ही, मेरा नाम नैतिक है. आगे 24, रंग गोरा, और अभी आर्किटेक्चर कर रहा हू. ये कहानी आज से 4 साल पहले की है, जब मैं एक स्ट्रेट लड़का था. उसके बाद मेरी लाइफ में कोई ऐसा आया, जिससे मेरी फीलिंग लड़का और लड़की दोनो के लिए होने लगी.
अब डाइरेक्ट स्टोरी पर आते है. मैं सब के साथ मज़ाक मस्ती करने वाला लड़का हू. मेरे बदन पर ना के बराबर बाल है. फेस और लंड पर भी अब थोड़े-थोड़े बाल आने लगे है. कुछ महीनो से जिम जाने लगा हू, इसलिए चेस्ट और गांद भी रौंद बनने लगी है.
मे का मंत था. गर्मियाँ शुरू हो गयी थी. मैं घर के किसी काम से बिके लेकर बाहर गया था. तभी मैने देखा एक आदमी रोड की साइड में बैठा हुआ था. जब मैने पास जेया कर देखा तो पता चला वो मेरे स्कूल टाइम में वन वाले अंकल थे, जो मुझे स्कूल लेकर जाते थे.
मैं उनके पास जेया कर उनसे कुछ बात करने की कोशिश करा, लेकिन वो मेरी तरफ देख ही नही रहे थे. फिर भी मैने ज़ोर देते हुए पूछा-
मैं: क्या बात हो गयी भैया, बताओ तो? मैं किसी को कुछ नही बोलूँगा. आप ऐसे क्यूँ बैठे हो?
अंकल कुछ बोलने के लिए रेडी ही नही थे. इसलिए मैं उनको बिके पर बिता कर उनके घर की तरफ ले जाने लगा. कुछ डोर आयेज चलते ही अंकल बोले-
अंकल: यार मैने एक लोन लिया था मेरी वाइफ की ज्यूयलरी रख कर. मेरी वाइफ को उसके बारे में कुछ नही पता. वो माइके गयी हुई है, 2 दिन बाद आएगी. पिछले कुछ महीने से काम बहुत खराब चल रहा है, और लोन की पेमेंट भी करनी है. इसलिए टेन्षन हो रही थी.
इसके बाद हम अंकल के घर आ गये. मैने उनको बेड पर बिता कर पानी दिया. उनके घर पर कोई भी नही था. अंकल टेन्षन से बहुत ज़्यादा पसीने-पसीने हो रहे थे
मैने उनको शर्ट निकाल देने के लिए बोला, और पंखा चला दिया. अंकल ने गाते बंद करा. अंकल (सुरेश) की आगे 38, 5.9 फीट हाइट, भारी भरकम बदन के साथ तोड़ा तोंद भी निकली हुई है. रंग गोरा, फेस पर हल्की-हल्की दाढ़ी.
अंकल ने बनियान और पाजामा पहना हुआ था. हम दोनो बैठ कर प्राब्लम के लिए बात करने लगे. मुझसे अंकल की प्रॉब्लम्स देखी नही गयी, इसलिए मैने पापा को कॉल करके सारी बात बता दी. अंकल माना कर रहे थे, लेकिन मैने फोर्स करके पापा से अंकल के लिए पैसे करवा ही दिए. कॉल काटने के बाद-
अंकल: थॅंक्स नैतिक यार, बहुत टेन्षन हो रही थी. मैं नेक्स्ट मंत तक ज़रूर करवा दूँगा तू भाई साहब (मेरे पापा) को बोल डियो.
मैं: इसमे थॅंक्स की क्या बात है? आप हमे बचपन से जानते हो, इतना तो आपके लिए कर ही सकते है.
अंकल ने खुश हो कर मुझे गले लगा लिया. उनके गले मिलने से, उनके पसीने की खुश्बू बहुत तेज़ आ रही थी.
मैं: आप तो बहुत गरम हो रखे हो. पसीना भी बहुत आ रहा है. आप रूको, मैं आपके लिए नींबू पानी बना देता हू. आप समान बता दो कहाँ रखा है?
अंकल मुझे माना ही कर रहे थे, लेकिन मैने फोर्स करते हुए उनके लिए नींबू पानी बना ही दिया. रसोई में बहुत सारे गंदे बर्तन भी थे. मैं सब काम करके बाहर आया, तो देखा अंकल बिस्तर पर लेते हुए थे और अपने सर पर कपड़ा बाँध रहे थे.
मैं: रूको मैं दबा देता हू आपका सर.
अंकल: तुम्हे घर जाने में लाते हो रहा होगा, मैं कर लूँगा.
