बेटे को सेक्स करते देख मा उसकी दीवानी हुई

हेलो दोस्तों, मैं हू सोनाकशी गुप्ता. ये मेरी पहली स्टोरी है. इससे पहले की स्टोरी स्टार्ट करू, आप लोगों को मेरी और मेरी फॅमिली के बारे में तोड़ा बता देती हू. मैं 40 यियर्ज़ ओल्ड हाउस वाइफ हू. मेरा फिगर 36-28-35 है. मेरा एक 18 साल का बेटा है, रोहन, और मेरे पातिदेव सुभाष. सुभाष बॅंक मॅनेजर है, और हम काफ़ी अमीर है.

अब स्टोरी पे आ जाते है.

ये स्टोरी है की कैसे मैं अपने बेटे से छुड़वाने के लिए पागल हुई, और उससे चुडवाया भी.

ई थिंक सब कुछ शुरू हुआ जब हमने रोहन को पर्मिशन दी उसके गर्लफ्रेंड अंकिता को घर पे लाने की. पर शर्त थी की रोहन कभी अपने रूम का डोर लॉक नही करेगा, जब वो अंकिता के साथ होगा.

लेकिन मैने कभी सपने में भी नही सोचा था, की इससे मेरे बेटे के लिए मेरी फीलिंग्स में इतना बड़ा चेंज आएगा. रोहन कभी रूल ब्रेकर नही था, पर एक टीनेज लड़का कब तक अपने हॉर्मोन्स की गर्मी रोक पता.

एक दिन शाम को अंकिता आई हुई थी. तो मैं उपर रोहन के कमरे में जेया रही थी, ताकि उसको डिन्नर तक रुकने के लिए बोल साकु. पर स्टेर्स चढ़ते वक़्त मुझे रोहन के कमरे से आवाज़ सुनाई दी.

मैने अपने कान दरवाज़े के साथ लगाए, और सुनने लगी. मैं शॉक्ड हो गयी, क्यूंकी अंकिता मोन कर रही थी. मैं समझ गयी की रोहन उसकी ज़बरदस्त ठुकाई कर रहा था. मैने डोर चेक किया, और डोर खुला था.

पहले मैने सोचा की मैं अंदर जौ, और तुरंत उन्हे रोक लू. बुत ई कोउल्ड़न’त मूव इनसाइड. अंकिता के वो चरम सुख लेने की आवाज़ ने मुझे काबू कर लिया था. बहुत वक़्त हो गया था, जब मैने इस तरह आवाज़े निकली थी.

मैं लगभग भूल ही गयी थी, की सेक्षुयल प्लेषर क्या होता है. मैं तो संभोग का मतलब भी भूलने वाली थी. भूखी थी मैं एक प्रॉपर ऑर्गॅज़म की. और अंकिता की उस आवाज़ ने मेरे कटे हुए घाव पे नमक चिड़क दिया था.

जैसी आवाज़ अंकिता निकाल रही थी, मैने कभी भी वैसी आवाज़ नही निकली थी. मुझे कभी भी वो सुख नही मिला था, जो अंकिता को मिल रहा था. और इन सब की एक-लौटी वजह थी, सुभाष का छ्होटा लंड और लो स्टॅमिना.

मैं ये सब सोच ही रही थी, की मुझे होश आया, जब मुझे अपने हाथो में खुच गीला फील हुआ. मेरी छूट से रस्स निकल रहा था. मैने अपनी अंजाने मैं ही फिंगरिंग कर रही थी. पर होश आते ही मैने खुद को काबू किया, और अपनी छूट से हाथ हटाया, और नीचे चली आई. फिर मैं किचन में खाना बनाने लग गयी.

पर बार-बार मेरे दिमाग़ में सेक्षुयल थॉट्स आ रहे थे. मुझे बार-बार अंकिता की मोनिंग याद आ रही थी. मैं बहुत कोशिश कर रही थी, खुद को कंट्रोल करने की. थोड़ी देर बाद रोहन और अंकिता नीचे आए. अंकिता के चेहरे पर सॉफ नज़र आ रहा था, की उसको कितना सुख मिला था. उसके बाद सुभाष भी आ चुके थे, तो हम सब ने एक साथ डिन्नर किया.

डिन्नर के बाद सारे बर्तन धो कर जब मैं बेडरूम में पहुँची, तो देखा की सुभाष अपने लॅपटॉप पे काम कर रहे थे. मैं बहुत हॉर्नी थी, तो मैं सुभाष के उपर बैठ गयी, और उसको सिड्यूस करने लगी. पर कॉसिश बेकार थी, वो नही जागने वाला था.

शुभाष: ई’म सॉरी डियर, आज मैं बहुत टाइयर्ड हू. ऑफीस में काम का प्रेशर बहुत है.

