भाई और बहन की चूसाम-चुसाई की कहानी

तो आयेज बढ़ते है. पिछले पार्ट्स नही पढ़े, तो पढ़ लेना. जब उसका शॉर्ट और उसका अंडरवेर निकाल कर फेंका, तो मेरे होश उडद गये यार. उसकी छ्होटी सी छूट पर छ्होटे-छ्होटे बाल थे, और उसकी छूट के होंठ एक-दूं भरे-भरे गुलाबी.

यार क्या बतौ मैं पागल सा हो गया. मैने एक नज़र उसको देखा. वो थोड़ी सी शॉक्ड थी. शायद उसको अंदाज़ा नही था की अब आयेज क्या होगा, और इसी सोच में थी. मैने दोनो टांगे पकड़ी उसकी, और बीच में आ कर टाँगो को खींचा, और एक-दूं से अपना मूह उसकी छूट पर रखा, और पूरी छूट मूह में भर ली. फिर छूट होंठो से कस्स कर दबा ली, और जीभ अंदर डाल कर घूमने लगा. शिखा को संभालने का भी मौका नही दिया मैने.

शिख: आअहह मा, उफफफ्फ़, प्लीज़ छ्चोढो. ये क्या कर रहे हो भैया? आहह उम्म मा, भैया प्लीज़. हाए भगवान, कैसे ज़ालिम पति दिया है. क्या-क्या करता है ये. काटो तो मत आहह.

मैने उसकी छूट को उपर से नीचे छाता मूह घुसा कर छूट में. फिर बारी-बारी से उसकी छूट के होंठ चूज़ कस्स-कस्स कर, और दांतो से दबा-दबा कर खींचता था, तो चिल्ला उठती थी साली.

शिखा: आ हज़्बेंड प्लीज़, दाँत चुभ रहे है. पहले कभी ऐसा फील नही किया मैने. आपने ये क्या कर दिया हज़्बेंड? मेरी सस्यू निकल गयी थी, और फिरसे निकालने वाली है. प्लीज़ प्लीज़ मत करो. उपर आओ प्लीज़. हज़्बेंड मैं आपके हाथ जोड़ती हू, प्लीज़ छ्चोढो उसको.

विवेक: किसे छ्चोढू बीवी?

शिखा: उफफफ्फ़ मा, क्या मुसीबत है. मेरी छूट को छ्चोढो हज़्बेंड प्लीज़. उपर आओ, और मुझे प्यार करो. मेरे बॉडी में और भी जगह है. प्लीज़ उसको छ्चोढ़ दो, मेरी जान निकल जाएगी. आअहह हज़्बेंड छ्चोढने को बोला है, आप और अंदर घुसा रहे हो अपनी जीभ आआहह. उई मा, कितनी तेज़-तेज़ चला रहे हो सस्सह.

वो अपने सिर और सीना उठा-उठा कर बेड पर गिर रही थी, और हाथो से मेरे मूह को छूट से हटा रही थी. पर मैं लगा हुआ था उसकी छूट को चूसने में. बहुत मस्त छूट थी यार, मज़ा आ रहा था उसकी छूट का रस्स चूसने में.

मैने उसकी छूट का दाना मूह में लेकर होंठो से खींच कर चूसा, तो उसने अपने पैर सिकोड कर मेरा मूह पैरों से दबा लिया और आहें भरने लगी.

शिखा: सस्सस्स उम्म एम्म मा प्लीज़ आअहह एस, एस, हज़्बेंड मुझे कुछ हो रहा है.

करीब 10 मिनिट से उसकी छूट चाट और चूस रहा था. उसकी बॉडी अकड़ने लगी. मैं समझ गया छूट पानी छ्चोड़ने वाली थी. मैने अपना मूह और गाड़ा दिया, और उसकी छूट को एक-दूं किसी जानवर की तरह चूसने लगा, और उपर-नीचे डाए-बाए मूह घुमा-घुमा कर चारो तरफ से छूट चूस रहा था.

वो पागल हो रही थी. उसको समझ नही आ रहा था, की वो क्या करे. वो मेरा मूह हटा नही पा रही थी, और अपनी बॉडी को भी पीछे नही हटा पा रही थी. अपना सिर साइड-साइड घुमा कर फिर मेरी तरफ करके बेड पर पटक रही थी बेचारी.

शिखा: भैया, भैया, प्लीज़ रुक जाओ एम्म मा, प्लीज़ मुझे कुछ हो रहा है भैया. मेरी जान निकल जाएगी आमम, प्लीज़ बहनचोड़ रुक आहह.

धीरे धीरे उसकी आहें और सिसकियाँ कम होती गयी, और उसकी छूट से रस्स निकलता गया. मैने अपना मूह खोल कर उसकी छूट पर सेट कर दिया था. उसका सारा जूस सीधा मेरे मूह में जेया रहा था, जिसे बहुत मज़े से पी रहा था मैं. आअहह, क्या छूट रस्स था उसका यार, मज़ा आ गया.

