दोस्त की बहन की वर्जिन चूत चोदी

ये कहानी लगभग 4 साल पहले की है. मैं उसी साल 19 का हुआ था, और मैने अपनी गफ़ को छ्चोढ़ के किसी की नही ली थी. मेरा नाम राजीव है. मेरा कद 6’2″ है. लंड मेरा 8 इंच का है, और मेरा रंग काला है. मेरा बड़ा लंड होने के कारण मेरी गफ़ उसे ठीक से चूस नही पाती थी.

एक दिन की बात है, मेरे दोस्त रवि के सारे घर वाले गाओं गये थे. सिर्फ़ वो, और उसकी बड़ी बेहन गायत्री घर पर थे. मैं, रवि, और एक और दोस्त अभिनंदन उसके घर पर सोने गये थे. देर रात तक हमने मस्ती मज़ाक किया. उसकी दीदी भी हम लोगों के साथ थी.

खेल-खेल मैं गायत्री का हाथ मेरे लंड को हल्के से आ लगा, और मेरा लंड अचानक से तंन गया. पर हम लोग सब बैठे थे, तो मैने तकिया अपने लंड के उपर रख लिया. गायत्री को ये एहसास हो चुका था शायद. इसलिए दोबारा वो पूरी की पूरी मुझपे आ गिरी, और उसका हाथ मेरे लंड पे था.

उसके बूब्स मेरे होंठो के करीब थे. हम दोनो ने एक-दूसरे को संभाला. ऐसे ही रात के टीन बाज गये, और हम लोग सब सोने चले गये. गायत्री भी अपने रूम में चली गयी. हम लोग सब इतने तक चुके थे, की एक-दूं गहरी नींद में सो गये. कुछ देर बाद मेरी जांघों पर मुझे एक हाथ महसूस हुआ.

मेरी नींद खुली तो वो गायत्री का हाथ था. मैने उसकी आँखों में देखा तो मानो वो कह रही हो की उसके बदन को छोड़-छोड़ कर तोड़ डू. फिर हम दोनो गायत्री के रूम में चले गये. रूम में जाते ही गायत्री मुझ पर चढ़ गयी.

तब उसने मुझे बताया, की मेरी गफ़ से उसकी बात हुई थी. तब उसने मेरे बड़े लंड और उसे ना चूस पाने के बारे में बताया था गायत्री को. उस वक़्त मैने गायत्री को पहली बार गंदी नज़रो से देखा.

उसके बड़े-बड़े बूब्स थे, मोटी गांद थी, लंबे सीधे बाल थे, और वो चश्मा भी लगती थी. तभी मैने उससे पूछा की वो किस टाइप का सेक्स करना चाहती थी. तो उसने बताया की उसने कभी सेक्स नही किया था. मगर पॉर्न फिल्म्स बहुत देखी थी. और उसे हार्डकोर सेक्स बहुत पसंद था. तो ये उसकी पहली चुदाई थी.

तब मैं झट से उसके गले को एक हाथ से पकड़ कर उसे चोक करने लगा. उसने भी अपने आप को मुझे सौंप दिया था. मैने उसे दीवार में ले जेया कर सत्ता दिया (हल्के से ही). फिर मैं उससे किस करने लगा, और अपने बदन को उसके बदन से रगड़ने लगा.

उसके बाद मैने उसकी कुरती फाड़ दी. वो मेरी ताक़त देख कर चौंक गयी. मैने उसकी लेगैंग्स भी फाड़ दी. तभी मैं सोफे पे जाके बैठ गया, और उसे बोला-

मैं: ब्रा उतार, या मैं फाड़ डू?

तो उसने जल्दी से ब्रा उतार दी. इससे उसके बूब्स लटक गये. फिर मैने उससे कहा की कुटिया बन के मेरे पास आए. वो पहले तोड़ा झीजक गयी, बुत दोबारा बोलने पे मान गयी. उसको मैने अपनी जाँघ पे बिताया और गांद पे एक-दो थप्पड़ मारे. गायत्री पूरी गीली हो गयी थी.

