जेठ जी ने मेरी चुदाई की पारिवारिक सच्ची चुदाई की कहानी

मेरा नाम रम्भा है और मैं कानपूर की रहने वाली हूं मेरी शादी को २ साल हो गए हैं मेरी साइज़ ३४-३२-३४ है, शुरू में भी बहुत शर्मीली थी, मेरी शादी के टाइम पर मैं कुंवारी थी, मैं हिंदी सेक्स स्टोरी पढ़ती थी की चुदाई क्या होती है और मर्द कैसे औरत को चोदते हैं। धीरे धीरे वह दिन आ गया या कहींये की रात आ गई, मेरी शादी हुई और मैं ससुराल आई। रात में मुझे सजा कर एक बेड पर बिठा दिया गया, मैं घबरा रही थी क्योंकि मेरी सील टूटने वाली थी।

तभी मेरे पति कमरे में आए और मुझे घुंघट हटाकर चुमने लगे, अपना कुर्ता उतारा और पैजामा भी। मैं पहली बार किसी मर्द से के साथ ऐसे थी, फिर उन्होंने मेरा ब्लाउज खोला और ब्रा के ऊपर से मेरी चूची दबाने लगे।

फिर अपना हाथ अपने लंड पर रखा है जो अंडरवियर के अंदर था, फिर मुझे धीरे-धीरे नंगी करने लगे अब मैं पूरी नंगी थी, शर्म से लाल हो गई थी। मुझे लिटाया और अपना लंड जोकि कुछ खास बड़ा नहीं था ४।५ इंच का ही था, मेरी बुर में डालने लगे। मेरी सिल तो टूटी पर ना तो इतना दर्द हुआ और ना ही वह एहसास हुआ जो एक कुंवारी लड़की सुहागरात के लिए बचा कर रखती है।

धीरे धीरे दिन गुजरने लगे और मैं रोज इसी लंड से चुदने लगी, जो कि मुझे गर्म कर देता था, पर मेरी इच्छा अधूरी रह जाती थी। तभी एक दिन घर में मेरे एक दूर के जेठ जो की आर्मी से रिटायर हो कर एक ट्रेवल एजेंसी चलाते थे, वह अपनी पत्नी के साथ आने वाले थे। वह शादी में नहीं आए क्योंकि उनके बेटे का एक्सीडेंट हो गया था।

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वह मुंबई में रहते थे। शाम हुई और मेरे पति उनको स्टेशन से लेकर घर आ गए, मुझे मेरी ननंद जो १७ साल की थी उसने बोला कि जल्दी से सज कर तैयार हो जाओ भाई साहब और भाभी आ रहे हैं।

मैं नॉर्मल थी, मेरी साडी धुली हुई थी, केवल एक ब्लाउज था जो थोड़ा आगे से खुला था, पति ने बोला कि वही पहन लो और बाहर आ जाओ।

मैं तैयार हूइ और अपनी क्लीवेज को साड़ी के पल्लू से छुपा लिया और बाहर आई। मेरी नजर मेरे जेठ और जेठानी पर थी, जेठकी उम्र ३७ साल के आसपास होगी और जेठानी ३५ की, मैंने उनके पास गई और मेरी जेठानी ने घूंघट उठा कर मुझे देखा और कहा कि राजू तुझे तो एकदम चांद का टुकड़ा मिल गया।

उन्होंने मुझे एक गोल्ड चेन गिफ्ट किया, फिर मैं जेठ के पैर छूने लगी तो उन्होंने मेरे कंधे पकड़ लिये और उठा लिया, उनके हाथों ने एक मर्द का एहसास मुझे पहली बार दिया पर मुझे कोई ख़ास फिलिंग नहीं आई क्योंकि मैंने ऐसा सोचा नहीं था। फिर रात को सब ने खाना खाया मैं फिर जल्दी सो गई। सुबह उठकर चाय बनाई तब तक जेठानी भी उठ गयी और मुझ से किचन में आकर बात करने लगी और पूछा कि कल रात कैसी रही?

मैं शरमा गई और मुह घुमा लिया, फिर उन्होंने कहा कि वह मुझे अपनी बहन समझे और हर बात बता सकती हैं, दोपहर में खाना खाकर मेरी सास सो रही थी, मेरे ससुर और पति ड्यूटी पर गए थे, और जेठ किसी काम से बाहर थे, घर में सिर्फ मैं और मेरी जेठानी थी। फिर हम बात करने लगे और उन्होंने पूछा कि सुहागरात कैसी थी? मैंने बोला कि मैं कुंवारी थी पर मुझे उतना मजा नहीं आया।

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फिर उन्होंने बताया कि जेठ का लंड बहुत बड़ा था जब उनकी सुहागरात हुई थी और यह भी कहा कि बहुत दर्द हुआ था जब वह सुहागरात में चुदी, पर धीरे-धीरे मजा आने लगा और अब वह चुदाई एंजॉय करती है, जेठ का स्टैमिना भी अच्छा है और दोनों जम के चुदाई करते हैं। मैं यह सब सुनकर गीली हो रही थी और मन-ही-मन जेठ की मर्दानगी वाले हाथ को अपने कंधे पर महसूस करने लगी।

तभी शाम को मुझे पता चला कि जेठ ने मुझे और मेरे पति को मुंबई में जाने के लिए फ्लाइट बुक करा दी है और गोवा का हनीमून ट्रिप भी और बोला कि उनका बेटा भी मिल लेगा क्योंकि वह नहीं आ सका। फिर मुंबई जाने की तैयारी होने लगी जेठानी मुझे शॉपिंग ले गई और सेक्सी नाइटी और स्विम सूट खरीदा और बोली कि यह सब पहन के तुम अपना हनीमून मनाना।

फिर हम चारों ने कानपूर से फ्लाइट पकड़ी और मुंबई आ गए। जेठ का फ्लैट था जिस में दो रूम सुर एक होल था,, उन्होंने हमें एक रुम में एडजस्ट किया, में अपने देवर से मिली, फिर मैं नहाने चली गई और नहा कर जेठानी की नाइटी पहन के लेट गई, शायद जेठ को पता नहीं होगा कि मैं हूं, जब रूम में आइ और वह पीछे से नाइटी देखकर रूम में आए तब मेरी नाइटी जांघो पर थी और मैं पैर के बल लेटी थी तो पता नहीं चला कि जेठजी आए हैं।

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