बॉस से चुदाई पैसो के लिए

दोस्तों मेरा नाम नेहा हे और मैं हरयाना के एक छोटे से विलेज से हू. मैंने रोहतक से अपनी पढाई की हे और मैंने इंजिनयरिंग की हे इलेक्ट्रोनिक्स फिल्ड के अंदर. मेरी इंजीनियरिंग 2012 में ख़त्म हुई. मैं एक मिडल क्लास की लड़की हूँ. मेरे पापा एक सरकारी दफ्तर में प्यून हे. और मेरे से छोटी दो बहने और हे. पढ़ाई में मैं ठीक ठीक ही थी. मेरे सभी दोस्तों को अच्छी अच्छी पोस्टिंग मिली. लेकिन मुझे पढ़ाई के बाद पता नहीं चल रहा था की क्या करूँ! केम्पस में मेरा सिलेक्शन हुआ नहीं इसलिए मुझे खुद हो जॉब भी खोजनी थी.

वैसे मेरे पापा ने मुझे काफी कहा एम टेक करने के लिए. लेकिन मैं उनके पैसे वेस्ट नहीं करना चाहती थी. इसलिए मैं खुद ही जॉब की तलाश करने लगी. मैं दिल्ली में ही रहने के लिए आ गई और डेली जॉब के लिए कॉल, पोस्ट करने लगी. दिन बदिन मेरे ऊपर मेंटल प्रेशर बढ़ता ही जा रहा था.

फिर आखिर मुझे एक स्टार्टअप में काम मिल गया 2014 में. वहां पर मेरी सेलरी आठ हजार थी. ये जॉब मुझे काफी मसक्कत के बाद मिली थी जिसे मैं कैसे भी कर के लूज नहीं करना चाहती थी.

हमारी ऑफिस छोटी थी और कुल मिला के 10 लोग ही थे. मेरा पहला ऑफिस का दिन नवम्बर 2014 में था. मैं अपने बॉस से मिली. वो उम्र में 33-34 साल का था. उसका नाम अभय पांडे था. पहले कुछ दिन अच्छे से निकले ऑफिस के, हमारी ऑफिस में एक और लड़की थी जिसका नाम स्वाति था. उसने मेरे से एक साल पहले ज्वाइन किया था और उसकी सेलरी वगेराह काफी बढ़ गया था कम समय में ही. मेरी और उसकी अच्छी दोस्ती हो गई. मैं अपनी सेलरी बढवाना चाहती थी. लेकिन अभी तक तो ऐसा हुआ नहीं था. जब भी सेलरी राईस की बात करती तो मुझे ये बताया जाता था की मेरा कंट्रीब्यूशन सेलरी बढाने के लिए काफी नहीं था.

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करीब छ महीने के बाद मैं अपने बॉस के पास गई और मैंने उनसे सेलरी राईस के लिए बात की. इन 6 महीनो में स्वाति की सेलरी दो बार बढाई गई थी वो मुझे पता था. बॉस ने मुझे पहले थोडा डांटा और फिर मुझे उन गलियों में ले के चला जहाँ से मैं पहले कभी नहीं गुजरी थी. दरअसल बॉस ने मुझे कहा की तुम्हे पता हे की स्वाति की सेलरी ऐसे कैसे बढती हे?

मैंने कहा नहीं सर.

वो बोले: दिन में ऑफिस का काम करती हे और रात को अपने बदन से मेरी सेवा करती हे!

फिर उसने कहा की अगर तुम्हे भी सेलरी बढ़वानी हे तो स्वाति के जैसे मेरी सेवा करनी होगी. वरना फिर अपनी आठ हजार की सेलरी ले के घर जाओ.

मैंने बॉस के इन शब्दों से एकदम पथ्थर सी हो गई थी.

उस दिन तो मैं घर चली गई और सोचती रही. वैसे आठ हजार मेरे लिए बहुत ही कम थे. मुझे अपने खर्चे निकाल के घर भी पैसे भेजने होते थे. फिर मैने सोचा की सामने से ये मौका मिल रहा हे तो ले ही लूँ. अपने दिल के ऊपर पथ्थर रख के मैंने भी बॉस की रांड बनने का फैसला कर लिया.

अगले दिन मैं बॉस के पास गई और मैंने उसको कहा की मैं रेडी हूँ. बॉस ने अपने एक सीक्रेट अपार्टमेंट का एड्रेस दिया और शाम को ठीक 7 बजे वहां पहुँचने के लिए कहा.

मैं घर गई और फिर नहा के बॉस के पास जाने के लिए रेडी हो गई. मैं बॉस की रंडी बनने को रेडी जो थी. सच कहूँ तो एकदम नर्वस थी मैं. सात के ऊपर चार पांच मिनिट हुई थी जब मैंने डोरबेल बजाई. डोर पहले से ही खुला था. अन्दर से बॉस की आवाज आई की अन्दर आ जाओ. मैंने अन्दर जा के देखा तो स्वाति भी वही पर थी. उसके गले में बॉस ने कुत्ते का पट्टा बाँधा हुआ था. बॉस ने मुझे देख के कहा, आ मेरी कुतिया तू लेट आई हे!

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मैं: सोरी सर!

बॉस: यहाँ सर नहीं चलेगा, यहाँ पर तुम मेरी गुलाम कुतिया हो और मैं तुम्हारा मालिक हूँ.

मैं: सोरी मालिक.

बॉस: सोरी से काम नहीं चलेगा छिनाल तुझे लेट आने की सजा मिलेगी.=

मैं: माफ़ कर दो मालिक आगे से ऐसे नहीं होगा कभी भी.

बॉस: ठीक हे आज तेरा पहला दिन हे इसलिए मैं तुझे जाने देता हूँ. लेकिन जल्दी से अपने सब कपडे निकालो और अपने गले में कुत्ते वाला पट्टा डालो.

मैं बॉस और स्वाति के सामने अपने सब कपडे खोल दिए. मैं अन्दर ही अन्दर रो रही थी लेकिन कुछ कर भी तो नहीं सकती थी. फिर मैं पट्टा पहन के बॉस के पास चली गई. बॉस ने स्वाति को कहा की इस नयी कुतिया को बताओ की क्या करना हे और कैसे करना हे. बॉस ने स्वाति के हाथ में एक चाबुक दे दिया.

स्वाति ने बॉस के पाँव के तलवे को चाटना चालू कर दिया. बॉस ने जब तक उसे मना नहीं किया वो उसके तलवे चाटती रही. फिर स्वाति ने बॉस के सामने उसके लंड के लिए भीख सी मांगी. बॉस ने अपना लंड स्वाति को दे दिया. स्वाति लंड को चूसने लगी. फिर स्वाति ने बॉस को चूत चोदने के लिए मिन्नत सी की. बॉस ने अपने बड़े लांद को स्वाति की चूत में डाल के खूब चोदा उसे. मैंने वही खड़ी सब कुछ देख रही थी.

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