बेटे ने मा को चोदने का प्लान शुरू किया

मैने आपको पिछले पार्ट में बताया की मैं मा को जैसे-तैसे अपने रूम लेकर आ गया, और उनके साथ बेड में था. अब आयेज.

मैं अपनी मा को पीछे से घूरे जेया रहा था. अब मैं उनके ख़ालीपन, और मेरे छोड़ने की लालसा, और उनके बदन की खुश्बू के कारण उनकी तरफ बढ़ता गया.

मैने उनके सोने का वेट किया, की जब वो सो जाए तब मैं आज अपना काम करके ही रहूँगा.

मा गहरी नींद में थी. इसका फ़ायदा उठा कर मैने अपना हाथ उनके पेट में रख दिया, और वाहा हाथ फिरने लगा. मा का कोई रिक्षन ना आते देख कर मैने उनके छूतदो में हाथ रख दिया, और वाहा भी हाथ फेरने लगा.

फिर मैं नीचे गया, और उनकी सारी को धीरे-धीरे उपर करने लगा, और उपर करते-करते उनकी जाँघो तक ले आया. मैं उनके पैरों को चूमने लगा, और अपनी जीभ से चाटने लगा. उनके पैरों के अंगूठो को मैं हौले-हौले चूसने लगा.

फिर अचानक मा नींद में करवट लेकर सीधी हो गयी. मेरी किस्मत का जैसे दरवाज़ा खुल गया. मेरी मा ऐसे सोई थी, जैसे उनको होश ही नही हो. मैं इसका फ़ायदा उठा कर उनकी टॅंगो को धीरे-धीरे फैलने लगा.

जब मेरी मा के बर का दरवाज़ा पूरी तरह खुल चुका था, तब मैने वाहा से आते हुए छूट की खुश्बू को फील किया, और उनकी कोमल छूट की तरफ आयेज बढ़ने लगा.

मेरी मा ने पनटी नही पहनी थी, क्यूंकी जब वो पापा के साथ चुड रही थी, तब उसने अपनी पनटी वही छ्चोढ़ दी थी.

मैं उनकी बर के करीब गया तो मदहोश हो कर उसको चाटने लगा. अया पिछले दिन की यादें ताज़ा हो गयी. उनकी छूट चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था.

फिर मैने ज़्यादा देर ना करते हुए अपनी पंत की ज़िप खोली, और अपने लंड को उनकी छूट में हल्का-हल्का रगड़ने लगा. कभी मैं उनकी छूट को किस करता, तो कभी उनकी छूट में अपना लंड रगड़ने लगता.

अचानक मा में एक हलचल देखने को मिली. मेरी फिरसे फटत गयी, और मैं पीछे हॅट गया. फिर मैने सोचा वैसे भी मा गुस्से में थी, और मुझे ऐसे देखेगी तो मेरी गांद फाड़ देगी. ये सोच कर मैं उनकी साइड में सो गया

मेरे मा को छोड़ने का सपना टूटता जेया रहा था. मैं उनको छोड़ पौँगा भी या नही ऐसा लगने लगा था. दिन ऐसे ही मूठ मार कर निकलते जेया रहे थे. ना कोई आशा, ना कोई उम्मीद की किरण दिख रही थी मुझे.

अगली सुबा मैने सोच लिया था, या तो मैं उनको अब छोड़ कर रहूँगा, या तो फिर मैं वापस चला जौंगा अपने कॉलेज. रोज़ का वही रुटीन हो गया था. उठो, फ्रेश हो, नहाओ, मा को बातरूम में झाँक कर मूठ मरो, बस यही चल रहा था.

मैं अंदर से बिल्कुल टूट चुका था. मा ने नाश्ता लगाया, लेकिन मैने नाश्ता टेबल पर ही छ्चोढ़ दिया, और मूड ऑफ होने के कारण बाहर घूमने चला गया बिना बताए. मैं बाहर से घूम कर आया तो मेरी मा ने मुझे पूछा-

मा: कहा चला गया था तू?