फिर मैने बातरूम में जाके फिंगरिंग करके खुद को शांत किया. अगले दिन सुबा मैं रोज़ की तरह रोहन को उठाने के लिए गयी. जब मैं उसके रूम पे पहुँची, तब वो गहरी नींद में सो रहा था.

अचानक मेरी नज़र नीचे की तरफ गयी, तो मैं पूरी शॉक्ड थी. रोहन की बेडशीट में टेंट बना हुआ था. मेरा मॅन करने लगा चादर उठा कर उसका लंड देखने का, पर मैं खुद को कंट्रोल कर रही थी. फिर मैं रोहन को जगाने लगी, और उसको जगाने के बाद नीचे चली आई ब्रेकफास्ट बनाने.

थोड़ी देर में रोहन भी कॉलेज के लिए तैयार होके ब्रेकफास्ट के लिए आ गया, और आते ही मुझे पीछे से एक टाइट हग किया. कसम से मेरी धड़कन बढ़ गयी थी, जब की ये तो उसका रोज़ का काम था. और मुझे भी इससे पहले कभी भी उसके हग से ऐसा फील नही हुआ. पर कल शाम के बाद से सब कुछ बदल गया था. और शायद आगे से कभी भी मैं रोहन को सिर्फ़ अपने बेटे के रूप में नही देख पौँगी. पर मैने अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल किया, और ब्रेकफास्ट के बाद शुभाष ऑफीस निकल गये, और रोहन कॉलेज.

मैं घर में अकेली थी, तो मैं कल शाम के बारे में सोचने लगी थी. तभी ख़याल आया रोहन की बेडशीट चेक करने की. तो मैने उसके रूम में जाके देखा. मेरा शक साहिता, उन दोनो ने बेडशीट गंदी की थी. तो मैं बेडशीट ढोने के लिए ले आई.

उसके बाद पूरा दिन मैने सिर्फ़ रोहन के लिए मेरी फीलिंग्स में जो चेंज आया था, उसके बारे में सोच के बिता दिया. मैं जितना ज़्यादा सोच रही थी, उतनी ज़्यादा हॉर्नी हो रही थी. तो मैने अपना माइंड डाइवर्ट करने के लिए घर के काम पे फोकस किया.

उस दिन शाम को अंकिता फिर हमारे घर आई पढ़ाई के बहाने. पर मुझे पता था उनका असली इरादा क्या था. फिर थोड़ी देर बाद मेरा शक सही हुआ. मैं रोहन के रूम में झाँकने लगी, क्यूंकी मुझे उन दोनो को सेक्स करते हुए देखना था. मैने दरवाज़ा चेक किया, वो बंद था. तो मैं के होल से अंदर झाँकने लगी, और मुझे सब कुछ बहुत सॉफ नज़र आ रहा था.

बिस्तर से आवाज़ आ रही थी, और मैं हेडबोर्ड को दीवार से ताराते हुए सुन सकती थी. रोहन मिशनरी पोज़ में अंकिता को छोड़ रहा था. अंकिता नीचे लेती थी, और उसके पैर रोहन के कंधे पे थे. रोहन बहुत तेज़ी से छोड़ रहा था उसको, और बीच-बीच में रोहन अंकिता के दो छ्होटे-छ्होटे बूब्स को दबा रहा था और चूस रहा था.

कभी-कभी वो उसके निपल्स को काट रहा था. रोहन इतनी ज़ोर छोड़ रहा था, की लग रहा था उसका बेड ज़्यादा देर नही टिक पाएगा. मुझे याद आया कुछ ही दिन पहले शुभाष ने उसके बिस्तर को इकट्ठा करने में मदद की थी. हमने कभी नही सोचा था की वो इश्स तरह रूल्स तोड़ के ये सब करेगा.

मैं उनकी मोनिंग सॉफ सुन रही थी. मैं उन्हे रोकने वाली नही थी. मुझे एक अजीब सेन्सेशन फील हो रही थी. फिर मुझे अपने पैरों के बीच में गीला फील हुआ. मैने इतने लंबे समय तक एक ऐसी लाइफ जी रही थी, की मैं लगभग भूल गयी थी, की मेरा शरीर ऐसी चीज़ो के लिए सक्षम था.

मेरी भी सेक्षुयल नीड्स थी. मैं अंकिता को उसकी चीखें छुपाने की कोशिश करते सुनी. इट वाज़ हेर क्लाइमॅक्स फॉर शुवर. फिर रोहन भी झाड़ गया, और एक प्लेषर से भारी हुई चीख नकली. हालाकी शुभाष ने कभी इस तरह की आवाज़ नही की. लेकिन मैं जानती थी की ये एक आदमी की रिहाई का शोर था.

ई वाज़ होपिंग की रोहन कॉंडम उसे कर रहा था. ये सब देखते हुए कब मेरा हाथ नीचे मेरी पनटी के अंदर चला गया, और मेरी छूट को रगड़ने लगा, मुझे पता ही नही चला. जितना मैने खुद को रोकने की कॉसिश की, मैं उतनी ज़ोर से फिंगरिंग करने लगी.

