एक अनूठा रिश्ता

Hindi Porn Stories Ek anutha Rishta नमस्ते, में सारिका सिंग अपनी दास्तान आपको सुना रही हूँ. ये मेरी पहली ही सबमिशन होने के कारण काफ़ी ग़लतियाँ हो सकती है, पर उसे छोड़ कर भावनाओ को समझो मेरी यही गुज़ारिश है आप सभी से.

फिलहाल मेरी उमर 34य्र्स है पर देखकर यकीन नही होगा आपको, क्यूंकी मैने अपनी देखभाल बहुत अच्छी तरह से की है. इस उमर में भी मैं 25-28की ही लगती हूँ, हां तोड़ा सा मोटापा ज़रूर आया है पर सही जगह पर चर्बी जमी है इसलिए मुझे उसपर नाज़ है. मेरा फिगर अभी 38सी-28-40 है, है कि नही लाजवाब???????

मेरी 6 साल पहले शादी हुई मिस्टर. पवन सिंग से और में इस घर मे आई. घर मे पवन, उसके पापा मिस्टर.श्याम और मेरी सास म्र्स.कंचन इतने ही लोग थे. मेरी सास बीमार थी, उन्हे परॅलिसिस हुआ था. हमारी शादी के 2 साल पहले उनको ये बीमारी हुई तब से वो बिस्तार से हिल भी नही सकती यही बस यही एक तकलीफ़ थी. पवन काफ़ी अच्छे थे दिखने में इस लिए मैने ये रिश्ता ठुकराया नही (वैसे मैने 5-6 लड़को को ना करदी थी उनके पहेले).

हमारी शादी से मैं काफ़ी खुश थी, और यही लगता था कि पवानब भी मुझसे संतुष्ट था. हमने अपनी सुहाग रात शिमला की हसीन वादियों में मनाई, और खुश होकर घर लौटे. घर आने पर पवन काफ़ी चुप-चुप्से रहने लगे, थोड़े ही दिनो में मैने उसे सुहाग रात की मेहनत रंग लाई और मैं मा बनने वाली हूँ ये खबर उसे बताई. तब वो खुश हुआ और उसने मुझे एक हीरे का पेंडेंट तोहफे में दिया. पर फाइयर्स उसकी खामोशी और सूना पन दिखाई देने लगा. पूछने पर वो कुछ बताता नही था, घर में उसका बर्ताव भी कुछ ठीक नही था. ससुर जी (मिस्टर.श्याम) और सासूजी से बात बात पर झगड़ा मोल लेता था वो.

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बात यहा तक आ गयी थी कि बाप बेटे में बातचीत बंद हो गयी. दिन बीतते गये, महीने गुज़रे अब मैं 4मैने पेट से थी तब अचानक पवन ने मुझसे कहा कि उसे ऑफीस के काम से दुबई जाना पड़ेगा वहाँ का प्रॉजेक्ट उसके अंडर होने के कारण वो उसे टाल नही सकता ऐसे बॉस की ऑर्डर है. मैं ने कहाँ ठीक है सास-ससुर जी को कहकर जाते हैं हम दुबई, तब वो बोला कि मैं उसके साथ नही आ सकती क्यूँ कि वहाँ औरतो के लिए सेफ नही. उपर से वो 6 महीने में लौट आएगा, और उसके जाने के बारे में सासुमा और ससुर जी को ना बताया जाए. दस दिन बाद की उसकी फ्लाइट थी, उसके जाने के दो दिन पहले मैने उसके माता-पिता को ये खबर सुनाई. उन्होने उसे रोकने के लिए कहा पर खुद उससे बात नही की. उनकी और मेरी बात थोड़े ही वो मानने वाला था, दो दिन बाद वो चला गया.

जाने से पहले उसने मुझसे एक चेक़ और एक डॉक्युमेंट पर साइन ली थी, कहाँ की दुबई में उसकी ज़रूरत है. वहाँ से उसने मुझे दो तीन बार फोन किया, अब मैं 6 महीने पेट से थी. तब अचानक से मेरे पेट में दरद चालू हुआ और मुझे डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा, डॉक्टर ने कहा की अबॉर्षन करना पड़ेगा वरना जान को ख़तरा है. इस लिए मेरा बच्चा गिराना पड़ा. ये दुख था ही और उसमे मुझे एक खत मिला, वो भी दुबई से पवन का.

खत देख कर मैं खुश हुई थोड़ी सी, पर उसे खोलते ही मेरी जिंदगी तबाह हो गयी. उसमे पवन ने लिखा था “मैं तुम में कोई रूचि नही रखता, मेरी तुम्हारे साथ शादी मजबूरी थी. अब मुझे मेरा प्यार मिल गया है और मैं उसके साथ खुश हूँ. तुम्हारा बच्चा गिरा ये सुनके दुख हुआ पर यही मंजूर था लगता है. तुम चाहो तो दूसरी शादी करो या मत करो पर अबसे अपना रिश्ता ख़तम. साथ में डाइवोर्स के पेपर भेज रहा हूँ जिस पर मैने तुम्हारे हस्ताक्षार पहले ही लिए थे उस चेक़ के साथ जो ,मैने जाने की पहले साइन करवाया था.”

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यह देखकर मेरे पैरो तले ज़मीन खिसक गई. कोख उजाड़ जाने का गम और उसमे ये डाइवोर्स. अब जाऊ तो कहाँ? क्यूँ कि मैके वाले भी कोई नही था, शादी के पहेले मेरी मा गुजर गयी थी 2 साल पहले और शादी के बाद कुछ ही महीनो मैं पिताजी का देहांत हो गया और उनकी मैं एकलौती बेटी थी. इस समय मुझे मेरे सास –ससूरने काफ़ी आसरा दिया, सारी परेशानियों में उन्होने मुझे होसला दिया.

मैं तो स्यूयिसाइड करने जा रही थी पर ससुर जी ने मेरी जान बचाई. अब घर मे मैं उनका और वो दोनो मेरा ऐसा हम एक- दूसरे का ख़याल रखने लगे. मैं विधवा की सफेद साडी पहनने लगी, मन्गल्सुत्र कब का उतार कर फेंक दिया और सूनी माँग के साथ मैं घर मे रहती थी. बाबूजी की पेन्षन पर हमारा घर चल रहा था, मैं जॉब करना चाहती थी पर उन दोंनो का इनकार था, इसलिए घर ही बैठी रहती थी. घर बैठे-बैठे, खाना पीना, टीवी देखना और आराम करना यही मेरा और ससुर जी का काम था. माजी तो अपने बिस्तार पर पड़ी रहती थी इसलिए वो ना के बराबर ही थी.

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