भूत की माँ की चूत

चोदूं चोदूं सब करें
चोद सकें न कोय
कहत गुरु जब चोदन लगे,
लण्ड खड़ा ना होय!

समस्त खड़े लण्डधारियों को नमस्कार और गुफा सरीखे भोसड़ों की मल्लिकाओं और बास्केटबॉल जैसे गोलक धारण करने वाली बालिकाओं को प्रीतम ‘खड़े लण्ड वाला’ का उनकी गर्म चूत पर जबरदस्त प्यार!
समय का सदुपयोग करते हुए जल्दी से मुद्दे की बात पर आते हैं। मेरा नाम प्रीतम है और मेरी उम्र 28 वर्ष है। यह बात 5 बर्ष पुरानी है. उन दिनों मैं अपने नाना जी के यहां गया हुआ था। गांव में अधिकतर लोग जल्दी सो जाते हैं क्योंकि उनको सुबह जल्दी उठना पड़ता है.

सब लोग शाम का खाना बहुत जल्दी खा लेते थे. यूं समझिये कि शहर में जहाँ शाम को चाय का वक्त होता है मेरे नाना के गांव में उस वक्त डिनर का टाइम हो जाता था. अब मैं तो शहरी बाबू था इसलिए इतनी जल्दी खाना हो नहीं पाता था. फिर धीरे-धीरे उनकी शैली को अपनाने की कोशिश भी की लेकिन ज्यादा खा नहीं पाता था. इसलिए मुझे रात को नींद भी कम ही आती थी. चूंकि शहर में रात के खाने के बाद सोने की आदत बनी हुई थी. फिर नाना के गांव में इसका उल्टा हो गया था. मगर जो भी हो गांव तो गांव ही होता है.

इसी बीच एक ऐसा वाकया हुआ कि मुझे रात में नींद ही आना बंद हो गयी।

एक रात जब मैं सोने गया तब कुछ पायल छनकने की आवाज आई, जिसे सुनकर मैं थोड़ा सा डर गया।
मैंने नाना से पूछा तो उन्होंने कहा- सो जाओ बेटा, कुछ नहीं है।
उस रात तो मैं नाना की बात मान कर सो गया कि शायद मेरे मन का ही कुछ वहम होगा लेकिन फिर अगली रात को भी मेरे साथ ऐसा ही हुआ।

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तब मैंने यह बात अपने एक दोस्त को बताई। तब उसने बताया कि मेरे नाना के घर के पीछे एक गौशाला है जिसमें एक चुड़ैल रहती है. रात को उसी की पायल की आवाज आती है और इसीलिये रात में कोई भी उस गौशाला में नहीं जाता।

लेकिन मैं इन बातों को नहीं मानता था क्योंकि मैं शहर का रहने वाला लड़का था. मैंने सोचा कि मैं रात को गौशाला जरूर जाऊंगा। आखिर देखूं तो सही कि ये चुड़ैल देखने में कैसी लगती है.
मेरा बस चलता तो मैं उस चुड़ैल की भी चूत चोद देता. मगर उसकी चूत मारना इतना आसान काम थोड़े ही था! उसके लिए तो पहले मुझे इस चुड़ैल का पता लगा कर उसको अपने काबू में करना था.

इसी हिम्मत के साथ मैं रात का इंतजार करने लगा. जब रात हुई तो मेरे मन का कौतूहल बढ़ने लगा. मैं देखना चाह रहा था कि आज भी पायल की आवाज आती है या नहीं.

मगर हुआ वही जो पहली दो रातों में होता आ रहा था. उस रात को भी मेरे कानों में फिर से पायलों की आवाज आई. मैं अधपकी नींद में था और कभी आंख लग जाती थी और कभी खुल जाती थी. मगर जैसे ही पायलों की आवाज मेरे कानों तक पहुंची मैं तपाक से उठ कर बैठ गया।

दिन में तो मैंने मन बना लिया था कि रात को अगर आवाज आई तो गौशाला में देखने जरूर जाऊंगा लेकिन जब रात 12 बजे वही आवाज आई तो मेरी सिट्टी-पिट्टी गुम होने लगी. मेरी हिम्मत गौशाला में जाने की नहीं हो रही थी।

फिर दोबारा से पायलें छनकी. एक तरफ गांड पसीज रही थी तो दूसरी चुड़ैल को देखने का मन भी कर रहा था. अब जब मुझसे रहा न गया तो मैं उठा और दबे पांव गौशाला की तरफ बढ़ने लगा ताकि किसी को शक न हो। मैं जैसे-जैसे गौशाला की तरफ बढ़ रहा था पायलों की आवाज बढ़ती जा रही थी. साथ ही मेरे दिल की धड़कन भी तेज होती जा रही थी लेकिन फिर भी मैंने हिम्मत बनाये रखी।

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मेरा प्रीतम (लंड) भी डर के मारे किशमिश के आकार में आ गया था। भई यूँ तो मैं पूरा चोदू हूँ लेकिन मामला ठहरा खतरनाक चुड़ैल का! थोड़ा सा डर लगना तो स्वाभाविक था. फिर भी दिल में जोश था लेकिन लंड कहीं मेरे अंडरवियर में छिपने की जगह ढूंढ रहा था.

मैं गौशाला के गेट पर पहुंच गया था और वहीं पर थोड़ा रुका.

वहाँ मैंने सुना कि 2 लोगों के आपस में बातें करने की आवाजें आ रही थीं। मैं थोड़ा छिप गया और धीमे-धीमे आगे बढ़ने लगा। जैसे ही मैं अंदर पहुंचा मैं अवाक् रह गया। अंदर कोई चुड़ैल नहीं बल्कि मेरे बचपन का प्यार, मेरे गांव के प्रधान की लड़की गीतांजलि मेरे उसी दोस्त के साथ चुदाई की क्रिया में मस्त थी। मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी। मेरी आखें फटीं की फटीं रह गयी।

गीतांजलि ने लाल रंग का सलवार-कुर्ता पहना हुआ था जो उसके स्वर्ण बदन पर चार चाँद लगा रहा था। उसको देख कर ऐसा लग रहा था मानो किसी सूरजमुखी के पुष्प पर गुलाब की पत्तियाँ लगी हुई हों। उसके चूचे अब पहले से ज्यादा बड़े हो गए थे। बहुत दिनों के बाद उस माल को देख रहा था इसलिए लंड महाराज उसको इस हाल में देख कर तनतना गये.

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