अंजाने में अरुण ने अपनी बेटी की चूत मारी

हेलो दोस्तों, आज जो मैं आपको बताने जेया रहा हू, दरअसल वो मेरी नही मेरे ऑफीस में सीनियर अकाउंटेंट अरुण जी की कहानी है. क्यूंकी हम लोग काफ़ी क्लोज़ फ्रेंड हो गये है, तो हम एक-दूसरे से हर एक प्राइवेट बात शेर करते है. आयेज की कहानी अरुण जी की ज़ुबानी.

ही दोस्तों, मैं अरुण लाल. जिस वक़्त की ये बात है, उस वक़्त मेरी आगे 45 की थी. मेरे घर में मेरी बीवी 42, मेरी बड़ी बेटी कविता 20 साल की, आंड छ्होटी बेटी बबिता 19 साल की थे.

मेरी बड़ी बेटी को मैने असम में नर्स की ट्रैनिंग के स्कूल में भेजा हुआ था आंड छ्होटी बेटी का यही कॉमर्स कॉलेज में अड्मिशन कराया. मेरी फॅमिली एक हॅपी फॅमिली थी, और मैने अपनी दोनो बेटियों को हमेशा एक फ्रेंड की तरह ही बड़ा किया था.

बात ये हुई की मेरे ऑफीस से मुझे 10 डेज़ असम जाने को कहा गया था, कुछ जूनियर्स को ट्राइंग देने के लिए. मैने मॅन ही मॅन सोचा चलो भेजा भी है तो असम जहा मेरी बेटी रहती थी.

मैं खुश था मगर मैं कविता को सर्प्राइज़ देना चाहता था. इसी वजह से मैने ये बात घर में किसी से नही बताई. उन्हे ये कह दिया की मैं बंगलोरे जेया रहा था. ऑफीस से मुझे अकेले ही जाना था, तो असम तक का सफ़र मैने अकेले ही टाई किया ट्रेन में. असम में मेरी कोई जान-पहचान नही थी. मगर वाहा मुझे दो ऑफीस के स्टाफ गाइड करने लगे, ऑफीस तो मी होटेल्स.

पहले 3 दिन तो मैं इतना बिज़ी था, की काम के चक्कर में मेरा दिमाग़ खराब हो रहा था. मगर फिर मेरे कुछ काम का लोड कम हुआ. इतने में मेरी ऑफीस बाय्स से दोस्ती बन गयी. हम काफ़ी बातें करने लगे. इतने में एक स्टाफ जिसका नाम जे था उसने कहा-

जे: सिर यहा दारू और मज़ा सब अवेलबल है. आप एंजाय कीजिए खुल के.

मैं पहले कुछ समझा नही उसकी बात. फिर मैने पूच लिया-

मैं: दारू तो अवेलबल है चलो, मगर मज़ा कहा अवेलबल होगा? और कों सा मज़ा?

जे: क्या सिर आप भी. मज़ा मीन्स लड़किया. सेक्सी-सेक्सी लड़कियाँ. यहा कॉलेज गर्ल्स बोहुत है, जो कॅंपस से पास के पार्क में आ जाती है फुल मज़ा देने. और पैसा भी बहुत कम लेती है.

अरुण: क्या बात कर रहे हो? वो ऐसा क्यूँ करती है भला?

जे: सिर देखिए, उनको उनके घर से लिमिटेड पैसा मिलता है, जिससे उनका गुज़ारा नही होता, और यहा असम में नाइट के वक़्त सब एंजाय करते है. इसलिए किसी को फराक नही पड़ता कों किसे छोड़ रहा है.

अरुण: मैने तो सिर्फ़ अपनी बीवी को छोड़ा है. उसके बाद तो मुझे नसीब नही हुआ.

चलिए सिर आज रात 9 बजे हम एक कोची माल से आपका स्वागत करेंगे. वो पैसा हम देंगे आपके लिए

अरुण: मतलब एक लड़की और हम चार?

जे: नही सिर, हम सब बारी-बारी से करेंगे सेक्स. वाहा काफ़ी अंधेरा रहता है, तो आपको सारम नही आएगी.

रात 9 बजे के करीब हम सब पार्क में चले गये, जहा सच में काफ़ी अंधेरा था. मगर चेहरा दिख रहा था टॉर्च मारने से. इतने में जे ने दूसरे स्टाफ से कहा की लड़की कहा है.

वो बोला: जे भाई लड़की का उद्घाटन रमेश पहले से ही कर रहा है झाड़ी के पीछे.

जे: बोला था ना आज सबसे पहले सिर छोड़ेंगे उसे. रमेश से आज रहा नही गया?

अरुण: अर्रे कोई बात नही, मैं लास्ट में चला जौंगा. इसके बाद तुम चले जाना.

जे: नो सिर, इसके बाद आप.

करीब 15 मिनिट बाद रमेश आ गया, और अब मुझे जाना था. मैं हिम्मत करके चला गया की कम से कम इतने सालों बाद जवान छूट मिलेगी. मैं चला गया. वाहा बस इतना महसूस हो रहा था जैसे कोई लड़की थी, मगर दिख कुछ नही रहा था. वो कुछ नही बोल रही थी, बस खड़ी थी.

