गायत्री को गाओ वाले के सामने चोदा

अगले सुबह 10 ब्जे हम रेडी हो गये. सपोर्ट करने वेल सब 25 मर्द साथ मे थे. मा भी रेडी थी. घग्रा चोली मे उसका चमकता हुआ जिस्म उन्न मर्दो का लंड खड़ा कर रहा था. सब होंठ चबा कर मा को घूर रहे थे और मा शरम से मूह झुका कर खड़े थे.

“साली ये प्रधान बन गयी ना इसको तो घ्र बुला कर चड़ौँगा भंचोड़ क्या माल है.”

“मई तो यही पर छोड़ डू इसको उउम्म्म्ममम…”

“इसकी तो चोली फाड़ कर निपल काट डू सारा दूध पी लू इसका”

अभी रॅली शुरू भी नही हुई थी और इन्न मर्दो की हवस ब्दने लगी. तो मैने इनको मोटीवेट करने के लिए.

मई- गत्री ये सब तुम्हार्र सपोर्टर है,इनसे एकबार आचे से गले मिलो.

ये सुन्न कर वो सब एकद्ूम खुश हो गये और मा शर्मा कर मुस्कुराने लगी.

मा- जी..जैसा आप बोले.

मा धीरे धीरे उसके सामने गयी और-

मई- अरे जागू भाई प्रधान से आचे से गले मिल ये तुम्हारी होने वाली पर्धन है.

जग्गू खुश हो गया और कासके गत्री को गले लगा लिया.

मा- (मॅन ही मॅन) हुहह..आहूहह….आहिहहुऊम्म्म्मम..

उसने कासके मा की कमर नोच कर पकड़ ली और चुचे अपनी चेस्ट मे दबा लिए उसको देख कर बाकी का लंड और खड़ा होने लगा. 25 मर्दो से मिलने का बाद मा सबका लंड अपनी छूट पर महसूष कर चुकी थी. उसकी चिकनी कमर को सबने सही से नोच कर पकड़ा था.

जब मा ने उन्न सबको देखा तो सब बेशर्मी से होंठ चबा कर घूर रहे थे और एक ने फ्लाइयिंग किस भी डेडी. मा शरमाती हुई वापस आ गयी मेरे पास और रॅली शुरू हो गयी. जीप आ गयी और उपर से खुली थी जिसमे से मा को खड़े होके हाथ हिलना था.

हम निकल पड़े जीप चलने लगी कुछ लोग उपर आ गये और बाकी जीप के पीछे पीछे नारे लगा कर. घग्रा चोली मे मा सामने खड़ी थी. और तभी मा को अपनी मोटी उठी हुई गांद पर एक मोटा लंड महसूस हुआ और फिर 2 हाथ उसकी चिकनी कमर नोचते हुए उसके मुलयूं पेट पर आ गये और कासके पकड़ लिया.

मा साँझ गयी की मई पीछे खड़ा और मुस्कुराने लगी. वो थोड़ी और पीछे हो गयी और मेरा लंड अपनी गांद से मसालने लगी लका लका और लोगो को हाथ भी हिलती रही. उउम्म्म्मम..मॅन तो कर रहा था गत्री का मुलयूं पेट नोच कर वही छोड़ डू साली को पर कंट्रोल करना था.

4-5 घंटे हो गये मा सब मर्दो से गले मिली और अपने जिस्म को च्छुने का सबको मोका दिया. अब डोफेर हो गयी थी और गाओ के हॉल मे सब जमा हो गये और रेस्ट करने लगे. लेकिन सुबह से मा के जिस्म को च्छू च्छू कर मेरा लोड्‍ा अब बुरी तरह फदाक रहा था. मा भी त्क गयी थी पर वो जानती थी की उसका शैतान उसका आराम हराम करने वाला है.

मई हॉल के उपर बने एक हाल मे मा को जाने को बोला और वो मुस्कुराती हुई चली गयी. सब खाना खाने लगे और मई उपर आ गया. उपर आते ही गत्री मेरा वेट कर रही थी. मेरे पास आई और मेरे होंठ पर किस करके मेरा लंड मसालने लगी…उउम्म्म्ममममममममममम. गुलाब जैसे होंठ चबा कर मैने भी मा की कसी हुई फाक मसल दी…उउंम्म..