मैं: मैं ऐसे ही बाहर चला गया था (साद होके).

मा: और तूने नाश्ता क्यू नही किया?

मैं: मॅन नही हुआ मेरा.

मा: तू साद दिख रहा है, कोई बात है क्या?

मैं बिना जवाब दिए अंदर चला गया.

मा: अर्रे बता कर तो जेया क्या हुआ?

मैं अपने कमरे में आ गया और चुप-छाप लेट गया. फिर मा आई, और पूछने लगी

मा: क्या हुआ बता ना? क्या तू नाराज़ है? क्यू तू इतना चुप-चुप सा है? हमसे कोई ग़लती हुई है क्या? या किसी ने तुझे कुछ बोला है?

मैं: नही मा, बस ऐसे ही मेरा मूड आज ठीक नही है

मा: तो रीज़न तो बता क्या हुआ?

मैं: कुछ नही, मैं वापस कॉलेज जाना चाहता हू.

मा: क्या हुआ बेटा, जो तू वापस जाना चाहता है. और अभी तो तेरी छुट्टी भी ख़तम नही हुई है. फिर क्यू जाना चाहता है?

मैं: बस मेरा मॅन नही हो रहा है. इसलिए अब और रुकना नही चाहता.

मा इतना सुन कर दुखी हो गयी, और उनकी आँखों में आँसू आ गये. वो अपने आँसू पोंछते-पोंछते बाहर चली गयी. मैने भी उनको उनका रोना चुप नही कराया. हम जैसे दोनो टूटी नाव में सवार हो कर अलग हो गये थे, ऐसा लगने लगा था.

उस दिन सॅटर्डे था. अनिता कॉलेज से जल्दी वापस आ गयी. वो आई, और मा को साद देखा. फिर उसने मा से पूछा-

अनिता: क्या हुआ मा, आप इतनी साद क्यू लग रही हो?

मा: कुछ नही, मेरी तबीयत ठीक नही लग रही.

अनिता: तो डॉक्टर के पास चलो ना मा.

उसने मुझे आवाज़ लगाई और कहा: भैया मा की तबीयत ठीक नही है. उनको आप हॉस्पिटल ले जाओ ना.

मा ने जाने से माना किया और बोली: मैं ठीक हू, कुछ नही हुआ.

मैने भी कुछ नही किया, और अपने रूम से बाहर नही निकला. ये देखा कर अनिता को पता चल गया था, की हम दोनो के बीच की ही उदासी थी. वो चुप हो कर अपने रूम में चली गयी. मैने उस दिन दोपहर में खाना भी नही खाया, और सो गया. शाम को मैं उठा, और च्चत पर टहलने चला गया.

इतने में मा च्चत से कपड़े लिए बाहर आई. वो मुझसे बात करना चाहती थी, पर मैने उनकी तरफ देखा भी नही. इतने में मा फिरसे रोने लगी, क्यूंकी मैं उनसे बात नही कर रहा था. मुझाए उनको रोते देख रहा नही गया. आख़िर वो मेरी मा थी, भले ही मैं उनके बारे में ग़लत सोचु.

वो एक हाथ से सूखे कपड़े निकाल रही थी, तो दूसरे हाथ से अपने आँसू पोंछ रही थी. मैं मा के करीब गया, और उनका हाथ पकड़ लिया, और उनके आँसू पोंछने लगा. उनको चुप होने को बोला, लेकिन वो रोए जेया रही थी. उन्होने मुझे रोते हुए बोला-

मा: तू सच में जेया रहा है? क्या ग़लती हुई मुझसे ऐसी, की तू हमे छ्चोढ़ कर जेया रहा है?

वो ऐसे रो रही थी, जैसे कोई बेटी अपने पिता के घर से विदाई लेते टाइम रोटी है.

मैं: कुछ ग़लती नही हुई मा आप से.

मा: तो क्यू जाने की बात कर रहा है? मैने तेरा क्या बिगाड़ा दिया?

