हवसी ससुर और सेक्सी बहू की चुदाई की सेक्सी कहानी

40 साल की रेखा भैंसॉं और गाए को चारा खिला कर अब घर के आँगन में कपड़े धो रही थी. घग्रा चोली में कपड़े ढोते हुए रेखा बहुत मादक लग रही थी. 40 की उमर में भी उसकी जवानी अपना जलवा दिखा रही थी. पीछे से झाँकति उसकी नंगी चिकनी कमर, और कपड़े ढोते हुए उसके दूध से भरे चुचे और उछालने लगते, और चोली से बाहर आने लगते.

धरम पल ( गाओं का प्रधान और गरम जिस्म का भूखा. रौबदार आदमी, और रेखा का ससुर). रेखा (धरम पल की मादक चिकनी बहू, और मनोज की बीवी).

मनोज (धरम पल का बड़ा बेटा, और रेखा का पति). जग्गू (धरम पल का छ्होटा बेटा).

उसका मुलायम पेट और मोटी गांद घर का काम कर-कर के और भी मादक हो गयी थी. उसका पूरा जिस्म पसीने में भीग गया था, की तभी उसने आवाज़ सुनी.

“आरे मेरा हुक्का लगा दो”.

ये आवाज़ थी घर के सबसे बड़े और सबसे रौबदार मर्द की. रेखा के ससुर धरम पल की. धरम पल गाओं का मुखिया और सबसे अमीर इंसान था. बड़ी कोठी और खूब सारा पैसा, और रेखा जैसी मादक बहू.

वो चाहता तो नौकर रख सकता था. लेकिन घर का सारा काम रेखा ही करती थी. इसलिए उसका बेटा भी कुछ नही बोलता था. आवाज़ सुन रेखा का 10 साल का बेटा अपने दादा जी को हुक्का देने गया.

धरम पल: अर्रे तू नही बेटा अपनी मम्मी को बोल. वो मेरा हुक्का लेके आएगी.

बच्चा: पर दादा जी मम्मी तो कपड़े धो रही है.

धरम पल: कोई बात नही. उसको बोल दे जाके तू की दादा जी बुला रहे है.

वो गया और अपनी मम्मी को बताया की दादा जी हुक्के के लिए उन्हे बुला रहे थे. रेखा मुस्कुराने लगी.

रेखा: ठीक है तू बाहर जाके खेल ले. मैं आती हू.

बच्चा: ठीक है मम्मी.

रेखा खड़ी हुई और अपना पसीने में भीगा हुआ जिस्म ले कर अपने ससुर के पास चली गयी. उउंम, अपनी बड़ी बहू का जिस्म देख कर धरम पल लंड मसालने लगा. उसका मुलायम पेट, उसकी गरम दूध से भारी छ्चाटी, और गुलाबी होंठ. रेखा बैठ गयी और मुस्कुराते हुए हुक्का भरने लगी.

रेखा ( मुस्कुराते हुए): क्या ससुर जी, अभी तो आपने हुक्का पिया था. अब फिरसे?

दादा जी ( रेखा की छ्चाटी घूरते हुए): हुक्का तो बहाना है. मुझे तो तेरा ये जिस्म का रस्स पीना है मेरी जानेमन.

तभी ससुर जी ने हाथ से खींच कर रेखा को अपनी जाँघ पर बिता लिया, और उसका मुलायम पेट नोच ल्लिया.

रेखा: आह अफ.

धरम पल: कहा चली जाती है तू? तेरे बिना तो एक मिनिट भी मुश्किल है मेरी जान.

रेखा ( मुस्कुराते हुए): क्या ससुर जी, पूरी रात तो मेरी चीखें निकाल देते हो. फिर भी मॅन नही भरता?

धरम पल: नही भरता मेरी जान. मॅन करता है पूरा दिन तुझे अपनी जाँघ पर बिता कर तुझे रग़ाद कर छोड़ता राहु.

और तभी ससुर जी ने रेखा की जाँघ पर थप्पड़ मारा और रगड़ने लगे.

रेखा: आउच आह, बहुत शैतान हो गये हो ससुर जी आप. जातीं आ जाएगा.

जातीं रेखा के 10 साल के बेटे का नाम था.

धरम पल: अर्रे तो आने दे. वो भी तो हम दोनो का बेटा है. याद है ना कैसे तुझे मैने बस के अंदर पूरी रात छोड़ा था. तभी तो हमारा ये जातीं पैदा हुआ था.

रेखा शर्मा कर मुस्कुराने लगी.

रेखा: चलो ससुर जी अब जाने दो ना.

