छ्होटे मामा और बड़ी मामी के ग़लत रिश्ते की कहानी

ही दोस्तों, आज एक और न्यू स्टोरी के साथ मैं आया हू. और ये तब की बात है, जब मैं कॉलेज में था, और अपने मामा के घर पे रह कर के पढ़ाई करता था.

ये स्टोरी कोई काल्पनिक नही है. ये एक ट्रू बेस्ड स्टोरी है. लेकिन इसको कॅरेक्टर्स चेंज करके लिखा गया है. ताकि पहचान च्छूपी रहे. अब आते है कहानी पे.

मेरे मामा 3 भाई थे, जिसमे से 2 भाई की शादी हो गयी थी, और सबसे छ्होटे वाले मामा अभी कुवारे थे. और वो भी उस समय पढ़ाई करते थे. मैं उस समय 1स्ट्रीट एअर में पढ़ता था.

अब मैं आपको बता देता हू, की मेरे बड़े मामा का नाम प्रकाश और छ्होटे मामा का नाम युवराज है. वही बड़ी मामी का नाम डेविका है जिनकी उमर लगभग 36 साल होगी, बुत दिखने में नही लगती की इतनी आगे की है. उनके 3 बच्चे भी है, 2 बेटे और 1 बेटी जो अभी छ्होटे है.

डेविका मामी की टीचर बहाली के लिए एग्ज़ॅम पड़े थे, और दूसरी सिटी में एग्ज़ॅम थे, तो उनको किसी के साथ जाना था. बुत प्रकाश मामा घर पे नही थे इसलिए छ्होटे युवराज मामा मामी को ले कर एग्ज़ॅम दिलवाने के लिए निकल गये.

रास्ते में दोनो के बीच कुछ ऐसा हुआ जो आज तक किसी को कुछ भी पता नही चला की क्या हुआ. क्यूंकी उनके साथ में और कोई नही गया था. बुत जब युवराज मामा और मामी वापस आए, तो काफ़ी क्लोज़ हो गये थे पहले से.

एक साथ ज़्यादा टाइम बिताना, बातें करना. घर पे सब को शक भी हो रहा था. बुत किसी ने कुछ देखा नही इसलिए सब कोई चुप थे, और किसी ने कुछ नही कहा.

एक दिन की बात है मैं कॉलेज गया था, और बाहर तेज़ बारिश हो रही थी. तो मैं बारिश में ही घर वापस आ गया. युवराज मामा और मामी को तब अंदाज़ा नही था की मैं इतनी बारिश में घर आ जौंगा. चुकी घर पे और कोई नही था, तो मैने अपनी बाउंड्रीस का गाते खुद से खोल लिया, और घर के अंदर चला आया.

मैं बारिश में पूरा भीगा हुआ था. इसलिए में डाइरेक्ट अपने रूम में गया. लेकिन वाहा देख के में डांग रह गया. वाहा पे युवराज मामा और मामी चिपके हुए थे, और एक-दूसरे को लिप्स किस कर रहे थे.

मामी मुझे देख करके घबरा गयी, और झट से पीछे हॅट गयी. उन्होने ऐसा बिहेव किया, जैसे की किस नही बस बातें कर रहे थे दोनो.

अब मैने युवराज मामा और मामी को देख लिया था. बात युवराज मामा और मामी को पता थी, इसलिए अब वो दोनो मेरे से आचे से बातें करते थे, और आचे से बिहेव करते थे. अभी ये सब देख करके, मामी को देखने का मेरा नज़रिया बदल गया था.

एक दिन मामी किचन में रोटी बना रही थी और बाकी लोग घर के बाहर थे, गर्मी के दिन में बैठ के बातें कर रहे थे. मैं किचन में गया किसी काम से. आज मेरे मॅन में कुछ और ही चल रहा था, और मैने जाते ही चारो तरफ देखा. आस-पास कोई नही था, तो मैं पीछे से मामी के शरीर से चिपक के खड़ा हो गया.

मामी: क्या हुआ, कुछ चाहिए क्या?

मैं: रोटी लेने आया था.

मामी: तो लीजिए.

और मैं पीछे से मामी के शरीर से पूरा चिपका हुआ था. मामी सारी पहने हुए थी. उनकी गांद का उभार सॉफ महसूस हो रहा था मुझे.

मामी: जाइए यहा से, कोई आ जाएगा.

तब मैने वाहा से रोटी ली, और निकल गया. फिर ऐसे ही कुछ दिन तक चलता रहा. मैं भी कुछ ज़्यादा नही सोचता था. क्यूंकी मामी मेरे से उमर में बड़ी थी. लेकिन फिर एक दिन मैं सीडी से उपर च्चत पे जेया रहा था. मामी के रूम में सीडी से दिखता है. क्यूंकी मामी के रूम का दरवाज़ा सीडी की तरफ ही है.

घर पे बस युवराज मामा, मामी, उनके छ्होटे बच्चे थे, जो सनडे होने के वजह से स्कूल नही गये थे. वो बाहर दूसरे लड़कों को साथ खेल रहे थे. और इनके अलावा मैं था. युवराज मामा और मामी दोनो मामी के रूम में ही थे, और मुझे कुछ भी अंदेशा नही था की क्या हो रहा था उस रूम में.

मैं सीडीयों के रास्ते उपर वाले रूम में जेया रहा था. तभी देखा की मामी के रूम का गाते बंद था. बुत शायद आचे से बंद नही कर पाए थे. जिससे हल्का खुल गया था. उसमे से मैने अंदर देखा तो मैं शॉक हो गया.

