कॉलेज के एग्ज़ॅम मे टीचर ने पड़का मेरा लंड

हेलो दोस्तो, मेरा नाम आकाश है और मई 19 साल का हू. मई अपने स्टेट के एक छोटे से टाउन मे रहेता हू. जो की जयदा बड़ा नही है, जहा कुछ गिने चुने स्कूल कॉलेज है. और ऐसे ही एक प्राइवेट कॉलेज मे मई पढ़ता हू, जो की एक स्कूल भी है. वाहा मई पहले से पढ़ता आया हू.

मेरी क्लास मे एक बेस्ट फ्रेंड भी है जिस का नाम विकी है और वो काफ़ी सरारती टाइप था. वो लड़कियो से जल्द घुल मिल जाता था. एक दिन उसने ऐसे बात बताई जिस को सुन कर मई हैरान हो गया.

उसने बताया की हुमारे स्कूल की एक टीचर है जिसको वो छोड़ता है. जिनका नाम रश्मि था और वो एक शादी शुदा औरत थी. हाइट कम थी 5.1, लेकिन सरीर मस्त था उनका.

विकी मुझे अपने चुदाई की किससे बताता था. लेकिन मई उस पर कभी यकीन नही कर पता था. पर मैने रश्मि मेडम को विकी की और देख के मुस्कराते हुई काई बार देखा था. लेकिन मई सोचता था ये बस एक टीचर के नाते देख रही है.

मई उसकी बात को यकीन तो नही करता था. लेकिन एक दिन मैने उसकी बातो से तंग आकर आख़िर कर पूछ ही लिया –

मैं – अरे विकी तूने रश्मि मेडम को कैसे पटाया?

विकी – अरे यार वैसे ही तोड़ा लाइन मारा और घर की पास वाली है ना, तो पाट गयी.

मैं – अछा ऐसे ही पाट गयी?

विकी – हन, तुजको भरोसा नही है तो मत कर..

कुछ दीनो बाद हुमारे एग्ज़ॅम्स शुरू हो गयी. हाल मे हम डोर डोर बैठे थी और रश्मि मेडम हुमारे क्लास की कॉपी चेक कर रही थी.

स्कूल मे काफ़ी दोस्त चीट कॉपी लाए थी जिसको चेक कर रही थी. और उसे वक़्त रश्मि माँ विकी को चेक करनी लगी. उसके उपर वाली पॉकेट पर हाथ लगाया और पंत पर भी. फिर ढेरे से उहोने अपना हाथ विकी के पंत की पॉकेट के अंदर डाल दिया. और विकी की और देख कर मुस्कुराने लगी.

एग्ज़ॅम एंड होने के बाद मई और विकी तब बात करनी लगे –

विकी – क्या मस्त माल है ना रश्मि माँ.

मई – हन, है तो..

विकी – तुझे अपना लंड पकड़वाना है क्या उससे?

मैं – क्या!!!? क्या बोल रहा है?

विकी – अरे यार तू डरपोक है, मेरी साथ रह कर भी कुछ नही सीखा.

मैं – क्या सीखू तुझसे?

विकी तभी अपने पंत पॉकेट दिखता है जिसको देख कर मई शॉक हो जाता हू, वो पॉकेट फटा हुआ था अंदर से.

मैं – मतलब सच मे रश्मि मेडम ने तेरा पकड़ा था??

विकी – हन मेरी यार तुजको क्या मई झूट बोलूँगा?

मैं – मुझे यकीन नही हो रहा.

विकी – तुझसे पकड़वाना है क्या उससे?

मैं – वो कहा पकड़ेगी..

विकी – पकड़ेगी चिंता मत कर.

मैं – नही यार, वो गुस्सा करेगी.

विकी – अरे कुछ नही बोलेगी चिंता मत कर, कुछ बोलेगी तो मई संभाल लूँगा.

मई उस रात काफ़ी गरम हो गया और रश्मि मेडम की नाम पर रात मे मूठ भी मार लिया.