मैने उसकी छूट मूह में भर-भर कर किस किया छूट को, और उसी के साथ चूस्टे हुए उसकी छूट पूरी तरह सॉफ की. शिखा हाँफ रही थी, और एक-दूं बेजान सी बेड पर पड़ी थी हाथो और पैरों को फैलाए हुए. मैने छूट पूरी तरह सॉफ की, और फिर उपर की तरफ जेया कर उसकी साइड में उसकी तरफ करवट लेकर लेट गया और उसको हानफते हुए देखने लगा.

उसकी आँखें बंद थी, और हाँफने की वजह से सीना ज़ोर-ज़ोर से उपर-नीचे हो रहा था. कुछ देर बाद जब उसकी साँसे नॉर्मल हुई, तो मैने उसके बूब्स पर हाथ रखा. उसने तुरत मेरा हाथ झटक दिया और तोड़ा डोर हो गयी मुझसे.

शिखा: बस अब हाथ भी नही लगाने दूँगी आपको, बहुत हो गया. आप तो मेरी जान निकाल दोगे. ऐसे कों करता है अपनी बेहन के साथ? वो बेहन जो बीवी भी हो. मैं रो रही थी, चिल्ला रही थी, फिर भी तरस नही आया ना मुझ पर? बस छूट में घुसे पड़े थे.

विवेक: अर्रे-अर्रे बस-बस बीवी, इतना गुस्सा किस लिए?

शिखा (गुस्से में): किस लिए? मेरी जान निकाल दी इसलिए?

विवेक: जान नही निकली बीवी, तेरी छूट को प्यास लगी थी, सो उसका पानी निकाल कर प्यास बुझाई थी उसकी. और गुस्सा तो ऐसे हो रही हो जैसे मज़ा नही आया तुझे बिल्कुल भी. मैं देख रहा था, कैसे अपने होंठो को चबा रही थी मज़े में तू.

शिखा का गुस्से का नाटक तोड़ा कम हुआ मेरी इस बात से, और वो नॉर्मल हो कर बैठ गयी.

शिखा: पता नही भैया, मुझे समझ ही नही आ रहा था की मज़ा है या सज़ा. पहले कभी किया नही किसी ने ये सब.

विवेक: कोई बात नही, पहले तुम्हारे पास ये हज़्बेंड नही था ना. अब तुम्हारा हज़्बेंड वो सब करेगा जो अभी तक नही हुआ तुम्हारे साथ. तैयार हो फिर आयेज के लिए?

शिखा (शॉक्ड): आयेज? अब आयेज क्या बचा है भैया? कर तो दिया जो करना था. मेरी तो जान निकल गयी. कितना तक गयी हू मैं, और आप बोल रहे हो आयेज के लिए तैयार है.

विवेक: अर्रे मेरी बीवी, अभी तो सिर्फ़ तुझे ही मज़े दिया है. अब तू भी तो मज़े देगी ना अपने हज़्बेंड को.

शिखा: अछा जी, सिर्फ़ मैने ही मज़े किए? तो मेरी छूट में जो घुसे पड़े थे, उससे आपको मज़ा नही आया?

विवेक: अर्रे आया, बहुत मज़ा आया, पर उससे भी ज़्यादा मज़ा आएगा जब तू मेरा लंड अपने मूह में लेकर चूसेगी, जैसे तेरी छूट चूसी.

शिखा: ची, नही मैं नही कर रही ये सब. आप ही करो ये सब गंदे काम.

विवेक: गंदे नही बीवी, यही तो प्यार है. मैं तुमसे प्यार करता हू, तो मैने तुम्हारी छूट चूस कर तुम्हे मज़ा दिया ना. अब तुम मुझसे अगर प्यार करती हो, तो मेरा लंड चूसो, और मुझे मज़े दो.

शिखा कन्फ्यूषन में बैठी थी. एक तरफ वो लंड मूह में नही लेना चाह रही थी, पर फिर मेरी प्यार वाली बात से थोड़ी कन्विन्स भी लग रही थी. क्यूंकी उसको भी अब अपना प्यार साबित करना था.

शिखा: ठीक है हज़्बेंड जी, अब जैसा आप बोलो. पर मुझे नही आता ये लंड चूसना-उूसना. मैने कभी किया नही तो कैसे करू?

विवेक: अर्रे बचपन में लॉलिपोप खाया है, बस वैसे ही इसको भी लॉलिपोप समझ कर खाओ, और पूरा मूह में लेकर चूसो.

शिखा: ओक, अब बताती हू आपको.

अब चिल्लाओगे छ्चोढो शिखा छ्चोड़ो, फिर भी नही छ्चोधूंगी आपका लंड, जैसे आपने नही छ्चोढी थी मेरी छूट.

