड्डी को देख कर अश्चर्य से कहा ” ये क्या है इतना बड़ा और मोटा सा , ये इतना ऊपर-नीचे क्यों हो रहा है ” . भैया ने नीचे देखते हुए कहा : “अरे पगली ये वही तो है जो मैंने तुझे कल दिखाया था ” माला नीचे देखते हुए मायूसी से बोली : “पर कल तो बहुत छोटा सा दिख रहा था , लेकिन आज तो बहुत बड़ा दिख रहा है .”……….भैया ने कहा :”जानेमन कल तो तुने कुछ करने ही नहीं दिया था , आज तो तेरी वजह से ये इतना बड़ा हुआ है. छु के देखा ना डर क्यों रही है ” माला : “ना बाबा ना , मैं नही छूती मुझे डर लग रहा है इससे ” भैया : “अरे इस नाम से बुला ना , डर क्यों रही …………मैंने बताया था ना इसे लंड कहते है ” माला : “छी, कितना गन्दा बोलते हो “. और वो शर्मा कर दूसरी तरफ देखने लगी | भैया ने प्यार से उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड की तरफ ले जाते हुए कहा : ” एक बार छू के तो देख कुछ गन्दा नहीं होता , तुझे भी मज़ा आएगा ” माला ने इस बार हाथ छुड़ाने का बिलकुल प्रयाश नहीं किया और भैया ने उसका हाथ अपने लंड पे रख दिया भैया माला का हाथ चड्डी के ऊपर से ही अपने लंड पे रख के ऊपर-नीचे करने लगे ,

जब माला का हाथ नीचे करते तो उनके लंड का कुछ हिस्सा चड्डी से बाहर दिखने लगता | माला बहुत उत्सुकता से देख रही थी और धीरे -२ अपना हाथ ऊपर नीचे कर रही थी| जब भैया ने देखा की माला को लंड मसलने में मज़ा आ रहा तो उन्होंने अपना हाथ माला के हाथ पर से हटा लिया , माला इंतना खो गयी थी लंड हिलाने में की उसे होश ही नहीं था कि भैया ने अपना हाथ हटा लिया है , वो अभी भी धीरे-२ अपना हाथ ऊपर -नीचे कर रही थी |मैंने ध्यान दिया कि ये सब देखकर मेरे पैंट के भी आगे का हिस्सा थोडा उभर आया है, मैंने जब अपना हाथ अपने पैंट के ऊपर रखा तो मुझे थोड़ी गुदगुदी हुइ और मज़ा भी आया | मैं भी अब धीरे-२ अपनी लुल्ली (मैं उसे लुल्ली ही कहूँगा क्यों मैं तब बहुत छोटा था ) को सहलाने लगा | तभी मैंने अंदर देखा कि भैया अब माला कि चुचियो को मसलने लगे थे | माला को तब होश आया जब उसके छाती में थोडा दर्द हुआ , उसने पाया कि वो अभी तक भैया का लंड मसल रही है ,जबकि भैया ने अपना हाथ हटा लिया है
दोस्तों कहानी अभी जारी है


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