पड़ोसी के साथ छत पर बहन की चुदाई

हेलो दोस्तों मेरा नाम मनीष है, और ये एक रियल सेक्स स्टोरी है. मैं अभी कॉलेज जाता हू, पर ये कहानी उस वक़्त की है जब मैं नया-नया कॉलेज आया था.

दीदी उस वक़्त पूरी जवान थी. उनका नाम ऋतु है. और वो उस वक़्त 22 साल की थी. बचपन से ही बहुत ही ज़्यादा सुंदर है. उनकी गड्राई हुई जवानी देख कर मेरे दोस्तों में खलबली मच जाती है.

आज भी मेरे दोस्तों में मेरी पीठ पीछे दीदी की ही बातें होती है. गर्मियों के दिन थे, और हम सभी च्चत पर सोया करते थे. मम्मी और पापा नीचे सोते थे.

मेरे पड़ोस में एक लड़का था जिसका नाम सूरज था. वो मेरी दीदी का उमर का था. हम तीनो खूब खेला करते थे. शाम को ही मैं च्चत पर बिस्तर लगा देता था.

सूरज भैया और मेरी च्चत एक-दूसरे से अटॅच थी, तो वो च्चत के मध्यम से ही हमारी च्चत पर आ जाते, और हमारे साथ खेलते बहुत. ज़्यादातर वो दीदी से बातें करते, और उनके साथ खेलते थे.

उनके बीच कभी सीरीयस बातें होती, तो वो लोग फुसफुसा कर बातें करते, और दीदी मुझे दाँत कर बोलती की जेया कर तू सो जेया. वो लोग घंटों ना जाने किस बारे में बात करते, और एक-दूसरे से खूब मज़ाक करते.

मुझे उनकी बातें समझ नही आती थी. मैं अपने बिस्तर पर पड़ा रहता था. जब तक दीदी का मॅन उनसे बातें करने का होता, तब तक उनके बिस्तर पर लेट कर खूब उनसे बातें करती थी. फिर उसके बाद मेरे बिस्तर पर आ कर मेरे साथ सो जाती थी.

एक दिन मैं अपने बिस्तर पर लेता हुआ था, तो दीदी और सूरज भैया आपस में बातें कर रहे थे. ऐसा लग रहा था की बहुत सीरीयस बातें हो रही थी. मैं सोने का नाटक कर रहा था, और उनको देख रहा था. तभी वो दोनो बातें करते-करते एक-दूसरे के मूह से मूह सत्ता दिए और फिर अलग हो गये.

फिर वो दोनो बहुत शांत हो गये. सूरज भैया अपनी चादर निकाले और दोनो पर डाल लिए. अब वो लोग चादर के अंदर हो गये. दीदी मेरी तरफ मूह कर दी, और सूरज भैया उनसे पीछे से ही सतत गये, और उनके कंधे पर किस करने लगे. मैं ये देख कर बहुत उत्तेजित हुआ.

फिर दीदी सूरज भैया के हाथ को पकड़ कर अपने पेट पर रख दी, और आँखें बंद कर ली. वो दोनो चादर के अंदर क्या कर रहे थे, मुझे पता नही चल पा रहा था. पर सूरज भैया का हाथ हिलता हुआ नज़र आ रहा था. थोड़ी ही देर बाद ऐसा लगा जैसे चादर के अंदर भूकंप आ गया हो.

सूरज भैया अपनी कमर हिलाते तो दीदी थोड़ी आयेज की और झुक जाती. और ऐसा लगातार वो लोग कर रहे थे. दीदी की आँखें बंद थी, और हल्की-हल्की मूह से आ निकल रही थी.

फिर दीदी ने कुछ फुसफुसा कर सूरज भैया से कहा, और वो उनसे तोड़ा पीछे हुए. दीदी सीधी लेट गयी, और अपने पैरों को फैला ली. फिर सूरज भैया चादर के अंदर ही दीदी के उपर चढ़ गये, और चादर को ठीक से ओढ़ लिया.