मैं: आप ऐसी बात मत करो मा, आपने कुछ नही बिगाड़ा है. आप चुप हो जाओ.

मा रोते ही जेया रही थी फुट-फुट कर. मैने अपने दोनो हाथो से उनके फेस को पकड़ा, और मेरी तरफ देखने को कहा. वो नही देख रही थी. इतने में मैने उनके होंठ और गाल के बीच में किस कर दिया और बोला-

मैं: अब चुप हो जाओ. मैं नही जेया रहा आपको कही छ्चोढ़ कर.

मा ये सुन कर थोड़ी चुप हुई, पर अभी भी सुसक रही थी.

मैं: अब मुझे माफ़ कर दो, और ये रोना बंद कर दो.

उन्होने मुझे झट से गले लगा लिया, और ज़ोर से रोने लगी. मैने इसका फ़ायदा उठाया, और उन्हे पीछे से टाइट पकड़ कर उनके गालों में फिरसे एक किस कर दिया जहा पहले किया था. मैं उनकी बॅक को सहलाए जेया रहा था, और उनको चुप होने को बोल रहा था.

मुझे ऐसा लगा की हमारी बातें कोई सुन रहा था. तो मैने सीडीयों की तरफ झाँक कर देखा. लेकिन वाहा कोई नही दिखा. मैने सोचा ये मेरा वहाँ होगा.

फिर मैने मा से कहा: अब चलो नीचे जाते है, वरना कोई देख लेगा.

मेरी मा ने मुझसे कहा-

मा: वादा कर तू अब जाने की बात नही करेगा, जब तक तेरी चुट्टिया ख़तम नही हो जाती.

मैं: हा मा,आ नही बोलूँगा. अब आप चुप हो जाओ, बस एक-दूं चुप.

मा भावनाओ में बह कर अचानक से बोल पड़ी: एक तू ही तो है जिसे देख कर मैं हमेशा खुश रहती हू, और सब कुछ भूल जाती हू. और अब तू ही ऐसा बोलेगा तो मेरी जान ही निकल जाएगी.

मैं: चिंता मत करो मा, जब तक मैं हू, आपकी जान नही जाने दूँगा.

मा ने मेरे माथे पर किस किया. इतने में मेरा लंड खड़ा हो गया था.

हम दोनो ने एक-दूसरे को कस्स कर पकड़ा हुआ था, इस कारण मेरा लंड उनकी छूट के उपर टच होने लगा था. पर वो कुछ नही बोली.

यहा से मेरी किस्मत ने करवट लेना शुरू कर दिया. मैं अपने प्लान में कामयाब होने लगा था. आप सोच रहे होंगे की मैं ये क्या बोल रहा हू. आपकी कुछ भी समझ में नही आ रहा होगा. तो मैं अपने स्टोरी में आयेज बढ़ने से पहले अपना सारा प्लान बताता हू.

मुझे मालूम था की मा मुझे बहुत लाद से रखती थी, और मेरे लिए जान चिड़कट्ी थी. मैने प्लान बनाया की क्यू ना मैं अपने आप को ऐसा दिखता हू की मा को लगे मैं नाराज़ हू उनसे, और उनसे डोर जाना चाहता था.

मैने सुबा से ही इसके बारे में सोच लिया था, और मैने जान-बूझ कर सुबा का नाश्ता नही किया, और ना ही मा से बात की, और उनको बिना बताए बाहर चला गया.

मुझे लगा ही था की मेरे ऐसा करने से उनका कुछ ना कुछ रिक्षन आएगा ही, और हुआ भी यही. ये मेरे लिए एक अंतिम दाव था, जो मैने मा के लिए खेला, और वो काम कर गया.

अब स्टोरी में आते है यहा से-

मेरा लंड मेरी मा की छूट में टच हो रहा था. उनको मालूम चल चुका था, की जो उनकी छूट में कोई चीज़ चुभ रही थी, वो कुछ और नही मेरा लंड था. पर वो कुछ नही बोली, क्यूंकी वो मेरे ना जाने के बात से बहुत खुश थी.

