दोस्त की सेक्सी माँ निर्मला की चूत चुदाई

ये कहानी जो मैं आज लिखने जा रहा हूँ ये मेरे पक्के दोस्त कमल की माँ निर्मला देवी के साथ में हुयी घटना है. आप सभी से निवेदन है की इस कहानी को पूरी पढ़ने के पश्चात ही आप सभी निर्मला देवी के स्तनों, चूत और कूल्हों की कल्पना करके पानी निकालें.
कमल मेरे गाँव का पुराना पक्का दोस्त है, मैं काफी समय पहले शहर में शिफ्ट हो गया था, लेकिन अचानक मुझे किसी कारणवश गाँव में जाना पड़ा, गाँव में मेरे बड़े बड़े खेत हैं, दरअसल उन्ही खेतों के काम के लिए मुझे गाँव जाना पड़ा.
जब मैं गाँव पंहुचा तो देखा एक पतला सा काला कलूटा लड़का, उम्र लगभग मेरे बराबर 27 साल, गाल अंदर धसे हुए, आँखों के नीचे काले गड्ढे पड़े हुए, दिन दोपहर की गर्मी में एक पेड़ के निचे छाँव में बैठकर चिलम पी रहा था, पहले मेने उसे पहचान नहीं, मेने सोचा कोई मजदुर होगा, लेकिन उसने मुझे तुरंत पहचान लिया.
कमल- ओर पंडित भाई कैसा है? बहुत दिनों बाद आया गाँव.
मैं- यार मेने तुझे पहचाना नहीं ?
कमल- तू भी भेनचोद, दोस्त को भूल गया, भोसडीके कमल हूँ, याद है बचपन में हम सरला बाइ के दूध देखकर अपना हिलाया करते थे ?
मैं- ओह भोसड़ीचोद कमल, हरामी कैसा है तू? और ये क्या हालात बना दी अपनी तूने, चुतीया लग रहा है, भिखारी सा हो गया तू.
कमल- तू मजाक बना ले भेन के लोडे, सुल्फा पी पी कर हालत ख़राब हो गयी यार सही में, पैसों का जुगाड़ नही हो पाता, माँ के गहने भी बेच दिए मेने बहिनचोद.
मैं- ये गलत बात है यार, निर्मला चाची कैसी है ? तबियत ठीक है ?
कमल- हाँ यार ठीक ही है, बाप तो शहर चला गया था अभी तक लौट कर नहीं आया, वहां दूसरी शादी कर दी चोद्दे ने, माँ को अकेला छोड़ दिया, चल भाई घर चल, हमारे घर रहियो.
मैं- हाँ बिलकुल भाई चल, रात में दारु पिएंगे.
(दारु का नाम सुनकर कमल के मुह में पानी आ गया, हम फिर कमल के घर जाते हैं, उस समय घर पर कोई नहीं था)
मैं- चाची कहाँ है बे ?
कमल- खेत में गयी होगी झाड़ काटने. आती होगी अभी, तू आराम कर तब तक मैं बाजार जाता हूँ कुछ समान ले आऊं. और सुन लोडे, मुझे देर हो जायेगी क्योंकि बाजार काफी दूर है यहाँ से. रात तक पहुँचूँगा, माँ आये तो बता देना.
मैं- ठीक है भाई, जल्दी आईयो.
(कमल फिर अपनी एटलस साइकिल में चला जाता है, कुछ देर बाद एक सांवली, मोटी सी सुडौल औरत, उम्र लगभग 50 साल, लाल साड़ी और काला ब्लाउज पहने, अपने सर पर लकड़ियाँ लादे हुए, बड़ी बड़ी गांड मटकाते हुए, पसीने से तर बदर, घर की और आती है, ये सेक्सी मोटी बड़ी उम्र की औरत और कोई नहीं बल्कि मेरे पक्के दोस्त कमल की कामुक मोटी ताज़ी माँ निर्मला देवी है..
जिसके ब्लाउज का गला काफी खुला है, जिसमे से उसके स्तनों की काली घाटी का नज़ारा साफ़ साफ़ दिख रहा है, यह दृश्य देखकर मेरा लण्ड जोर जोर से झटके मारने लगा, निर्मला के माथे से पसीने की बूंदे उसके गालों से होते हुए, फिर गले से और अंततः स्तनों की घाटी में समा रही थी, बहुत ही मनमोहक और लण्डमोहक दृश्य था, अचानक निर्मला की नज़र मुझ पर पड़ी)
निर्मला- अरे पंडित बेटा, तू कब आया, और कमल कहाँ है ?
(मैंने श्रद्धा भाव से निर्मला के पैर छुए और प्रणाम किया, निर्मला ने मुझे आशीर्वाद दिया, और मुझे गले से लगा लिया जिसके फलस्वरूप उसका पसीना मुझे भी लग गया और जब मैं निर्मला के गले लगा तो उसके पसीने की भीनी भीनी खुशबू कम गंध ने मुझे पागल कर दिया, उसके कड़क निप्पल उसके ब्लाउज से दिख रहे थे क्योंकि उसने ब्रा नहीं पहना हुआ था, गाँव में अक्सर कोई भी औरत ब्रा नहीं पहनती थी)
निर्मला- कैसा है बेटा तू ? तू तो बड़ा हो गया रे, और तंदरुस्त भी, एक कमल को देख, गलत संगत में पड़ गया है, उसका शरीर कमजोर हो गया सुल्फा पी कर.
मैं- हाँ चाची, मैं जब आया वो सुल्फा पी रहा था, मेने मना भी किया लेकिन नहीं माना.
निर्मला- तू तो हीरो हो गया शहर में रहकर, मुझे भी ले चल अपने साथ.
(चाची मजाक के मूड में थी, और मुझ से शरारत कर रही थी, मेने भी मौके का फायदा उठाया)
मैं- चल ले चाची मेने कहाँ मना किया, लेकिन मुझ से शादी करके चलियो.
निर्मला- चल हट बदमाश, शहर जाकर बदमाश हो गया तू.
मैं- मैं तो मजाक कर रहा हूँ चाची, गुस्सा न हो.
निर्मला- मैं तेरे लिए खाना बना दूँ, तू थक भी गया होगा, आराम कर लेना.
मैं- हाँ बना दे खाना, फिर खाने के बाद आराम कर लूंगा, तू सुना चाची कैसी है तू ? चाचा आता है घर ?
निर्मला(उदास होकर)- अरे वो कहाँ आता है कलमुहा, दूसरी शादी करके बैठा है सहर में, मेरी जिंदगी नरक बना दी उस आदमी ने तो.

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