गांव की मौसी की चुदाई कहानी

Gaav ki mausi ki chudai kahani मेरा नाम दीपक है और मैं शहर जो हमारे गांव से लगा हुआ है, में एक ( जगत) मौसी के घर मैं रहकर पढ़ता हूँ. घर मैं एक मौसी, भाई और भाभी है मौसी की उमर कोई 47 साल की है. भैया की उमर 25 साल है और भाभी की 23 साल. मैं 20 साल का हॅट्टा कॅट्टा युवक हूँ गाँव का काम ठेकेदार सम्हालता है. पर मौसाजी की म्रत्यु के बाद भैया गाँव में ठेकेदार की मदद करते हैं और सप्ताहान्त पर आते हैं. इन लोगो के पास काफ़ी पैसा था और एक कार भी थी और काफ़ी ज़मीन जायदाद. मैं 20 साल का हो चुका था और पिछले 6-7 सालो से मूठ मार कर गुज़ारा कर रहा था. मुझे भारी बदन की औरते बहुत पसंद थी शायद यही वजह थी कि मुझे बड़ी उमर की औरते भी पसंद थी खास कर के औरत का भारी चूतड़ों पर तो मैं फिदा था. और मेरे घर मैं तो दो दो औरत जिनके चूतड़ बहुत भारी थे.

मौसी जो की 47 की हो चुकी थी उनका फिगर कोई 38 34 42 था. चूचियाँ और चूतड़ बहुत भारी थे साथ ही पेट भी हलका उभरा सा था और नाभी बहुत गहरी थी. भाभी का फिगर भी कुछ कम नही था 36 30 40. भाभी भी काफ़ी भारी चूतडो की मालकिन थी. जब से शादी हो कर आई थी तब से उनके चूतड़ और चूचियों मैं और भी उभार आ रहा था. मैं तो पूरे दिन मौसी और भाभी के चूतडो को ही निहारा करता और दिन मैं 4-5 बार मूठ मार कर अपना रस बर्बाद कर देता था. भैया की शादी को 2 साल हो चुके थे पर उनके कोई संतान नही थी. भाबी बहुत ही अच्छी थी और मुझे बहुत प्यार करती थी और मेरा बहुत ख़याल भी रखती थी. भैया सप्ताहान्त पर आते और भैया भाभी काफ़ी अपना समय अपने कमरे मैं ही बिताते थे. मौसी मौसाजी के जाने से पहले तो बहुत रंग बिरंगे कपड़े पहनती थी पर मौसाजी के बाद क्योंकि गाँव मैं रह रहे थे इसलिए जायदातर साड़ी ही पहनती थी कभी कभी चोली और लहंगा पहन लेती थी पर वो भी एक दम सीदा साधा. पर चोली लहँगे मैं मौसी एक दम गजब लगती थी. उनकी भारी भरकम चूचियाँ उसके अंदर समाँ ही नही पाती थी वो अपनी चुनरी से अपनी विशाल छातियों को छुपाने की नाकाम कोशिश करती थी. और उनका चूतड़ लहँगे को फाड़ कर भर आने को तैयार रहता इतना कसा होता

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था उनके चूतड़ो पर. वो 47 की हो चुकी थी पर क्योंकि उन्होने घर मैं शुरू से ही काफ़ी मेहनत की थी इसलिए उनके अंगे अभी ढीले नही पड़े थे और उनमे एक कसाव अभी भी था यहाँ तक चूचियाँ भी भारी थी पर ढीली नही हुई थी. उनकी चोली में से झाँकती हुई चूचियाँ ये सॉफ बयान करती थी. दो इतने खूबसूरत औरते मेरे घर मैं थी और मुझे मूठ मार कर काम चलाना पड़ता था कभी कभी तो मुझे बड़ा गुस्सा आता और सोचा मौसी और भाभी पकड़कर चोद डालूँ पर मन मार कर रह जाता था. भाभी भी शहर की थी पर उन्होने अपने आप को गाँव मैं अच्छे से ढाल लिया था. शहर मैं तो पश्चमी ढंग के कपड़े पहनती थी पर अब घर मैं सिर्फ़ साड़ी या घाघरा चोली ही पहनती थी. पर उनके कपड़े मौसी की तरह सादे नही होते थे और उनके ब्लाउज़ के कट बहुत ही गहरा होता था जिससे से उनकी 1/4 चूचियाँ बाहर झाँकती थी और उनकी दोनो चूचियाँ मिल कर क्या मस्त कट बनाती थी. और वह ल़हेंगा नाभी की नीचे ही पहनती थी जिससे उनकी गहरी नाभी सॉफ दिखाई पड़ती थी. जब वह घाघरा चोली पहनती तो चुनरी अपने सर पर रखती थी जिससे उनकी साड़ी छाती खुली रहती और मुझे उनके मोटी नुकीली छातियों के दर्सन होते रहते जिससे मेरा लण्ड हमेशा खड़ा रहता.

