लड़की ने चुदाई देख कर अपनी चूत भी शांत की

हेलो दोस्तों, कैसे हो आप सब? उम्मीद करती हू सब ठीक होंगे, और अपनी-अपनी ज़िंदगी में मज़े कर रहे होंगे. मेरा नाम संगीता है. मैं 27 साल की हू.

मेरे फिगर की बात करू तो मेरे बूब्स 34″ के है. मेरी कमर 30″ की, और मेरी गांद का साइज़ 36″ है. मेरा फिगर देख कर आचे-आचे लंड खड़े हो जाते है.

इस वेबसाइट पर मैं हमेशा ही कहानियाँ पढ़ती रहती हू, और मुझे सभी कहानियाँ बहुत अची लगती है. तो इसलिए मैने सोचा की मैं अपना एक्सपीरियेन्स भी आप सब लोगों के साथ शेर करू.

बात 4 साल पहले की है, जब मेरी दीदी की न्यू-न्यू शादी हुई थी. शादी के बाद मेरी दीदी और मेरे जीजू दोनो देल्ही में ही प्राइवेट जॉब करते थे. जीजू की बाकी फॅमिली हरयाणा में रहती थी.

मेरी दीदी का फिगर इतना अछा नही है, पर मेरे जीजू बहुत ही ज़्यादा हॅंडसम है. ज़्यादा बातें ना करते हुए मैं सीधा स्टोरी पर आती हू.

दीदी की शादी के कुछ महीने बाद मैं उनसे मिलने उनके घर देल्ही गयी. मैं अपनी दीदी और जीजू को मिल कर बहुत ही ज़्यादा खुश हुई. जीजू दीदी का बहुत ध्यान रख रहे थे, जो देख कर मुझे बहुत अछा लगा.

उनके घर में दो बेडरूम थे. एक जिसमे वो दोनो रहते थे, और दूसरा उन्होने मुझे रहने के लिए दे दिया था. दोनो बेडरूम एक-दूसरे के पास-पास ही थे.

मैं वाहा पहुँची, हमने बातें की, आपस में मस्ती की, और फिर हम खाना खा कर अपने-अपने बेडरूम में सोने चले गये.

मैं सोने तो आ गयी, पर मुझे नींद नही आ रही थी. तो मैं ऐसे ही अपना फोन चलाने लगी. मैं अपना फोन चलाने में मस्त थी.

फिर थोड़ी देर बाद मैने कुछ आवाज़ सुनी. आवाज़ कुछ अजीब सी थी. जब मैने ध्यान से सुना, तो मुझे समझ लगा की शायद जीजू और दीदी आपस में सेक्स कर रहे थे.

उनकी आवाज़ सुन कर मुझे भी कुछ अजीब सा महसूस होने लगा. मेरा भी सेक्स करने को मांन करने लगा था. मुझे पता ही नही चला, की कब मेरा हाथ मेरी पनटी के अंदर खुद ही घुस गया. मैं अपनी सबसे बड़ी वाली उंगली अपनी छूट के अंदर-बाहर करने लगी.

उंगली अंदर-बहार करने के साथ-साथ मैने अपने बूब्स को अपनी त-शर्ट के उपर से मसाला शुरू कर दिया. दोस्तों मुझे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आने लगा. मैं सोचने लगी की अगर दीदी की जगह मैं होती, तो आज मज़ा ही आ जाता.

थोड़ी देर मैने ऐसे ही अपनी छूट के मज़े लिए. पर मेरा मॅन अभी भी शांत नही हो रहा था. शायद मेरी उंगली मेरी छूट को शांत नही कर पा रही थी, तो मैने सोचा की मैं किचन में जेया कर कोई ऐसी चीज़ देखती हू, जो मेरी छूट के अंदर जेया कर उसको शांत कर सके.

मैं धीरे से बेड से नीचे उतरी, और ज़मीन पर हल्के हल्के पैर रखते हुए दरवाज़ा खोल कर किचन में जाने लगी. किचन का रास्ता हॉल में से होकर जाता था, और हॉल में ही दोनो रूम्स के डोर खोलते थे.

मैं हल्के-हल्के पैर ज़मीन पर रखते हुए हॉल में पहुँच गयी, तो मैने देखा की दीदी के रूम का दरवाज़ा हल्का सा खुला हुआ था. उन्होने रूम की लाइट ओं ही रखी थी, पर हॉल की लाइट ऑफ थी. मेरा मॅन होने लगा की मैं दोनो को आपस में सेक्स करते हुए देखु.

फिर मैं दरवाज़े से हल्का पीछे हॅट कर अंदर देखने की कोशिश करने लगी. मैने ध्यान से देखा तो दीदी जीजू के लंड पर बैठ कर उपर-नीचे हो रही थी, और जीजू दीदी के दोनो बूब्स को पकड़ कर मसल रहे थे.