मैं: कोई बात नही, मैने पापा को बोल दिया है की जैसे ही अंकल नॉर्मल होते है, मैं आ जौंगा.
अंकल: देखो तुम भी काम करते-करते कितने पसीने में हो गये हो. अपनी त-शर्ट निकाल कर कूलर ओं कर लो.
मैं: मैने नीचे बनियान नही पहनी है.
अंकल (हेस्ट हुए): मैं कों सा लुगाई हू जो मुझसे शर्मा रहा है. बचपन में जब तेरे घर आता था, तब कितनी बार तुझे नंगा घूमते हुए देखा था, क्या तू भी.
मैने त-शर्ट निकाल दी. अंकल मेरा बदन तिरछी नज़ारो से देख रहे थे. अंकल को बिस्तर से नीचे बिता कर, मैं खुद बिस्तर पर बैठ गया, और उनके सर को दबाने लगा. कुछ देर दबाने के बाद-
अंकल: मज़ा ही आ गया, क्या जादू है नैतिक तेरे हाथ में. क्या आयिल लगा कर चम्पी करेगा?
अंकल ने मुझे नवरटन का आयिल दिया. मैने उससे चम्पी करना शुरू किया.
अंकल: वाह बेटे, क्या बात है, बिल्कुल ठंडक पहुँच गयी. लगता है सारी थकान डोर हो गयी.
मैं मस्त चम्पी कर रहा था. तभी अंकल ने बोला: यार तोड़ा गर्दन पर भी कर दे, कुछ दिन से बहुत दर्द है.
मैं: आपका बनियान गंदा हो जाएगा.
अंकल ने बनियान निकल कर बोला: इसमे क्या बड़ी बात है? ले अलग कर दिया.
अंकल की छ्चाटी पर ना के बराबर बाल थे. मस्त बरा हुआ बदन था उनका. मैं गर्दन की मालिश करते हुए सर पर चम्पी करता रहा. अंकल ने मस्त हो कर आँखें बंद कर ली.
कुछ देर बाद मुझे लगा शायद वो सो गये. इसलिए मैं उनको देखने के लिए आयेज हुआ तो मेरी गोद में रखी हुई आयिल की बॉटल आयेज उनके पाजामे पर जेया कर गिर गयी. अंकल अचानक से खड़े हुए, और आयिल सॉफ करने लगे.
मैं: सॉरी अंकल, सॉरी वो ग़लती से गिर गयी. बस आपको देख रहा था की आप सो तो नही गये.
अंकल पाजामा खोलते हुए बोले: कोई नही, हो जाता है.
अंकल पाजामा खोल कर ब्लू कलर की ब्रीफ में मेरे सामने खड़े थे. उनकी चड्डी से उनका लोड्ा कितना मोटा अलग ही लटक रहा था. अंकल दोनो हाथ उपर करके ज़ोर से अंगड़ाई लेने लगे. इतना कामुक आदमी आधे नंगे बदन में मेरे बिल्कुल सामने खड़ा था, पता नही क्यूँ बार-बार मेरा ध्यान उनके भरे हुए बदन पर ही जेया रहा था.
अंकल: कसम से तेरे हाथ में जादू है. अगर बुरा ना माने तो एक काम करेगा?
मैं: हा बोलो.
अंकल: मेरी पीठ और कमर की भी कर दे.
मैने उनको लेटने के लिए बोला. अंकल एक प्लास्टिक की शीट बिस्तर पर बिछा कर खुद पेट के बाल लेट गये. अंकल का पूरा बदन बहुत गोरा, और हल्के-हल्के बालों से ढाका हुआ था. मैं पीठ और कमर पर आयिल लगा कर मालिश करने लगा.
अंकल का बदन इतना बड़ा और मोटा था की मेरे हाथ पूरा एक साथ कवर ही नही कर पा रहे थे. इसलिए मैं उनकी गांद पर बैठ कर कमर की और पीठ की मस्त मालिश करने लगा. 5 मिनिट तक मस्त मालिश करने के बाद.
अंकल: नीचे जाँघ पर.
मैने अंकल की जाँघ पर आयिल लगाया. आयिल के ठंडे होने से अंकल का बदन और मेरा हाथ ठंडा हो गया था. अंकल की जाँघ से पैर तक मस्त मालिश कर रहा था. अंकल की जाँघ बहुत मोटी थी, इसलिए बहुत ज़ोर लगा कर मसलना पद रहा था. जाँघ पर मसालते-मसालते मैं उनकी गांद जो उनकी चड्डी से दिख रही थी, उसको भी मसालने लगा.
अंकल का पूरा बदन आयिल ही आयिल में हो गया था. मैने उनके दोनो पैरों को फैलाया. फिर उसके बीच में बैठ कर कमर से गांद, फिर नीचे जाँघ तक मसालने लगा. मस्त मालिश के बाद-
मैं: कैसा लग रहा है?
