भाभी ने दिया अपनी प्यासी चूत का तोहफा

मैं 26 साल का हू, और मेरी शादी 25 की उमर में हो गयी थी. हालाकी मेरी लोवे मॅरेज हुई थी, पर सेक्स लाइफ मेरी ज़्यादा अची नही थी. मेरी वाइफ के बूब्स बहुत छ्होटे है, और वो स्किनी है, जिससे मुझे सेक्स करने में ज़्यादा मज़ा नही आता. और उसे मेरा लंड चूसना भी नही पसंद.

इसलिए मैं अक्सर मास्टरबेशन करके ही काम चलता हू.

मेरी वाइफ का एक ही बड़ा भाई है, जिसकी शादी हमसे एक साल पहले हुई थी. उनकी वाइफ का नाम है शीतल. मैं उनसे पहले भी मिला था उनकी शादी पर. पर तब मैने इतना ध्यान से नही देखा था उन्हे.

लेकिन जब मेरी सगाई थी, उस दिन मैने पहली बार उन्हे इतना ध्यान से देखा. उन्होने बहुत ही सेक्सी सा ल़हेंगा पहना था मेरी सगाई में. हालाकी वो मेरी भी भाभी लगी, और ऐसे देखना उन्हे सही था. पर मेरी आँखें उनसे हॅट नही रही थी.

सावला रंग, बड़े-बड़े मुममे, और थोड़ी सी चब्बी, और उसपे पसीने की छ्होटी-छ्होटी बूंदे. वो ही प्लेट में एंगेज्मेंट रिंग लेके मेरे पास आई थी. मैं अपने को कंट्रोल नही कर पाया, और मेरा लंड खड़ा हो गया, जिसे मुझे वही हाथ से तोड़ा सेट करना पड़ा.

बड़ा ही एंबॅरसिंग था मेरे लिए वो. पर अची बात ये हुई, की ये देख कर भाभी की हस्सी छ्छूट गयी, और वो मुझे हेस्ट हुए देखने लगी. मैं भी तोड़ा हस्स दिया.

फिर सगाई से 6 महीने बाद मेरी शादी हो गयी. वो तब प्रेग्नेंट थी. फिर मेरी उनसे ज़्यादा मुलाकात नही हुई. 1.5 साल बीट गया. उनका बाकचा भी हो गया था.

मेरा अपनी वाइफ के साथ सेक्स करने का मॅन नही करता था, और मैं भाभी की ही फोटो देख कर हिला लेता था. लेकिन जब भी मैं अपने ससुराल जाता, तो वो मुझे देख कर अलग ही स्माइल देती, जो की मुझे लगता की कोई सिग्नल था. पर हिम्मत नही होती थी बात करने की ऐसी कोई.

फिर एक दिन मेरी वाइफ की एक फ्रेंड की शादी में जाने के लिए मुझे अपने ससुराल जाना पड़ा अपनी वाइफ के साथ. सब लोग शादी में चले गये, पर मुझे काम था, तो मैं घर पे ही रहा. मैं अब घर पर अकेला था. मेरे सास-ससुर और वाइफ शादी में गये थे, और साला और भाभी ऑफीस में थे.

मैं मौके का फ़ायदा उठा के भाभी के कमरे में गया, और उनके बातरूम में तंगी ब्रा और पनटी सूंघने लगा, और अपने लंड को हिलने लगा. तभी घर की बेल बाजी. मैने झट-पाट सब रखा, और देखा भाभी गाते पे खड़ी थी. वो मुझे देख के तोड़ा चौंकी, फिर हस्स के बोली-

भाभी: आप नही गये शादी में?

मैने कहा: नही मुझे काम था, तो मैं नही गया.

मैने पूछा: आपका तो ऑफीस था ना?

भाभी ने कहा: हा, पर मुझे तबीयत ठीक नही लग रही थी, तो हाफ दे लेके आ गयी.

फिर वो सीधा वॉशरूम में गयी. उनका रूम नीचे था ग्राउंड फ्लोर पे, और मैं उपर फर्स्ट फ्लोर पे रूम में जाके बैठ गया. भाभी उपर आई, और उनके हाथ में उनकी ब्रा थी, जिसपे मेरा प्रेकुं लगा हुआ था.

भाभी बोली: ये सब क्या है? ये आपने क्या किया?

मैं बिल्कुल दर्र गया. मेरे पसीने छ्छूट गये.

मैने कहा: मुझे कुछ नही पता. मैं तो यही था, तब से नीचे गया ही नही. उन्होने तुरंत मेरे लंड को पंत के उपर से ही ज़ोर से पकड़ा और कहा-

भाभी: मुझे सब पता है ये आपका ही काम है.

मैं कुछ बोल ना पाया, और चुप रहा मूह नीचे करके. भाभी ने फिर मेरा हाथ पकड़ा, और अपने बूब्स पर रख दिया, और कहा-

भाभी: जैसे ही मुझे पता चला मम्मी जी से, की आप घर पर ही हो अकेले, तो मैं हाफ दे लेके चली आई.

आज मुझे 1.5 यियर्ज़ बाद वो मौका मिला, जो मैं बस सोच के ही हिलता था. मैने तुरंत भाभी को ज़ोर से अपनी और खींचा, और उन्हे स्मूच करना शुरू कर दिया. वो भी बिल्कुल वाइल्ड होके मुझे चूमने लगी. ऐसा लग रहा था, की सेम आग उनमे भी लगी थी.

