दोस्त की प्यासी बीवी का समर्पण

हैल्लो दोस्तों, वैसे से तो में भी आप लोगों की तरह antarvasnahd डॉट कॉम का बहुत बड़ा दीवाना हूँ। में सेक्सी कहानियों को पढ़कर बड़े मज़े करता हूँ और में हर दिन जब भी मुझे मौका मिलता है कहानियाँ पढ़ने लगता हूँ। ऐसा करने से मेरे मन को बहुत अजीब सी ख़ुशी मिलती है और जब मेरे पास चुदाई करने का जुगाड़ नहीं होता तो में कहानी को पढ़कर अपने लंड को हिलाकर उसको शांत करके ख़ुशी महसूस करता हूँ। दोस्तों में सूरत का रहने वाला हूँ और एक बार फिर से आप सभी को अपनी एक आप बीती घटना सुनाने जा रहा हूँ जो दिसंबर महीने की है, वैसे आप सभी लोग अच्छी तरह से जानते है कि में 24 साल का एक जवान सुंदर लड़का हूँ मैंने ऐसा सुना है कि में दिखने में बहुत स्मार्ट भी हूँ और ऐसा मुझे किसी दूसरे ने बताया। मेरी लम्बाई 5 फीट 8 इंच है और मेरा गोरा भरा हुआ शरीर है मेरा 7 इंच का लंबा लंड 2.5 इंच चौड़ा भी है जो किसी भी प्यासी लड़की की चुदाई करके उसको संतुष्ट करने के लिए एकदम ठीक है।

दोस्तों में और शेखर एक बहुत ही गहरे दोस्त है और हमारी यह दोस्ती पिछले कुछ सालों से लगातार चलती आ रही है। हम दोनों एक दूसरे से कुछ भी नहीं छुपाते, हम बड़े मज़े से रहते है और मेरा भी उसके साथ बड़े मज़े से वो दिन निकल रहे थे और अभी मेरे उस दोस्त की शादी को करीब पांच महीने ही हुए थे। वैसे उसकी अच्छी किस्मत से उसकी जो पत्नी है वो बहुत ही हॉट सेक्सी और बहुत ही सुंदर लगती है, मेरी उस सुनीता भाभी के फिगर का आकार 36-28-36 है उनका गोरा रंग और गुलाबी रसभरे होंठ बड़े ही आकर्षक है जिसको देखकर मुझे हमेशा कुछ कुछ होने लगता है, लेकिन वो मेरे दोस्त की पत्नी है में यह बात सोचकर हमेशा पीछे हट जाता हूँ। दोस्तों मेरे उस दोस्त की अपनी एक दुकान है, जिसको वो खुद ही सम्भालता है। उस दुकान से उसके घर का खर्चा बड़ी आसानी से चल रहा था, इसलिए वो दोनों पति पत्नी अपने उस जीवन में बहुत खुश थे। वो हंसी ख़ुशी अपना समय बिता रहे थे। तो इस बार 31 दिसम्बर पर मेरा वो दोस्त दस दिनों के लिए कहीं बाहर घूमने गया हुआ था, वैसे उसने बाहर जाने से पहले मुझसे इस बारे में कहा भी था वो मुझे भी अपने साथ ले जाने की जिद कर रहा था, लेकिन मैंने उसको मेरे एक जरूरी काम की वजह से मना कर दिया इसलिए वो अकेला ही चला गया। फिर एक दिन में अपने उस दोस्त के घर पर गया तो मैंने देखा कि मेरी सुनीता भाभी उस समय अपने घर में एकदम अकेली थी और मेरी वो सुनीता भाभी अपने स्वभाव से बहुत ही शरारती और सेक्सी है, इसलिए वो हमेशा मुझसे हँसी मज़ाक किया करती है। उनका मेरे लिए व्यहवार बहुत अच्छा होने के साथ साथ मेरे साथ बहुत खुलकर भी रहती है, जिससे पता चलता है कि वो खुले विचारों की है और में इससे पहले भी बहुत बार उनके घर जा चुका था। फिर मैंने देखा उस दिन वो अपने घर में अकेली थी और उन्होंने मुझे देखकर मुझसे कहा कि आओ राहुल अंदर आ जाओ, बैठो मेरे साथ पहले खाना खा लो और फिर उसके बाद हम दोनों फिल्म देखेगें। तो उनके बहुत बार कहने पर मैंने उनके साथ खाना खाया और उसके बाद हम दोनों साथ में बैठकर फिल्म देखने लगे। उस समय सुनीता ने लाल रंग की बड़े गले की बिल्कुल ढीली ढाली मेक्सी पहनी हुई थी, लेकिन वो उस मेक्सी में बहुत ही सेक्सी लग रही थी और उस मेक्सी में से उनकी ब्रा बाहर से ही साफ साफ नजर आ रही थी। फिर हम दोनों उस फिल्म को देखने लगे थे। कुछ देर के बाद उस फिल्म में दो तीन बार लिप किस आ गए तब मेरी नज़र अपने पास में बैठी मेरी उस भाभी की तरफ चली गई और वो भी मेरी तरफ देखकर थोड़ा सा शरमा गई और यह सब देखकर तो मेरा लंड अब तनकर खड़ा हो चुका था। उस समय हम दोनों एक है बिस्तर पर बड़े आराम से बैठे हुए फिल्म के मज़े ले रहे थे। उस समय रात के करीब दस बज चुके थे। अब मैंने घड़ी में समय देखकर उनसे कहा कि में अब चलता हूँ क्योंकि रात भी बहुत हो चुकी है घर वाले मेरा इंतजार कर रहे होंगे और वैसे भी अब आपको भी नींद आ रही होगी, मुझे अब चलना चाहिए और यह बात कहकर में उठकर खड़ा हो गया।

