दोस्त की विधवा लेकिन जवान बहन की मस्त बुर में लंड दिया

dost ki behen ki chudaiहाय दोस्तों, मैं मोहित यादव आप सभी का  स्टोरी में स्वागत करता हूँ। मैं कानपूर जिले का रहने वाला हूँ और पिछले कई महीनो ने नॉन वेज स्टोरी का नियमित पाठक हूँ, मेरे सारे दोस्त भी यहाँ की मस्त मस्त कहानी पढ़ते है। लेकिन आज मैं यहाँ आप लोगो के बीच अपनी कहानी सुनाने आया हूँ। ये मेरी रियल कहानी है। दोस्तों, कुछ दिन पहले मेरे दोस्त चरनजीत के घर शादी थी। उसकी छोटी बहन की शादी थी। जब मेरी बहन की शादी हुई थी तो चरनजीत ने सारा काम करवाया था। चरनजीत बलरामपुर में रहता था। इसलिए ये मेरा फर्ज बनता था की मैं भी उसकी बहन की शादी में सारा काम करवाऊं। इसलिए मैंने अपने ऑफिस से ३ दिन की छुट्टी ले ली और चरनजीत के घर चला गया। दोस्तों उसके पापा तो गुजर ही चुके थे इसलिए मैंने और चरनजीत ने मोटरसाइकिल उठायी और सारा काम करवाने लगे। सबसे पहले हलवाई हम दोनों ने बुक करवाया, फिर शामियाना और टेंट वाला बुक करवाया ,फिर दहेज का सामान खरीदने चले गये। रोज मैं और चरनजीत मोटरसाइकिल से यहाँ से वहां दौड़ लगाते और काम करवाते। शादी बस ४ दिन बाद होनी थी, इसलिए हम भाग भागकर टीवी, फ्रिज, कूलर, और अन्य सामान खरीद रहे थे।

चरनजीत की बहन की शादी ठीक ठाक और राजी खुशी से निपट गयी। उसने कुछ दिन और रुकने को कहा। मैं कानपुर से बलरामपुर सिर्फ उसकी बहन की शादी अटेंड करने आया था, इसलिए मैं रुक कहा। फिर मेरी मुलाकात आरोही दीदी से हुई। मेरा दोस्त और बाकी सभी लड़के आरोही दीदी को सिर्फ ‘दी’ कहकर पुकारते थे तो मैं भी दी कहकर पुकारने लगा। एक दिन वो बाकी औरतों के साथ बैठी थी। उन्होंने सफ़ेद रंग की साडी पहन रखी थी। एक साड़ी वाले को औरतों ने घर में रुकवा लिया था और अपनी अपनी साड़ियाँ पसंद कर रही थी। मैंने एक गुलाबी रंग की साड़ी उठा ली।

“दी…..देखिये, ये साड़ी आप पर बहुत खिलेगी!” मैंने कहा

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तो बाकी औरते एकाएक चुप हो गयी।

“क्या तुम नही जानते ही आरोही विधवा है…” एक औरत मुझसे बोली

मैं तो बिलकुल दंग रह गया। सारी औरतें आपस में खुसर फुसर करने लगी। दी [आरोही] मुझे लेकर एक दूसरे कमरे में आ गयी और कहने लगी कोई बात नही है। तुमको नही पता था की मैं विधवा हूँ। ‘मोहित, कोई बात नही’ दी बोली। कुछ देर बाद वो रोने लगी। आरोही दी बहुत गोरी और बहुत सुंदर थी। दोस्तों, वो बिलकुल देखने में करीना कपूर से कम नही थी। मैं उनको बार बार सोरी बोल रहा था की मेरी वजह से उनका सारी औरतों के सामने मजाक बन गया था। वो रो रही थी। आरोही दी की नीली बेहद खुबसुरत आँखों में आंसू बिलकुल अच्छे नही लग रहे थे। मैं उनकी आँख से आंसू पोछने लगा। वो कमजोर और दुखी महसूस कर रही थी।

अचानक आरोही दी ने मुझे सीने से लगा लिया। तो मैंने भी कुछ नही कहा। दोस्तों कुछ देर बाद वो मुझसे अलग हो गयी। मैं किसी काम से बाहर चला गया पर वो पल जब आरोही जैसी माल ने मुझे सीने से लगा लिया था, मैं बार बार ना जाने क्यों भूल नही पा रहा था। मुझे चरनजीत की सगी बड़ी बहन आरोही अच्छी लगने लगी थी। सायद मैं उसको चोदना भी चाहता था। धीरे धीरे मैं रोज आरोही जैसी चुदासी लड़की के लिए रोज सुबह सुबह काफी लेकर जाता और उसने बात करता। कुछ दिनों में मेरी आरोही से अच्छी जान पहचान हो गयी। एक शाम जब मैं अपने कमरे में था आरोही आ गयी। उस समय मेरा दोस्त और आरोही का भाई चरनजीत बाहर किसी काम से गया हुआ था।

“कैसी है दी???” मैंने आरोही से पूछा

“मैं…..अच्छी हूँ!!” वो हँसकर बोली

फिर हम लोग आपस में बात करने लगे। कुछ देर में आरोही ने मुझे प्रपोज मार दिया। “मोहित, मैं तुमने प्यार करने लगी हूँ” आरोही बोली। तो मैंने भी कह दिया की मैने भी जबसे आपको देखा है मेरी नींद और चैन उड़ गया है। उसके बाद आरोही ने मेरा हाथ पकड़ लिया तो मैं भी उसका हाथ लेकर चूमने लगा। फिर हम दोनों आपस में किस करने लगे। दोस्तों, मुझे आरोही बिलकुल टंच माल थी। मुश्किल से उसकी उम्र 25 की रही होगी। मैंने उसे बाहों में भर लिया और किस करने लगा। बाप रे, वो बहुत जादा सुंदर थी। उसका चेहरा पान के आकार का था। चेहरा बिलकुल ताजे गुलाब जैसा फ्रेश और ताजा था। आरोही को देखकर यही लगता था की अभी वो एक बार भी चुदी नही होगी, पूरी तरह अनचुदी होगी। उसकी शादी होने के बस १ साल के अंदर ही उसका पति खत्म हो गया था।

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आरोही के गालों में शाहरुख़ की तरह डिम्पल थे। जब वो हंसती थी तो बहुत सेक्सी लगती थी। मन यही करता था की बस अभी इसको गिराकर चोद डालूँ। फिर मैं बिना किसी शर्म और झिझक के आरोही के रसीले ओंठ पीने लगा। दोस्तों १ साल के छोटे से समय में चरनजीत की बड़ी बहन आरोही ना तो ठीक से चुदवा पायी थी और ना ही ठीक से किसी को अपने रसीले ओंठ पिला पायी थी। इसलिए आज मेरा ये फर्ज बनता था की मैं अपने दोस्त की चुदासी और बेहद सेक्सी बहन को रगड़कर चोदूँ और उसके रसीले ओंठ पियूँ। मैंने आरोही को बाहों में भर लिया और उसके रसीले संतरे जैसे होठ पीने लगा। हम दोनू एक दूसरे को आँखों ही आँखों में ताड़ रहे थे, जैसे एक दूसरे को आँखों ही आँखों में चोद लेंगे। मैं भी चरनजीत की विधवा भाभी को चोदना चाहता था, तो भी मुझसे चुदवाना चाहती थी।

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