10 मिनिट तक मैने आचे से मा के होंठ चबा कर काट लिए और मा ने मेरा मोटा लंड और मैने उनकी गुलाबी कसी हुई फाक गरम करदी. देरी ना करते हुए मा ने अपना घग्रा खोल दिया और मेरा फड़कता हुआ लंड देख कर मा उसको अपनी गरम छूट प मसालने लगी. और अगले ही झटके मे लंड मा की फाक को चीरते हुआ घुस गया अंदर.

मा- आआआआआआआआआआआआआआआआआआआहहुहह…मॅर गयी…हुहह…..आअहहुहह आअहह..

काप्त हुई टॅंगो ने से मा ने मेरा लंड अंदर तक एक ही बार मिस्टर ले लिया और मेरी मशीन चालू हो गयी. हाफ्ते हुई गत्री को पकड़ कर मेरे लंड मा को छोड़ना शुरू कर दिया.

आहह..आहह..बेटा आराम से .आ..हह..हुहह..हुहह..उम्म्म्म

मम्मी…सुबह से भूका हू..तुझे खा जौंगा..आहूहह….हुहह

फचह…फचह…फच…फच..फचह..घप्प्प्प..घप्प्प्प..घपाआ

आआआआआआआआआआआआआहह….मरड़चोड़…..आओउम्म्म्ममममममम..

ग्घहप्पा….घपाआ..घप्प्प्प..घप्पाा..ग्घहप्प्प्प…घपाा…घप्प्प्प्प…ग्घहपाआ

फफच..फच..फच..फच्छ….धप्पाआ..द्धप्प्प….धप्प्पाा…द्धप्प्प्प

फचह…फचह…फच…फच..फचह..घप्प्प्प..घप्प्प्प..घपाआ

ग्घहप्पा….घपाआ..घप्प्प्प..घप्पाा..ग्घहप्प्प्प…घपाा…घप्प्प्प्प…ग्घहपाआ

फफच..फच..फच..फच्छ….धप्पाआ..द्धप्प्प….धप्प्पाा…द्धप्प्प्प

मई सुबह से भूका था और मैने मा पटक पटक कर छोड़ कर खुद को शांत कर लिया. एक भयांकेर चुदाई के बाद होने वाली प्रधान वही बुरी तरह त्क कर लेट गयी. उसकी छूट और मूह मे मेरा वीरये बाहर चुका था. गाते लगा कर अपनी नंगी गत्री को पकड़ कर मई भी लेट गया.

2 घंटे बाद दोनो नीचे आए. कटा हुआ होंठ अपनी कसी हुई गुलाबी छूट मे मेरा भरा हुआ वीरये लेके मा वापस नीचे आ गयी. उसकी हालत देख कर सब साँझ गये की उपर क्या हालत हो गयी इसकी.

“होंठ देख मेडम का, लगता है यूयेसेस सुनील ने सही से चबा कर चूसा है”

“भेंचो..पेट देख कैसा लाल पद गया है”

“आबे जब इतनी चिकनी मादक औरत होगी तो कोई कैसे शांत हो जाएगे, लगता है सुनील सही से रग़ाद कर छोड़ा है मेडम को”

“मई होता तो मेडम को गाड़ी मे ही छोड़ देता हुउहहूंम्म.उम्म्म्ममम”

सारे मर्द अपनी ह्वास बता रहे थे. शरमाती हुई गत्री अब गाओ के लिए फिर से निकल पड़ी. मई तो अभी शांत था इश्स बार मैने मा के पीछे 2 मर्दो को खड़ा कर दिया. मा ने देखा तो कुछ ना बोली वो जानती थी ये सब जिस्म के भूके और अपने बिस्तर पर पटक पटक कर छोड़ना चाहते है.

मा बस मुस्कुरा दी, वो जानती थी जीतने के लिए इनको अपने जिस्म का सुख देना ज़रूरी है और ये खुद ही इतने भरे बेते है. वो सोच ही रही थी एक हाथ उसकी कमर पर आ गया और एक गांद मसालने लगा. गत्री मॅन ही मॅन मुस्कुराने लगी और अंजान बनने लगी. कुछ दूउर और जीप आयेज बदी की पीछे खड़े 2 आदमियो मे से एक ने उसकी कमर झटके से भीच दी.