मैने अपने सारे कपड़े उतारे, और लड़की को पकड़ लिया, और वो भी मेरा साथ देने लगी. 5 मिनिट किस करने के बाद उसने मुझसे कॉंडम पहनने को कहा. उसकी आवाज़ मुझे जानी-पहचानी लगी. मगर सेक्स की आग में मुझे कुछ सुनाई दिखाई नही दे रहा था. मैने फटाफट कॉंडम पहना, और उसको झुका के उसकी छूट में लॅंड सेट कर दिया.

मैं उसकी छूट मार रहा था, और उसके छ्होटे-छ्होटे बूब्स दबा रहा था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैने सोचा कम से कम किसे छोड़ रहा हू ये तो देख लू. फिर मैने फटत से फोन उठाया और टॉर्च ओं किया. लाइट जलते ही मेरी गांद फटत गयी. ये तो मेरी बेटी कविता थी.

मैने झट से लाइट ऑफ की. और पता नही क्यूँ मेरी स्पीड काफ़ी बढ़ गयी. कविता मेरे सामने पीछे मूडी हुई थी इसलिए वो मुझे देख नही पाई. मैं अब सारी बातें भूल कर उसे छोड़ता रहा. 20 मिनिट बाद मैं झाड़ गया, और अपने कपड़े पहन के वापस आ गया. फिर मेरे बाद जे अंदर गया, आंड छोड़ने लगा.

मुझे बहुत खराब लग रहा था. मैने सोच लिया था अभी यहा से जाता हू, और इसका कोई इलाज निकालूँगा. फिर मैं वाहा से होटेल में चल गया. मैं रात भर सोचता रहा. सोचते-सोचते मैं सो गया. नेक्स्ट दे मैने कविता से कहा-

अरुण: सनडे मैं तुमसे मिलने आ रहा हू.

कविता: पापा आप तो बंगलोरे में है ना?

अरुण: नही बेटा, मैं तुम्हे सर्प्राइज़ देना चाहता था. दरअसल मेरा काम असम में है. मैं 1 घंटे में आ रहा हू तुम्हे लेने. क्यूंकी वो गर्ल्स कॉलेज था इसलिए मैं उसे लेके होटेल में आ गया. यहा होटेल में मेरे कोई स्टाफ भी नही आते.

कविता: पापा इतना बड़ा सर्प्राइज़.

अरुण: एस, चलो उपर रूम में, बातें वही करेंगे.

फिर हम उपर रूम में चले गये.

कविता: पापा मुझे बहुत खुशी है यहा आप से मिल के.

अरुण: बेटा ये बताओ मैने किस चीज़ में कमी की थी, जो तुम यहा ये सब काम कर रही हो?

कविता दर्र गयी.

कविता: क्या मतलब पापा, समझी नही?

अरुण: देखो बात घूमाओ नही. मुझे पता लगा है तुम पैसे लेके सेक्स करती हो. क्या इसी दिन के लिए बड़ा किया था? कविता रोने लगी.

कविता: पापा प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिए.

अरुण: ओक रो मत, अब बताओ तुम्हे पैसे कम पद रहे थे तो माँगने थे ना.

कविता: सच काहु तो पापा पैसे से बड़ी बात मुझे सेक्स की इक्चा हो रही थी. और साथ में पैसे भी मिल रही थे.

अरुण: तुझे पता है कल तुझे जो छोड़ रहा था और टॉर्च मारा था, वो कोई और नही मैं था.

कविता: ओह मी गोद, पापा आपने रोका क्यूँ नही?

अरुण: क्या करता मैं? मेरा लंड तेरी छूट में था. उस वक़्त आवाज़ करता तो कितनी बदनामी होती पता है.

कविता: ई’म सॉरी पापा. अब कभी ये काम नही करूँगी.

अरुण: ओक बेटा. मगर सच पूछो तो तुम बहुत सेक्सी हो.

कविता: थॅंक योउ पापा. वैसे पापा आप चाहे तो…

अरुण: मैं चाहु तो क्या?

कविता: अगर आप चाहे तो मम्मी को पता चले बिना. अंधेरा क्या पूरा रोशनी में मेरी छूट मार सकते है.

अरुण: तो शुरुआत बर चाटने से करू?

कविता: नो पापा, पहले लंड चूसने देंगे प्लीज़? उम्म उम्म्म उम्म्म.

कविता मेरा लंड चूस्टे-चूस्टे खड़ा कर दी. फिर मैने उसको नंगा किया. उसके हर एक हिस्से का मज़ा लिया. फिर मैने उसके छूट में लंड सेट किया, और धक्के मारे. कविता उम्म्म आआ उउउ की आवाज़े निकालती रही. मैं कविता को छोड़ते रहा. कभी कविता को 69 पोज़िशन में छोड़ता, कभी हॉर्स राइडिंग करता. मैने उसको छोड़ने का पूरा मज़ा लिया.

कविता उसके 1 साल बाद नर्स की जॉब करने घर वापस आ गयी. अब हम लोग च्छूप-च्छूप के अक्सर चुदाई करते है. सोच रहा उसकी शादी तक उसकी छूट मारु. फिर शादी के बाद छ्चोढ़ दूँगा.

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