दोस्त की गर्लफ्रेंड के साथ पहला सेक्स

मैं उत्तर प्रदेश से हूँ। यह 2012 की बात है। मैं स्कूल की पढ़ाई गांव से पूरा कर चुका था, और मैं कॉलेज में पढ़ने के लिए शहर में आया था।

मेरा एक दोस्त था, जिसकी एक गर्लफ्रेंड थी, और वो उसके साथ मजे लेता था। चूंकि हम अच्छे दोस्त थे, तो उसकी गर्लफ्रेंड भी मुझे अच्छे से जानती थी। उसकी गर्लफ्रेंड का नाम किरन था।

वो मेरा नंबर दोस्त के फोन से निकाल कर मुझसे बातें करने लगी। हमारे बीच कभी-कभी नॉनवेज बातें भी हो जाती थी।

इसी तरह से कॉलेज का एक सेमेस्टर निकल चुका था।

जनवरी में मैं घर आया, तब वो मिलने के लिए बोलने लगी। फिर उसी ने प्लान बनाया। एक दिन उसके घर वाले शादी में गए थे, और उसके घर में सिर्फ वो और उसकी भाभी थी। तो वो मुझे मिलने के लिए बुलाई। मेरा घर उसके घर 25 किमी की दूरी पर था।

मैं उसके घर गया, वहां सिर्फ उसकी भाभी और वो थी। वो पानी लेकर आई और हम बैठ कर बातें करने लगे। कुछ देर बाद वो अपनी भाभी से बोली कि मैं घर दिखा कर आती हूं। उसकी भाभी ने हामी भरी, तो वो मुझे लेकर घर की छत पर ले आई। कुछ बातें करने के बाद हम नीचे आने लगे।

उसका घर काफी बड़ा था। जब हम सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे, तो मुझे उसे किस करने का मन कर रहा था। तो वो बोली,‌ “रूक क्यों गए?” तो मैंने बिना कुछ बोले उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किस करने लगा। लेकिन वो मेरा साथ नहीं दे रही थी।

वो मेरा पहला किस का अनुभव था। मेरी आंखें लाल हो गई थी, और सेक्स का भूत सवार हो गया था। फिर धीरे-धीरे अब बात किस से बढ़ कर बूब्स दबाने और चूसने तक आ चुकी थी। वो मेरा साथ नहीं दे रही थी और ना मना कर रही थी।

फिर किरन ने कहा: चलो रूम में चलते हैं।

बिना कुछ कहे मैं भी चल दिया।

जब हम रुम में पहुंचे, तो उसे अपनी बाहों में भर लिया। वो मुझे रोकने लगी।

वो बोली: मैं तुम्हारे दोस्त की गर्लफ्रेंड हूं। तुम्हारे साथ नहीं कर सकती।

मैंने उससे बहुत रिक्वेस्ट किया और बोला: ये मेरा फर्स्ट टाइम है,

प्लीज़ करने दो।

वो नहीं मानी तो मैंने

उससे कहा: ठीक है, पर किस तो कर ही सकते हैं?

वो मान गई। तब मैंने उसके होंठों में अपने होंठों को डाल दिया। उसके दोनों हाथ मेरी कमर को पकड़े, और मेरे हाथ उसकी गर्दन को। उसने अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर तक डाल दी, और मैंने भी।

मैं उसके बारे में बता दूँ, कि उसकी उम्र उस समय 20 साल से थोड़ी ज़्यादा ही थी। उसकी हाइट 5 फुट 3 इंच की थी, और 32-28-34 का फिगर था।

उसने काले रंग का सूट पहना था। किस करते-करते मैं उसके मम्मे दबाने लगा। मैं जैसे दूसरी दुनिया में चला गया था। वो भी आंखें बंद करके सिसकारियां लेने लगी।

कुछ देर बाद वो बोली: अब चलते हैं, भाभी क्या सोच रही होंगी?

मैंने कहा: अभी कहां, रुको तुमने अभी तक अपनी चूत के दर्शन नहीं कराए हैं।

वो बोली: यहां नहीं, बिल्कुल भी नहीं।

मैंने उसे खींच कर अपने करीब किया, और उसे किस करके कहा: किरन, प्लीज आज अपने मम्मे और चूत के दर्शन करा दो। यहां कोई नहीं है।

उसने कहा: देखो भाभी आ गयी तो क्या सोचेंगी हमारे बारे में?

