बेटे और मा के रोमॅन्स की शुरुआत की कहानी

धन्यवाद ये कहानी को पढ़ने के लिए. जिसने भी पिछले पार्ट्स नही पढ़े है, पहले वो पढ़े. फिर ही समझ आएगी ये कहानी. मेरा मकसद इस कहानी का लिखने का यही है, की मैं अपना एक्सपीरियेन्स बतौ.

क्या उतार चढ़ाव आते है ऐसे वाले रीलेशन में. क्या पता आप में से भी किसी ने ऐसे रीलेशन एक्सपीरियेन्स किए हो, और उनका एक्सपीरियेन्स मेरे से अलग हो. मगर मेरी भी एक रिलिटी है, जो मैने एक्सपीरियेन्स की है. ज़्यादा बातें ना करके आयेज की कहानी स्टार्ट करता हू.

मैं इस बार एग्ज़ाइटेड था घर जाने के लिए क्यूंकी इस बार कोई नही आने वाला था घर. मैं 14 मार्च को देल्ही पहुँचा. उसके बाद वाहा से मेरे टाउन. पहुँचते-पहुँचते दोपहर का 1 बाज गया था. मैं घर पहुँचा, मम्मी ने दरवाज़ा खोला. मैने उनको देखा. पता नही मुझे हर बार और सुंदर लगती जेया रही थी. शायद अब मैं उनको ज़्यादा नोट करने लग गया था.

सारी पहनी हुई थी उन्होने ब्लॅक कलर की. मेकप भी किया हुआ था हल्का-फूलका. मैने दरवाज़ा बंद किया. हम दोनो अंदर आ गये. मैने उनका हाथ पकड़ा, और अपनी तरफ खींचा और हग किया. उनकी गांद पर हाथ सहलाया. फिर अलग हुए. हमने एक-दूसरे को ई लोवे योउ बोला.

उन्होने मुझे फ्रेश होने को बोला. मैं नहाने चला गया. नहा के तैयार हुआ. इतने में उन्होने खाना बनाया. फिर हम दोनो ने मिल के खाना खाया. मेरा दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था. खाना खाने के बाद उठे.

उनको मैने फिरसे हग किया. समझ ही नही आ रहा था कहा से स्टार्ट करू. बस हग ही कर लेता था. मुझे याद है 3 बजे के आस-पास होगा टाइम. हम दोनो उनके बेडरूम में थे. वो बेड के एक कोने पर बैठी थी, और मैं एक कोने पर.

उन्होने अपना हाथ बेड पर रखा. मैने अपना हाथ उनके हाथ पर रखा. वो धीरे-धीरे लोवे योउ लोवे योउ बोल रही थी मुझे. मैने थोड़ी सी हिम्मत जुटाई, और उनके पास जाके उनके लेफ्ट गाल पर किस ली. वो स्माइल करने लगी. मैं एक-दूं से डोर हॅट गया. ये मेरी पहली किस थी किसी लड़की को. मैं वो दिन नही भूल सकता.

गांद पर हाथ तो हम लड़के किसी ना किसी लड़की के लगा देते है, बस में या किसी भीड़ में जाने-अंजाने में. मैने किस कभी नही की थी. ये अलग ही खुशी थी. फिर से एक बार और हिम्मत जुटाई दोबारा से, और उनके लेफ्ट गाल पर किस की. मेरी हार्ट बीट बहुत तेज़ हो गयी थी.

मैने उनको बोला: मैं बाहर जेया रहा हू.

मैं अब उन्हे मम्मी नही बोल रहा था. उनका नाम बोल रहा था सुषमा. उनको पता था तोड़ा मुश्किल हो रहा था मुझे इस चीज़ को आक्सेप्ट करने में. इसलिए वो ज़ोर भी नही दे रही थी कुछ ज़्यादा के लिए. मैं घर के बाहर चला गया. अंदर से खुशी भी थी, और काफ़ी क्वेस्चन भी. ऐसे ही फ्रेंड से मिल के वापस 6 बजे घर आया.

मैं: सुषमा ई लोवे योउ.

मम्मी: ई लोवे योउ टू.