मा- (मॅन ही मॅन) आहहूूच.हुहह..हह

वो दोनो मा का माखन जैसा जिस्म पकड़ कर और पागल हो गये और उनकी हरकत ब्दने लगी. मा नॉर्मल होके सबको हाथ हिला रही थी और वो दोनो कसम से मा की क्मर को क्या भीच कर नोच रहे थे. जैसे साला अभी मा की चिकनी कमर को नोच कर खा जाएँगे.

इतने डोफेर नही हो गयी दोनो ने मा का पेट और कमर छ्चोड़ा नही और नीचे आते ही मा ने रहट की सास ली. मा का पेट और कमर पुउरे लाल पड़े थे. जाते हुए उन्न दोनो ने मा की गांद भीच दी और मा को लाइन मारते हुए निकल गये. मा ने शर्मा कर मूह नीचे कर लिया.

मई- क्या बात है मेरी जान आज तो तेरी मुलयूं खाल लाल कर दी.

मा- (शरमाते हुए) अब मई क्या करती वोट भी तो चाहिए ना.

मई (मा की कमर मसालते हुए) वोट या फिर तेरी भूक.

तो मा शर्मा कर मुस्कुराने लगी.

मा- अब तू तो खड़ा हुआ नही मेरे पीछे वरना मई अपनी भूक भी शांत कर लेती.

मा- (मेरी च्चती मसालते हुए) चल आजा मेरी जान उपर चलते है, मई जानती हू तू भी बहोट भूका है अभी. मेरा जिस्म चबा चबा कर खाने के बाद तुझे शांति मिलेगी.

मई- क्या बात है, आज खाना नही खाएगी?

मा- (मेरा लंड मसालते हुए) जब तू इसका वीरये मेरे मूह मे पीला देता है ना, मेरी भूक शांत हो जाती है. बहोट ताक़त है इसमे.

बात तो सही थी गत्री की ताक़त तो बहोट थी मेरे वीरये मे सारी भूक मिटा देता होगा गत्री की. फिर हम उपर गये और मा ने मेरा लंड निकल कर चूसना शुरू कर दिया.

मा- उउम्म्म्म..प्पउक्च…ससपरर..स्परर…ससपरर….ससपरर…प्पउक्च

मई- आहहूऊम्म्म्मममममममम..मेरी गत्री….क्या कमाल है तू..उउम्म्म्ममममाअहह…उउफ़फ्फ़..

मा- उउम्म्म्म..प्पउक्च..स्परर..ससपरर..स्परर..प्पुउच्च..प्पुच…अयू…

स्प्सरर..स्परर..स्प्स्परर्र..स्प्सरर…गल्लप्प्प्प्प..ग्गलपप्प…ग्गलपप्प…उउंम्म…प्पुच

औकच्छ..प्पुउचह..प्पउक्च…ससपरर..ससपरर…स्सपप्रर..प्पउक्च..

उउम्म्म्मम….ग्गलपप्प्प्प..गल्लप्प्प..ग्गलपप्प..प्पउक्च

मैने लंड मा के गले तक घुसेड दिया और वो किसी भूकि कुटिया की टरफ़ लंड चूस चूस कर उसकी राल पीने लगी. मा का मूह मेरे लंड की राल से बाहर गया पर वो सारा राल गतक गयी और मेरा लंड पूरा त्नन कर दिया.

मा ने इतना आच लंड चूसा की मैने ई अंदर तक झटका मार कर लंड घुसेड दिया, मा की आखे बाहर हो गयी और अब मई उनका मूह छोड़ने लगा.

फफचह…फक्चह…फच…फच…स्सपप्रर.सस्रर्प्प्प..स्परर…फफचह

फचह…फचह…फच…फच..फचह..घप्प्प्प..घप्प्प्प..घपाआ

फफचह…घप्पा…घप्प्प…फच..फफचूम्म….म्‍म्म्मममम

उम्म्म्म..गुलाब जैसे होंठ को रगड़ता हुआ मेरा मोटा लंड मा के मूह को छोड़ने लगा और एक तेज धार के साथ मेरा सारा वीरये मा के गले मे निकल गया….उम्म्म्ममममममममाआहहुऊंम्म..

क्या मज़ेदार एहसास था. मा मेरे सारा वीरये गतक गयी. उम्म्म्मम…मा ने मेरा लंड पकड़ा और प्यार से चाट चाट कर उसको सॉफ करने लगी. मेरे लंड पर लगा हुआ वीरये भी मा ने पूरा चाट लिया और एकद्ूम खुश हो गयी. फिर मा के जिस्म से लिपट कर मई वही लेट गया और मा भी मेरे से चिपक कर वही लेट गयी.