मैंने कहा: वो तो वैसे भी सोच रही होंगी, कि हम सेक्स कर रहे होंगे। क्योंकि पूरे घर में हमीं लोग हैं, और इतनी देर से घर तो नहीं देख रहे होंगे।

मैं उसको समझाया: भाभी तो वैसे भी सोच रही होंगी, कि दोनों सेक्स करके आये हैं तो क्यों ना करके ही बदनाम हो? बिना कुछ करे बदनाम होने से अच्छा है, करके बदनाम हों।

मेरी ये बात उसकी समझ में आ गई, और बोली: बात सही है। इतनी देर हो गई है, तो यही सोच रही होंगी।

लेकिन वो बोली: ये पहली और आखिरी बार है। दोबारा नहीं दूंगी। और ये बात हम दोनों के बीच रहेगी।

मैंने हामी भरी, और

मैंने उसकी सलवार खोल दी, और सूट के ऊपर से ही बूब्स दबाने लगा। मैं ऊपर से हाथ डालने लगा।

उसने कहा: ऐसे तो तुम सूट फाड़ दोगे।

मैं इतना एक्साइटेड हो गया था, कि सब कुछ भूल गया।

फिर मैंने कहा: मम्मे चूसने है।

उसने सूट को ऊपर किया, और साथ ही ब्रा को भी। जिसे बिना उतारे ही मैं बूब्स को चूस सकूं।

पहली बार किसी के बूब्स को पूरी तरह ढंग से देखा था, और चूत को भी। चूत में हल्के-हल्के बाल थे।

मैं उसके बूब्स को एक बच्चे की तरह पीने की कोशिश करने लगा।

मुझे मजा आने लगा। मैंने दोनों बूब्स को चूसने के बाद मुंह हटाया ही था, कि उसने सूट और ब्रा ठीक कर ली।

मैंने कहा: किरन अब तुझे सलवार उतारनी पड़ेगी।

वो भी उतावली हो रही थी, तो सलवार उतार दी। मैं अपनी उंगली से चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था थोड़ी देर बाद चूत ने पानी छोड़ दिया। अब वासना की भूख दोनों को लग चुकी थी।

मैंने कहा: किरन, मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है।

मैं उसे उठा कर पलंग पर ले गया, और उसकी पैंटी उतार दी।

फिर मैं उसकी चूचियों को अपने दोनों हाथों से मसलने लगा, और मुंह में लेकर निप्पल को काट देता, जिससे उसकी दर्द के साथ-साथ उत्तेजना भी बढ़ जाती।

मैं उसके कान, गले, गर्दन, गालों को भी चूमता, जिससे वो और उत्तेजित हो जाती। चूत में उंगली डाल कर अन्दर-बाहर करने लगा।

मैं पूरी बॉडी पर किस करने लगा।

उसके मुँह से हल्की-हल्की आवाजें आ रही थी।

बस उसे मैंने सीधा लिटाया और दोनों पैरों को अपने कंधे पर ले लिया।‌ मैं फिर लंड को चूत के मुँह पर रगड़ने लगा, जिससे वो पागल सी हो गयी। फिर मैंने चूत को थोड़ा सा अपने हाथ से खोला, और अपना लंड चूत पर सैट कर दिया।

मैंने कहा: किरन रेडी!

उसने इशारे में कहा: हम्म।

मैंने झटके से लंड अन्दर किया।

वो अभी लगभग आधा ही गया था, कि उसकी एक-दम से जोरदार चीख निकली। तो मैंने अपना मुंह उसके मुंह पर रख दिया।

वो बोली: आराम से करो, तुम्हारा लंड तुम्हारे दोस्त से बड़ा और मोटा है। और मैं काफी दिनों से सेक्स नहीं की हूं।

मैंने लंड को फिर से बाहर किया, और अन्दर पूरी ताकत के साथ डाला। इस बार पूरा चला गया था।

मैं कुछ देर रुका रहा। फिर लंड को धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा।

अब उसका दर्द मज़े में बदल गया।

मैं स्पीड में उसे चोदे जा रहा था।

उसे भी मजा आ रहा था। मैं उसके मम्मे दबाता हुआ लंड को स्पीड से अन्दर बाहर कर रहा‌‌ था। कुछ देर पहले वो झड़ गयी, और उसके बाद मैं।

मैं उसके ऊपर ऐसे ही लंड अन्दर डाल कर पड़ा रहा। कुछ देर में मेरा लंड छोटा सा हो गया, और खुद बा खुद बाहर निकल गया। यह मेरी जिंदगी का पहला सेक्स था। तब मुझे एहसास हुआ कि दुनिया में सेक्स से ज्यादा मजा कहीं नहीं है।

मैंने फिर अपने कपड़े पहन लिए।

मैं बोला: किरन, मजा आया?

उसने कहा: बहुत।

वो पूछी: तुम सच में वर्जिन थे?

मैंने कहा: मेरा पहला सेक्स था, बस मुठ मार लिया करता था।

वो कुछ नहीं बोली। उसके बाद हमने उसकी भाभी के रूम में बैठ कर कुछ बातें की। उसकी भाभी मुझे देख कर मुस्करा रही थी। फिर मैं वहां से चला आया। किरन मेरे दोस्त से शादी करना चाहती थी, लेकिन किसी कारणवश नहीं हो सका। दोस्त की शादी कहीं और हो गई।

उसकी शादी में किरन भी आयी थी, क्योंकि दोस्त का उसकी फैमिली से घरेलू संबंध था।

वो मुझे घूरने जा रही थी। मैंने मोबाइल से उसकी बहुत सारी फोटो खींच ली थी। शादी खत्म हो गई, और वो भी दोस्त के घर आ गई थी।

वो मुझे घूरती रहती थी। फिर रात में दोस्त सुहागरात के लिए 12 बजे रूम में गया और बाकी लोग सब सो चुके थे। सिर्फ मैं और किरन बचे थे। मेरे लिए अलग बिस्तर लगा था, जिस पर सिर्फ़ सोने वाला था। बाकी सब सो चुके थे, कोई छत पर,‌ कोई कहीं। मेरे आस-पास कोई नहीं सोया था।

मैंने मजाक में उससे कहा: तुम्हारी जगह पर कोई और सुहागरात मना रही है। तुम्हारा ब्वायफ़्रेंड किसी और के साथ सुहागरात मनाने जा रहा है। अब तुम क्या करोगी?

