दीदी की शादी में कज़िन सिस्टर की चुदाई

ही दोस्तों, कैसे है आप सब? मैं आपके लिए लेके आया हू एक न्यू स्टोरी. ये कहानी मेरी एक कज़िन की है. वो देल्ही यूनिवर्सिटी से ब.कॉम कर चुकी है, और उसका अब इंक से कोई कोर्स चल रहा है.

तो ज़्यादा वेट ना करते हुए डाइरेक्ट कहानी पे आते है. जो मेरी कज़िन है, उसका नाम अस्मिता है. उसका फिगर 32-28-34 के अप्रॉक्स होगा, क्यूंकी मैने एग्ज़ॅक्ट मेषर नही किया है.

कहानी आज से एक साल पहले की है. कोविद के बाद मेरी बेहन की सगाई होनी थी. तो वो च्छुतियों का टाइम था. वो 2 या 3 दिन के लिए हमारे घर पे आ गयी थी. हमारा एक घर लुक्कणोव के गोंटी नगर में भी है, और सगाई वाहा से ही होनी थी.

तो जब वो आई, तो मेरी नज़र तोड़ा उसपे थी. क्यूंकी चलते टाइम उसके हिप्स का मूव्मेंट मेड मे क्रेज़ी आंड हॉर्नी टू. इसके अलावा उसका ड्रेसिंग सेन्स बहुत कमाल का था.

उसको फराक नही पड़ता था, की क्या दिख रहा क्या नही. और उससे भी अची बात उसके सेक्सी वाले अंडरगार्मेंट्स वन हेउसेन के जो वो नहा के टेरेस पे डालने जाती थी. मैं उनको देखता था. उसका ब्लॅक आंड रेड कलर का सेट मानो पागल करता था.

अब मैं सोच रहा था, की काश मुझे उसको छोड़ने का कुछ जुगाड़ हो जाए. 3 दिन से उसके हिप्स, क्लीवेज, शाम में स्कर्ट से कभी-कभी थोड़ी बहुत उसकी पनटी की झलक देख के मैं मास्टरबेट कर लेता था.

बुत मुझे मौका नही मिल रहा था, की क्या करू, और कैसे करू. वो लाते तक जागती थी, इसलिए वो उपर रूम में मेरी दीदी के साथ सोती थी.

और दीदी होने वाले जीजू से बात करने के लिए टेरेस पे आ जाती थी. कभी-कभी मैं भी टेरेस पे उनको छेड़ता था. एक दिन बॅटरी लो हुई, तो दी बोली-

दीदी: मेरा चारजर ले आओ, अस्मिता उसे कर रही होगी.

तो मैं टेरेस से दबे पावं नीचे आया, की देखु मेडम क्या कर रही थी. या चारजर के बहाने थोड़ी बातें करू. बुत आया तो देखा वो इयरफोन्स लगा के आँखें बंद करके गाना सुन रही थी.

गर्मी का टाइम था, तो उसने चादर डाल रखी थी, जो की साइड से उठ गयी थी. इससे मुझे उसके वन पीस के अंदर उसकी छूट के उपर का दर्शन हो रहा था, और मैं बैठा-बैठा फोन चार्ज कर रहा. मैं बार-बार वही देख रहा था. एक-दो बार उसने देखहा, बुत वो समझ नही पाई.

फिर जब मैं बार-बार वही देखु अगर कुछ बात भी हो. तो वो समझ गयी की मैं क्या देख रहा था. उसने अंजान बनते हुए चादर सही की, और मैं फोन में बिज़ी हो गया. अब मुझे वही छूट नज़र आ रही थी दिमाग़ में. तो मैने पूछा-

मैं: तुम लोग यहा आचे से सो जाती हो?

तो उसने कहा: हा, यहा कोई डिस्टर्ब करने नही आता. और मैं और दी ही रहते है.

तो मैने कहा: यार मैं 3 दिन से सो नही पाया. मेरी हालत टाइट है.

तो उसने कहा: यही सो जाओ.

मैने कहा: 3 लोग आ जाएगे इस बेड पे?

तो उसने कहा: देख लेना, बाकी दीदी आ जाए तो पूच लो उनसे.

अब हम लोग ही-हेलो कर रहे थे, लेकिन मेरी नज़रे सिर्फ़ उसके हुस्न, उसके निकले हुए हिप्स, और बूब्स को याद कर रही थी. साथ ही साथ छूट से चिपकी हुई वो रेड पनटी वाला सीन मानो लंड को छूट फाड़ने पे मजबूर कर रहा था.

और फिर वो सोने लगी. फिर दीदी आई तो मैने दीदी को आँख मारते हुए कहा-

मैं: मैं भी यही सो जौ?

तो दीदी बोली: वैसे भी 1 बजने वाला है. नीचे सबकी नींद डिस्टर्ब करेगा, आजा यही अड्जस्ट होके सो जाना. ऐसा कर, तू उस तरफ सोना वरना अस्मिता बेड से नीचे ना गिर जाए.

मैं समझ रहा था दीदी मेरे मॅन को पढ़ ली थी, और दीदी भी जानती थी अस्मिता शहरी लड़की थी, क्या पता आज रात हम दोनो के मज़े भी हो जाए.