मैने अपनी मा की और देखा और कहा: मैने आपसे उस दिन कुछ ज़रूरी बात के बारे में बात की थी ना मा? वो मैं आपको कहना चाहता हू.

मेरी मा ने मुझे गले से लगा कर रखा था, और उन्होने मेरे कान में धीरे से एक बात कही, जिससे मेरे पैरों के तले ज़मीन खिसक गयी.

मा: मुझे मालूम है तू क्या बोलना चाहता है.

मैं शॉक हो गया, की इनको कैसे पता चल गया करके.

मैं: कों सी बात मा? क्या आपको पता है?

मा: हा, मुझे मालूम है की तू कहना चाहता है की.

मैं: की! क्या मा?

मा: की तू मुझे बहुत प्यार करता है, और मुझे कभी दुख में नही देखना चाहता.

मेरे तो होश ही उडद गये ये सुन कर.

मैने बोला: आपको कैसे पता मा?

मा: मैं तेरी मा हू, तेरी हर एक चीज़ का मुझे ध्यान रहता है. तो मैं इतनी सी बात नही समझूंगी.

मैं चुप था.

मा: आख़िर तू मेरा बेटा है, और मैं तेरी मा हू.

मैं: हा मा, मैं तुमको बहुत प्यार करता हू, और आपको कभी दुख में नही देखना चाहता. हमेशा हेस्ट हुए और खुश देखना चाहता हू.

ये कह कर मैने मेरे मा के होंठो पर एक प्यारा सा किस कर दिया. मा ने कुछ नही बोला, और वो कपड़े लेकर नीचे जाने लगी.

मैं मॅन ही मॅन में बहुत खुश होने लगा, की यहा से मेरा काम बन गया करके. मैं मा के पीछे-पीछे ही जेया रहा था.

इतने में चाची अपने रूम से बाहर निकली, और मा से बात करने लगी. मैं चाची से बात किए बिना ही नीचे चला गया. उनमे काफ़ी टाइम तक बातें हुई. मेरा उस दिन खुशी का ठिकाना नही था. मैं खुशी से झूमता रहा सारा दिन.

अगले दिन मैं सो कर उठा लाते से. घर पे कोई नही था, और मेरी मा बातरूम में नहा रही थी. मैं बाहर था, और खुश था की अब मुझे ये सब करने की ज़रूरत नही थी. अब सीधे मैं अपनी मा को छोड़ सकता था.

मा बातरूम से बाहर निकली, और पेटिकोट और ब्रा में थी. मैं उनके रूम में गया, और उनकी पीछे से कमर को पकड़ लिया.

मा: आज तेरा मूड अछा लग रहा है बेटा.

मैं: हा मा, मैं आज बहुत खुश हू.

इतना . हुए मैने अपना हाथ उनकी बड़ी से . में डाल दिया, और उसको उंगली से सहलाने लगा. मैने उनके गले पर अपने होंठो को रख दिया, और चूमने लगा.

पता नही क्या हुआ, की मेरी मा ने मुझे गुस्से से देखा और . दिया.

मा: तू ये क्या कर रहा है?

मैं: आपको प्यार कर रहा था.

मा: तो एक बेटा अपनी मा से ऐसे ही प्यार करता है क्या (गुस्से में)?

मैं: मा मेरे प्यार दिखाने का तरीका ग़लत था. पर मैं आपसे सच में बहुत प्यार करता हू.

इतना बोल कर उनको फिरसे पकड़ लिया, और उनके होंठो पे ज़ोरदार किस करके ‘ई लोवे योउ’ मा बोल दिया. उन्होने मुझे अपने से डोर किया, और गुस्से में आ गयी, और कहने लगी-

मा: तुझे शरम नही आई अपनी मा के साथ ऐसा करने में? और तूने सोचा भी कैसे की तू मुझे ई लोवे योउ बोलेगा?