भैया जब चआदर ओढ़ रहे थे, तब वो चादर को तोड़ा देर के लिए हटाए. तो मैने देखा की दीदी नीचे से पूरी नंगी थी, और सूरज भैया भी नंगे थे. और दीदी की गोरी-गोरी जाँघ दिख रही थी. सूरज भैया उनके उपर चढ़े, और अपने लंड को उनकी छूट में डाल दिया. फिर वो उसके उपर लेट गयी, और फिर उपर से चादर डाल कर धक लिया. उसके बाद दीदी के सर को पकड़ कर उनके गाल को चूमते हुए छूट में धक्के लगाने लगे.

रात का समय था, और मौसम बिल्कुल शांत था. लेकिन इन दोनो की साँसों की आवाज़ सुनी जेया सकती थी. दीदी के मूह से हल्की-हल्की आ निकल रही थी. सूरज भैया लगातार दीदी को छोड़ रहे थे. चादर के उपर से भैया की कमर हिलती सॉफ नज़र आ रही थी.

थोड़ी देर तक ऐसे ही चलता रहा. उसके बाद दोनो शांत हो गये, और ऐसे ही पड़े रहे. फिर सूरज भैया उठे, और चादर को हटा दिया. उसके बाद दीदी अपनी छूट को कपड़े से सॉफ की, और फिर दीदी ने अपनी सलवार सूट को ठीक किया, और मेरे पास आ कर लेट गयी. सूरज भैया भी अपने कपड़े ठीक करके लेट गये.

दीदी रोज़ ऐसे ही सूरज भैया से उनके बिस्तर पर बातें करती लेट कर, और बात करते-करते वो लोग मुझे देखते की मैं कब सो रहा हू.

मैं भी जल्दी ही सोने का नाटक करता, तो फिर दोनो चादर के भीतर जाते, और फिर से उन दोनो की चुदाई शुरू हो जाती थी. एक दिन आधी रात को जब मेरी नींद खुली, तो मैने देखा की दीदी और सूरज भैया दोनो बिल्कुल नंगे थे चाँद की रोशनी में.

दीदी का दूधिया हॉट कुवर्व्स वाला बदन चमक रहा था. उनकी दोनो चुचियाँ हवा में लहरा रही थी. सूरज भैया बारी-बारी से चुचियों को चूस रहे थे, और दीदी अपने मूह से हल्की-हल्की सिसकारी निकाल रही थी.

फिर सूरज भैया उनकी टाँगों के बीच में आए, और अपने लंड को उनकी गोरी छूट के भीतर घुसा कर दीदी के उपर लेट गये. फिर उनके होंठो को चूस्टे हुए उनकी चुदाई करने लगे. दीदी के मूह से हल्की-हल्की आआहह… सस्स्शह… आआहह… निकल रही थी.

सूरज भैया दीदी के उपर लेट कर उनके गाल को चूमते हुए ज़ोर-ज़ोर से छोड़ रहे थे. चाँद की रोशनी में उन दोनो का नंगा बदन चमक रहा था, और उन दोनो की चुदाई से माहौल बिल्कुल गरम हो गया था.

ऐसे ही काफ़ी देर तक चुदाई के बाद दोनो शांत हो गये, और लेट कर एक-दूसरे से बातें करने लगे. पूरे गर्मी के मौसम में वो लोग ऐसे ही छत पर चुदाई करते थे.

फिर जब गर्मी के बाद बरसात आई. दीदी को भैया से चुदाई का मौका नही मिल रहा था. पर फिर भी वो लोग किसी ना किसी बहाने से कहीं ना कहीं चुदाई कर लेते थे. पर मुझे अब उनकी चुदाई देखने को नही मिल रही थी.

मेरी दीदी का पहले भी काई लोगों के साथ अफेर रह चुका था. ऐसे ही चोरी च्छूपे मैं एक-दो लोगों को जानता हू, जिन्होने मेरी दीदी को छोड़ा है, और मैने उन्हे चुदाई करते हुए देखा भी था.

एक तो मेरे पड़ोस के सूरज भैया थे, और लोग भी थे जिनके बारे में अगले भाग में लिखूंगा.

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