देवर ने की अपनी भाभी की रफ चुदाई

पिछले पार्ट में जैसे मैने बताया की भैया नाइट ड्यूटी पे जाने वाले थे, तो अब रात को घर पे सिर्फ़ मैं भाभी और उनका बच्चा ही रहेगा. ये सुन कर मैं और भाभी बहुत खुश थे. मेरी आखरी रात बहुत अची गुज़रने वाली थी. भैया ने रात का खाना खा लिया, और उनके ऑफीस जाते ही भाभी ने घर के सारे काम निपटा लिए.

मैं उनके बच्चे के साथ टीवी देख रहा था लिविंग रूम में बैठ कर. भाभी ने सब काम ख़तम किए, और आ कर छ्होतू को ले गयी सुलने उसके रूम में. कुछ 30 मिनिट्स बाद भाभी उसको सुला कर बाहर आई, और लिविंग रूम की लाइट्स ऑफ कर दी, और मेरी गोदी में आ कर बैठी. फिर वो मुझे चूमने लगी.

भाभी ने आज स्लीव्ले वाला नाइट्गाउन पहना था, और अंदर कुछ भी नही. मैने वही पर भाभी को नंगी कर दिया, और भाभी ने भी मेरी त-शर्ट और शॉर्ट्स उतार दिए थे. अब मैं सिर्फ़ अंडरवेर में था, और भाभी मेरी गोदी में पूरी नंगी थी.

कुछ देर वही एक-दूसरे का बदन चूमने और चाटने के बाद मैने भाभी को अपनी बाहों में उठाया. फिर उसको बेडरूम में ले गया. वाहा मैने उसको बेड पर लिटाया, और उसके पैर फैला के छूट चाटने लगा. कुछ 10 मिनिट्स तक मैने उसका पूरा बदन चूमा और छाता. फिर भाभी ने मुझे लिटा दिया बेड पे, और मेरे पैरों के बीच में आ गयी.

वो मेरे पैरों के बीच बैठ कर मेरा अंडरवेर निकालने लगी. अंडरवेर निकाल कर बाजू में फेंक दिया और फिर धीरे-धीरे मेरे लंड को चूमने लगी. मैं बस लेट कर मज़े ले रहा था. थोड़ी देर में भाभी ने लंड को चाटना और चूसना भी शुरू कर दिया.

मेरे लंड को आचे से गीला करने के बाद वो मेरे लंड पे बैठ कर मेरे बदन पे गिर गयी. उसने धीरे-धीरे अपनी गांद हिलनी शुरू की, और अपनी आवाज़ दबा कर सिसकारियाँ लेने लगी. मैने अब एक हाथ से उसकी कमर कस्स के पकड़ ली, और दूसरे हाथ से उसके बाल खींच कर उसकी गर्दन और बाबलो को चूमना और चाटना शुरू किया. भाभी ने हल्की आवाज़ में मेरे कान में कहा-

भाभी: आज तुम अगर रफ होना चाहते हो तो मैं माना नही करूँगी. बस आखरी रौंद हम एक-दूं प्यार से करेंगे.

मैं: श भाभी, तुम जानती हो ना मुझे ये आज़ादी मिल गयी तो मैं कितना बेरहम हो सकता हू?

भाभी: मुझे पूरा भरोसा है तुझपे. तू रफ होते हुए भी मुझे बहुत प्यार करेगा.

मैने ये सुनते ही उसको स्मूच कर लिया, और हम दोनो बेड पे घूम गये, और अब मैं उसके उपर और वो मेरे नीचे थी. मैने अब एक हाथ से उसका मूह दबाया, और दूसरे हाथ से एक एक निपल्स को ज़ोर से खींच रहा था. मेरे हाथ के कारण उसकी चीखें डब गयी थी.

मैने फिर एक निपल मूह में लिया, और काटना और चूसना शुरू किया. अब मैं उसका मूह दबा कर उसके निपल्स चूस्टे हुए उसको ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार के छोड़ रहा था. 5 मिनिट्स तक ऐसे छोड़ने के बाद मैने उसके बाल पकड़ कर उसको उठाया, और कुट्टी बनाया.

