दो बहनो के साथ चुपाचिपि

ये बात तबकि है जब मे 10थ मे था। अपरिल का महिना था सभि सचूल मे चुत्ति सुरु हो गयि थि। मे हर साल चुत्ति मनने अपने ममा (उनसले) के घर जता था। इस बार भि मे उनके घर चुत्ति मनने चला गया। मे आपको बता देअ हु कि मेरे उनसले बहुत साल पेहले हि देअद हो गये थे। अब उनके घर मे मेरि ममि उनकि बदि लदकि मनिशा उस से चोति लदकि जगरुति और उस से चोता लदका मनोज रेहते है।तब मनिशा 16 जगरुति 13 और मनोज 12 साल का था।

मेरि ममि एक सोमपनी मे सलरक है। वो पुरे दिन घर पर नहि होति है। मे ,

मनोज , जगरुति और मनिशा पुरे दिन बहुत खेलते है और रात को सब फ़लूर पे साथ मे हि सो जते थे और ममि एक अलग बेदरूम मे सोति थि। एक दिन मेने और मेरे दोसत ने उसके घर पर एक बलुए फ़िलम देखि। मे पेहलि बार बलुए फ़िलम देख रहा था मे बहुत एक्ससिते हो गया। उसदिन हर वकत मेरे दिमग मे वो हि फ़िलम दिख रहि थि। मुजे भि सेक्स करने का बहुत मन्न कर रहा था।

उस रात को जब सब सो गये लेकिन मुजे निनद नहि आ रहि थि ?(यौ कनोव थत) मनिशा मेरे पस्स मे हि सोयि थि । मेने देखा कि वो पुरि तरह से सो गयि हे तब मेने हलके से उसकि कमर पर हथ रख दिया फिर धिरे धिरे मेने अपने हाथ को उपर लेजकर उसके अप्पले सिज़े बूबस पर रख दिया और धिरे से दबया इतने मे हि वो जाग गयि ।मेने अपना हाथ उसके बूबस पर हि रहने दिया और ऐसे बेहवे किया कि मे सच मुच मे सो रहा हु। फिर उसने मेरे हाथ को हतकर सिदे मे रख दिया। दूसरे दिन वो मुजे अजीब नज़र से देख रहि थि लेकिन मे बिलकुल नोरमली बेहवे कर रहा था।

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उस दिन ममि के ओफ़्फ़िसे जने के बाद हम सब दोपहर को चुपचुपि (अ गमे) खेलने लगे। पेहला तुरन मनोज का आया । उसने 100 तक गिना और हुम तीनो चुप गये। मनिशा बेदरूम मे , जगरुति दूर के पिचे और मे बथरूम मे चुप गया। थोदि देर के बाद जगरुति औत हो गयि। उसके बाद मनोज मुजे धूधने के लिये बथरूम कि और आअ रहा था इस लिये मे वहा से निकल कर बेसरूम मे मनिशा के पस्स भग गया। मनिशा ने मुजे कहा कि तुम इधेर कयौ आये हुम दोनो औत हो जयेगे मेने उसे कहा कि कुच नहि होगा। थोदि देर मे मनोज बेदरूम कि और आने लगा तब हुम दोनो बेदरूम के पलनग के पिचे बेथे थे। जब उसने बेदरूम का दूर खोला तो मेने मनिशा को पलग के सिदे मे लेतकर उसके उपर सो गया। फिर मनोज को हुम दिखै नहि दिये इसलिये वो वहसे चला गया। फिर मेने मनिशा के लिपस पर अपने लिपस रखा कर उसे 2-3 मिनुते तक किस्स कर दि।थत’स मी फ़िरसत किस्स तो अनी लदी वहत अ अमज़िनग फ़ीलिनग थत वस। वो कुच नहि बोलि। फिर मनोज आ जयेगा ये सोचकर हुम औत हो गये।

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