तो वो पहले गुस्सा हुई, फिर बोली: तुम आज मेरे साथ सुहागरात मना लो।

ठंड का मौसम था, तो हम एक ही कम्बल में घुस गये, और वो इतनी उतावली थी, कि मुझे पागलों की तरह चूमने लगी। दोनों चिपक गए, दोनों ऐसे चिपटे जैसे बरसों के बिछड़े हों। किरन तो मानो मुझको खा ही जाना चाहती थी।

हम दोनों के होंठ भिड़े हुए थे, और ज़ुबान एक-दूसरे के मुंह में समाने को बेताब थी। मैंने हाथ नीचे किया, और किरन की सलवार का नाड़ा खोल दिया। किरन मेरा लंड ही तो टटोल रही थी।

किरन ने अपनी कुर्ती उतार फेंकी, और तब तक मैं अपना लोवर और टी-शर्ट उतार चुका था। अब मैं केवल अंडरवियर में था, और वो ब्रा-पेंटी में। किरन मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी।

मैं बोला: मेरा लंड तो अब चुदाई के लिए तड़प रहा है.

किरन ने कहा: अभी देखती हूँ कितना तड़प रहा है.

कह कर किरन ने मेरा अंडरवियर नीचे करके लंड निकाल लिया, और हाथों से रगड़ते हुए अपने मुंह में ले लिया। उसका ये रुप देख कर मैं दंग था। वो लंड चूसने में तो माहिर लग रही थी। मैं उसके मम्मे मसलने लगा ब्रा के ऊपर से ही। मेरे कहने पर उसने अपनी ब्रा-पेंटी उतार दी। उसकी मखमली चूत चमक रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे आज सेक्स का सोच कर आई थी।

मैंने चूत चूसते-चूसते उसके मम्मे भी मसल मसल कर लाल कर दिए। अब वो मेरा लंड अपनी चूत में चाहती थी, तो उसने मुझसे ऊपर आने को कहा। किरन ने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रख दिया।

मैंने हल्का सा धक्का लगाया तो लंड चूत में बेरहमी के साथ पूरा समा गया। उसके मुंह से आह की आवाज निकली, तो मैं उसके होंठों से अपने होंठ भिड़ा दिया, और चुदाई की धक्का-पेल शुरू कर दी।

वो भी चुदासी थी, तो वह भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी, और वह नीचे से उछल रही थी।

वो मम्मे अपने हाथों से पकड़ कर बोली: इसे भी चूसो, बड़ा मज़ा आ रहा है।

मैं मम्मे अदल-बदल कर चूस रहा था, और चुदाई भी कर रहा था।

हालाँकि समय बहुत था, पर डर दोनों के मन में था कि कहीं कोई जाग ना जाए। मैंने ताबड़-तोड़ चुदाई करने के बाद अपना सारा माल उसकी चूत में डाल दिया।

मैं ऊपर से हटने लगा, तो वो मुझसे चिपक गयी, और बोली- हिलो मत।

इसके बाद तो पता नहीं कब कर पायेंगे। आज रात भर मुझे चोद कर मेरी प्यास बुझा दो। तुम जितनी बार चोद सकते हो उतनी बार चोदो, मैं चुदाने के लिए तैयार हूं। तो मैं उसे बाँहो में भर लिया, और उसे चूमने लगा, बूब्स को चूसने भी लगा। उसकी चूत गरम हो गई थी, और मेरा सर नीचे अपनी चूत पर दबाते हुए कहा

किरन: ये लो मेरी चूत चाटो।

तो मैं चूत चाटने लगा। कुछ देर चूत चाटने के बाद मैंने उसकी चूत में अपना लंड रगड़ते हुए घुसा दिया, और जोर-जोर से मुझे चोदने लगा। वो सिसकारियों लेने लगी। इस समय मेरी ये दूसरी चुदाई थी। मैं उसे जोर-जोर से चोदे जा रहा था, और वो भी उछल-उछल के मेरा लंड अपनी चूत में लिए जा रही थी।

करीब आधे घंटे बाद मेरा पानी छूट गया, और मैं अपने वीर्य से चूत भर दिया और ऐसे ही लेटा रहा। फिर वो मुझे प्यारा सा किस की और अपनी जगह पर सोने चली गई। उसके बाद उसकी शादी हो गई और हमारी कभी मुलाकात भी नहीं हुई।

यह कहानी भी पड़े  असंतुष्ट फ्रेंड को दिया चरम-सुख


error: Content is protected !!