धरम पल: अर्रे अभी कहा, अब तो हुक्का गरम हो चुका है. अब जब तक ये ठंडा नही हो जाता, तुझे जाने नही दूँगा.

इससे पहले रेखा कुछ बोलती, ससुर जी ने रेखा को पलंग पर धक्का दिया और उसकी चोली नीचे खींच कर सीधे उसके निपल्स पर काट कर उसका दूध चूसने लगे.

रेखा: आराम से ससुर जी आहह.

ससुर जी अपनी बहू के चुचे चूस्टे नही थे, बल्कि उनको चबा कर निचोढ़ देते थे. वो रेखा के दूध से भरे मोटे चुचे का बुरा हाल कर देते थे.

10 मिनिट तक अपनी बहू के चुचो को चबा कर चूसने के बाद रेखा को लगा की शायद अब ससुर जी का पेट भर गया था. लेकिन अभी तो वो और गरम हुए थे. चुचे पीते ही ससुर जी ने रेखा की चोली खींच कर फेंक दी, और उसका घग्रा भी छूट तक उपर कर दिया.

रेखा की मोटी चिकनी जाँघ और एक-दूं चिकनी रस्स से भारी छूट को देख ससुर जी के मूह में पानी आ गया. वो सीधा मूह लगा के अपनी बहू की चिकनी छूट का रस्स पीने लगे. रेखा की तो आँख बंद हो गयी और उसको भी एहसास होने लगा.

रेखा: आह उफ़फ्फ़ ह्म.

धरम पल: उम्म्म पूछ पूछ.

और चूस्टे-चूस्टे रेखा की चिकनी छूट में ससुर जी ने अपना मोटा लंड घुसेध दिया. रेखा एक-दूं चीख पड़ी.

रेखा: आह मम्मी, आराम से ससुर जी आ.

धरम पल: साली तेरी क़ास्सी हुई छूट मुझे पागल कर देती. ले बहनचोड़ आहह आहह.

ससुर जी ने रेखा की कमर पकड़ी, और अंदर तक झटका मार कर उसकी छूट फाड़ने लगे. वो आहें भरने लगी. अपनी ताक़त से ससुर जी अपनी बहू रेखा की छूट को चियर कर छोड़ रहे थे.

रेखा: आ मम्मी आ. धीरे करो ना आ.

और एक ज़बरदस्त चुदाई के बाद ससुर जी ने अपनी बहू की छूट को अपने वीर्या से भर दिया और शांत हो गये.

रेखा: आह ससुर जी, आपने तो मेरे अंदर ही निकाल दिया.

धरम पल: तो क्या हुआ? तेरे इस मुलायम पेट से एक लड़का तो हो चुका है मेरा. तो एक और लड़का पैदा हो जाएगा.

रेखा मुस्कुरा कर शरमाने लगी.

धरम पल: चल अब पैर दबा मेरे.

रेखा नंगी ही ससुर जी के पैर दबाने लगी और ससुर जी भी उसके चुचो से खेलने लगे. आप तो समझ गये होंगे चुदाई का ये सीन बहुत पहले से चला आ रहा था. धरम पल का अपने घर में बहुत रौब था, और गाओं में भी. पुर गाओं में और घर में उसके सामने कोई फालतू नही बोलता था.

लेकिन धरम पल गरम जिस्म का भूखा था. इस उमर में भी उसमे सांड़ जैसी ताक़त थी, इसलिए छोड़-छोड़ कर अपनी बहू का पानी निकाल देता था. धरम पल के दोनो बेटे चुप-छाप काम करते थे उसके खेतों में. और घर पर बैठा धरम पल अपने बेटे की बीवी को रग़ाद कर छोड़ता था. अपने पति की हालत और धरम पल का रौब देख कर रेखा भी अपने ससुर की पुर जिस्म और मॅन से सेवा करती थी.

अब मनोज ये सब जानता था की नही ये तो पता नही. क्यूंकी मनोज बस रात को कुछ घंटे ही अपनी बीवी के साथ सोता था, और फिर धरम पल उसको खेतों में रखवाली के लिए भेज देता था. अपने ससुर का बिस्तर गरम करके रेखा फिर से कपड़े ढोने लगी. फिर शाम भी हो गयी. दोनो बेटे खेतों से वापस आ गये और खाना खाने लगे. रेखा ने पति और देवर का खाना लगा दिया. धरम खाना अपने रूम में ही खाता था.

रेखा: आप लोग खाना खाओ मैं पापा जी को उनके कमरे में खाना देके आती हू.

आगे की कहानी अगले पार्ट में.

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