बहन की गर्मी का इलाज

मेरा नाम अमर है और मेरी उमर 22 साल की है. मेरे परिवार में एक परंपरा है. हर लड़की के रिश्ते के लिए उसके मामा को पहले दी जाती है. अगर मामा ना हो या फिर शादी से ना कर दे तो किसी और के साथ लड़की की शादी की जाती है. मामा का अपनी भांजी से शादी करने का हक पहला माना जाता है. मेरे घर में मेरे माँ बाप के अलावा मेरी बड़ी बेहन मानसी है, जो मुझ से कोई 6 साल बड़ी है. मेरी बेहन बला की सुंदर है.

जब मानसी की उमर 18 साल की हुई तो उसकी शादी की बात उठी तो मेरी माँ, सुषमा ने कहा,” इस मे बात क्या करनी है, मेरा भाई विष्णु जो है, मानसी की शादी विष्णु से होगी” मैं तब बहुत छोटा था लेकिन मेरे पापा ने इसका विरोध किया,” विष्णु, नहीं सुषमा, हम को इस परंपरा को तोड़ना चाहिए. विष्णु मुझ से उमर में बड़ा है, वो क्या खुशी दे सकेगा हमारी मानसी को, साला बूढ़ा. हमारी बेटी जवान है, खूबसूरत है. अब ये मामा भांजी के रिश्ते को त्याग देने का वक्त आ चुका है. विष्णु मादर चोद अब 48 साल का और मानसी बस 18 साल की.” माँ भड़क उठी,” देखो जी, ये मत भूलना कि हमारे परिवार की परंपरा क्या है. विष्णु भैया कई बार मुझे पूछ चुके हैं. मामा भांजी की शादी व्यापार के लिए भी शुभ होती है. हमारी बेटी मेरे भैया के घर की शोभा बनेगी, मेरे भैया की दुल्हन बने गी.

मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या मानसी हमारी माँ की भाबी बनेगी? क्या माँ बेटी का रिश्ता भाबी और ननद का होगा? खैर मानसी की शादी विष्णु मामा से हो गयी और मेरी बेहन मेरी मामी भी बन गयी और मेरी माँ अपने भाई की सास. कुच्छ देर तक तो ठीक चलता रहा. मैं जवानी में कदम रखता चला गया . मुझे औरत मर्द के रिश्ते का ज्ञान हुआ और मैं औरतों में दिलचस्पी लेने लगा. उधर मानसी का यौवन फूल की तरह खिलने लगा. मानसी का जिस्म भरने लगा, उसकी छोटी छोटी चुचि अब पूरा सेब बन चुकी थी और उसकी गान्ड में पूरा उभार आ चुका था. लगता था कि विष्णु मामा मेरी बेहन की चूत खूब अच्छी तरह चोद रहे थे लेकिन बाद में अपनी ग़लती का पता चला. शादी के कुच्छ दिन बाद मामा बात कर रहे थे और मुझे अपनी माँ के कमरे में हो रही बात सुनाई पड़ रही थी,” दीदी, मानसी बिल्कुल तेरे जैसी है, क्या मस्त माल है, मैं तो बस रोक नहीं पाता अपने आपको.” माँ हंस पड़ी,” देख विष्णु, मानसी जवान है और तेरी उमर काफ़ी हो चुकी है, उसको संभाल कर रखना, वरना तेरी बीवी को कोई और ले उड़े गा, मेरे भाई.”

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विष्णु के साथ मेरी दीदी उसकी पत्नी बन के रहने लगी. अब मेरी दीदी मेरी मामी भी थी. लेकिन मुझे शुरू से लगा कि विष्णु मामा के लंड में कोई खास ताक़त नहीं थी. वो सारा दिन बिज़्नेस में ही बिज़ी रहता था. बात उन्दिनो की है जब मैं 16 साल का था और मानसी दीदी के घर 10थ के एग्ज़ॅम के बाद गया हुआ था. पहले ही दिन मुझे नयी बात का पता चला. मेरा कमरा दीदी के कमरे के साथ वाला था और दीवार में एक छेद था. रात को विष्णु मामा देर से आए और खाना खा कर सोने लगे. क्यो कि दीदी के कमरे से लाइट छेद में से मेरे कमरे में आ रही थी इस लिए मुझे नींद नहीं आ रही थी. तभी मुझे सिसकारी की आवाज़ सुनाई पड़ी”अहह…हाईईइ……तेज़ी से करूऊऊ….ज़ोर से…..ज़ोर से चोदो राजा….”

मैं चौंक पड़ा और छेद में आँख लगा कर दीदी के कमरे के अंदर झाँकने लगा. मानसी पलंग पर बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी और उसने अपनी जांघों को फैला रखा था. क्मरे में दूधिया बल्ब जल रहा था. मेरे जिज़्जु भी नंगे थे और मेरी दीदी को चोद रहे थे. मेरी दीदी के पति थे इस लिए चोदना मुझे अजीब नहीं लगा. लेकिन मानसी के दूधिया जिस्म को देख कर एक बार तो भाई का लंड भी खड़ा हो गया . मैने उतेज़ित होते हुए अपने लंड को ज़ोर से भींच लिया. मानसी की चूत मेरी नज़र के सामने थी और उस पर एक भी बाल नहीं था. विष्णु का लंड मुरझाया हुआ था जिस को वो मेरी दीदी की बुर में घुसेड़ने की असफल कोशिश कर रहा था. लंड चूत से बार बार फिसल जाता क्योकि वो काफ़ी ढीला था. मानसी उतेज्ना से गरम हो चुकी थी. मेरी दीदी की चूत लंड के बिना तड़प रही थी,”

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चोदो मुझे विष्णु, अगर चोद नहीं सकते थे तो मुझ से शादी क्यों की थी, डाल भी दो मेरी चूत में अपना लंड…..आआआआअ….मर रही हूँ मैं राजा पेलो मुझे…बुझा दो मेरी प्यास,”

इतनी देर में जिज़्जु के लंड से पानी की धारा बह निकली,” अर्रे मानसी रानी, मेरा लंड पानी छोड़ चुका है…मैं फिर झड गया हूँ, मुझे माफ़ कर दो…मैं तुझे आज भी अच्छी तरह नहीं चोद सका”

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