मई अगले दिन एग्ज़ॅम के लिए जल्दी ही पहुच गया. और विकी ने बताया की मुझे क्या करना है. विकी के साथ मिल कर मैने अपने पंत पॉकेट की सीलई भी खोल दिया. जिससे जो भी हाथ डाले उसका हाथ सीधा मेरी लंड को टच हो. और अंदर से तोड़ा फोल्ड कर कपड़े को तोड़ा फोल्ड कर दिया. ताकि बाहर से लगे की अंदर कुछ छुपाया हुआ है और चेक किया जाए.

हम एग्ज़ॅम देने के लिए बैठ गयी और एग्ज़ॅम शुरू हो गया. हुमारे क्लास मे रश्मि ही थी जो की कुछ टाइम बाद कॉपी के लिए सब को चेक करना शुरू कर ही दे, “वो मेरा पकड़ने वाली है”. मई ये सब सोच सोच कर मेरा लंड हार्ड हो गया था. और मई पसीने से लटपोट हो गया था.

लेकिन तभी रूम मे और एक टीचर चली आए जिनका नाम कुमुदिनी है. जो की एक 29 साल की सिंगल औरत है. जिनकी फॅमिली की प्राब्लम के कारण अब तक शादी नही की थी.

वो मेरी तूतिओं टीचर भी थी और स्कूल मे जियोग्रॅफिक टीचर थी. उनको मई पहले से ही जानता था. वो ऐसे टीचर थी जिसने कभी गुस्से मे मुझसे बात नही किया था. जिसके कारण वो मेरी फेवोवरिट टीचर भी थी. वो देखने मे खूबसूरत थी और गूरी भी, बदन 34द – 27 – 36 की था, पतली कमर, हाइट भी आची थी उनकी तकरीबन 5.6.

कुमुदिनी मेडम की आते ही मई दार गया. और आचनक वो रश्मि मेडम की साथ चीत चेक करना शुरू कर दिए. मई ये देख कर पसीना पसीना हो गया.

मई सूचने लगा की रस्मी ही मेरी चेक करे. लेकिन उसका उल्टा ही हुआ और मेरी सामने कुमुदिनी मेडम आ कर खड़ी हो गयी मुझे चेक करनी के लिए. मई दर गया पूरा, मई और कुछ सोच ही नही पा रहा था.

कुमुदिनी – आकाश कुछ चीत तो नही है तेरे पास?

मैं – नही नही माँ कुछ भी नही है.

वो फिर भी चेक करनी लगी और अचानक मेरी पंत पॉकेट की उपर हाथ मारने लगी. तो मैने अपने पॉकेट को उपर से ही कस की पकड़ लिया. वो मेरी फेव टीचर थी और वो मुझे एक आछा लड़का मानते थी.

कुमुदिनी – क्या आकाश क्या छुपा रहा है?

मे – कुछ नही माँ.

कुमुदिनी – तो ऐसे कुछ कर रहा है, मुझे चेक करनी के लिए दे.

मे – कुछ नही है माँ यहा.

कुमुदिनी – तो छुपा मत चेक करनी को दे, कुछ चिट है तो दे दे.

मे – नही माँ नही है…

कुमुदिनी माँ नई मेरी बात नही मानी और चेक करनी के लिए अपना हाथ ज़ोर से पंत पॉकेट मे डाल ही दिया. और पंत पॉकेट मई छेड़ होने के कारण उनका हाथ सीधा जा कर मेरी खड़े लंड मे लगा.

वो लंड मे हाथ मे पढ़ते ही शॉक हो गयी. मई दर के मारे उनको देख रहा था और वो घूर के अपने सर उठा कर मेरी और देखी. मेरा मोटा लंड उनकी हाथ मे था.

वो झटके से अपने हाथ बाहर निकली, मई दर गया की अब क्या होगा.

कुमुदिनी – रश्मि माँ आप चेक करो, मई नीचे से आती हू.

वो ये बोल कर वाहा से चली गयी और मई दर के मारे बैठ गया. क्यू आज वो हो गया था जिसकी मैने कल्पना भी नही की थी. मेरी फेवोवरिट टीचर ने मेरा लंड मे हाथ लगा दिया था.