मैं: तुम मुझे समझती होगी. मैं तोड़ा सा समझ नही पा रहा, की क्या हम सही कर रहे है?

मम्मी: इसका जवाब तो मैं भी नही दे सकती. मगर जैसा आपको लगे वैसे ही करना. कुछ ऐसा ना हो जिससे आप परेशन हो. मगर मुझे कुछ दिक्कत नही है.

उनकी बात सुन कर मैं तोड़ा शांत हुआ. एक बात मेरे मॅन में ये भी चल रही थी, की वो केवल सेक्स के लिए ही ना कर रही हो, और मैं वो दे नही रहा उसे, तो वो चली ना जाए. मुझे तब समझ आ रहा था ये लोवे ही था, लस्ट नही मम्मी की. इस रीलेशन में उमर में वो मुझसे बड़ी थी. वो ज़्यादा समझती थी प्यार और सेक्स के बारे में. उस दिन कुछ नही हुआ और ज़्यादा.

अगले दिन मुझे कुछ ज़रूरी काम था. वो काम करते-करते 1 बाज गया. फिर मैं घर वापस आया. आते वक़्त बहुत सारे ख़याल थे. आज कुछ तो आयेज बधू, लंड खड़ा हुआ था. घर पहुँचा, तो खाना खाने के बाद उनके बेडरूम में बैठे थे. मैं उनको देख रहा था. मैं तोड़ा आयेज बढ़ा, उनके गाल पर किस के लिए. उन्होने गाल आयेज किया.

पता नही उन्होने जान के किया, या अंजाने में गाल को टिल्ट कर दिया. मेरे होंठ आधे उनके होंठो पर गिरे, और आधे गाल पर. उसके बाद हमारे होंठ पुर मिले. लीप किस का सुना था सॅकी ग़ज़ब होती है. मेरी पहली लीप किस मेरी मा के साथ थी. वो किस 2 से 3 मिनिट की थी. मैने उनका सलाइवा भी टेस्ट किया.

फिर हम अलग हुए. हमने एक-दूसरे हो देखा. मैं उनके पास गया, उनको पकड़ा, उनको बेड पर लिटाया, फिर उनको किस की. किस करते-करते उनके उपर लेट गया. किस करते-करते लंड सारी के उपर टच हो रहा था, तो मैं आयेज-पीछे होने लगा. मैं किस करता रहा उनको 5 मिनिट, और मेरा मास्टरबेट हो गया था. शायद उनका भी.

फिर हम अलग हुए. मैं खुद पर यकीन नही कर पा रहा था, की मैने ये सब किया. फिर मैं बातरूम गया, और सॉफ करके बाहर आया. मैं पता नही क्यूँ नज़र सी नही मिला पा रहा था उनसे. फिर मैं बाहर चला गया. जैसे से स्पर्म निकलता है, हमारी वासना सी ख़तम हो जाती है. फिर गिल्ट सा जाता है. शायद मैने वासना से वो सब कर दिया था. फिर जैसे ही स्पर्म निकला, मैं गिल्ट में आ गया. इसलिए नज़र नही मिला पा रहा था.

मगर 1 घंटे बाद फिरसे वही सोचने लग गया था. फिरसे लंड खड़ा हो गया था. मैं वापस 5 बजे आया. जैसे अंदर आया, मम्मी के पास गया. सीधा जाके उनको लीप पर किस करना स्टार्ट कर दिया. मैं उनको बेडरूम में लेके गया. उनको फिरसे बेड पर लिटाया, और उनके उपर मैं लेट गया. वापस फिरसे लंड को सारी के उपर से छूट पर टच कराया. फिर आयेज-पीछे होने लगा.

उनको किस साथ में करता रहा. थोड़ी देर बाद हाथ को उनकी गांद पर ले गया. मास्टरबेट होने के बाद मैं उनसे अलग हो गया. इस बार कोई गिल्ट भी नही था. इस बार ज़्यादा मज़ा आया था. मम्मी भी हैरान थी इस हरकत से.

मम्मी: इस बार तो मज़ा ही आ गया. कहा से आई इतनी हिम्मत?