मैं दर्र के मारे चुप हो गया.

मा: मैने तुझे क्या समझा था चिकू, और तू क्या निकल गया. मैने सोचा भी नही था की तू मेरे साथ ऐसे करेगा.

मैं: क्या किया मा मैने? बस आपको किस करके प्यार ही तो कर रहा था.

मा: मैं बेवकूफ़ नही हू, जो मुझे समझ नही आएगा. मुझे पता चल गया तेरे प्यार करने का तरीका. मुझे शरम आती है तुझे बेटा कहने में.

मेरी गांद फटत गयी, और मुझे चक्कर आने लगे थे.

मा: तू क्या समझता है, मुझे कुछ दिखाई नही देता?

मैं: क्या बोल रही हो मा?

मा: मैने सब देखा है.

मैं: क्या देखा है मा आपने?

और जो उन्होने बोला, मेरे तो दिमाग़ ने ही काम करना बंद कर दिया.

मा: जब से तू आया है, मुझे सब पता है तेरी सोच के बारे में. पर मैं ये समझ कर चुप रही, की तू ऐसा नही है, और जो किया अंजाने में किया है.

मैं: मैने क्या किया मा? आप ये क्या बोल रहे हो?

मा: उस रात जब मैं और तेरे पापा रूम में थे, तब तूने हम लोगो को बाहर से सेक्स करते हुए देखा था. भूल गया की और भी कुछ याद दिलौ?

मुझे समझ नही आ रहा था, की मैं क्या बोलू.

मा: और याद है वो रात जब मैं तेरे साथ सोई थी? जो तूने किया, वो मुझे सब आचे से पता था. मैं उस वक़्त सोई नही थी, जाग रही थी.

मेरे होश उडद गये. मुझे लगा था की मा सर दर्द के कारण सो गयी थी. मैने एक पल को सोचा था की वो जाग रही थी, पर मैने उसको अनदेखा किया था. लेकिन मेरा सोचना गॉल्ट था. मेरी मा जाग रही थी, और मैने जो उनके बूब्स को चूसा और छूट छाती थी उनको सब याद था.

मैं (दर्र के मारे बोला): तो तुमने रोका क्यूँ नही?

मा: क्यूंकी तेरे पापा दारू पी कर आए थे, और सोए थे. अगर मैं तुझे वही रोक कर चिल्ला देती, तो घर में सब को सुन जाता, और ये शर्मसार हरकत सब को पता चल जाती.

मैं: मुझे माफ़ कर दो मा, मैं अपने आप को रोक नही पाया

मा: कल की रात भी भूल गया, जब तूने सारी हड्दे पार कर दी, और तूने वो किया जो तुझे नही करना था. तू अपनी ही मा को छोड़ना चाहता था ची!

मा: जिस मा ने तुझे जानम दिया, उसी के साथ ये सब करने लगा तू. तुझे बिल्कुल भी शरम नही आई?

मैं: मुझे माफ़ कर दो मा. मैं आज से ऐसे कभी नही करूँगा.

मा: अब माफ़ करने के लिए बचा ही क्या है? तूने वो सारे गंदे काम कर लिए जिसके बारे में मैं सोची तक नही थी.

मैं: मा मुझे प्लीज़ माफ़ कर दो. मैं तुम्हारा बेटा हू ना.

मा: अछा तू बेटा है मेरा? और जो तूने किया, वो किस मा का बेटा ऐसा उसके साथ करता है?

तुझे इसके लिए मैं कभी माफ़ नही करूँगी चिकू, तू जेया यहा से.

मैं: मा प्लीज़ अब ऐसी ग़लती दोबारा नही करूँगा.

मा (निर्दयता से): तू बस डोर होज़ा मेरी नज़रों से अभी. और ऐसा करने की कोशिश भी की या सोचा, तो ये बात मैं तेरे पापा से कह दूँगी. अब तू जेया यहा से, मुझे तुमसे कोई बात नही करनी.

