दोस्त से बाप दे चुदा सारी रात

नमस्ते दोस्तों मेरा नाम ज़ेशन है, और ये कहानी मेरी और मेरे बेस्ट फ्रेंड राज के पापा अमित की है. अमित अंकल एक हटते-काटते पंजाबी थे. उनकी हाइट 6’4″ थी. उनकी उमर तो 45+ होगी, और वो देखने में भी वैसे ही लगते थे. पुर फेस पर लंबी-लंबी दाढ़ी थी और हल्की-हल्की दाढ़ी सफेद हो चुकी थी. राज की मम्मी का देहांत कुछ साल पहले हो चुका था, और अब उनके घर में सिर्फ़ राज और अमित अंकल ही रहते थे.

मेरी उमर उस वक़्त 21 साल थी. मैं उपस्क के तैयारी के लिए देल्ही में था. मैने कभी पहले किसी के साथ भी सेक्स नही किया था. मगर मुझे गे पॉर्न देखना पसंद था. ख़ास करके जिसमे छोड़ने वाले (टॉप) की बियर्ड हो, और फुल बॉडी पे बाल हो. मैने अपना ये राज़ कभी किसी को नही बताया था, यहा तक की राज तक को भी नही.

मैं अपने फिगर के बारे में बतौ, तो मेरा कद 5’6″ है. मैं पतला-दुबला और तकलिया भी बिल्कुल लड़कियों जैसा हू. मेरी गांद मगर थोड़ी चौड़ी है. मेरा रंग सफेद है, और मेरे शरीर पर ज़रा भी बाल नही है. लोग मुझे अक्सर लड़की समझ लिया करते थे. राज भी शायद मेरे साथ इसीलिए था. कभी-कभी वो भी मेरा उपर-उपर से मज़ा ले लिया करता था.मैं भी उसे कुछ नही कहता था. सच बोलू तो मुझे मज़ा ही आया करता था.

तो बात है राज का बर्तडे था, और उसने हम सब को इन्वाइट किया था. मैने पिंक कुर्ता पहना था. उस दिन मैने अजीत अंकल को पहली बार देखा. उन्होने भी पिंक कुर्ता पाजामा ही पहना था. उन्हे मैं पहले लड़की लगा. मगर जब उन्हे पता चला की मैं लड़का हू, तो वो भी हैरान रह गये.

मेरे नज़रे भी सिर्फ़ उन्ही पे अटक गयी. पूरी पार्टी में हम दोनो एक-दूसरे को ताड़ते रहे. मुझे किचन के काम में काफ़ी इंटेरेस्ट आता है तो मैं किचन में अंकल की हेल्प करने लगा.

मे: अंकल आप खाना काफ़ी अछा बना लेते हो.

अंकल: हा जी, वो राज की मम्मी के जाने के बाद से बनाते-बनाते सीख गया.

जगह काफ़ी कम थी, तो हम एक-दूसरे के करीब ही खड़े थे. अंकल ने इत्तर लगाया हुआ था. कुछ लेने अंकल मेरे पीछे से निकल रहे थे, तो अंकल का टाइट लंड मुझे मेरी गांद पर फील हुआ. अचानक से मेरी गांद भी सुकड गयी. थोड़ी देर अंकल ने भी उस मोमेंट का मज़ा लिया. मगर किसी की आहत सुन जल्दी से हॅट गये. मैं भी दोबारा काम में लग गया.

पार्टी ख़तम होते तक सब नशे में थे. तो राज सब को छ्चोढने चला गया. मैं अंकल की हेल्प करने के लिए रुक गया. मुझे अंकल के साथ वक़्त बिताना बहुत अछा लग रहा था. मैं बर्तन धो कर पीछे मुड़ा, तो अंकल मेरे पीछे ही खड़े थे, और मुझे नशीली आँखों से घूरे जेया रहे थे.

अंकल: तुझे पता है राज की मम्मी की हाइट भी बिल्कुल तेरे जितनी थी.

मे: अछा (लंबी साँसे भरते हुए)?

अंकल: उसके फेस का कट भी बिल्कुल तेरे तरह ही था. तुझे लड़का नही लड़की होना चाहिए था.

मे: मैं भी यही सोचता हू.