कुछ ही मिनिट्स के बाद मैं भी झाड़ गयी. मेरा पानी पनटी से नीचे फ्लोर पे गिर रहा था. मैने अपनी टॉप उतार के उसको सॉफ किया, और अपने रूम में जाके चेंज कर लिया. उस दिन मुझे बहुत हल्का फील हुआ. ऐसा लगा रहा था, जैसे बहुत दीनो बाद मुझे तोड़ा सेक्षुयल प्लेषर मिला था.

ऐसे ही एक-दो हफ्ते और चले गये. इतने में अंकिता चार दिन और आई थी, और मैने उनको सेक्स करते देख फिंगरिंग की. पर मेरी भूख बढ़ती जेया रही थी. मुझे अपनी छूट में एक लंड चाहिए था, रोहन का लंड.

एक रात मुझसे और कंट्रोल नही हुआ. मैं शुभाष को सोने के लिए जाने से रोकी, और उसको सिड्यूस करने लगी, और उसको लिटा के उसके लंड पे सवार हो गयी. लेकिन चीज़े और बत्तर बन गयी. इससे पहले की मैं एंजाय करती, शुभाष झाड़ गया. उस रात मैं बट्रूम गयी और रोज़ की तरह अपने आप को फिंगरिंग करके शांत किया.

उसके बाद मैने हर रात खुद को च्छुआ. पर ये भी ज़्यादा दिन मुझको शांत नही रख पाया. फिर एक दिन मैने खुद पे अपना सारा कंट्रोल खो दिया, और मैं रोहन के कमरे में गयी. वो पढ़ाई कर रहा था.

मे: क्या बात है, आज तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना?(मैं उसके बिस्तर के किनारे पर बैठ गयी. रोहन मेरी तरफ मूड गया)

रोहन: क्यूँ क्या हुआ?

मे: नही, तुम इतना मॅन लगा कर पढ़ाई कर रहे हो, तो मुझे लगा शायद तुम्हारी तबीयत खराब है.

रोहन: अगले महीने एग्ज़ॅम्स है तो सोचा थोड़ी पढ़ाई कर लू. पर आप इतनी रात को मेरे रूम में अचानक? पापा की तबीयत तो ठीक है ना?

मे: सारी फिकर सिर्फ़ पापा के लिए? मेरे लिए कुछ नही?

रोहन: ऐसी बात नही है.

मे: कोई नही. मैं बस तुम्हारी टाँग खींच रही थी.

रोहन: तो फिर इतनी रात को किस लिए?

मे: तुमसे कुछ बारे में बात करनी थी.

रोहन (मेरी तरफ मूड के): किस बारे में?

मे: तुम और अंकिता पढ़ाई के बहाने जो करते हो, उस बारे में.

रोहन (डरते और घबराते हुए): ई’म सॉरी मों! आप लोगों ने माना किया था फिर भी.

मे (उसको रोकते हुए): इट’स ओक बेटा. ई अंडरस्टॅंड. तुम अभी यंग हो. तुम्हारे लिए एग्ज़ाइटेड होना नॉर्मल है. मुझे तो बस कन्फर्म करना था, की तुम कॉंडम उसे करते हो.

रोहन: हा मों, मैं कॉंडम उसे करता हू.

मैने उसके पॅंट्स के उपर हाथ रखा. वो एक बॉक्सर पहना था.

मे: मैं बस चाहती हू, की तुम सेफ रहो. अभी तुम छ्होटे हो. कोई गड़बड़ हुई तो तुम्हारे लिए बहुत परेशानी होगी.

रोहन (शरमाते हुए): क्या पापा को पता है?

मे: नही, अभी तक तो नही. मुझे लगा की पहले तुमसे बात करनी चाहिए.

रोहन: थॅंक्स मों. प्लीज़ पापा को मत बताना.

मे: ठीक है, नही बतौँगी. इतने में मुझे पता ही नही चला कब मेरा हाथ अपने आप आयेज बढ़ गया. मैं उसकी जाँघ को धीरे से रग़ाद रही थी. मुझे समझ नही आई की मैं ये क्यूँ कर रही थी? पर मैं बहुत एग्ज़ाइटेड हो रही थी. मेरी आँखें उसकी आँखों में थी. मेरा हाथ उसके लंड की तरफ बढ़ रहा था. रोहन भी तोड़ा एंबॅरास्ड लग रहा था. अचानक मैं थोड़ी घबरा गयी, और झट से अपना हाथ हटा लिया, और वाहा से निकल आई. अपने रूम में जाके मैं सीधा अटॅच्ड बातरूम में गयी, और फिंगरिंग शुरू की. मैने टाई कर लिया था, की मुझे रोहन का लंड चाहिए.

आयेज पाडिया कैसे मैने आख़िर-कार रोहन का लंड अपनी छूट में डलवा लिया.

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