मैं: मुझे भी बहुत मज़ा आया इस बार. हिम्मत तो तेरे से ही आई है. बार-बार सोच की ऐसे माल को कैसे छोड़ रहा हू.

मम्मी: मुझे माल बोलते हो, शरम नही आती आपको?

मैं: माफ़ करना, ऐसे ही निकल गया. तुम तो जान हो मेरी.

मम्मी: अब अछा लग रहा है. आ रहे हो लाइन पर धीरे-धीरे.

इसके बाद कुछ हरकत नही की हमने पूरा दिन. मगर आते-जाते कभी-कभी उनकी गांद को टच कर देता. अब मैं ओपन हो रहा उनके साथ. नेक्स्ट दे मैं सुबा उठा. पापा जेया चुके थे. मम्मी नहाने गयी थी. मैने बाहर से आवाज़ लगाई.

मैं: सुषमा आज सारी मत पहनना.

अंदर से आवाज़ आई: अछा, इतनी जल्दी. ठीक है, नही पहनुँगी. फिर क्या पहनु आप ही बताओ?

मैं: मतलब सलवार कमीज़ डालना. सारी में सही टच नही कर पाता तुम्हारी गांद को.

मम्मी: फिर कुछ ना पहनु, आचे से टच करना.

मुझे पता था इतनी हिम्मत उसमे भी नही थी.

मैं: ठीक है, आ जाओ नंगी बाहर.

मम्मी: नही रहने दो, सलवार-कमीज़ ही पहन के आती हू.

मैं: सुषमा ई लोवे योउ.

मम्मी: ई लोवे योउ टू.

वो सलवार-कमीज़ डाल के आई. वो बहुत कम सूट डालती थी. सूट में ज़्यादा सही लग रही थी. सूट में वैसे सही से देख पा रहा था गांद. सही साइज़ गांद का उसमे पता चल रहा था.

मम्मी: क्या देख रहे हो?

मैं: तेरी गांद.

मम्मी आँखें खोलती हुई. जैसे वो ये वर्ड सोच नही रही थी की ये मैं बोलूँगा.

मम्मी: अब ओपन हो गये हो अपनी सुषमा से.

उनकी गांद सॅकी आज सही से देखी थी. ज़्यादा मोटी भी नही पतली भी नही. पर्फेक्ट मोटी थी. हमने खाना खाया. जैसे ही वो उठ के जेया रही थी, मैने उनको फिरसे पकड़ा, और किस करना स्टार्ट कर दिया. फिरसे बेडरूम ले गया. इस बार लंड सलवार के उपर से सही टच हो रहा था उसकी छूट पर.

वो भी महसूस कर सकती थी इस बार. मैने हाथ रखने की कोशिश की उनकी छूट पर, लेकिन उन्होने हटा दिया. फिर मैने हाथ गांद पर रखा. वो आचे से महसूस हो रही थी. मैने हाथ उसकी सलवार में डाला. पनटी में डाला हाथ, और उनकी नंगी गांद को पहली बार टच कर रहा था.

मम्मी ने हाथ बाहर निकाला. मगर इस बार पहली बार मैने उनके खिलाफ फिरसे हाथ अंदर डाल दिया, और गांद का मज़ा ले रहा था. मास्टरबेट होने के बाद फिरसे हम अलग हो गये.

मम्मी: अब मज़ा आने लगा है आपको.

मैं: हा, बस देखती जेया आयेज-आयेज क्या होता है.

ऐसे ही अगले 2 दिन हमने किस और ऐसे ओरल सेक्स किया. मगर मम्मी ने छूट पर हाथ लगाने नही दिया. पर उनकी गांद के मैने फुल मज़े लिए. जब भी टाइम मिलता, हाथ लगा देता. किस भी नॉर्मल कर लेता नेक्स्ट 2 डेज़ में. किचन में काम कर रही होती लंड को गांद पर टच कर देता. अंदर हाथ डाल देता गांद में.

अब दर्र सा खुल गया था. इस बार घर आने का फ़ायदा हुआ. मैं वापस जॉब पर चला गया सनडे को. वाहा पहुँच के फिरसे कॉल मेसेज पर बात. अब आयेज की कहानी नेक्स्ट पार्ट में.

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