अचानक से ना-जाने मुझे क्या हुआ, और मैं अंकल को किस करने के लिए आयेज बढ़ा. अंकल ने भी मेरा प्रस्ताव स्वीकार किया, और मुझे कस्स कर पकड़ कर किस करने लगे. हम दोनो एक-दूसरे में खो गये. इतना नया और इतना अछा मैने कभी फील नही किया था. मैने अंकल को चेर में बिताया और खुद उनकी गोद में बैठ गया, और उनका पहले से सख़्त हुआ लंड सहलाने लगा. साथ ही साथ उन्हे किस भी करने लगा.

मे: मेरे पास छूट नही तो क्या हुआ, आप मेरी गांद मार लो.

अंकल: दर्द नही होगा तुझे?

मैने इसका जवाब अंकल के लंड पर अपनी गांद को मसालते हुए दिया. अंकल फुल मूड में आ गये, और जल्दी से मेरे कपड़े उतार दिए. फिर अंकल अपने भी सारे कपड़े उतार कर नंगे मेरे सामने अपना कड़क लंड लेकर खड़े हो गये. अंकल के पुर शरीर में बाल थे. मुझे जैसा मर्द चाहिए था वैसा ही.

मैं तुरंत ही किसी स्लेव के तरह अपने घुटनो पे बैठ ज़ुबान बाहर निकल लिया. ये सब मैने पॉर्न से सीखा था. अंकल ने पहले अपने लंड का टोपा मेरे मूह में डाला. मैने उससे चूस-चूस के गीला किया. उनके टोपे पे जैसे-जैसे अपनी ज़ुबान फेर रहा था, अंकल सिसकियाँ ले रहे थे.

फिर मैने अंकल का लंड और अंदर लिया. मेरे लिए ये सब पहली बार था, तो मैं तुरंत ही चोक कर गया. मैं बार-बार कोशिश करता, मगर चोक कर जाता. फिर अंकल ने मामला अपने हाथ में लिया. उन्होने मेरा सिर पकड़ा, और अपना लंड फोर्स से मेरे मूह में डालने लगे.

मुझे दर्द तो बहुत हुआ. मेरी आँखों से आँसू आ गये, मगर मैं पीछे नही हटा. अंकल ने अपनी फोर्स बधाई, और लंड मेरे गले तक चला गया. अंकल की झाँते इतनी बड़ी थी, की वो भी मेरे मूह में आ रही थी.

मेरा लाल चेहरा और आँखों में आँसू देख अंकल मुस्कुराए. मगर मैने उन्हे इशारों में रुकने से माना कर दिया. अंकल मेरे मूह को छोड़ते गये. उनके पुर लंड को मैने गीला कर दिया था. मेरी पूरी छाती थूक से गीली हो चुकी थी.

फिर अंकल ने मुझे उठाया, और आराम से किसी फूल की तरह बिस्तर पे लिटा दिया. उसके बाद वो मेरे शरीर पे लगे सारे थूक तो चाटने लगे. मुझे लग रहा था मैं तुरंत ही झाड़ जौंगा. फिर अंकल मेरे होंठो के साथ खेलने लगे. अंकल मेरे गोट्तो पर मारते, और मैं दर्द से मचलता. फिर अंकल मेरे गोट्ते को अपने मूह में लेकर चाटने चूसने लगे. बीच-बीच में अंकल मेरे गोट्तो पर थपकी मरते जिससे मुझे काफ़ी दर्द होता.

अमित अंकल: तू पहले किसी से छुड़ा है?

मैने सिर हिला कर ना में जवाब दिया. फिर मैने अपनी टांगे फैला के अपनी गांद के च्छेद को उनके सामने कर दिया.

मे: देख लीजिए, मैने आज तक पेन भी अंदर नही लिया है.

अंकल मुस्कुराते हुए झुके, और मेरी गांद के च्छेद को चाटने लगे. मैं ज़ोर-ज़ोर से मोन करने लगा.

मे: आअहह… उहह… अहह अंकल… और छातो. आपके चाटने ने मेरी गांद का च्छेद और खुलता जेया रहा है.