दिन मे मैं गांव जा खेतो मे काम देखता कभी वहाँ पर भी मूठ मार कर अपने लण्ड की भूख को शांत करता. मेरी भाभी बहुत ही नयी ढंग के ब्रा पॅंटी पहना करती थी कभी कभी भैया के साथ शॉपिंग पर शहर जाती थी शायद तभी वह ये मस्त ब्रा पॅंटी ले कर आती क्योंकि शॉपिंग कवर से पता चल जाता था कि वो कोई अच्छी शॉप मे

गयी थी. घर मे मौसी अपने कपड़े खुद धोती थी बाकी सबके कपड़े भाभी धोती थी. हम लोगो के घर एक बाथरूम था उससे मे एक बड़े बर्तन मैं हम गंदे कपड़े रखते थे भाभी भी अपने और कपड़ो के अलावा अपनी सेक्सी ब्रा पॅंटी भी बर्तन मैं रखती थी. एक बार मैं जब अपने कपड़े धुलने के लिए डालने गया तो मैने देखा कि भाभी की लाल रंग की पॅडेड ब्रा और छोटी से पॅंटी बर्तन मैं पड़ी थी. उससे देख कर तो मेरा लण्ड एक दम मचल गया. भाभी के बदन पर उस ब्रा और पॅंटी की कल्पना से ही मैं उत्तेजित हो गया सोचने लगा ये ब्रा कैसे भाभी के बड़ी चूचियों को अपने अंदर समाती होगी और ये कच्छी पहन कर तो भाभी के चूतड़ पूरे ही नंगे हो जाते होंगे और भाभी किसी मस्त अप्सरा से कम नही लगेंगी. मैं ब्रा और पॅंटी को अपने हाथ मैं लिए क्या मुलायम कपड़ा था एक सुंदर अन्चुयि औरत के लिए बनी थी वो ब्रा पॅंटी. पॅंटी को मैं अपनी नाक तक ला कर शुंघा क्या मदमस्त महक थी मेरी भाभी की चूत की. उसकी कच्छी पर जहाँ चूत होती के एक गहरा निशान था शायद भाभी की चूत गीली हो गयी थी जब भाभी ने वह पॅंटी पहनी थी.मैने अपनी नाक पूरी भाभी की कच्छी पर रख कर सुंगने लगा. मेरा लण्ड एक दम लोहे के रोड की तरह खड़ा हो गया था. अब मेरा रुकना बहुत मुस्किल था. मैने थोड़ी देर भाभी की पॅंटी सूँघी और फिर बाथरूम से बाहर झाँककर देखा बाहर कोई नही था मैने भाभी की ब्रा पॅंटी अपने शॉर्ट मैं छुपाई और अपनी कमरे की तरफ चल दिया. अपने कमरे मे पहुँच कर मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. और भाभी की ब्रा पॅंटी बाहर निकाल ली. और उनकी पॅंटी सूंघने लगा. जब मैं पहली बार उनकी पॅंटी को सुँघा था तब पॅंटी थोड़ी गरम थी जैसे अभी अभी किसी गरम बदन से उतरी हो. मैं बिस्तर पर लेट गया और भाभी की पॅंटी अपने मुँह पर रख कर सुंगने लगा. मेरा लण्ड अब मेरे शॉर्ट मैं रहने को बिलकुट तयार नही था. मैं लण्ड बाहर निकाल और उससे सहलाने लगा. भाभी की चूत की महेक मे मैं खो सा गया था. मैने अपने लण्ड को ब्रा के दोनो कप्स से पकड़ लिया. पॅडेड कप मेरे लण्ड पर छुए तो मुझे बड़ा अच्छा लगा. मैने अपने लण्ड को ब्रा से कस कर पकड़ लिया और मूठ मूठ मारने लगा. ब्रा मैं मूठ मारने का मज़ा ही कुछ और था. ऐसा लग रहा था जैसे मैं भाभी के बड़ी बड़ी चूचियाँ चोद रहा हूँ और साथ ही साथ उनकी पॅंटी से उनकी चूत भी चाट रहा हूँ.

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