फिर मैं भी लेट गया, और लाइट ऑफ कर दी. सब लोग सोने लगे, लेकिन मेरे दिमाग़ में तो उसकी रेड पनटी छूने का मॅन कर रहा था. मैने एसी का रिमोट लेके टेंपरेचर 19 कर दिया, ताकि एक ब्लंकेट था तो मैं और अस्मिता पास-पास सो जाए.

अब रात का अंधेरा, एसी की ठंडी हवा, छूट का अट्रॅक्षन, और लंड को हिप्स टच करने का मॅन, ये सब एक माहौल बना रहे थे. फिर मैने आराम से अस्मिता की साइड करवट ली, और पाया अस्मिता सर्दी से अपने को फोल्ड करके सोई थी.

तो मैने बहुत हिम्मत करते हुए अपना हाथ उसके हिप्स और कमर के बीच में रख दिया. मेरी बॉडी अंदर से काँपने लगी. मेरा दिल बहुत दर्र रहा था की बवाल ना हो जाए. लेकिन मुझे तोड़ा सर्दी और रात के 3 बजे का कॉन्फिडेन्स था, की इस टाइम लड़कियाँ भी बहक जाती है, जैसे एक बार मेरी बेहन बहक गयी थी.

फिर मैने तोड़ा अस्मिता के पास जाके अपना लंड उसकी गांद से सत्ता दिया. मानो पुर शरीर में आग लग गयी हो. मेरा लंड ऐसे फंफना रहा था, की एक ही झटके में उसकी रेड पनटी फाड़ के उसको पीछे से छोड़ डालु. लेकिन मुझे लगा जल्दबाज़ी में काम बिगड़ जाएगे.

फिर मैने उसका वन पीस तोड़ा उपर किया, और उसकी रेड पनटी पे हाथ रख दिया. फ्रेंड्स सोचो आप, एक हॉट सी लड़की की पनटी पे आपका हाथ, और एक उंगली से उसकी थाइ टच करने की कोशिश आप करो, तो कैसा फील होगा.

मैं पागल हो रहा था. मैने फिर पनटी पे उपर-नीचे उंगलियाँ फिरना स्टार्ट किया, कभी हिप्स के बीच में तो कभी आयेज साइड जहा छ्होटे-छ्होटे बाल महसूस हो रहे थे.

तो ऐसा करते-करते आधा घंटा हो गया, और अस्मिता ने अपनी पोज़िशन चेंज नही की. अभी भीइ मैं कन्फ्यूज़ था, क्यूंकी उंगली अंदर तो गयी नही थी. तो मैं डाउट में था, की वो जाग रही थी, या सो रही थी.

लेकिन जितनी देर से मैने हाथ से जादू किया था, और पीछे से जब 2 फिंगर छूट पे टच करता, तो मुझे हीट बहुत महसूस हो रही थी. मैं शुवर था, की वो भी मज़ा ले रही थी.

फिर मैने नींद में नाटक करते हुए लंड से उसको पुश किया. फिर एक हाथ से उसकी थाइ पकड़ के अपनी साइड खींच दिया, ताकि वो तोड़ा सीधी लेट जाए, और मेरी छूट पे चढ़ने की राह आसान हो जाए. आंड हुआ भी वैसा ही.

दोस्तों रात में आप अप्रोच करना कभी किसी को. सिर्फ़ छूट से करना, किस या बूब्स से ज़्यादा कुछ होता नही है. मेरा पर्सनल एक्सपीरियेन्स है ये. इसलिए मैं अब उससे चिपक के लेट गया, और अपनी साँसे उसके कान के पास छोढ़ने लगा. ताकि वो गरम हो जाए, और नीचे मैं अपना काम करने के लिए फिरसे तैयार होने लगा.

मैने फिरसे हिम्मत करके उसका 1 पीस आयेज से उपर किया, और उसकी पनटी को एक्सपोज़ किया. और इस बार मुझे तोड़ा ज़्यादा कॉन्फिडेन्स हो रहा था.

और एक बात, लड़कियाँ बूब से ज़्यादा जल्दी छूट से या गले पे किस करने से होती है. तो अब वन पीस का आधा हिस्सा पनटी के उपर था, तो मैं सोच रहा था की अगर डाइरेक्ट छूट में गया तो लाफद हो सकता था.

मैं ये भी सोच रहा था की अगर सिड्यूस ना हुई हो, तो अभी भी सुबा होने में देर थी. जब भी ऐसी सिचुयेशन आए पीछे मत हटना, वरना अगर लड़की को तुमने शांत नही किया, तो ज़रूर वो चिल्ला कर ऐसी-तैसी कर देगी.

और फॅमिली की सबसे अची बात ये होती है, की अगर पकड़े गये तो नींद का नाटक कर लो. क्यूंकी बहुत लड़कों को सपने में देख कर साथ सोए आदमी पे ये सब करने की आदत होती है.

एक बार को मेरे भाई ने सोते हुए मेरी चड्डी में हाथ डाल दिया था. इसलिए ध्यान रखना अगर आप भी भाभी, मामी, बुआ, मौसी, डिड, किसी को भी सिड्यूस करना चाहो तो.