अंकल: पूच मत, बस करता जेया.
मैने उनकी कमर को पकड़ कर सीधा होने का इशारा किया. अंकल सीधे हो कर लेट गये. अंकल की आँखें अभी भी बंद ही थी. उन्होने अपने दोनो हाथ उपर की तरफ मोड़ कर अपने सर के नीचे कर दिए.
तभी मेरा ध्यान गया, और अंकल का मोटा लोड्ा चड्डी में खड़ा हो गया था. ब्रीफ अंडरवेर होने की वजह से चड्डी की साइड में फ़ासस रहा था. अंकल ऐसे लेते हुए थे, जैसे उनको कोई शरम ही ना हो. मैने आयिल उनके बदन पर लगाया, उनकी छ्चाटी, पेट और फिर जाँघ को मसालने लगा.
बार-बार मेरा ध्यान उनके लोड पर ही जेया रहा था. तभी मैं उनकी जाँघ की तरफ आया. अंकल ने अपनी जाँघ खुद से ही फैला ली, जैसे वो इशारा कर रहे हो बीच में बैठ कर मालिश कर.
मैं उनकी जाँघ को अपने दोनो हाथो से मसालते-मसालते, उनकी चड्डी की पास से अपनी उंगलियों को घूमते हुए नीचे-उपर जाँघ को मसल रहा था. मैं उनके लोड के बहुत करीब था. बार-बार मेरा ध्यान लोड पर ही जेया रहा था.
मेरा मूड उनके लोड को एक बार देकने का हुआ. मैं धीरे से अपने हाथ की उंगलियों को उनके लोड को छ्छूते हुए नीचे, फिर उपर ले गया, जो उनकी चड्डी की साइड में फ़ससा हुआ था. मेरे हाथ लगते ही उनका लोड्ा एक-दूं से उपर-नीचे हुआ.
मैने फिर से लोड को छ्छूने की कोशिश करी, और अंकल को देखा कहीं वो जाग तो नही रहे. तभी अंकल के आयिल से भरे हुए बदन पर मेरा हाथ फिसल गया, और मैं उनके उपर गिर गया. मेरा मूह उनकी छ्चाटी पर, और मेरे निपल्स उनके पेट पर टिक गये.
मेरे गिरते ही अंकल जाग गये, और मुझे पकड़ कर उपर उठने लगे. बदन इतना चिकना हो गया था की मैं फिर से फिसल गया. अंकल ने हेस्ट हुए मुझे उठा कर बिताया और खुद लेते ही रहे.
उनके उपर गिरने से मेरे बदन पर भी आयिल लग गया था, ख़ास कर पेट और निपल्स पर. वो लेते-लेते ही मेरे चुचो से आयिल को अपने हाथ से सॉफ करने लगे.
अंकल (हेस्ट हुए): सारे बदन पर तेल लग गया.
अंकल मेरे चुचो को कुछ ज़्यादा ही दबा-दबा कर मसल रहे थे. कुछ देर बाद वो अपने दोनो हाथो से मसल-मसल कर सॉफ करने लगे.
मैं: बस हो गया.
अंकल: इनसे क्या दूध सप्लाइ करता है क्या? कितने मोटे कर रखे है. तोड़ा पास आ, अभी और है.
ये बोलते ही अंकल ने मुझे एक हाथ से गांद को पकड़ते हुए पास खींचा, जिससे मेरा बॅलेन्स बिगड़ गया. इससे मेरा एक हाथ उनके खड़े लोड पर जो अभी भी चड्डी में फ़ासस रहा था, उस पर लग गया.
मेरे लोड पर हाथ लगने से लोड्ा जो एक साइड में फ़ासस रहा था बाहर आ गया. अंकल अभी भी बेशार्मो की तरह मेरे निपल्स मसल रहे थे. मेरे हाथ के नीचे उनका खड़ा लोड्ा था.
मैं पीछे होते हुए: सॉरी-सॉरी.
अंकल अपने लोड को हाथ से मसालते हुए बोले: क्या यार, तू भी हर बात पर सॉरी बोलता है. हम दोनो मर्द ही तो है. तूने देख लिया तो क्या हुआ? ले पूरा देख ले.
अंकल चड्डी निकाल कर पुर नंगे हो गये, और लोड्ा हाथ से मसालने लगे. वैसे लोड्ा तो मेरा भी खड़ा हो गया था. अंकल का लोड्ा 6 इंच लंबा और 2-3 इंच मोटा तो ज़रूर होगा. बहुत बड़ा लग रहा था, एक-दूं काला. अंकल के गोरे बदन पर काला लोड्ा क्या मस्त लग रहा था. मेरी तो नज़र ही नही हॅट रही थी.