और मा ने अपना मूह फेर लिया मुझसे. मैं ये सब सुन कर दर्र गया की कही ये बात वो पापा से ना बोल दे. मुझे ज़रा सा भी अंदाज़ा नही था की मेरी मा को सब पता था, की मैं क्या कर रहा था.

मैं उनके रूम से साद होकर बाहर निकल गया, और अपने रूम में आ गया. मेरी मा बहुत गुस्से में थी उस दिन. उन्होने मुझे खाने के लिए तक नही पूछा उस दोपहर को. मैं जब भी अपनी मा की तरफ देखता, बस उनके सामने हाथ जोड़ लेता, और माफी माँगता.

पर मेरी मा नज़र घुमा लेती थी. मैं परेशन हो गया था, और सोचने लगा की मैने ये क्या कर दिया. अपने आचे भले परिवार में मा और मेरे बीच ही दीवार खड़ी कर दी.

ऐसे सोचते-सोचते 2 दिन निकल गये. मैं ना ठीक से खाना ख़ाता था, और ना ही सो पता था.

मैं अपने घर वालो के सामने नज़र भी नही मिला पा रहा था. मेरी लाख कोशिश के बाद भी मा नही मानी. मुझे पता चल गया था की मेरी मा अब नही मानने वाली मुझसे.

ऐसा सब कुछ चलता रहा, और तभी अनिता को ये पता चला की हम दोनो के बीच कुछ ना कुछ हुआ था, जिससे हम एक-दूसरे से बात नही कर रहे थे. अनिता ने मा से पूछा-

अनिता: क्या हुआ मा? मैं कुछ दीनो से देख रही हू, आप नाराज़ हो किसी बात से. और भैया के साथ आप बात क्यू नही कर रहे?

उन्होने कुछ बोला क्या आपको?

मा: नही, ऐसा कुछ नही है. तू छ्चोढ़ इन बातों को और अपनी पढ़ाई में ध्यान दे. जिसको यहा रहना हो रहे, खाना हो खाए, नही तो जाए.

मैं ये लास्ट की बात सुन कर डांग रह गया, की एक छ्होटी सी ग़लती की सज़ा मुझे अब ज़िंदगी भर मिलेगी. मा और मेरे बीच वो पहले जैसा प्यार का रिश्ता नही रहा. अनिता मेरे पास आई, और मुझसे पूछने लगी-

अनिता: क्या हुआ भैया आप दोनो के बीच? ना मा आपसे बात कर रही है, और ना आप. मेरे दिमाग़ में बोलने को कुछ नही था, तो मैने कह दिया-

मैं: मैने उनसे जाने की बात कही तो इतने में ही मुझसे नाराज़ हो गयी. और मुझसे गुस्सा होके बात नही कर रही.

अनिता: बस इतनी छ्होटी सी बात है?

मैं: हा.

अनिता: मुझे लगा कुछ बड़ा हुआ है.

मैं: नही बस इतना ही है.

अनिता कहने लगी की इतनी सी बात के कारण नाराज़ है. मैं उन्हे अभी जेया कर माना लेती हू. मैने माना किया की वो ऐसा ना करे. फिर अनिता मा के पास गयी, और मा से कहने लगी-

अनिता: मा मैने भैया से बात कर ली है. वो नही जाने वाले है. अब आप इतनी छ्होटी सी बात से नाराज़ मत हो.

मा ने गुस्से से अनिता को एक छाँटा मार दिया, और बोली: तू जेया यहा से, तुझे समझ नही आती बात?

अनिता रोते हुए अंदर चली गयी, और रूम का दरवाज़ा बंद करके सो गयी. घर का पूरा नक्षटरा ही बदल गया, मानो जैसे घर की सारी खुशिया एक पल में चली गयी हो.

मैं मा के पास गया और उनसे कहा-

मैं: आप मेरी ग़लती की सज़ा उस बेचारी को क्यू दे रही हो? उसने क्या किया

है?