यूयेसेस दिन का प्रगरममा आछा रहा. फिर हम रात को घ्र आ गये और मई गत्री को अपनी बाहो मे बाहर कर लेट गया.

मई- (मा की दूध से भारी गरम च्चती को मसालते हुए) गत्री अब तुझे गाओ का हर बछहे से लेके जवान पहचान गया है. अब तुझे जीतने से कोई नही रोक सकता.

मा- हन मेरी जान, सब के सब मेरे जिस्म के भूके है.

मई- क्यू नही होंगे, तू चीज़ ही एसी है जिसको देख लंड से आग निकलने लगती है.

मा- हन तभी तो वो तेरे सपोर्टर मुझे टच करते रहते है.

मई- चिंता मत कर जीतने के बाद तुझे इन्न सबसे चड़वौनगा. ये सब हवस के भूके कुत्ते तुझे कुटिया की तरह छोड़ छोड़ कर पागल कर देंगे.

मा- (शरमाते हुए) क्या तुम भी..

मा- आछा सुनो ना..

मई- हन बोल?

मा- मुझे नये ब्लाउस बनवाने है, वो मई वोट माँगे जाती हू तब कर लिए. सोच रही थी कोई नया डिज़ाइन बनवा लू.

मई- (मा के ब्लाउस मे हाथ घुसा चुचा भीचते हुए) मेरी जान..इतनी तो मस्त है तू और क्या बनवाएगी.

मा- आहहुउऊुुुुुुुुउउम्म्म्ममम…हुहह..हुहह…वो…कुछ नये डिज़ाइन देखे थे बस वही.

मई- (मा का गुलाबी निपल नोचते हुए) आछा. या फिर उन्न सब कुत्टो को देख कर तेरे जिस्म की गर्मी बद्ड गयी है.

मा- हाआआआआआआआअहहूच्च…हुहह…हुहह…मेरी जान…मेरी गर्मी तो तू है बस…

मई जनता था जब हवस से भरे मर्द गत्री का जिस्म घूरते थे तो गत्री बहोट मजा आता था. और मई कुछ दीनो के एलेक्षन मे पापेरवोरक मे बिज़ी होने वाला था तो ये भी हो सकता था की गत्री इश्स बीच गत्री को ये हवस के भूके भेड़िए जो सपोर्टर बनके इसके आस-पास घूम रहे है गत्री को कुटिया बना कर पटक पटक कर छोड़ दे.

मई- आछा…और मेरी गर्मी को निकलेगा.

मा- (मेरा लंड मसालते हुए) मई निकालूंगी मेरी जान, मई तो बस तेरी ही हू.

मा ने अपना घग्रा नीचे करा…उम्म्म्म..उसकी गीली छूट मे मैने लंड लगाया और झटका मार कर अंदर घुसेड दिया.

मा-आआआआआआआआआआआआआआआआआआहह..उउफफफफफफफफफफफ्फ़……आह..हह…मम्मी…

और मा की यूयेसेस गरम कसी हुई छूट मे लंड घुसेड कर सो गया. अगले दिन मा नहा धो कर त्यार हो गयी और-

मा- सुनील चल ना मुझे टेलर के पास जाना है.

मई यूयेसेस वक़्त नींद मे था. मैने मा को बोला की खुद ही चल जाए. वेसए तो मा मुझे लेके ही जाती थी की तेरे बिना नही जवँगी पर इश्स बार वो ठीक है बोल कर जाने लगी. इश्स बार उसने घग्रा चोली नही बल्कि सारी पहें कर गयी थी. नाभि के नीचे तक सारी और पीछे एक डोरी वाला ब्लाउस. और पल्लू के नीचे उसका मुलयूं चिकना पेट.

11 ब्ज चुके थे और धूप भी निकल गयी थी. गाओ मे एक ही टेलर की दुकान थी जो कम्म से कम्म 10 केयेम दूउर थी. गाओ की सब औरते वही पर जाती थी या फिर यूयेसेस दुकान का टेलर मुन्ना सब कर घर आके नाप लेके जाता था. अब वाहा तक कोई बस नही थी बस बेल गाड़ी चलती थी उसी मे बेत कर सब जाते थे.

तभी दूर से एक बेलगाड़ी आती हुई दिखाई दी. पास आई तो उसमे सब मर्द भरे पड़े थे.

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