फिर भाभी ने सीधा मेरी पंत उतरी, और मेरे साथ सीधा आइ कॉंटॅक्ट बनाते हुए मेरा लंड अपने मुझे में रखा. श… वो फीलिंग, उसे वर्ड्स में नही लिखा जेया सकता. भाभी का मूह तो ऐसा था, जैसे जन्नत. भाभी ने जैसे ही चूसना शुरू किया, मेरे लंड को ऐसा मज़ा कभी नही मिला था. वो पागलों की तरह लंड चूस रही थी.

मैं कंट्रोल नही कर पा रहा था, और मेरा कम निकालने को हुआ. मैने उन्हे ज़बरदस्ती पीछे कर दिया.

मैने कहा: मेरा निकालने वाला है.

ये सुन के वो हस्स पड़ी और बोली: बस अभी से ही ये निकालने वाला है? अभी तो पिक्चर शुरू हुई है.

फिर उन्होने कहा: ठीक है.

और फिर अपने कपड़े उतारने शुरू किए. अब भाभी बस ब्रा और पनटी में थी.

उन्होने कहा: अब ये आप उतरो.

मैने जैसे ही उनकी ब्रा खोली, उनके मुममे कुछ आज़ाद से हो गये. उनके निपल्स काले थे, और बॉडी सावली. मैने पहली बार भाभी के मुममे देखे थे. फिर मैने तुरंत उन्हे चूसने शुरू कर दिया.

प्रेग्नेन्सी की वजह से उनके बूब्स और बड़े हो गये थे, और उनमे अभी भी तोड़ा दूध आ रहा था. मुममे चूस्टे हुए मैने उनकी पनटी पे हाथ रखा, तो वो पूरी भीगी पड़ी थी. मैने उनकी पनटी उतरी, और अपना लंड अंदर डाल दिया. छूट इतनी गीली होने की वजह से लंड बहुत आराम से अंदर चला गया.

गरम-गरम छूट में लंड आराम-आराम से अंदर-बाहर हो रहा था, और भाभी तो मदहोश हो रही थी. मैं आराम-आराम से ही कर रहा था, ताकि उन्हे दर्द ना हो. पर उन्होने कहा ज़ोर से करने को. तो मैने ज़ोर से उन्हे छोड़ना शुरू किया, जिससे उन्हे मज़ा आने लगा.

वो बोलती: और ज़ोर से, और ज़ोर से करो.

मैने पूरी ताक़त लगाई. मेरे पसीने छ्छूट गये, पर भाभी तो बस एक ही बात बोल रही थी, की और ज़ोर से छोड़ो, और ज़ोर से. फिर उन्होने तोड़ा मूह बना के बोला-

भाभी: आप में तो बिल्कुल ताक़त नही है.

ये बात सुन के मुझे गुस्सा आ गया. मैने एक कस्स के छाँटा मारा उनके गाल पे, और उन्हे खड़ा करके बेरेहमी से छोड़ना शुरू किया. उससे उनकी चीख निकल गयी, पर मैं छोड़ता रहा.

मैने कहा: और ज़ोर से चाहिए ना तुझे? ले अब.

मैं छोड़ता रहा ज़ोर-ज़ोर से.

भाभी बोली: बस-बस हो गया.

पर मैं रुका नही.

भाभी बोली: मेरी छूट फटत जाएगी, छ्चोढो अब.

लेकिन मैं छोड़ता रहा.

मैने कहा: ले ना अब, देख अब तू ताक़त.

भाभी बोली: मुझे माफ़ कर दो. अब बस करो प्लीज़. जब उन्होने ऐसा कहा तो मैने अपना लंड निकाल लिया. वो बस बेड पर गिर गयी, और लंबी साँसे लेने लगी. मैने कहा: क्या हुआ, अब मज़ा आया?

तो वो हस्सी और बोली: बहुत मज़ा आया. मेरी चूत ही फाड़ दी अपने तो.

फिर उन्होने मेरा लंड फिरसे चूसना शुरू किया.

उन्होने कहा: मेरे मूह में मत छ्चोढना मुझे इसकी स्मेल पसंद नही. मेरे दिमाग़ में तुरंत खुराफात आई. मैने जैसे ही कम आने को हुआ, उनका मूह काज़ के पकड़ के उनके मूह में ही अपना माल छ्चोढ़ दिया. मेरा माल उनकी नाक से बाहर आ गया, और वो खाँसने लगी.

फिर वो बोली: ये क्या किया? मैने माना किया था.

मैने कहा: इसकी आदत डाल लो, टेस्ट अछा लगने लगेगा धीरे-धीरे.

वो डिज़्गस्ट सा मूह बना के टेढ़ी नज़रो से मुझे देखती रही. तभी डोर पर सासू मा खड़ी थी, और एक-दूं ज़ोर से बोली-

सासू मा: ये क्या हो रहा है.

मैं और भाभी शॉक हो गये. हम दोनो पुर नंगे थे उनके सामने. भाभी अपने घुटनो पर थी, और उनके मूह और नाक से मेरा माल गिर रहा था. हम उपर आते वक़्त मैं गाते को लॉक करना भूल गये थे.

तो बे कंटिन्यूड…

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