डेरे वाले बाबा जी और सन्तान सुख की लालसा-3

आरती की सैक्सी नंगी खूबसूरती को देख कर मंगल खुद को रोक नहीं पाया और आरती के पास आ कर उसकी चूचियों को अपने हाथों में पकड़ कर मसलने लगा। वास्तव में आरती को इन दो मर्दों के सामने खुद का सिर्फ सैंडल पहने नंगी मौजूद होना बहुत अच्छा लग रहा था। उसने अपनी ज़िंदगी में बहुतों से चुदवाया था पर एक साथ दो मर्दों से बहुत कम चुदी थी। दो मर्दों से एक साथ चुदवाने का उसे बेहद शौक था और हमेशा ऐसा मौका ढूँढती रहती थी। आरती फिर थोड़ा झूठ का नखरा दिखाते हुए बोली, “उउफ्फ्फ्फ नहींईईईई प्लीज़ मंग…ल नहहहींईईईई मुझे जाने दो। प्लीज़ जसवंत, मंगल के सामने मुझसे ऐसा सब कुछ मत करना, अपनी नादान बेटी की खातिर मैंने यह सब तेरे साथ किया, लेकिन मंगल को इसमें मत लेना। मुझे शरम आती है। प्लीज़ मंगल तुझे कसम है, मेरे बदन को छूना भी नहीं।” आरती को पता था कि उसकी बात कोई नहीं सुनेगा और वो भी यही चाहती थी और झूठमूठ का नखरा कर रही थी।

दोनों मर्द आरती की बात अनसुनी करके अपना-अपना काम करते रहे। जसवंत ने फिर से ज़ोर लगा के अपना लंड आरती की गाँड में घुसा दिया। आरती को दर्द हुआ लेकिन इस बार वो दूसरे मर्द से अपने मम्मे मसलवाने से इतनी गरम हो चुकी थी कि उसे दर्द का एहसास नहीं हुआ। आरती को अब मज़ा आ रहा था लेकिन वो नाटक करते हुए बोली, “देखो मंगल मैं तेरी बहन जैसी हूँ, प्लीज़ ऐसा मत करो मेरे साथ। मुझे इतना ज़लील मत करो प्लीज़।” मंगल आरती के मम्मे बेरहमी से दबाते हुए बोला, “तेरी चूत को कुत्ते चोदें रंडी… साली खुद को मेरी बहन कहती है तू? छिनाल मेरी बहन तेरे जैसे रंडीबाज़ी नहीं करती। वो बड़ी शरीफ़ लड़की है, उसे शरम और हया है। चुदक्कड़ साली… तू और तेरी बेटी रंडियाँ हो और कुछ नहीं… समझी? चुप हो जा आरती और छिनाल कि तरह चुदवा ले। मैं और जसवंत साहब एक दूसरे की सब बात जानते हैं। भले हमने किसी लड़की को एक साथ नहीं चोदा लेकिन आज तुझे एक साथ चोदके वो इच्छा भी पूरी करेंगे।” अब इस दोहरे धावे से आरती को और मज़ा आने लगा। तब मंगल ने भी अपनी पैंट उतार दी और उसका दमदार लंड देख के आरती और चुदासी हो गयी। भले उसका लंड जसवंत जैसा नहीं था पर फिर भी काफी तगड़ा था और आज उसे एक साथ २-२ लंड मिलने वाले हैं, इस बात की उत्तेजना थी उसे। इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

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आरती अब जसवंत के लंड पे अपनी गाँड आगे पीछे करने लगी जिससे जसवंत को उसकी टाईट गाँड मारने में मज़ा आने लगा। जसवंत आरती की कमर पकड़के अब उसकी गाँड मार रहा था। मंगल का लंड अपने हाथ में मसलते हुए और उसका सिर अपने मम्मे पे दबाते हुए और अपनी गाँड आगे पीछे करते हुए आरती बोली, “जसवंत साले… मार मेरी गाँड और मंगल तू चूस मेरे मम्मे… आज अपने इन लौड़ों से मेरी चूत और गाँड मारो तुम दोनों… मंगल आज जसवंत ने मुझे अपनी रंडी बनाया था, अब मैं तेरी भी राँड बन गयी हूँ… वैसे भी मुझे हमेशा नए-नए लौड़ों कि तलाश रहती है… और ज़ोर से चोद मेरी गाँड जसवंत… साले कुत्ते… मार ले अपनी कुत्तिया की गाँड…. ।”

जसवंत पीछे से आरती की गाँड चोद रहा था और आगे से मंगल ने आरती के मम्मे मसलते हुए अपना लंड आरती के मुँह पे रख दिया। आरती एकदम रंडी जैसे मंगल का लंड चूसने लगी। जसवंत बड़ी बेरहमी से आरती की गाँड मारते हुए बोला, “तेरी बहन की चूत साली… हम दोनों भले अमीर गरीब हैं लेकिन एक दूसरे की रग-रग से वाकिफ़ हैं। चल यार मंगल… इस चुदक्कड़ कुत्तिया को एक साथ चोद के इसे अपनी रंडी बनायेंगे।” ऐसी हालत में आरती अपने आप से बेहाल होती और मंगल का लंड चूसते हुए बोली, “उउउउउउफ्फ्फ्फ्फ्‌फ… जऽऽऽऽ…सवंत हाँ मैं हूँ तेरी रंडी और अब मैं मंगल की भी छिनाल बनने जा रही हूँ… मंगल और दबा मेरे मम्मे और जसवंत तू ज़ोर से मेरी गाँड चोद… मैं मंगल का लंड चूसती हूँ।”

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मंगल का मोटा लंड आरती के मुँह में था जिसे आरती खूब मस्ती से चूस रही थी और जसवंत का लंड उसकी गाँड पूरी तरह खोलके धक्के पे धक्के दे रहा था। जसवंत अपना एक हाथ आरती की चूत पे ले गया और अपनी अँगुली से आरती की चूत और दाने को रगड़ते हुए उसकी गाँड मारने लगा।

आरती का पूरा बदन वासना की आग में जल रहा था। वो मंगल के लंड को मुँह में चूसते बोली, “उफ्फ्फ मेरे मस्त लौड़ों… ऐसे ही चोदो मेरा मुँह और गाँड, इस चुदक्कड़ आरती का जिस्म आज से तुम्हारा है और जब चाहे जैसे चाहे इसे चोदो… जसवंत मज़ा आ रहा है… मेरी चूत में खलबली मचा रहा है तेर हाथ… राजा उउउम्म्म्म्म…. जसवंत अब मंगल को मेरी चूत मारने दे और तू गाँड मारता रह… मुझे आज एक साथ मेरी चूत और गाँड में राजपुताना लौड़े चाहियें।”

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