मा गुस्से से मेरी तरफ़ा देखते हुए बोली: मैने बोला ना, तुझ जैसे घटिया इंसान के साथ मुझे बात नही करनी. और मैने उसको थप्पड़ इसलिए मारा, ताकि वो तेरे से डोर रहे.

क्या पता तू जिस नज़र से मुझे देखता है, उस नज़र से अपनी बेहन को भी देखता हो.

मैं: मैं ऐसा क्यू सोचूँगा मा, अपनी बेहन के बारे में?

मा: तेरा क्या भरोसा, जो अपनी मा के लिए ऐसा सोच सकता हो, वो दूसरो के बारे में पता नही क्या-क्या सोच सकता है.

मैं: अब जाने भी दो ना मा. ई आम सॉरी. सब मेरी वजह से हुआ है. मैने अपनी ग़लती मान ली.

मा: ग़लती मान लेने से ग़लत इंसान सही नही हो जाता.

मैं: तो मैं क्या करू?

मा: वो तुम जानो, और मुझे अकेला छ्चोढ़ दो.

ये सब सुन कर मैने भी मा से गुस्से-गुस्से में बोल दिया-

मैं: ठीक है मा. मेरी ही ग़लती के कारण ये सब हुआ है. मैं अब यहा नही रुकुंगा. मैं वापस चला जौंगा कल. और तभी अवँगा जब आप मुझे माफ़ करोगे.

ये कह कर मैं चला गया.

दोस्तों कभी भी ऐसे हालात मत लाना, की जिससे आपकी फॅमिली की खुशिया चीन जाए. और आपकी ज़िंदगी बाद से बत्तर हो जाए. कुछ ऐसी ही हालत थी मेरी उस वक़्त.

मैने सोच लिया था, की मैं अपनी ग़लती की सज़ा अपने घर वालो को क्यू डू. तो मैं खुद ही वाहा से चला चला जौंगा, और फिर कभी दोबारा नही अवँगा.

शाम हुई, सब को मा ने खाने पर बुलाया मुझे छ्चोढ़ कर. मैं और मेरी बेहन खाना खाने नही जेया रहे थे.

इतने में मेरे पापा मेरी बेहन को बुलाने गये, और उसे अपने साथ खाना खाने को बोला.

मेरे बारे में उन्होने पूछा भी नही.

उनको लगा मैने खाना खा लिया था. वो लोग खाना खा कर अपने रूम में चले गये. अनिता तो मा से वैसे भी नाराज़ थी.

मा किचन को सॉफ कर रही थी. मैं उनके पास सिर झुका कर गया, और कहने लगा-

मैं: मुझे मालूम है की इस ग़लती की मुझे कभी माफी नही मिलेगी. और मैं ये सब घर में नही देख सकता. तो मैं कल वापस अपने कॉलेज जेया रहा हू. आप मेरे बारे में चिंता मत करना, मैं जी लूँगा कैसे भी.

ये कह कर रोते हुए मैं वाहा से निकल गया. मैं अपना समान पॅक करने लगा वापस आने के लिए. ऐसा करते मेरी मा ने मुझे देख लिया था, पर फिर भी वो कुछ नही बोली.

मैं अपना समान पॅक करके बिना खाना खाए सो गया. आचंक रात में मेरी नींद खुली, और मैने रोने की आवाज़ सुनी.

मैने उठ कर देखा की मेरी मा मेरे रूम के पास आ कर रो रही थी. मैं अपने बिस्तर से उठा, और मा के पास उनको शांत करने गया. और फिर वो हुआ, जिसका आप सब को बेसब्री से इंतेज़ार है. अब आयेज की स्टोरी अगले पार्ट में.

तब तक वेट कीजिए.

आप मुझे एमाइल करके अपना फीडबॅक दे सकते हो, की कैसी लगी ये स्टोरी आपको. मिलते है नेक्स्ट पार्ट में, बड़ी ही इंटरेस्टिंग स्टोरी के साथ.

यह कहानी भी पड़े  दोस्तो के बीच की चुदाई


error: Content is protected !!