वो सब देख कर मेरा और भी ज़्यादा बुरा हाल हो गया. मैने अपना हाथ दोबारा अपनी पनटी के अंदर डाल लिया, और अपनी छूट को अपने हाथ से मसालने लग गयी. मॅन ही मॅन मैं सोच रही थी, की काश दीदी की जगह वाहा मैं होती. वो थोड़ी देर ऐसे ही आपस में सेक्स करते रहे.

फिर जीजू ने दीदी को अपने लंड के उपर से हटाया. दीदी जैसे ही जीजू के लंड के उपर से उतरी, तो मैने देखा की जीजू का लंड एक-दूं खड़ा था. उनका लंड मोटा और बहुत ज़्यादा लंबा था, जिसे देख कर मेरे मूह में पानी आ गया.

दीदी लंड से नीचे उतार गयी, और जीजू वही लेते रहे. फिर दीदी ने जीजू के लंड पर पहले हल्का सा किस किया, और फिर उसको अपने मूह में लेकर चूसने लग गयी. दीदी पागलों की तरह लंड को चूज़ जेया रही थी. मैं ये सब देख कर बहुत पागल हो रही थी.

वो सब देखने से पहले मैने किसी को ऐसे सेक्स करते हुए नही देखा था, और ना ही मैने उससे पहले कभी सेक्स किया था. बस अपनी दोस्तों से सुना था जिन्होने अपने बाय्फरेंड्स के साथ सेक्स किया था. या फिर मैने गंदी वीडियोस में देखा था. पर वो सब मैं पहली बार ऐसे देख रही थी. मुझे सब बहुत ही अछा लगा रहा था.

दीदी लंड को तब तक चूस्टी रही, जब तक उनके लिप्स की पूरी लिपस्टिक नही निकल गयी. फिर जीजू ने दीदी को बेड से नीचे उतरा, और दीदी की गांद में अपना लंड डालने लगे पीछे से. जीजू ने एक बार में ही अपना पूरा लंड दीदी की गांद में डाल दिया.

लंड डालते टाइम जीजू ने दीदी के मूह पर अपना हाथ रखा हुआ था. जैसे ही उन्होने अपना लंड उनकी गांद के अंदर डाला, तो दीदी की आँखें उल्टी हो गयी, जैसे उनको बहुत दर्द हो रहा हो.

पर जीजू बेरहें बन कर दीदी की गांद छोड़ते रहे. कुछ देर के बाद दीदी का दर्द शांत हुआ तो वो भी उनका साथ देने लग गयी. इस साइड मैं भी अपने आप को शांत करने की कोशिश कर रही थी.

मैं अपनी दोनो उंगलियाँ अपनी छूट के अंदर-बाहर कर रही थी. 10 मिनिट बाद जीजू ने अपना लंड गांद से बाहर निकाला, और अपने हाथ से उसको आयेज-पीछे करने लग गये. इतने में दीदी अपने दोनो घुटनों के सहारे ज़मीन पर बैठ गयी.

दीदी का फेस जीजू के लंड के बिल्कुल सामने था. वो अपनी दोनो आँखें बंद करके सिर्फ़ लंड को अंदर-बाहर कर रहे थे. थोड़ी देर अंदर-बाहर करने के बाद जीजू के लंड ने पानी छ्चोढ़ दिया.

जीजू के लंड से निकला वाइट रंग का पानी सीधा जेया कर दीदी के फेस पर गिरा. दीदी अपनी जीभ से अपने गालों पर लगा हुआ पानी चाटने लग गयी.

थोड़ी देर अपनी जीभ मूह पर घूमने के बाद दीदी ने जीजू का लंड मूह में लिया, और अपनी जीभ से जीजू के लंड पर लगा हुआ हल्का सा बाकी पानी सॉफ कर दिया.

फिर दोनो ने एक-दूसरे को किस किया, और वैसे ही बेड पर लेट गये. वो तो शांत हो गये थे, पर मैं अभी भी शांत नही हुई थी. मैं किचन में गयी, और वाहा से मैने एक लंबा और मोटा क्यूकमबर लिया, और वापस अपने बेडरूम में आ गयी.

फिर मैने भी अपने पुर कपड़े उतार दिए. कपड़े उतारने के बाद मैं क्यूकमबर को अपनी छूट में डाल कर अंदर बाहर करने लगी, और जो कुछ मैने वाहा देखा वो सब सोच कर अपने आप को शांत करने लगी.

थोड़ी देर बाद मेरी छूट ने भी पानी छोढ़ दिया, और मुझे तोड़ा अछा लगा. पर मैं वो सब बिल्कुल भी भूल नही पा रही थी.

चलिए मैं अपनी स्टोरी यही ख़तम करती हू. उम्मीद करती हू की आप सब लोगों को मेरी ये स्टोरी बहुत अची लगी होगी. इसका नेक्स्ट पार्ट भी मैं जल्दी ही आप सब लोगों के सामने लेकर अवँगी.

थॅंक योउ दोस्तों.

यह कहानी भी पड़े  एक कुंवारी एक कुंवारा-1


error: Content is protected !!