अंकल: हाथ लगा कर देख ले. तेरे अंकल का ही है. क्यूँ शर्मा रहा है?
मैने अंकल के खंबे को हाथ में लिया. अंकल मेरी कमर पर हाथ रख कर सहलाने लगे. अंकल मेरे हाथ को पकड़ कर लंड को हिलने लगे. कुछ देर हिलने के बाद अंकल ने मेरा सर पकड़ कर लंड के पास कर दिया.
अंकल: चूस ले यार.
अंकल का लोड्ा बहुत मोटा था. मैने उसको मूह में लिया. अंकल मेरे सर पर हाथ रख कर लोड्ा पुर अंदर तक घुसा रहे थे. मेरी साँस भी रुकने लगी. मेरे मूह के थूक से पूरा लोड्ा ही गीला हो गया था. मैं फिर से लोड को चूसने लगा.
अब अंकल ने हाथ मेरे सर से हटा लिया था. मैं खुद ही पुर मज़े में लोड्ा चूसने लगा. अंकल ने मेरी कमर से मेरे पाजामे को चड्डी के साथ ही उतार दिया. मैं पुर मज़े में था, इसलिए अंकल की हर हरकत पसंद आ रही थी. 2-3 मिनिट लोड्ा चूसने के बाद अंकल ने मुझे अपने पास खींच लिया और मेरे निपल्स को चाटने लगे.
अंकल मेरे चुचो को पूरा मूह में लेकर चाट रहे थे. मेरे अंदर की हवस एक अलग ही आसमान में थी.
मैं: आहह, आराम से.
अंकल: लोड्ा गांद में लेगा?
मैं: मैने कभी किया नही.
अंकल: वो बस मुझ पर छ्चोड़ दे.
फिर अंकल ने मुझे घोड़ी बनाया और गांद के च्छेद पर आयिल लगा कर लोड्ा अंदर करने लगे. लोड्ा मेरी गांद फाड़ता हुआ अंदर जाने लगा. मेरी दर्द से हालत ही बुरी हो रही थी.
मैने अंकल को रोका: बहुत दर्द हो रहा है.
अंकल ने मेरी गांद को और ज़्यादा फैलाया और च्छेद में बहुत सारा आयिल लगा कर उंगलियाँ अंदर-बाहर करने लगे. 4-5 मिनिट ऐसे ही उंगलियों से गांद छोड़ने के बाद अंकल ने लोड्ा अंदर किया. लोड्ा अंदर जाने लगा. लेकिन दर्द तो अभी भी बहुत था.
अंकल: तोड़ा ढीला छोड़, बस तोड़ा दर्द होगा.
मैने कैसे ही खुद को कंट्रोल किया. अंकल का आधा लोड्ा मेरे अंदर ही था. अंकल ने झटका देना शुरू किया. कुछ देर तक दर्द हुआ, फिर नॉर्मल लगने लगा. अब अंकल ने मुझे मिशनरी पोज़िशन में किया और मेरे च्छेद से खून सॉफ किया. फिर कॉंडम लगा कर, लोड्ा अंदर डाल कर झटके देने लगे.
अंकल मेरे लीप पर किस करते रहे, और मेरी गांद मुझे मज़े लेते हुए आराम-आराम से छोड़ने लगे. 2-3 मिनिट छोड़ने के बाद अंकल बिस्तर पर लेट गये. फिर मुझे लोड पर बिता कर छोड़ने लगे.
कभी अंकल झटके देते, कभी मैं लोड पर उछालने लगता. कॉंडम निकाल कर कुछ देर बाद अंकल ने मेरी कमर को ज़ोर से पकड़ कर लोड को पूरा घुसा दिया.
मेरी गांद में अंकल का माल एक गरम-गरम पिचकारी के साथ पूरी गांद को भर दिया. कुछ देर तक लोड्ा अंदर ही रहा, फिर ढीला हो कर बाहर निकल गया. लोड के साथ अंकल के वीर्या की धार मेरे च्छेद से होते हुए अंकल के बदन पर गिर गयी.
अंकल: मज़ा आया ना?
मैं: बहुत, लेकिन दर्द भी हो रहा है.
अंकल: नेक्स्ट टाइम नही होगा.
मैं: फिर से?
अंकल: लोड्ा अछा नही लगा क्या? अगली बार तो तेरे किए कुछ और भी रेडी रखूँगा.
मैं: वो क्या?
अंकल: कल दोपहर में आ जेया, फिर पता चलेगा.
इसके बाद मैं अंकल के घर से चला गया, और अगले दिन का वेट करता रहा.