वो बेड से उतार कर नीचे बैठी, और मेरा उंदर्वेर नीचे करके मेरा लंड बाहर निकाला.

शिखा: अर्रे हज़्बेंड जी, ये तो इतना बड़ा है. ये मूह में कैसे जाएगा पूरा? नही-नही मेरे से नही होगा प्लीज़.

विवेक: अर्रे बीवी, कोई ज़्यादा बड़ा नही है, आराम से मूह में चला जाएगा. प्लीज़ अब चूसो भी.

शिखा ने लंड को हाथ में पकड़ा, और अपना मूह लंड के पास ले गयी. और फिर आँखें उपर करके मुझे देखा, और जीभ निकाल कर मेरे लंड के टोपे पर घुमाई. मेरी आहह निकल गयी यार, क्या बतौ कैसा फील हो रहा था. उसकी गरम जीभ मेरे टोपे पर उफ़फ्फ़.

फिर उसने वैसे-वैसे ही किया जैसे-जैसे मैने उसकी छूट के साथ किया था.

उसने होंठो से मेरे टोपे को चूमा, फिर होंठ से दबा कर खींचा. वो दोनो साइड चूम रही थी, और दबा-दबा कर चूस रही. वो मेरे एक्सप्रेशन्स देख कर और दबा रही थी. बहुत मज़ा आ रहा था भाइयों, क्या बतौ साली मस्त किसी एक्सपर्ट रंडी की तरह टोपे को चूस रही थी.

उसको लग रहा था वो बदला ले रही थी. पर असल में बहुत मज़े से टोपे को चूस रही थी. मुझसे कंट्रोल नही हुआ, और मैने उसके सिर पकड़ और अपना लोड्‍ा उसके मूह में उतारने लगा

विवेक: बेबी एस, सक मे, एम्म्म बीवी पूरा अंदर लेकर चूसो ना. एस, एस, सक इट बेबी सक मी डिक.

शिखा का मूह तोड़ा ज़्यादा खुल गया. उसको खाँसी आने लगी, पर मैने लंड नही निकाला, और फिर वो धीरे-धीरे जीभ पुर लंड पर घूमते हुए लंड को चूसने लगी. पर उसको कोई एक्सपीरियेन्स नही था, तो लंड चुस्वते हुए लग रहा था की कोई नया-नया ही चूस रहा था लंड.

फिर मैने उसको बताया: लंड को हाथ से उपर-नीचे करते-करते चूसो.

तो वो वैसे ही करने लगी.

शिखा: उम्म उम्म आग्ग्घ.

विवेक: एस बेबी, जस्ट लीके तट यॅ, बेबी सक मे, सक मी डिक बेबी. एस टके इट, टके इट ऑल आअहह.

शिखा ने आँखें बंद कर ली, और पूरा ज़ोर लगा कर मूह को टाइट्ली लंड के आस-पास बंद कर लिया और स्पीड में चूसने लगी. 2 मिनिट ऐसे ही चूसने के बाद मेरा लंड खड़क हो गया, और झड़ने को हो गया.

विवेक: एस, एस, एस बेबी डॉन’त स्टॉप, कीप सकिंग आह चूस चूस साली, क्या मस्त आइटम है यार शिखा तू, एक-दूं रंडी की तरह लोड्‍ा चूसने लगी, फर्स्ट टाइम में ही. इतनी जल्दी तो मेरा कभी नही निकला, और तेरे मूह की गर्मी ने मेरा लोड्‍ा पिघला दिया.

और इतना कह कर मैने शिखा के मूह में अपना लंड और दबा दिया, और झटके मार-मार कर अपना रस्स उसके मूह में गले तक गिरा दिया.

वो ना चाहते हुए भी रस्स पीने लगी, और 8-9 झटको के बाद जब लंड से रस्स निकल गया, तो उसको छ्चोढा मैने.

शिखा: ची भैया, यक! मेरे मूह में ही सस्यू कर दिया आपने.

विवेक: अर्रे बेवकूफ़, अभी बताया था ना ये सस्यू नही था. जैसे तेरी छूट ने मेरे प्यार का रिप्लाइ किया था, वैसे ही मेरे लंड को तेरे मूह की सेवा अची लगी, तो उसने थॅंक्स बोला, और तुझे अपना रस्स दिया पीने को.

उसकी चुसाई से बहुत मज़ा आया, और लंड धीरे-धीरे छ्होटा हो गया. मैं वैसे ही आधा लटका हुआ बेड पर पड़े रहा. वो वॉशरूम में जेया कर मूह सॉफ करने लगी. अभी शिखा की छूट का पूजन होना बाकी था, और आयेज बहुत कुछ हुआ जो आयेज के पार्ट्स में.

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