अंकल अपनी ज़ुबान मेरे च्छेद में डालने लगे. अपने आप ही मेरा च्छेद खुलने लगा. फिर अंकल अपनी उंगली मेरे च्छेद में डालने लगी. मुझे जलन सी होने लगी, और मैं सिसकियाँ भरने लगा. फिर अंकल ने अपनी उंगलियों की गिनती मेरी गांद में बढ़ा दी. दो उंगलियों तक तो मैं से गया. मगर तीसरी उंगली तक मुझे बहुत दर्द होने लगा.

मे: अंकल और मत बाधाओ, मैं नही से पौँगा.

अंकल ने एक हाथ से मेरा मूह ज़ोर से बंद कर दिया, और बोले: बस तू हिल मत, और गांद फैलाए रख.

धीरे-धीरे अंकल ने पाँचों उंगलियाँ मेरी गांद में डाल दी. मैं दर्द से चिल्लाना चाहता था. मगर अंकल ने इतनी ज़ोर से पकड़ा था की मैं हिल भी नही पाया. धीरे-धीरे मुझे मज़ा आने लगा. दर्द तो हो रहा था, मगर मज़ा भी आ रहा था. मैं इसी से झाड़ गया. फिर मैं शर्मा कर अंकल की तरफ देखने लगा. अंकल मुस्कुराए और मेरे शरीर पर से मेरे माल को कपड़ा लेकर सॉफ किया.

फिर अंकल खड़े हुए और अपने लंड पर थूक लगते हुए मेरे च्छेद की तरफ देखे लगे. मैं बेकरार हो कर अंकल के लंड को देखने लगा, और सोचने लगा इतना बड़ा लंड मेरे अंदर घुसेगा तो मैं तो मॅर ही जौंगा.

इतने में अंकल ने लंड मेरी गांद पर सेट किया, और एक झटके में अंदर डाल दिया. मुझे मेरी गांद फटने की आवाज़ तक फील हुई. अंकल ने इतनी ज़ोर से धकेला था, की उनका पूरा लंड मेरी गांद में था. बहुत दर्द हुआ. तोड़ा खून भी आया. मगर मुझे लगा जैसे लड़कियों की वर्जिनिटी टूटने पे होती है, वैसा ही होगा. अंकल ने मेरी चुदाई जारी रखी, और मैं मोनिंग करना शुरू कर दिया.

अंकल: तूने मेरी बीवी की कमी पूरी कर दी.

मे: आपके लिए मैं कुछ भी करूँगा.

अंकल की आँखों में खुशी के आँसू थे. मैने अंकल को किस की, और फिर उन्हे लेटने को कहा. अंकल लेट गये, और मैं उन पर चढ़ गया. फिर मैने उनके लंड को अपनी गांद में सेट किया, और उसकी सवारी शुरू की. धीरे-धीरे अंकल का लंड मेरी गांद में अंदर तक जाता रहा, और मैं मोनिंग करता रहा.

मैं अंकल की छाती के बालों के साथ खेलता भी, और उन्हे चाट-ता भी. उनके बालों में फसा पसीना मुझे चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था. थोड़ी देर बाद अंकल ने अपना माल मेरी गांद में ही डिसचार्ज कर दिया.

माल इतना ज़्यादा था की मेरी गांद से बाहर रिसने लगा. मैने सारे माल को अपनी हातेली पर जमा किया, और अंकल के सामने उसे छत कर स्वॉलो कर लिया. फिर मैने अंकल के लंड को भी चाट कर सॉफ किया. अंकल के लंड पर मेरी गांद की महक थी.

थोड़ी देर बाद राज भी आ गया. मैं और अंकल दोनो ही बिस्तर से निकलना नही चाहते थे. अंकल ने फोन करके राज को बोल दिया की ज़ेशन जेया चुका है, और वो भी सो गये थे. राज भी अपने कमरे में जेया कर सो गया. रात भर अंकल से मैं चूड्ता रहा अलग-अलग पोज़िशन में.

सुबा 6 बजे राज से बचते-बचाते अंकल ने मुझे घर छ्चोढ़ दिया. रात भर मेरी इतनी चुदाई गुई थी, की मैं सीधी तरह चल भी नही पा रहा था. मगर सब दर्द वर्त इट था.

तो दोस्तों आपको मेरी ये स्टोरी कैसी लगी, मुझे कॉमेंट्स में ज़रूर बताए. कुछ गंदी फॅंटेसी हो तो उसपे भी मैं सब का रिप्लाइ देता हू.

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