अब मैने पेशियेन्स से काम लिया, और अपना हाथ पेट पे रखा. क्यूंकी मैं चाहता था पेट पे या कमर पे हाथ रखूँगा तो उसको ज़्यादा फील होगा. वो कैसे, आओ बतौ आपको.

तो मैने पेट पे हाथ उसकी कमर की तरफ करके रखा था. 4 उंगलियाँ पेट पे थी, और बाकी एक उंगली छूट में जादू करने की तलाश कर रही थी. वो पनटी की एलास्टिक टच करती आयेज-पीछे. कभी पेट के बीच में हाथ लता, तो वो बड़े आराम से पनटी के अंदर तक जाती.

और मैं वाहा अस्मिता के छ्होटे-छ्होटे बालो को महसूस करता था. क्या मज़ा आ रहा था. मैने अपना लंड उसकी थाइ से सत्ता दिया, और एक पैर उसके पैर पे रख लिया. मैने उसकी नी से दूसरे पैर को ऑपोसिट डाइरेक्षन पे धकेल दिया, जिससे छूट खुल जाए.

अब मेरी दो उंगलियाँ उसकी पनटी में जेया रही थी. मैने बाहर निकल के दूसरी तरफ से पनटी एलास्टिक पे मिड्ल फिंगर रख ली. फिर आराम से प्यार से नीचे छूट की तरफ बढ़ रहा था. मुझे अस्मिता की साँसे और तेज़ होती महसूस होने लगी थी.

मैं समझ गया था, की अस्मिता जाग चुकी थी. बुत यार मैं अपना सेडक्षन वाला मज़ा खराब नही करना चाहता था. क्यूंकी काफ़ी दीनो बाद तो न्यू माल मिला था.

अब जब कुछ देर एलास्टिक पे हाथ रखता, तो बीच-बीच में मिड्ल फिंगर उसकी छूट की दरार में रख देता. मुझे उसकी छूट गीली महसूस हो गयी थी. अब मैने अपनी साइड से थंब को पनटी की एलास्टिक पकड़ के आराम से नीचे की तरफ किया.

फिर मैने थोड़ी सी पनटी डाउन करके दो फिंगर उसकी छूट में टच कर दी. हाए राम! क्या गीली छूट थी. उसकी छूट का पानी तुरंत मैने चाट लिया.

अब कॉन्फिडेन्स बढ़ने लगा था, बुत जल्दबाज़ी मुझे अब भी नही थी. क्यूंकी ये सब करने से आपका एक्सपीरियेन्स ला-जवाब हो जाता है. अब मैं पेट पे हाथ रख कर नीचे की तरफ जाता, और बड़े प्यार से 4 उंगलियाँ उसकी छूट तक ले जाता.

फिर कमर से 2 फिंगर पनटी के साथ-साथ नीचे जाती, और छूट को टच करती. उसके बाद उपर से हाथ डालता, तो क्लाइटॉरिस रब करता.

अब 1 घंटे से ज़्यादा टाइम हो गया था मज़ा करते-करते.

अस्मिता शरम से कुछ बोलना नही चाह रही होगी. इसलिए मैने सोचा चलो अब फिंगर नीचे तक ले जाते है. तो मैं इस बार अपनी 4 उंगलियाँ टाइट क्लोज़ करके नीचे तक ले गया, और वाहा मैने छूट को फैला के छूट के पानी को फील किया.

मैने उसकी छूट को अब रब करना स्टार्ट किया, और मेरा हॉंसला तोड़ा बड़ा. इसलिए मैने सोचा सच में एक फिंगर अंदर डाल के देखु. फिर जैसे ही फिंगर अंदर डाली, अस्मिता के मूह से आ निकल गयी, और वो मेरे से हग करके चिपक गयी

अब मैं अपना एक्सपीरियेन्स जल्दबाज़ी में बर्बाद नही करना चाह रहा था, क्यूंकी अभी सफिशियेंट टाइम था शादी में. मैने सोचा आराम से छोड़ेंगे क्यूंकी उस रूम में दीदी के अलावा कोई आता नही था.

दीदी का रूम था, और वो सिर्फ़ अस्मिता को अपने साथ सुलने वाली थी. तो मैने सोचा आज सिर्फ़ उंगली और छूट चाटेंगे, और बाकी का मज़ा कल देखेंगे.

ये सोच कर मैने हॅंड पे अस्मिता का सर रखवा लिया, और उसको अपने से टाइट हग कर लिया. अब मेरा रिघ्त हॅंड नीचे ही था, तो मैने उस हाथ से उसकी पनटी उतार दी, और उसका हाथ अपने बॉक्सर में डाल दिया.

उसने मेरा पेनिस टाइट्ली होल्ड कर लिया था. उसकी छूट में बहुत ज़्यादा पानी था. मैं बहुत आचे से रब कर रहा था उसकी छूट.

अब आयेज बतौँगा कैसे हमने 69 किया, और कैसे मैने उसको छोड़ा. सब अगले पार्ट में.

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