मैने अपनी अंडरवेर ढूंढी, और उसके मूह में तूस दी ताकि उसकी चीखें ना निकले. पीछे से उसके बाल खींच कर मैने अब उसकी छूट में लंड घुसाया, और धीरे-धीरे स्पीड बढ़ते हुए छोड़ना शुरू किया. अब पुर रूम में ठप-ठप की ज़ोरदार आवाज़ हो रही थी.

मैने भी भाभी के गांद पे एक ज़ोरदार थप्पड़ मार दिया.

फिर मैने उसको बेड से नीचे उतरा, और बेड के सामने खड़े हो कर मैने उसको बेड पे झुका दिया. उसके बाद उसके पीछे खड़े हो कर छोड़ना शुरू कर दिया. मैने उसके दोनो हाथ पकड़ रखे थे, और वो अपना मूह बिस्तर में दबा रही थी.

कुछ 10 मिनिट्स में मैं भाभी के अंदर ही झाड़ गया, और उसके बगल में जेया कर लेट गया. भाभी ने मूह से मेरी अंडरवेर निकली, और मेरी छाती चूमते हुए बोली-

भाभी: वाउ! आज क्या हो गया था तुम्हे? इतना ज़ोर से तो तुमने पहले कभी नही किया?

मैं: मैने कहा था ना भाभी, आज़ादी मिल गयी तो मैं बेरहम हो सकता हू.

भाभी: सही में यार! पर मज़ा बहुत आया. तेरे भैया ने शादी के इतने सालों में ऐसा कभी नही छोड़ा होगा जैसा तूने आज किया है.

मैं: अब से कोई टेन्षन नही लेना तुम. जब भी तड़प मचे चूड़ने का तो मैं हू ना.

भाभी: पर तू तो कल जेया रहा है (उदास हो कर कहा)

मैं: तो क्या हुआ? जब भी तुमको बहुत याद आए मेरी, तो एक मेसेज या कॉल कर देना. मैं ट्रेन पकड़ के आ जौंगा.

भाभी: पक्का? अपनी भाभी को भूलोगे तो नही?

मैं: मैने पहले भी कहा था ना तुमसे, मुझे जो सुख तुमने दिया है, उसके बाद मैं तुमको ज़िंदगी भर नही भूल सकता.

भाभी ने फिरसे मुझे चूमना शुरू किया और कहा-

भाभी: मेरा बस चले तो मैं तुम्हारे साथ ही निकल चालू.

मैं: तो चलो साथ, किसने रोका है?

भाभी (शरमाते हुए): काश ऐसा हो पाता. खैर छोढ़ो वो, मैं तुमको हर रोज़ मेसेज करूँगी, और कभी मॅन किया तो वीडियो कॉल भी करूँगी.

मैं: हा हम फोन सेक्स करते रहेंगे.

भाभी: वो क्या होता है?

फिर मैने उसको फोन सेक्स के बारे में समझाया.

भाभी: वाह! ये तो बिल्कुल करेंगे जी.

और फिर वो मुझे फिरसे चिपक कर स्मूच करने लगी. मैने भाभी को अपने उपर खींचा, और अब मैं एक हाथ से उसकी गांद मसल रहा था, और एक हाथ उसकी पीठ पे फेरते हुए उसको स्मूच कर रहा था. कुछ 10 मिनिट्स बाद मेरा लंड फिरसे खड़ा होने लगा, तो मैने हल्की आवाज़ में भाभी के कान में पूछा-

मैं: भाभी मेरी एक खावहिश पूरी करोगी?

भाभी (हेस्ट हुए): अब और भी कुछ बचा है?

मैं: मैं तुमको बाल्कनी में छोड़ना चाहता हू.

भाभी: हमने दोपहेर को ही तो किया था वाहा.

मैं: हा पर इस बार खड़े-खड़े. बाल्कनी में पुर नंगे हो कर चुदाई करेंगे. किसी के देखने का दर्र रहेगा तो और एग्ज़ाइट्मेंट होता है.

भाभी ने कुछ देर सोचा, और मैने भी बहुत मनाया उसको. फिर वो मान गयी. आयेज क्या हुआ ये जानिए अगले, और इस सीरीस के फाइनल पार्ट में.

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