गुड्डे गुड़िया का खेल

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक बार फिर हाजिर हूँ एक नई कहानी के साथ दोस्तो ये कहानी एक ऐसी नाबालिग लड़की की कहानी है जिसके साथ कच्ची उम्र मे सेक्स का एक हादसा हो गया तो दोस्तो ये कहानी उसी की ज़ुबानी …………………. मैं अपने माता पिता की इकलौती संतान हूँ जब पैदा हुई तो घर वाले बहुत खुश हुए क्योंकि मैं शादी के आठ साल बाद पैदा हुई थी घर वालों की आंख का तारा हूँ बचपन से ही बहुत सुंदर हूँ गोल मटोल चेहरे ऊपर नीली आँखें गोरा रंग और गाल ऐसे लाल जैसे कंधारकी अनार हूँ देखने वाले पहली नज़र में मुझे एक सुंदर पठान समझते हैं

जब भी कोई मेहमान हमारे घर आता तो वह निश्चित रूप से मुझे गोद में उठा लेता था क्योंकि मैं बिल्कुल गुड़िया की तरह लगती थी

जब मैं चार साल की हुई तो घर वालों ने मुझे शहर का सबसे अच्छा स्कूल में भर्ती कराया, मैं कक्षा की सबसे हसीन लड़की थी एक तो हसीन थी और ऊपर से ज़हीन भी, इसलिए क्लास की सब टीचर्स मुझे बहुत पसंद करती थीं

जब मैं तीसरी कक्षा में आई तो मेरे मोहल्ले की एक लड़की ने मेरे क्लास में प्रवेश किया उसका नाम तना था कुछ ही दिनों में हम सहलयाँ बन गई और खेलने के लिए एक घर आने जाने लगीं, जब भी उनके घर जाती तो और तना छत पर खेला करती थी उनकी छत पर एक पुरानी चारपाई जिसे हमने दीवार के साथ खड़ा कर लिया था और हमने उस पर एक बड़ी सी चादर डाल कर उसे चारों ओर से बंद कर एक छोटा सा घर बनाया हुआ था इस घर में हम अपनी गुड़िया से खेला करती थी मेरी सहेली का भाई भी कभी कभी हमारे साथ खेला करता था वह तना तीन चार साल बड़ा था,

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एक दिन अपनी एक किताब वहाँ क्लास मे मैं भूल आई थी मैं गेट पर खड़ी पापा का इंतज़ार कर रही थी वह मुझे लेने अभी तक नहीं पहुंचे थे स्कूल के अधिक बच्चे जा चुके थे

अचानक मुझे अपनी किताब याद आई में तुरंत अपनी कक्षा में गई और अपनी किताब उठाकर क्लास से बाहर निकली तो मेरी नज़र सामने दसवीं कक्षा की खिड़की से पड़ी तो वहाँ एक लड़का और एक लड़की एक दूसरे से चुंबन कर रहे थे मुझे बहुत अजीब लगा लेकिन वहाँ रुकी नहीं और सीधे गेट पर आ गई मेरे पापा इतनी देर में आ चुके थे मैं उनके साथ घर चली आई लेकिन यह घटना जैसे मेरे मन पर अंकित होकर रह गई थी जब भी किसी फिल्म में चुंबन सीन देखती तो मेरी फीलिंग्स अजीब सी हो जाती लेकिन समझने में असमर्थ थी क्योंकि बचपन के दिन थे सेक्स के क ख भी नहीं जानती थी ऐसे ही तीन चार साल बीत गए लेकिन हमारी एक दूसरे के घर जाकर खेलने वाली आदत नहीं बदली – एक दिन हमने अपनी गुड़िया की शादी की, हम जब भी नई गुड़िया ख़रीदतें तो उनकी आपस में शादी जरूर करती थीं शादी वाले दिन हमने केक, पेस्ट्री आदि तना के भाई से मंगवाया था तरह वह भी शादी में शरीक हो जाता था

उसकी उम्र लगभग पंद्रह साल हो चुकी थी और मैं भी उस समय बारह साल की हो चुकी थी एक दिन हम गुड़िया की शादी की तो तना के भाई ने कहा कि गुड़िया की शादी तो बहुत बार हो चुकी है अब अगली बार हम एक दूसरे शादी करेंगे और आपस में खेलेंगे

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बचपन के दिन थे इतना समझ नहीं थी और न ही शादी की मूल वास्तविकता से परिचित थीं इसलिए हम मान गईं

तनाके भाई ने कहा कि संडे हम शादी शादी खेलेंगे –

संडे वाले दिन तना के घर गई तो तना और उसके भाई सुनी मुझे लेकर छत पर चले गये छत पर हम अपने विशिष्ट कमरे में चले गए जो हमने चारपाई से बनाया था सनी ने मुझसे कहा कि आज मैं और तुम शादी करेंगे आज तुम तना की भाभी बनो और तना आज के बाद तुम्हारी सेवा किया करेगी – बचपन की बातें आज याद आती है तो खुद पर हंसी आती है कि बचपन भी बस बचपन होता है लेकिन बचपन की उस घटना ने मेरी जिंदगी बदल कर रख दी थी और पहली बार सेक्स के मज़े से परिचित हुआ था कि बहुत दर्दनाक और बुरा एक्सपीरियेन्स था –

हाँ तो बात हो रही थी बचपन की उस घटना तो कहानी की ओर आती हूँ – सनी ने मुझसे पूछा कि तुम मुझसे शादी करोगी तो मैंने तना की ओर देखा तो सनी ने कहा कि बहन भाई के बीच शादी नहीं होती इसलिए तुम्हें ही मुझसे शादी करनी पड़ेगी, मैंने कहा ठीक है कि आप मुझसे ही शादी कर लो –

जब हम गुड़िया और गुड्डे शादी करते थे तो गुड्डे से गुड़िया के गले में एक हार पहना दिया करती थीं और केक और पेस्ट्री खाकर गुड़िया और गुड्डे की छुट्टी कर देती थीं – अगर मेरा गुड्डा होता तो मैं उसे गुड़िया केसाथ ले आती और अगर मेरी गुड़िया होती वहाँ छोड़ आती –

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