मैने उसकी पनटी खींच के फाड़ दी, और उसकी छूट को पनटी से आज़ाद कर दिया. उसकी चीख निकल गयी, तो मैने उसके मूह को अपने हाथो से बंद कर दिया. उसकी छूट पे दाग पद गया था पनटी के फटने से.

मैने अपनी दो उंगलियाँ उसकी छूट में डाल दी. वो पूरी गीली हो चुकी थी. फिर मैने अपनी उंगली आयेज-पीछे करनी शुरू की, और वो मोन करने लगी. कुछ देर बाद वो झाड़ गयी. मैने उसे घुटनो पे बैठने को कहा, और वो झट से बैठ गयी. फिर मैने अपना लंड निकाल के उसके मूह पर रख दिया.

मेरे लंड की लंबाई उसके चेहरे की लंबाई के बराबर थी. मैने उसे अपनी बॉल्स चूसने को कहा, और वो झट से बॉल्स को चाटने लगी. अब वो मेरी हर बात मानने लगी थी. थोड़ी देर बाद मैने उसको मूह खोल कर अपनी टंग बाहर निकालने को कहा.

उसने झट से वैसा ही किया. फिर मैने अपना लंड उसके मूह में दे दिया. पहले तो उसने खूब जाम के मेरा लंड चूसा. मगर पूरा वो भी नही चूस पा रही थी. फिर मैने उसके मूह हो छोड़ना स्टार्ट कर दिया. मैं उसके सर को पाकर के मूह छोड़ने लगा. शुरू-शुरू में उसे दर्द हुआ मानो वो रुकने के लिए कह रही हो. मगर मैं ना रुका, और तेज़ी से छोड़ने लगा.

फिर वो माना करना छ्चोढ़ दी. धीरे-धीरे मैं अपना लंड उसके गले तक ले गया. तब जाके कही मेरा पूरा लंड उसके मूह में समाया. फिर मैने उसे बेड पे घोड़ी बनने को कहा. वो झट से मान गयी. मैने थोड़ी सी थूक उसके छूट पे लगाई, और अपना लंड उसकी छूट में डालने लगा.

पहले के दो इंच पे ही उसकी चीख निकल गयी. मैने झट से उसके मूह को बंद किया, और लंड अंदर डालता रहा. वो चीखती रही. फिर मैने अपना पूरा लंड उसके अंदर डाल दिया. अब मैं गायत्री को छोड़ने लगा. अभी भी वो चीख ही रही थी.

उसकी आँखों से आँसू भी आ रहे थे, मगर कुछ देर बाद उसकी चीख मोनिंग में बदल गयी. फिर उसने खुद अपने हाथो से मेरे हाथ को अपने मूह से हटाया. अब वो भी खूब एंजाय कर रही थी. मैने उसकी गांद में दो-टीन थप्पड़ भी मारे. वो और ज़ोर से मोन करने लगी.

फिर मैने एक उंगली उसकी गांद में भी डाल दी. उसने माना किया और कहा किसी और दिन ये भी मार लेना. फिर मैने उसे झट से पलटा और आयेज से उसकी लेने लगा. साथ ही साथ मैं उसके बूब्स भी दबा रहा था, और चूस भी रहा था.

फिर मैने उसके बूब्स पे एक लोवे बीते दे दिया इस दिन की निशानी के तौर पर. वो दोबारा झड़ने वाली थी. मैने उससे झड़ने की इजाज़त नही दी, और वो मुझसे झड़ने की भीख माँगने लगी. मैं भी अब झड़ने वाला था. फिर मैने उसको इज़्ज़त दी, और मैं और वो एक साथ झाडे. मैने अपना माल उसके अंदर ही छ्चोढ़ दिया.

फन ओं होने के बावजूद मैं और वो दोनो पसीने से तार-बतर थे. फिर उसने मुझसे कहा की मैं जब चाहे उसकी ले सकता था. मैं बिना उसपे ध्यान दिए रवि के रूम में सोने चला गया. मानो मैने उसे इस्तेमाल करके वही छ्चोढ़ दिया हो.

उसके बाद भी मैने उसे काई बार छोड़ा. काई बार उसकी गांद भी मारी. एक बार तो मैने और अभिनंदन ने भी मिल कर उसकी मारी. मगर ये सब कहानी किसी और दिन.

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