यह कहानी भी पड़े  दिल्ली की आंटी की चुदाई

अब वो मुझसे कहने लगी कि आप इतनी रात को कहाँ जाते हो? आज आप यहीं पर सो जाओ और अपने घरवालों को फोन करके बता दो, आज रात को वैसे भी में अकेली हूँ आपके यहाँ पर रहने से मुझे किसी का डर भी नहीं रहेगा वरना क्या पता रात को कौन चोर लुटेरा घर में आकर मेरे साथ क्या कुछ कर दे, क्योंकि में अकेली उसका कैसे सामना कर सकती हूँ। दोस्तों मेरी तो उसके मुहं से वो बात सुनकर अपने मन की एक इच्छा जो बहुत दिनों से अधूरी थी, आज वो पूरी हो रही थी, क्योंकि मन ही मन में भी यही सब चाहता था जिसके लिए वो मुझसे अब कह रही थी और अब में मन ही मन सोचने लगा था कि आज पूरी रात में उसकी जमकर चुदाई करूंगा और वैसे भी उसका घर उस जगह पर था, जहाँ पर आसपास कोई भी घर नहीं था इसलिए हम दोनों को डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी, बस थोड़ी ही हिम्मत करने की जरूरत थी और वो काम आज मैंने पूरा करने की बात अपने मन में ठान लिया था। अब में उनके कहने पर मन ही मन बहुत खुश होकर वहीं पर सोने के लिए तैयार हो गया और उस फिल्म को देखने लगा और उस फिल्म के खत्म हो जाने के बाद वो भी उसी बिस्तर पर सो गई। फिर कुछ देर बाद मेरा एक हाथ उनके बूब्स पर छू गया, लेकिन वो मुझसे कुछ भी नहीं बोली और अब मैंने हिम्मत करके जानबूझ कर अपने उस हाथ को बूब्स पर ही रहने दिया और उसके बाद में बूब्स को धीरे धीरे सहलाने लगा था, लेकिन वो तब भी चुप ही थी। अब मेरे अंदर पहले से ज्यादा जोश के साथ साथ अब हिम्मत भी आ गई, इसलिए मैंने बिना सोचे समझे उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और में उसके होंठो को चूसने लगा। फिर कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि अब वो भी मेरा साथ देने लगी थी।

यह कहानी भी पड़े  चाची ने सेक्स किया मेरे साथ

Pages: 1 2 3 4

error: Content is protected !!