मामी अपने पलंग पे नीचे लेती हुए थी, और युवराज मामा मामी के उपर चढ़ करके छोड़े जेया रहे थे. मैं पहली बार लाइफ में चुदाई देख रहा था. मिशनरी पोज़िशन में ही युवराज मामा ढाका-धक अपना लंड पेले जेया रहे थे मामी की छूट में.

ये देख करके तो मैं तोड़ा सा ठहर गया सीडीयों पे ही, और वही से देखने लगा चुदाई. मामा लगातार छोड़े जेया रहे थे बिना किसी सोनकोच के, और मामी भी मस्त आहें भर रही थी. हालाकी हल्की आवाज़ भी निकल रही थी.

तभी मैने देखा छ्होटे मामा की छोड़ने की स्पीड बढ़ गयी, और वो बिना रुके लगातार धक्के मारे जेया रहे थे छूट में. फिर वो कुछ ही सेकेंड्स में झाड़ गये, और ऐसे ही मामी के उपर निढाल हो करके लाते गये.

अब मुझे युवराज मामा, और मामी के सारे राज़ पता चल चुके थे. लेकिन मुझे किसी को कुछ बताना नही था. ताकि उनकी बदनामी ना हो जाए. इसी बीच मेरे युवराज मामा की जॉब लग गयी, क्यूंकी वो एग्ज़ॅम क्लियर कर लिए थे. फिर उनका अपायंटमेंट लॅटर भी आ गया, और कुछ ही दीनो में युवराज मामा ट्रैनिंग के लिए चले गये.

फिरसे सब नॉर्मल हो गया. क्यूंकी मेरे से मामी बड़ी थी, इसलिए मैं कुछ भी ट्राइ नही करता था. और ऐसे ही 6 मंत्स निकल गये. फिर ट्रैनिंग के बाद युवराज मामा वापस से घर आ गये. वो लगभग 15 दिन की छुट्टी में आए हुए थे. तो इधर-उधर रीलेशन में जाना, दोस्तों से मिलना, ऐसे ही उनका टाइम कट्ट गया.

जिस दिन जाना था उसके एक दिन पहले की रात को मामी च्चत पे बेड लगा करके लेती हुए थी. युवराज मामा नीचे अपने रूम में लेते हुए थे. और घर पे सब थे, नाना-नानी भी थे. तभी मामी ने अपने बेटी से मुझे उपर च्चत पे बुलाया. तो मैं गया और देखा की मामी लेती हुई थी. मैं जेया करके मामी के बगल में बैठ गया.

तभी मामी बोली: जाइए ना अपने युवराज मामा को मेरे पास में भेज दीजिए. लेकिन घर में किसी को पता ना चले, वरना बिना बात के ही घर में बवाल हो जाएगा.

मैं समझ गया की मामी क्यूँ युवराज मामा को बुलाना चाह रही थी. फिर मैं नीचे आया, और युवराज मामा को बोला-

मैं: बड़ी मामी आपको च्चत पे बुला रही है.

युवराज मामा शायद किसी बात से गुस्से में थे. मुझे पता नही किस बात से गुस्से में थे.

फिर युवराज मामा बोले: मामी से बोल देना की मैं सोने जेया रहा हू.

अब मैं मामी के पास गया, और सिचुयेशन को देखते हुए मैं भी गरम हो गया था. मुझे पता था की बड़ी मामी क्यूँ युवराज मामा को बुला रही थी, ताकि कल मामा के जाने से पहले आचे से आज की रात छुड़वा सके.

मैं मामी की बगल में बैठ गया. च्चत पे कोई नही था. मामी सारी पहने हुए थी. तो मैने डाइरेक्ट अपना हाथ मामी के नंगे नाभि पे रख दिया, और अपनी उंगलियों को नाभि और पेट पे घूमने लगा, और मामी से बातें करने लगा.

मैं: मामा बोल रहे है की उनको नींद लग रही है, इसलिए नही आएँगे.

और मैं लगातार अपनी उंगली से मामी के पेट को सहला करके मज़े ले रहा था, और मामी भी बिना कुछ कहे आराम से मेरे से बात कर रही थी.

मामी: जाइए ना किसी भी तरह से आज उनको उपर भेजिए ना.

मैं: युवराज मामा गुस्से में लग रहे थे. क्यूँ गुस्सा है मामा?

मामी: पता नही, मुझे भी कुछ पता नही. इसलिए तो मैं आपसे बोल रही हू की युवराज मामा को भेज दीजिए उपर.

मैं: आप ही नीचे क्यूँ नही चली जाती, जब युवराज मामा गुस्सा है, और उपर नही आ रहे है तो?

मामी: आपके नाना-नानी है ना नीचे. तो मैं नही जेया सकती. पहले से ही सब को कुछ-कुछ शक है, और ऐसे रात के समय युवराज मामा के रूम में जाते कोई देख लेगा तो बवाल हो जाएगा. इसलिए आप ही जाइए, और उनको भेजिए.

मैं जाना नही चाह रहा था, क्यूंकी अब मैं पेट के उपर मामी की चूची पर भी ब्लाउस के उपर से ही अपना हाथ फिरा रहा था. और ये पहला मौका था जब मैने मामी के बूब्स को हाथ लगाया था. मामी भी समझ रही थी की मैं इतनी बातें क्यूँ बना रहा था.

मामी: जाइए ना, आप तो यही पे रहोगे. जाइए युवराज मामा को भेज दीजिए.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. अगेर आपको ये वाली स्टोरी पसंद आई हो,

यह कहानी भी पड़े  ट्रेन यात्रा में दो से मज़े लिए


error: Content is protected !!