मई बस ये ही सोच रहा था अब क्या होगा? मेरी क्या इज़्ज़त रह जाएगी मेडम के सामने? मई एक बुरा लड़का बन गया हू. क्या सोच रही होंगी मेरी बारे मे. अब मई कैसे उनको अपना मूह देखा पौँगा.

कुमुदिनी मेडम ने चेक कर दिया था इसीलिए रस्मी मेडम ने चेक नही किया.

विकी – क्या मेरी दोस्त क्या हुआ रस्मी के चेक ना करनी से उदास है क्या?

मे – नही कुछ गड़बड़ हो गयी है.

विकी – क्या गड़बड़?

मे – वो.. वो.. मुझे कुमुदिनी मेडम ने चेक किया..

विकी – क्या बोल रहा है, उसी पॉकेट को तो चेक नही किया??

मे – कर लिया और हाथ वाहा भी पद गया उसका.

विकी – क्या बात कर रहा है, ये तो सच मई गड़बड़ हो गया यार, मुसीबत मे पद गया है तू तो.

मे – हन, अब पता नही क्या होगा… मेरी फेव टीचर भी है, पता नही कैसे मूह दिखौँगा.

विकी – सॉरी यार क्या सोच क्या हो गया, सब ठीक हो जाएगा.

मे – क्या खाक ठीक होगा, सब गड़बड़ हो गया है, मुझे तेरी बात मानना ही नही चाहिए थी, मैने ग़लती कर दी.

मई गुस्से से उदासी मे चला गया वाहा से. और 2 दिन तक तूतिओं भी नही गया दर की मारे. ताकि कुमुदिनी मेडम मुझ पर गुस्सा ना करे.

2 दिन बाद एग्ज़ॅम शुरू होने के पहले मई स्कूल मे अकेला बस एक जघा टहल रहा था. जहा की ड्यूवर के दूसरी तरफ टीचर ऑफीस था. वाहा से एक औरत की हासणे की आवाज़ सुनाई दी. तो मई खिड़की की और से तोड़ा झका. वो रश्मि मेडम की हसी थी और उनकी साथ कुमुदिनी मेडम भी खड़ी थी तोड़ा सरमीले चेहरे के साथ, और अंदर कोई भी नही था.

रश्मि – क्या सच मे, तू मज़ाक तो नही कर रही है ना??

कुमुदिनी – सच मे रश्मि, उसके अंदर हाथ डालते ही मुझे उसका खड़ा लंड महसूस हुआ, मई तो शॉक हो गयी.

मई ये सुन कर शॉक हो गया की अंदर मेरी बारे मे बात हो रही है. मई बस सोच रहा था अब मेरा क्या होगा.

रश्मि – हहहे और इसे कारण तू इतने परेशन है 2 दीनो से हहहे…

कुमुदिनी – ये हासणे वाली बात नही है रश्मि, मुजको अजीब सा लगा.

रश्मि – तू पड़की नही है ना इसे पहले इसीलिए, कों सा लड़का है वो?

कुमुदिनी – वो मेरी तूतिओं मे पढ़ता है.

रश्मि – वा ये तो अची बात है, तो और एक बार पकड़ लीटी हहे…

कुमुदिनी – तुम भी ना रश्मि, स्टूडेंट है मेरा.

रश्मि – तो क्या हुआ, जवान लंड मज़ा देगा, पकड़ के मज़ा आया ना?

कुमुदिनी – हन आया तो…

ये बोल के हासणे लग गयी दोनो और मई ये सब सुन कर शॉक हो गया. की मेरी फेवोवरिट मेडम को मेरा लंड पकड़ के अछा लगा. ये सुन कर मेरी अंदर से दर चला गया. मुझे तब एक अलग तरहा की ख़ुसी का एहसास होने लग गया.

उस दिन जब मई एग्ज़ॅम मे बैठा था तब कुमुदिनी माँ भी एग्ज़ॅम हॉल मे थी. जो की बीच बीच मे मेरी तरफ देख रही थी और बीच बीच मई नीचे की तरफ देख रही थी.

आशा करता हू आपको कहानी पसंद आ रही होगी. इसका अगला पार्ट ज़रूर पढ़े और अपना सुझाव और कहानी कैसी लगी मुझे मैल कार्की ज़रूर बताए

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