मैंने मामी के होंठ मुँह में भर लिए और चूसते हुए उनको चोदने लगा, साथ ही अपने हाथ से उनके रसीले मम्मे दबाने लगा। पूरे कमरे में चुदाई की आवाजें ‘चाप.. फटाक.. चाप फटाक..’ ही गूँज रही थी।
मामी भी अपनी गांड उठा-उठा कर नीचे से मेरा साथ दे रही थीं। कभी मामी मुझे रोक कर अपनी चूत को घुमातीं और मेरे होंठ को बहुत तेज़ से चूसतीं और चूतड़ उछाल कर लंड को जड़ तक खा लेतीं।
इस तरह करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद जब मैं झड़ने को हुआ, मैंने मामी से पूछा- अपनी मलाई किधर निकालूँ?
तो मामी ने धीरे से मेरे कान में कहा- मेरे जानू.. मेरी मुनिया में ही छोड़ दे..! मैं कौन सी माँ बन जाऊँगी, मेरा तो ऑपरेशन हो चुका है।
फिर मैंने बेधड़क अपना सारा वीर्य उनकी चूत में ही उड़ेल दिया।
अब उनके चेहरे पर संतुष्टि दिखाई दे रही थी। मैं उनके ऊपर ही लेट गया।
हम काफ़ी देर तक ऐसे ही लेटे रहे। उस दिन मैंने अपनी मामी को चार बार चोदा। उसके बाद हम दोनों को जब भी मौका मिलता तो चुदाई जरूर करते।
मामी मेरे लंड से बहुत खुश थीं और मैं भी खुश था।
यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी। दोस्तो कैसी लगी मेरी मामी की चुदाई की कहानी.. जरूर बताइएगा।
आपकी मेल का इन्तजार रहेगा।
आपका अपना रोहित जोधपुर
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