बेटे का एडमिसन प्रिंसपल से चुदवा कर

हेल्लो दोस्तों, मै रिया माथुर आप सभी का  स्वागत करता हूँ। मै दिली की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र लगभग 28 साल है, और मेरी शादी हो चुकी है। शादी से पहले मै दिखने में बहुत ही हॉट और सेक्सी थी। अगर कोई लड़का एक बार मुझे देख लेता था , तो एक बार तो जरुर मेरे बारे में सोचता था। लड़के मेरे चहरे को देख कर मेरी चूची और चूत के बारे में सोच लेते थे। वैसे भी मेरी बड़ी बड़ी आंखे, गाजर की तरह लाल लालो गाल, पतली और मलाई की तरह रसीली और मुलायम होठो को, तो कोई भी देख कर मुझ पर फ़िदा हो जाता था। और मेरे मम्मे तो काफी गजब कर थे, देखने से लगता था की कोई मीडियम साइज़ का बड़ा वाला निम्बू है। काफी मुलायम बिल्कुल रुई की तरह और सॉफ्ट भी। एक बार छू लो तो हाथ हटाने का भी मन ना करे। और मेरी चूत तो कुछ दिनों तक कुवारी थी लेकिन मै एक लड़के के प्यार के चक्कर में पड़ कर अपनी चूत चुदवाली। जब मेरी चूत को पहली बार मेरे बोयफ़्रेंड ने चोदा तो मेरी चूत तो फट गई थी और मेरी चूत से खून भी निकलने लगा था। फिर मेरे बोयफ़्रेंड ने मुझे समझाया। जब पहली बार चुदाई करो तो सील टूटने से खून निकलने लगता है। उसके बाद मैंने किसी से नही चुदवाया, और किसी को लाइन भी नही दिया लेकिन बहुत लड़के मेरे पीछे पड़े थे। बहुत से लड़के तो मेरे घर के आगे पीछे भी घूमा करते थे। बहुत बार तो मेरे पापा कई लडको से पूछने लगते थे कि यहाँ क्यों घूम रहें हो। तो वो लोग बहाना बनाकर बता देते थे कि अपने दोस्त का इंतजार कर रहा हूँ।

मेरी शादी को सात साल हो चुके है और मेरी शादी के बाद मेरे पति ने लगातार दो साल तक मेरी चुदाई और अपने लंड की प्यास मेरी चूत की चुदाई करके बुझाई। लेकिन दूसरे साल मै प्रेग्नेंट हो गयी। उसके नौ महीने बाद मुझे एक लड़का हुआ। मैंने उसका नाम समीर रखा। धीरे धीरे हमारा बेटा बड़ा हो गया। अब वो पांच साल का होने वाला है। अब उसकी पढाई के लिये उसका एडमिसन करवाने का समय आ रहा था। मै अपने बच्चे को दिल्ली के सबसे अच्छे स्कूल में पढाना चाहती थी। ताकि वो बड़ा होकर कुछ बन सके। मै नही चाहती थी की उसको बड़ा होकर भटकना पड़े।

यह कहानी भी पड़े  ट्रेन मे भाई से सुहागरात--1

कुछ दीन पहले की बात है, मैंने अपने बेटे की एडमिसन के लिये दिल्ली के श्री राम स्कूल वसंत विहार के साथ साथ पांच और स्कूल में एप्लाई किया। लेकिन किसी स्कूल में उसका नाम नही आया। फिर मेरे पति के दोस्त ने मुझे एक दलाल से मिलवाया, उन्होने कहा – “आप की मदत हो जायेगी जब और कोई काम हो तो मुझको बताना”। मैने कहा ठीक है। मेरे पति के दोस्त चले गये। मै और मेरा छोटा बेटा उस दलाल के साथ में बैठे थे। वो मुझे ताड़ रहा था, मैने उसको नोटिस किया वो बार बार मेरे मम्मो को देख रहा था और अपने हाथ से अपने लंड को सहला रहा था। । मुझे लगा की ये सायद ये मेरी चुदाई के बारे में सोच रहा है।

मैंने उससे कहा – “आप मेरे बेटे का एडमिसन तो करवा देंगे। तो उसने कहा – “हाँ मैडम हमारा काम यही है लेकिन आप को भी मेरे साथ कुछ मेहनत करना होगा”। मैंने उससे कहा – “आप जो कहेगे मै वो करूँगी लेकिन मेरे बेटे का एडमिशन हो गये बस”।

फिर उसने मुझसे कहा – “देखिये वैसे तो मै सबसे पैसे लेता हूँ लेकिन आप मुझको बहुत पसंद आ गयी है और मै आप को अपने बेड तक ले जाना चाहता हूँ। मै आप से पैसे भी नही लूँगा और आप का एडमिसन भी करवा दूँगा”। उसकी बात सुनकर मुझे गुस्सा आ गया। मैंने उससे कहा – “आप ने मुझे समझ क्या रखा है मै कोई वैश्या नही हूँ जो तुम्हारे कहने पर तुम्हारे बेड पर चली जाउंगी। और रही बात एडमिसन की वो मै किसी तरह से करवा ही लुंगी”।

यह कहानी भी पड़े  आंटी की चूत मारी गर्मी रात मे

दूसरे दिन मुझे पता चला कि उस स्कूल का प्रधानाचार्य जो है वो घूशखोर और घूस लेकर वो एडमिसन कर लेता है। मै भी उससे मिलने दूसरे दिन पहुँच गई। मैंने वहां के प्रधानाचार्य से कहा – “आप जो पैसे कहेगे मै आप को दे दूंगी बस आप मेरे बेटे का एडमिसन कर लो”। वहां का प्रधानाचार्य देखने में जवान था, मैंने देखा वो भी मुझे देख रहा था और काफी मूड में लग रहा था। मैंने कहा – “सर बस किसी तरह हो गये तो ठीक होता मै बड़ी उम्मीद लेकर आई हूँ”।

तो उसने कहा – “आप चिन्ता मत करिये बस आप आपने बच्चे को यहाँ भेजने के बारे में सोचिये। लेकिन उससे पहले मै बता दूँ मै सबसे तो तीन लाख रूपये लेता हूँ लेकिन मै आप के लिये कुछ छूट कर दूँगा। आप मुझको केवल एक लाख रूपये दे देना और साथ में मै आप के जिस्म के साथ में खेलना चाहता हूँ। तुम चाहो तो जितना मैंने कहा है उतना मुझे दे दो और अपने बेटे का एडमिसन करवालो या फिर घर जाओ। और तुम चाहो तो एक दिन का समय भी ले लो। लेकिन कल तक बता देना”। उसकी बात सुनकर मुझे गुस्सा तो बहुत आया लेकिन मै वह से चुपचाप चली आई।

Pages: 1 2 3

error: Content is protected !!